भगवान रंगनाथ की निकली रथयात्रा:60 फीट ऊंचे रथ पर विराजमान हुए, 5 किमी की दूरी 6 घंटे में पूरी होगी; 4 लाख भक्त जुटे

भगवान रंगनाथ की निकली रथयात्रा:60 फीट ऊंचे रथ पर विराजमान हुए, 5 किमी की दूरी 6 घंटे में पूरी होगी; 4 लाख भक्त जुटे

उत्तर भारत के बड़े रंगनाथ मंदिर से रविवार को रथयात्रा निकाली गई है। भगवान रंगनाथ (विष्णु जी) माता गोदा ( लक्ष्मी जी) 60 फीट ऊंचे और 10 टन वजन के चंदन की लकड़ी से बने रथ में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। सुबह रथ के शीर्ष पर सोने से बना कलश और चांदी से बना छत्र स्थापित किया गया। फिर पूजा-पाठ के बाद रथ यात्रा शुरू हुई। अद्भुत कला से बने इस विशाल रथ को हजारों भक्त खींच रहे हैं। करीब 5 किमी की दूरी 6 घंटे में पूरी होगी। सोने की पालकी में विराजमान होकर पहुंचे रथ पर भगवान रंगनाथ माता गोदा जी के साथ सुबह शुभ मुहूर्त में निज मंदिर से सोने से बनी पालकी में विराजमान हुए। परंपरागत वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच सिंह द्वार के समीप स्थापित रथ पर पहुंचे। यहां भगवान को 6 बजे रथ में विधि विधान से पूजन अर्चन के बाद विराजमान किया गया। पेठे के फल की दी गई बली भगवान को रथ में विराजमान करने के बाद मंदिर के पुरोहित ने रथ का पूजन शुरू कराया। मंदिर के पुरोहित विजय किशोर मिश्र और गोविंद किशोर मिश्र ने वेद मंत्रों का उच्चारण कर देव आह्वान, नवग्रह स्थापन, गणपति आह्वान आदि देवों का पूजन वंदन किया। इस पूजा में करीब 1 घंटे का समय लगा। इसके बाद रथ यात्रा शुरू होने से पहले रथ के चारों पहियों के नीचे पैठे का फल रखा और उसकी बली पूजा की गई। रथ खींचने को आतुर भक्त पूजा के बाद जैसे ही सात कूपों का धमाका और काली के स्वर ने रथ के चलने का संकेत किया। भक्तों का उत्साह दोगुना हो गया। रंगनाथ भगवान के जयकारे लगे। रथ को खींचने की होड़ लग गई। करीब 15 फीट चौड़े, 20 फीट लंबे और 60 फीट ऊंचे रथ को देखने के लिए सभी आतुर दिखे। मोटे मोटे रस्से को पकड़ कर भक्त एक बार रथ को खींचना चाह रहे। दिग्पाल, विश्वकसेन जी आदि देवताओं से सुसज्जित रथ पर सजी रंग बिरंगी पताका, देसी-विदेशी फूल, केलि के तने, हरे पत्तों से रथ का आकर्षण अपनी दिव्यता से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा। 6 घंटे चलेगी रथयात्रा, 4 लाख भक्त शामिल होंगे
दोपहर में रथ बड़ा बगीचा पहुंचेगा। जहां विश्राम के बाद रथ मंदिर के लिए रवाना होगा। रथ यात्रा में आगे आगे चलते घोड़े, हाथी और बैंड बाजा पर बजती धार्मिक मधुर ध्वनि के बीच दोपहर बाद रथ मंदिर पहुंचेगा। जहां भगवान को रथ से उतारकर सोने से बनी पालकी में विराजमान किया जाएगा। इसके बाद उनको मंदिर के अंदर ले जाया जाएगा। रथ घर से ठाकुर जी को दोबारा पालकी में विराजमान कर बगीचे में लाया जाएगा। यहां शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से पानी के रंगीन फव्वारे चलाए जाएंगे। रंगनाथ जी को शीतल पेय, मिठाई, फल आदि अर्पित किया जाएगा। भगवान रंगनाथ की इस आने-जाने की 5 किमी की रथयात्रा में दिनभर में करीब 4 लाख से ज्यादा भक्त शामिल होंगे। ऐसा है रंगनाथ का रथ
भगवान रंगनाथ के जैसा रथ कहा जाता है कि कहीं अन्य किसी देवालय में नहीं है। रथ के आगे लकड़ी से बने सफेद रंग के 4 घोड़े लगे होते हैं तो ऊपर हाथों में ध्वज लिए परियां लटकी रहती हैं। रथ पर लगी लकड़ी पर की गई उत्कृष्ट कलात्मकता उस समय के कारीगरों की कला को दर्शाती है। रथ पर यश, गंधर्व, सिंह शार्दुल, द्वारपाल जय विजय विराजमान रहते हैं। सिंहासन के बाहर दो सिंह की आकृति के दानव रूपी मूर्तियां बनी है। इनके बारे में कहा जाता है कि यह भगवान को लगने वाली नजर से बचाती हैं। ———————– ये खबर भी पढ़िए- मुस्कान मुंह छिपाए बैठी रहती, साहिल बेचैन दिखा: जेल में 4 दिन से नशा नहीं मिलने से परेशान, मुस्कान का टेस्ट होगा सौरभ की हत्या करने वाले साहिल और मुस्कान मेरठ की जेल में नशे के लिए परेशान हैं। साहिल की तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद जेल अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका चेकअप किया। नशा उन्मूलन सेंटर के काउंसलर ने साहिल और मुस्कान की काउंसिलिंग भी की। पढ़िए रिपोर्ट… उत्तर भारत के बड़े रंगनाथ मंदिर से रविवार को रथयात्रा निकाली गई है। भगवान रंगनाथ (विष्णु जी) माता गोदा ( लक्ष्मी जी) 60 फीट ऊंचे और 10 टन वजन के चंदन की लकड़ी से बने रथ में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। सुबह रथ के शीर्ष पर सोने से बना कलश और चांदी से बना छत्र स्थापित किया गया। फिर पूजा-पाठ के बाद रथ यात्रा शुरू हुई। अद्भुत कला से बने इस विशाल रथ को हजारों भक्त खींच रहे हैं। करीब 5 किमी की दूरी 6 घंटे में पूरी होगी। सोने की पालकी में विराजमान होकर पहुंचे रथ पर भगवान रंगनाथ माता गोदा जी के साथ सुबह शुभ मुहूर्त में निज मंदिर से सोने से बनी पालकी में विराजमान हुए। परंपरागत वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच सिंह द्वार के समीप स्थापित रथ पर पहुंचे। यहां भगवान को 6 बजे रथ में विधि विधान से पूजन अर्चन के बाद विराजमान किया गया। पेठे के फल की दी गई बली भगवान को रथ में विराजमान करने के बाद मंदिर के पुरोहित ने रथ का पूजन शुरू कराया। मंदिर के पुरोहित विजय किशोर मिश्र और गोविंद किशोर मिश्र ने वेद मंत्रों का उच्चारण कर देव आह्वान, नवग्रह स्थापन, गणपति आह्वान आदि देवों का पूजन वंदन किया। इस पूजा में करीब 1 घंटे का समय लगा। इसके बाद रथ यात्रा शुरू होने से पहले रथ के चारों पहियों के नीचे पैठे का फल रखा और उसकी बली पूजा की गई। रथ खींचने को आतुर भक्त पूजा के बाद जैसे ही सात कूपों का धमाका और काली के स्वर ने रथ के चलने का संकेत किया। भक्तों का उत्साह दोगुना हो गया। रंगनाथ भगवान के जयकारे लगे। रथ को खींचने की होड़ लग गई। करीब 15 फीट चौड़े, 20 फीट लंबे और 60 फीट ऊंचे रथ को देखने के लिए सभी आतुर दिखे। मोटे मोटे रस्से को पकड़ कर भक्त एक बार रथ को खींचना चाह रहे। दिग्पाल, विश्वकसेन जी आदि देवताओं से सुसज्जित रथ पर सजी रंग बिरंगी पताका, देसी-विदेशी फूल, केलि के तने, हरे पत्तों से रथ का आकर्षण अपनी दिव्यता से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा। 6 घंटे चलेगी रथयात्रा, 4 लाख भक्त शामिल होंगे
दोपहर में रथ बड़ा बगीचा पहुंचेगा। जहां विश्राम के बाद रथ मंदिर के लिए रवाना होगा। रथ यात्रा में आगे आगे चलते घोड़े, हाथी और बैंड बाजा पर बजती धार्मिक मधुर ध्वनि के बीच दोपहर बाद रथ मंदिर पहुंचेगा। जहां भगवान को रथ से उतारकर सोने से बनी पालकी में विराजमान किया जाएगा। इसके बाद उनको मंदिर के अंदर ले जाया जाएगा। रथ घर से ठाकुर जी को दोबारा पालकी में विराजमान कर बगीचे में लाया जाएगा। यहां शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से पानी के रंगीन फव्वारे चलाए जाएंगे। रंगनाथ जी को शीतल पेय, मिठाई, फल आदि अर्पित किया जाएगा। भगवान रंगनाथ की इस आने-जाने की 5 किमी की रथयात्रा में दिनभर में करीब 4 लाख से ज्यादा भक्त शामिल होंगे। ऐसा है रंगनाथ का रथ
भगवान रंगनाथ के जैसा रथ कहा जाता है कि कहीं अन्य किसी देवालय में नहीं है। रथ के आगे लकड़ी से बने सफेद रंग के 4 घोड़े लगे होते हैं तो ऊपर हाथों में ध्वज लिए परियां लटकी रहती हैं। रथ पर लगी लकड़ी पर की गई उत्कृष्ट कलात्मकता उस समय के कारीगरों की कला को दर्शाती है। रथ पर यश, गंधर्व, सिंह शार्दुल, द्वारपाल जय विजय विराजमान रहते हैं। सिंहासन के बाहर दो सिंह की आकृति के दानव रूपी मूर्तियां बनी है। इनके बारे में कहा जाता है कि यह भगवान को लगने वाली नजर से बचाती हैं। ———————– ये खबर भी पढ़िए- मुस्कान मुंह छिपाए बैठी रहती, साहिल बेचैन दिखा: जेल में 4 दिन से नशा नहीं मिलने से परेशान, मुस्कान का टेस्ट होगा सौरभ की हत्या करने वाले साहिल और मुस्कान मेरठ की जेल में नशे के लिए परेशान हैं। साहिल की तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद जेल अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका चेकअप किया। नशा उन्मूलन सेंटर के काउंसलर ने साहिल और मुस्कान की काउंसिलिंग भी की। पढ़िए रिपोर्ट…   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर