नूंह में स्टूडेंट्स से कचरा बिनवाने के आदेश पर विवाद:लेटर में लिखा-बच्चे कचरा बेचें, मिले पैसों से बांटे मिठाई, कारण बताओ नोटिस जारी

नूंह में स्टूडेंट्स से कचरा बिनवाने के आदेश पर विवाद:लेटर में लिखा-बच्चे कचरा बेचें, मिले पैसों से बांटे मिठाई, कारण बताओ नोटिस जारी

हरियाणा के नूंह जिले में शिक्षा विभाग के सफाई को लेकर जारी एक लेटर ने विवाद खड़ा कर दिया है। विवाद इंग्लिश में लिखे CJM के लेटर के हिंदी में हुए अनुवाद के बाद हुआ। दरअसल CJM ने बच्चों में रिस्पांसिबिलिटी की भावना पैदा करने के लिए सफाई अभियान चलाने की बात कही। शिक्षा विभाग ने इस पत्र को हिंदी में जारी कर कहा कि बच्चे प्लास्टिक का कचरा बीनेंगे। इसको बेचने से मिलने वाले पैसों से मिठाई बांटी जाएगी। कचरा बीनने के फोटो क्लिक कर शिक्षा विभाग में भेजे जाएंगे ताकि पता चल सकते सच में बच्चे इस अभियान से जुड़े भी हैं या नहीं। BEO को 26 मार्च को चिट्ठी लिखकर दिए गए आदेश डीईओ अजीत श्योराण की ओर से नूंह, तावड़ू, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका और नगीना के खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को 26 मार्च को चिट्ठी लिखकर आदेश दिए गए कि जिले के सभी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के स्टूडेंट्स अपने घरों व आसपास से प्लास्टिक का कचरा एकत्रित करें। इस कचरे को कबाड़ी के पास बेचें और मिले पैसों से मिठाई खरीदकर स्कूल में बांटें। पत्र में यह भी कहा गया कि कचरा बीनते हुए बच्चों के फोटो और इसे कबाड़ी के पास बेचने के फोटो कार्यालय में भेजना सुनिश्चित करें। डीसी ने दिए जांच के आदेश
शिक्षा विभाग ने जारी किये गए पत्र में CJM कम डालसा सचिव के 25 फरवरी के पत्र का भी हवाला दिया है। DEO के पत्र पर हंगामा हुआ तो डीसी विश्राम कुमार मीणा ने पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी की मानें तो अंग्रेजी भाषा में लिखे इस पत्र का अनुवाद करने में हुई चूक के कारण BEO को भेजे पत्र में गैर अनुचित बात लिख दी गई। अब पत्र को वापस ले लिए गया है और इसे करेक्शन कर दोबारा जारी करने की बात कही गई है। सीजेएम के लेटर के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कम सचिव (जिला न्यायिक सेवाएं प्राधिकरण) नेहा गुप्ता के 25 फरवरी को DEO के नाम लिखे पत्र के बाद शुरू हुआ। दरअसल, इस पत्र में डालसा सचिव ने हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के लिए महीने में एक बार स्कूल में प्लास्टिक और दूसरे प्रकार के कबाड़ को एकत्रित करने का अभियान चलाने की बात कही थी। पत्र में एकत्रित कबाड़ा बेचने और इसे बेचने से मिलने वाले पैसे से मिठाई खरीदने की बात भी कही गई। DEO बोले-मेरी जानकारी के बिना जारी किया पत्र, कारण बताओ नोटिस जारी किया
जिला शिक्षा अधिकारी अजित श्योराण ने कहा कि पत्र मेरी जानकारी के बिना कार्यालय के एक कर्मचारी ने जारी कर दिया। इससे विभाग की छवि को नुकसान हुआ है और मेरी जानकारी के बिना मेरे नाम से पत्र जारी करना घोर अनुशासनहीनता है। उक्त कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस दे दिया है। यह पत्र भी वापस लेकर संशोधित तथ्यों के साथ प्रेषित किया गया है। हरियाणा के नूंह जिले में शिक्षा विभाग के सफाई को लेकर जारी एक लेटर ने विवाद खड़ा कर दिया है। विवाद इंग्लिश में लिखे CJM के लेटर के हिंदी में हुए अनुवाद के बाद हुआ। दरअसल CJM ने बच्चों में रिस्पांसिबिलिटी की भावना पैदा करने के लिए सफाई अभियान चलाने की बात कही। शिक्षा विभाग ने इस पत्र को हिंदी में जारी कर कहा कि बच्चे प्लास्टिक का कचरा बीनेंगे। इसको बेचने से मिलने वाले पैसों से मिठाई बांटी जाएगी। कचरा बीनने के फोटो क्लिक कर शिक्षा विभाग में भेजे जाएंगे ताकि पता चल सकते सच में बच्चे इस अभियान से जुड़े भी हैं या नहीं। BEO को 26 मार्च को चिट्ठी लिखकर दिए गए आदेश डीईओ अजीत श्योराण की ओर से नूंह, तावड़ू, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका और नगीना के खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को 26 मार्च को चिट्ठी लिखकर आदेश दिए गए कि जिले के सभी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के स्टूडेंट्स अपने घरों व आसपास से प्लास्टिक का कचरा एकत्रित करें। इस कचरे को कबाड़ी के पास बेचें और मिले पैसों से मिठाई खरीदकर स्कूल में बांटें। पत्र में यह भी कहा गया कि कचरा बीनते हुए बच्चों के फोटो और इसे कबाड़ी के पास बेचने के फोटो कार्यालय में भेजना सुनिश्चित करें। डीसी ने दिए जांच के आदेश
शिक्षा विभाग ने जारी किये गए पत्र में CJM कम डालसा सचिव के 25 फरवरी के पत्र का भी हवाला दिया है। DEO के पत्र पर हंगामा हुआ तो डीसी विश्राम कुमार मीणा ने पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी की मानें तो अंग्रेजी भाषा में लिखे इस पत्र का अनुवाद करने में हुई चूक के कारण BEO को भेजे पत्र में गैर अनुचित बात लिख दी गई। अब पत्र को वापस ले लिए गया है और इसे करेक्शन कर दोबारा जारी करने की बात कही गई है। सीजेएम के लेटर के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कम सचिव (जिला न्यायिक सेवाएं प्राधिकरण) नेहा गुप्ता के 25 फरवरी को DEO के नाम लिखे पत्र के बाद शुरू हुआ। दरअसल, इस पत्र में डालसा सचिव ने हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के लिए महीने में एक बार स्कूल में प्लास्टिक और दूसरे प्रकार के कबाड़ को एकत्रित करने का अभियान चलाने की बात कही थी। पत्र में एकत्रित कबाड़ा बेचने और इसे बेचने से मिलने वाले पैसे से मिठाई खरीदने की बात भी कही गई। DEO बोले-मेरी जानकारी के बिना जारी किया पत्र, कारण बताओ नोटिस जारी किया
जिला शिक्षा अधिकारी अजित श्योराण ने कहा कि पत्र मेरी जानकारी के बिना कार्यालय के एक कर्मचारी ने जारी कर दिया। इससे विभाग की छवि को नुकसान हुआ है और मेरी जानकारी के बिना मेरे नाम से पत्र जारी करना घोर अनुशासनहीनता है। उक्त कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस दे दिया है। यह पत्र भी वापस लेकर संशोधित तथ्यों के साथ प्रेषित किया गया है।   हरियाणा | दैनिक भास्कर