हरियाणा के पानीपत जिले के बबैल गांव में एक मकान की छत गिर गई। छत के गिरने से कमरे में लेटी बुजुर्ग महिला, उसकी बेटी और पोती मलबे में दब गए। धड़ाम की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मलबा हटाकर तीनों को मलबे के नीचे से निकाला। इस परिवार का गुजारा वृद्धावस्था पेंशन से चल रहा है। बुजुर्ग महिला को गंभीर चोट लगी है, जिसे उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। बच्ची को भी सिर पर चोट लगी है। बुआ ने बचाई भतीजी की जान, खुद ही मलबे से निकाला
नीलम ने बताया कि उसका गांव बबैल में मकान है। इसमें वह अपनी 60 वर्षीय मां सोना देवी और भतीजी सवन्या (5) के साथ रहती है। बुधवार को कमरे में मां और भतीजी सो रही थी। सुबह करीब 7 बजे का वक्त था। वह खुद खाना बना रही थी। खाना बनाते वक्त वह कमरे में आ-जा रही थी। इसी दौरान अचानक छत गिर गई और मलबे के नीचे वे तीनों दब गए। उसने तुरंत ही मलबा हटाकर खुद को और अपनी भतीजी सवन्या को बाहर निकाला। इसी दौरान वहां पड़ोसी आ गए। जिन्होंने बिना देरी किए मां को भी बाहर निकाला। हादसे में मकान के साथ-साथ घरेलू सामान का भी नुकसान हुआ है। 60 साल पुराना है मकान, कमजोर हो चुकी है छत
नीलम ने बताया कि उनका उनका 30 साल पुराना मकान है। छत में लगी लकड़ियां कमजोर हो गई है। मिट्टी के साथ पुरानी ईंटों से मकान बना हुआ था। कमजोर होने की वजह से ही मकान की छत गिरी। फिलहाल वह सुरक्षित है। उसकी मां और भतीजी ही मलबे में दबने के कारण घायल हुई है। उसने जिला प्रशासन से आर्थिक मदद की मांग की है। सवन्या के पिता की हादसे में मौत हो चुकी
परिजनों ने बताया कि सवन्या के पिता रवि की करीब 3 साल पहले गांव में ही सड़क हादसे में मौत हो गई थी। जिसके बाद रवि की पत्नी ने दूसरी शादी कर ली थी। इसके बाद से ही सवन्या अपनी दादी के पास रह रही है। परिवार बेहद गरीब, घर में कमाने वाला कोई पुरुष नहीं
छत गिरने से घायल हुई मां सोना देवी की पुत्री नीलम ने बताया कि उनका परिवार बेहद गरीब है। भाई रवि की मौत के बाद परिवार चलाने वाला कोई
पुरुष घर में नहीं है। परिवार में वह, उसकी मां और भतीजी ही है। आगे बताया कि उनके परिवार का गुजारा मां सोना देवी को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन से ही चलता है। घर के दूसरे हिस्से में बनाया आसरा
नीलम ने बताया कि मकान काफी पुराना था। इसमें दो कमरे बने हुए है। एक कमरे की छत गिर गई है। मलबे में दबने से घर का काफी सामान भी नष्ट हो गया है। अब उनके पास केवल एक ही कमरा बचा है। इसी में उन तीनों को रहना होगा। यह भी बताया कि उनके पास इतने भी पैसे नहीं है कि गिर चुकी छत की मरम्मत करा सके। उसने प्रशासन से परिवार की आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। हरियाणा के पानीपत जिले के बबैल गांव में एक मकान की छत गिर गई। छत के गिरने से कमरे में लेटी बुजुर्ग महिला, उसकी बेटी और पोती मलबे में दब गए। धड़ाम की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मलबा हटाकर तीनों को मलबे के नीचे से निकाला। इस परिवार का गुजारा वृद्धावस्था पेंशन से चल रहा है। बुजुर्ग महिला को गंभीर चोट लगी है, जिसे उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। बच्ची को भी सिर पर चोट लगी है। बुआ ने बचाई भतीजी की जान, खुद ही मलबे से निकाला
नीलम ने बताया कि उसका गांव बबैल में मकान है। इसमें वह अपनी 60 वर्षीय मां सोना देवी और भतीजी सवन्या (5) के साथ रहती है। बुधवार को कमरे में मां और भतीजी सो रही थी। सुबह करीब 7 बजे का वक्त था। वह खुद खाना बना रही थी। खाना बनाते वक्त वह कमरे में आ-जा रही थी। इसी दौरान अचानक छत गिर गई और मलबे के नीचे वे तीनों दब गए। उसने तुरंत ही मलबा हटाकर खुद को और अपनी भतीजी सवन्या को बाहर निकाला। इसी दौरान वहां पड़ोसी आ गए। जिन्होंने बिना देरी किए मां को भी बाहर निकाला। हादसे में मकान के साथ-साथ घरेलू सामान का भी नुकसान हुआ है। 60 साल पुराना है मकान, कमजोर हो चुकी है छत
नीलम ने बताया कि उनका उनका 30 साल पुराना मकान है। छत में लगी लकड़ियां कमजोर हो गई है। मिट्टी के साथ पुरानी ईंटों से मकान बना हुआ था। कमजोर होने की वजह से ही मकान की छत गिरी। फिलहाल वह सुरक्षित है। उसकी मां और भतीजी ही मलबे में दबने के कारण घायल हुई है। उसने जिला प्रशासन से आर्थिक मदद की मांग की है। सवन्या के पिता की हादसे में मौत हो चुकी
परिजनों ने बताया कि सवन्या के पिता रवि की करीब 3 साल पहले गांव में ही सड़क हादसे में मौत हो गई थी। जिसके बाद रवि की पत्नी ने दूसरी शादी कर ली थी। इसके बाद से ही सवन्या अपनी दादी के पास रह रही है। परिवार बेहद गरीब, घर में कमाने वाला कोई पुरुष नहीं
छत गिरने से घायल हुई मां सोना देवी की पुत्री नीलम ने बताया कि उनका परिवार बेहद गरीब है। भाई रवि की मौत के बाद परिवार चलाने वाला कोई
पुरुष घर में नहीं है। परिवार में वह, उसकी मां और भतीजी ही है। आगे बताया कि उनके परिवार का गुजारा मां सोना देवी को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन से ही चलता है। घर के दूसरे हिस्से में बनाया आसरा
नीलम ने बताया कि मकान काफी पुराना था। इसमें दो कमरे बने हुए है। एक कमरे की छत गिर गई है। मलबे में दबने से घर का काफी सामान भी नष्ट हो गया है। अब उनके पास केवल एक ही कमरा बचा है। इसी में उन तीनों को रहना होगा। यह भी बताया कि उनके पास इतने भी पैसे नहीं है कि गिर चुकी छत की मरम्मत करा सके। उसने प्रशासन से परिवार की आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। हरियाणा | दैनिक भास्कर
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