निर्वाण आश्रय केंद्र के बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होने पर 4 और बच्चों की लोकबंधु अस्पताल से छुट्टी कर दी गई है। अभी भी केजीएमयू, बलरामपुर और लोकबंधु अस्पताल में सात बच्चे भर्ती हैं, जिनका इलाज डॉक्टरों की टीम निरंतर कर रही है। अब तक अस्पताल से काफी बच्चे डिस्चार्ज होकर निर्वाण संस्था जा चुके हैं। मोहान रोड बुद्धेश्वर स्थित निर्वाण संस्था में मार्च के तीसरे सप्ताह में बच्चे बीमार हो गए थे। पीपीपी मॉडल पर संचालित निर्वाण संस्था में मानसिक कमजोर, लावारिस बच्चे रहते हैं। ज्यादातर की उम्र 10 से 18 साल के बीच है। बच्चों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द आदि शिकायत थी। संस्था के जिम्मेदारों ने शुरुआत में बच्चों की बिगड़ती हालत को गंभीरता से नहीं लिया। 23 मार्च को उल्टी-दस्त और पेट दर्द से जब बच्चे अचेत होने लगे तब संस्था ने अलग-अलग अस्पतालों में बच्चों को भर्ती कराना शुरू किया था। इस दौरान एक-एक करके पांच बच्चों की जान भी चली गई थी। बलरामपुर के ICU में चल रहा इलाज लोकबंधु अस्पताल में 16 बच्चे, बलरामपुर में तीन व KGMU में एक बच्चा भर्ती हुए थे। इनमें से लोकबंधु अस्पताल से दो दिन में सात बच्चों को हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज करके निर्वाण संस्था भेज दिया गया है। लोकबंधु में रविवार को भी पांच बच्चों को डिस्चार्ज किया गया था। बलरामपुर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक बच्चे को किडनी, निमोनिया की शिकायत है। आज 4 बच्चों को लखनऊ से मिली राहत लोकबंधु के एमएस डॉ. अजयशंकर त्रिपाठी ने बताया कि अभी अस्पताल अन्य बच्चों का इलाज किया जा रहा है। हालत में सुधार होने पर उन बच्चों को जल्द छुट्टी दे दी जाएगी। बलरामपुर और KGMU में कुछ बच्चे भर्ती हैं। इन सभी का इलाज चल रहा है। दूसरी ओर सीएमओ की ओर से काकोरी सीएचसी से डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगातार निर्वाण संस्था में लग रही है। निर्वाण में स्वास्थ्य कर्मी लगातार बच्चों की निगरानी कर रहे हैं। निर्वाण आश्रय केंद्र के बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होने पर 4 और बच्चों की लोकबंधु अस्पताल से छुट्टी कर दी गई है। अभी भी केजीएमयू, बलरामपुर और लोकबंधु अस्पताल में सात बच्चे भर्ती हैं, जिनका इलाज डॉक्टरों की टीम निरंतर कर रही है। अब तक अस्पताल से काफी बच्चे डिस्चार्ज होकर निर्वाण संस्था जा चुके हैं। मोहान रोड बुद्धेश्वर स्थित निर्वाण संस्था में मार्च के तीसरे सप्ताह में बच्चे बीमार हो गए थे। पीपीपी मॉडल पर संचालित निर्वाण संस्था में मानसिक कमजोर, लावारिस बच्चे रहते हैं। ज्यादातर की उम्र 10 से 18 साल के बीच है। बच्चों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द आदि शिकायत थी। संस्था के जिम्मेदारों ने शुरुआत में बच्चों की बिगड़ती हालत को गंभीरता से नहीं लिया। 23 मार्च को उल्टी-दस्त और पेट दर्द से जब बच्चे अचेत होने लगे तब संस्था ने अलग-अलग अस्पतालों में बच्चों को भर्ती कराना शुरू किया था। इस दौरान एक-एक करके पांच बच्चों की जान भी चली गई थी। बलरामपुर के ICU में चल रहा इलाज लोकबंधु अस्पताल में 16 बच्चे, बलरामपुर में तीन व KGMU में एक बच्चा भर्ती हुए थे। इनमें से लोकबंधु अस्पताल से दो दिन में सात बच्चों को हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज करके निर्वाण संस्था भेज दिया गया है। लोकबंधु में रविवार को भी पांच बच्चों को डिस्चार्ज किया गया था। बलरामपुर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक बच्चे को किडनी, निमोनिया की शिकायत है। आज 4 बच्चों को लखनऊ से मिली राहत लोकबंधु के एमएस डॉ. अजयशंकर त्रिपाठी ने बताया कि अभी अस्पताल अन्य बच्चों का इलाज किया जा रहा है। हालत में सुधार होने पर उन बच्चों को जल्द छुट्टी दे दी जाएगी। बलरामपुर और KGMU में कुछ बच्चे भर्ती हैं। इन सभी का इलाज चल रहा है। दूसरी ओर सीएमओ की ओर से काकोरी सीएचसी से डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगातार निर्वाण संस्था में लग रही है। निर्वाण में स्वास्थ्य कर्मी लगातार बच्चों की निगरानी कर रहे हैं। उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर
निर्वाण केंद्र के 4 बच्चों को अस्पताल से मिली छुट्टी:लोकबंधु में भर्ती कर चल रहा था इलाज, अभी भी 7 बच्चे एडमिट
