बार एसोसिएशन बोला-जस्टिस वर्मा को यहां बैठने नहीं देंगे:अध्यक्ष-सचिव ने कहा- यहां डस्टबिन थोड़े है, सोमवार को आमसभा, फिर आंदोलन हो सकता है

बार एसोसिएशन बोला-जस्टिस वर्मा को यहां बैठने नहीं देंगे:अध्यक्ष-सचिव ने कहा- यहां डस्टबिन थोड़े है, सोमवार को आमसभा, फिर आंदोलन हो सकता है

दिल्ली हाईकोर्ट के जज के बंगले में 15 करोड़ रुपये मिलने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का मामला प्रयागराज में वकीलों के बीच गरमाने लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए इमरजेंसी मीटिंग तक बुला ली। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कड़ रुख अपना कर इसका जबरदस्त विरोध शुरू किया।
अब पदाधिकारी वकीलों को साथ लेने की मुहिम में जुट गए हैं। उनका कहना है कि इस मामले पर वह वकीलों के पूरे समूह को साथ लेकर जरूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे। ऐसे में सोमवार को इस मामले पर प्रदर्शन हो सकता है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट कोई कूड़ादान नहीं है कि यहां कुछ भी फेंक दिया जाए। उन्होंने इस कार्रवाई पर सख्त ऐतराज जताते हुए सोमवार को आमसभा की बैठक आहूत की है और यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में हम उन्हें यहां बैठने नहीं देंगे। जरूरत पड़ी तो हम काम भी ठप कर देंगे। अनिल तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के इस फैसले से गंभीर सवाल यह उठता है कि क्या इलाहाबाद उच्च न्यायालय कूड़ेदान है ? यह मामला तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम वर्तमान स्थिति की जांच करते हैं जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी है और लगातार समस्याओं के बावजूद पिछले कई वर्षों से नए न्यायाधीशों की नियुक्ति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यह भी गंभीर चिंता का विषय है कि बार के सदस्यों को न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय कभी भी बार से परामर्श नहीं किया गया। पात्रता पर विचार करना मानक के अनुरूप नहीं प्रतीत होता है। कुछ कमी है जिसके कारण भ्रष्टाचार हुआ है और परिणामस्वरूप न्यायपालिका में जनता के विश्वास को बहुत नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हम यह नहीं कह सकते कि यह स्थिति सर्वोच्च न्यायालय की जानकारी में नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार “इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुछ गड़बड़ है” जैसी टिप्पणी की है। अनिल तिवारी ने कहा कि वर्तमान में हम कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, विशेष रूप से न्यायाधीशों की कमी के कारण महीनों तक नए मामलों की सुनवाई नहीं हो पाती है, जिससे कानून के शासन में जनता का विश्वास कम होता जा रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कूड़ेदान में हैं। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन की चिंता केवल न्यायपालिका में जनता के विश्वास को बनाए रखना है। इस स्थिति में हम आकस्मिक आम सभा बुलाने के लिए बाध्य हैं ताकि बार के सदस्य उचित निर्णय ले सकें। उन्होंने यह भी कहा कि बार एसोसिएशन को लगता है कि इन सभी कारकों के पीछे इलाहाबाद हाईकोर्ट को विभाजित करने की साजिश है, जिसके लिए हम अंतिम दम तक लड़ाई का संकल्प लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में रिक्तियां भरने के लिए अपेक्षा की है अनिल तिवारी ने कहा कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति आर महादेवन की खंडपीठ ने कमलाबाई के मामले में पारित आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिक्तियों के कारण मुकदमों के बोझ और तीन दशक से मामले लंबित होने का जिक्र किया है। खंडपीठ ने लिखा कि एक न्यायाधीश के पास लगभग 15000 से 20000 मामले हैं। वादकारी अपने मामलों की सुनवाई और निर्णय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसका एकमात्र उपाय यह है कि रिक्तियों को भरने के लिए यथाशीघ्र आवश्यक कदम उठाए जाएं और शुद्ध योग्यता और क्षमता के आधार पर उपयुक्त व्यक्तियों की सिफारिश की जाए। खंडपीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले पर गौर करने और अपने प्रशासनिक पक्ष पर इस संबंध में उचित आदेश करने की अपेक्षा की है। अनिल तिवारी ने कहा कि इस आदेश का आशय यह नहीं है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को कूड़ादान समझकर कुछ भी डाल दिया जाए। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही बतौर जज नियुक्त हुए थे। जिन्हें अक्टूबर 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया था। जज बनने से पहले वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य सरकार के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल भी रहे। दिल्ली हाईकोर्ट के जज के बंगले में 15 करोड़ रुपये मिलने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का मामला प्रयागराज में वकीलों के बीच गरमाने लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए इमरजेंसी मीटिंग तक बुला ली। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कड़ रुख अपना कर इसका जबरदस्त विरोध शुरू किया।
अब पदाधिकारी वकीलों को साथ लेने की मुहिम में जुट गए हैं। उनका कहना है कि इस मामले पर वह वकीलों के पूरे समूह को साथ लेकर जरूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे। ऐसे में सोमवार को इस मामले पर प्रदर्शन हो सकता है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट कोई कूड़ादान नहीं है कि यहां कुछ भी फेंक दिया जाए। उन्होंने इस कार्रवाई पर सख्त ऐतराज जताते हुए सोमवार को आमसभा की बैठक आहूत की है और यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में हम उन्हें यहां बैठने नहीं देंगे। जरूरत पड़ी तो हम काम भी ठप कर देंगे। अनिल तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के इस फैसले से गंभीर सवाल यह उठता है कि क्या इलाहाबाद उच्च न्यायालय कूड़ेदान है ? यह मामला तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम वर्तमान स्थिति की जांच करते हैं जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी है और लगातार समस्याओं के बावजूद पिछले कई वर्षों से नए न्यायाधीशों की नियुक्ति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यह भी गंभीर चिंता का विषय है कि बार के सदस्यों को न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय कभी भी बार से परामर्श नहीं किया गया। पात्रता पर विचार करना मानक के अनुरूप नहीं प्रतीत होता है। कुछ कमी है जिसके कारण भ्रष्टाचार हुआ है और परिणामस्वरूप न्यायपालिका में जनता के विश्वास को बहुत नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हम यह नहीं कह सकते कि यह स्थिति सर्वोच्च न्यायालय की जानकारी में नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार “इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुछ गड़बड़ है” जैसी टिप्पणी की है। अनिल तिवारी ने कहा कि वर्तमान में हम कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, विशेष रूप से न्यायाधीशों की कमी के कारण महीनों तक नए मामलों की सुनवाई नहीं हो पाती है, जिससे कानून के शासन में जनता का विश्वास कम होता जा रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कूड़ेदान में हैं। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन की चिंता केवल न्यायपालिका में जनता के विश्वास को बनाए रखना है। इस स्थिति में हम आकस्मिक आम सभा बुलाने के लिए बाध्य हैं ताकि बार के सदस्य उचित निर्णय ले सकें। उन्होंने यह भी कहा कि बार एसोसिएशन को लगता है कि इन सभी कारकों के पीछे इलाहाबाद हाईकोर्ट को विभाजित करने की साजिश है, जिसके लिए हम अंतिम दम तक लड़ाई का संकल्प लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में रिक्तियां भरने के लिए अपेक्षा की है अनिल तिवारी ने कहा कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति आर महादेवन की खंडपीठ ने कमलाबाई के मामले में पारित आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिक्तियों के कारण मुकदमों के बोझ और तीन दशक से मामले लंबित होने का जिक्र किया है। खंडपीठ ने लिखा कि एक न्यायाधीश के पास लगभग 15000 से 20000 मामले हैं। वादकारी अपने मामलों की सुनवाई और निर्णय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसका एकमात्र उपाय यह है कि रिक्तियों को भरने के लिए यथाशीघ्र आवश्यक कदम उठाए जाएं और शुद्ध योग्यता और क्षमता के आधार पर उपयुक्त व्यक्तियों की सिफारिश की जाए। खंडपीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले पर गौर करने और अपने प्रशासनिक पक्ष पर इस संबंध में उचित आदेश करने की अपेक्षा की है। अनिल तिवारी ने कहा कि इस आदेश का आशय यह नहीं है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को कूड़ादान समझकर कुछ भी डाल दिया जाए। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही बतौर जज नियुक्त हुए थे। जिन्हें अक्टूबर 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया था। जज बनने से पहले वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य सरकार के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल भी रहे।   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर