<p style=”text-align: justify;”><strong>Maharashtra Politics:</strong> मुंबई में राज ठाकरे की पार्टी एक बार फिर एक्शन मोड पर दिखाई दे रही है. महाराष्ट्र में मराठी का मुद्दा बना हुआ है और इसे राज ठाकरे की एमएनएस पार्टी ने हमेशा की तरह पकड़कर रखा है. मराठी भाषा के मुद्दे पर MNS आक्रामक दिख रही है. ऐसा माना जा रहा है कि राज्य में अब स्थानीय निकाय चुनाव होने जा रहे हैं इसलिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पूरी तरह से एक्टिव है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>राज ठाकरे की पार्टी पर आरोप लग रहे हैं कि मराठी भाषा का अपमान करनेवाले वालों के साथ सीधा मारपीट होती है और उसका वीडियो बनाकर वायरल किया जाता है. गुड़ी पड़वा रैली में मराठी के मुद्दे को लेकर राज ठाकरे ने चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था, ”जहां-जहां मराठी का अपमान होगा वहां कान के नीचे आवाज निकलेगी.” </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>बीएमसी चुनाव में राज ठाकरे का मराठी कार्ड!</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>गुड़ी पड़वा के पहले राज ठाकरे ने एक मराठी कविता का सम्मेलन भी आयोजित किया था, जहां अभिनेता <a title=”विक्की कौशल” href=”https://www.abplive.com/topic/vicky-kaushal” data-type=”interlinkingkeywords”>विक्की कौशल</a> से लेकर जावेद अख्तर जैसी कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं थी. ऐसे में मतलब निकाला जा रहा है कि राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद मराठी कार्ड का मुद्दा लेकर बीएमसी चुनाव में उतर रही है. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मुंबई के पवई में सुरक्षा गार्ड पर हमला</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>हाल ही में मुंबई के पवई इलाके में एक सुरक्षा गार्ड द्वारा मराठी भाषा के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने उसकी पिटाई की थी. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें गार्ड को मराठी भाषा का सम्मान करने की चेतावनी दी गई. इसके पहले भी मोबाइल की गैलरी हो या फिर सोसायटी हो सभी जगह पर मराठी भाषा का विवाद दिखाई दिया और राज ठाकरे की पार्टी इसमें आगे दिखी.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>आरएसएस नेता भैयाजी जोशी का बयान</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>मार्च 2025 में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा था कि मुंबई में रहने के लिए मराठी सीखना जरूरी नहीं है. इस बयान के बाद विवाद पैदा हुआ और उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई और महाराष्ट्र की मूल भाषा मराठी है. यहां रहने वाले सभी लोगों को मराठी भाषा सीखनी चाहिए. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>सरकारी दफ्तरों में मराठी भाषा की अनिवार्यता</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी और अर्ध-सरकारी दफ्तरों में मराठी भाषा के उपयोग को अनिवार्य किया है. 1964 के महाराष्ट्र राजभाषा अधिनियम के तहत, सभी आधिकारिक दस्तावेज, प्रस्ताव, पत्र और परिपत्र मराठी में होने चाहिए. 2024 में स्वीकृत मराठी भाषा नीति ने इसके संरक्षण, संवर्धन और प्रसार पर जोर दिया है. </p>
<p style=”text-align: justify;”>मनसे के गुड़ी पड़वा मेलावा 2025 में राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से बैंकों में जाकर पूछने को कहा कि क्या मराठी में काम हो रहा है? उनका कहना है कि बैंक लेनदेन मराठी में किया जाना चाहिए. इसके पहले भी एमएनएस पार्टी मराठी भाषा को लेकर कई आंदोलन कर चुकी है. जिसे महाराष्ट्र में सफलता मिली है और पार्टी राज्य में हमेशा चर्चा में रही है. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने की मांग</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>राज ठाकरे ने कई बार महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे मराठी भाषा को प्राथमिकता दें. उन्होंने यह भी मांग की थी कि महाराष्ट्र में काम करने वाले कर्मचारियों (विशेष रूप से सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में) को मराठी भाषा सीखनी चाहिए.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>बड़े ब्रांड्स और होर्डिंग्स में मराठी भाषा</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>राज ठाकरे ने मुंबई और अन्य शहरों में होर्डिंग्स और साइनबोर्ड्स पर मराठी भाषा को प्राथमिकता देने की मांग की. कुछ कंपनियों और दुकानों ने उनकी अपील के बाद मराठी में बोर्ड लगाना शुरू किया.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मराठी फिल्मों और थिएटर को बढ़ावा</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे मराठी फिल्म इंडस्ट्री और थिएटर को बढ़ावा देने के पक्षधर हैं. उनकी मांग थी कि मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों में मराठी फिल्मों के लिए प्राइम टाइम स्लॉट दिया जाए.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>उत्तर भारतीयों और हिंदी भाषा पर राज ठाकरे का रुख</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>राज ठाकरे का रुख उत्तर भारतीयों को लेकर सख्त रहा है, खासकर जब हिंदी भाषा महाराष्ट्र में हावी होने लगी. वे मानते हैं कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा सीखनी चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए. उन्होंने राज्य में मराठी युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता की भी मांग की.</p>
<p style=”text-align: justify;”>महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इसके पहले भी चुनाव में अपना किस्मत आजमा चुकी है. पहले ही चुनाव में जीत के बाद उन्हें हमेशा हार ही मिली है. पार्टी के पहले ही चुनाव में 12 विधायक जीते थे. यह जीत 2009 में मिली थी. अब सवाल है कि मराठी का मुद्दा एक बार फिर उठाकर राज ठाकरे को क्या बीएमसी चुनाव में जीत मिलेगी?</p> <p style=”text-align: justify;”><strong>Maharashtra Politics:</strong> मुंबई में राज ठाकरे की पार्टी एक बार फिर एक्शन मोड पर दिखाई दे रही है. महाराष्ट्र में मराठी का मुद्दा बना हुआ है और इसे राज ठाकरे की एमएनएस पार्टी ने हमेशा की तरह पकड़कर रखा है. मराठी भाषा के मुद्दे पर MNS आक्रामक दिख रही है. ऐसा माना जा रहा है कि राज्य में अब स्थानीय निकाय चुनाव होने जा रहे हैं इसलिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पूरी तरह से एक्टिव है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>राज ठाकरे की पार्टी पर आरोप लग रहे हैं कि मराठी भाषा का अपमान करनेवाले वालों के साथ सीधा मारपीट होती है और उसका वीडियो बनाकर वायरल किया जाता है. गुड़ी पड़वा रैली में मराठी के मुद्दे को लेकर राज ठाकरे ने चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था, ”जहां-जहां मराठी का अपमान होगा वहां कान के नीचे आवाज निकलेगी.” </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>बीएमसी चुनाव में राज ठाकरे का मराठी कार्ड!</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>गुड़ी पड़वा के पहले राज ठाकरे ने एक मराठी कविता का सम्मेलन भी आयोजित किया था, जहां अभिनेता <a title=”विक्की कौशल” href=”https://www.abplive.com/topic/vicky-kaushal” data-type=”interlinkingkeywords”>विक्की कौशल</a> से लेकर जावेद अख्तर जैसी कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं थी. ऐसे में मतलब निकाला जा रहा है कि राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद मराठी कार्ड का मुद्दा लेकर बीएमसी चुनाव में उतर रही है. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मुंबई के पवई में सुरक्षा गार्ड पर हमला</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>हाल ही में मुंबई के पवई इलाके में एक सुरक्षा गार्ड द्वारा मराठी भाषा के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने उसकी पिटाई की थी. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें गार्ड को मराठी भाषा का सम्मान करने की चेतावनी दी गई. इसके पहले भी मोबाइल की गैलरी हो या फिर सोसायटी हो सभी जगह पर मराठी भाषा का विवाद दिखाई दिया और राज ठाकरे की पार्टी इसमें आगे दिखी.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>आरएसएस नेता भैयाजी जोशी का बयान</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>मार्च 2025 में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा था कि मुंबई में रहने के लिए मराठी सीखना जरूरी नहीं है. इस बयान के बाद विवाद पैदा हुआ और उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई और महाराष्ट्र की मूल भाषा मराठी है. यहां रहने वाले सभी लोगों को मराठी भाषा सीखनी चाहिए. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>सरकारी दफ्तरों में मराठी भाषा की अनिवार्यता</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी और अर्ध-सरकारी दफ्तरों में मराठी भाषा के उपयोग को अनिवार्य किया है. 1964 के महाराष्ट्र राजभाषा अधिनियम के तहत, सभी आधिकारिक दस्तावेज, प्रस्ताव, पत्र और परिपत्र मराठी में होने चाहिए. 2024 में स्वीकृत मराठी भाषा नीति ने इसके संरक्षण, संवर्धन और प्रसार पर जोर दिया है. </p>
<p style=”text-align: justify;”>मनसे के गुड़ी पड़वा मेलावा 2025 में राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से बैंकों में जाकर पूछने को कहा कि क्या मराठी में काम हो रहा है? उनका कहना है कि बैंक लेनदेन मराठी में किया जाना चाहिए. इसके पहले भी एमएनएस पार्टी मराठी भाषा को लेकर कई आंदोलन कर चुकी है. जिसे महाराष्ट्र में सफलता मिली है और पार्टी राज्य में हमेशा चर्चा में रही है. </p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने की मांग</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>राज ठाकरे ने कई बार महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे मराठी भाषा को प्राथमिकता दें. उन्होंने यह भी मांग की थी कि महाराष्ट्र में काम करने वाले कर्मचारियों (विशेष रूप से सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में) को मराठी भाषा सीखनी चाहिए.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>बड़े ब्रांड्स और होर्डिंग्स में मराठी भाषा</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>राज ठाकरे ने मुंबई और अन्य शहरों में होर्डिंग्स और साइनबोर्ड्स पर मराठी भाषा को प्राथमिकता देने की मांग की. कुछ कंपनियों और दुकानों ने उनकी अपील के बाद मराठी में बोर्ड लगाना शुरू किया.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मराठी फिल्मों और थिएटर को बढ़ावा</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे मराठी फिल्म इंडस्ट्री और थिएटर को बढ़ावा देने के पक्षधर हैं. उनकी मांग थी कि मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों में मराठी फिल्मों के लिए प्राइम टाइम स्लॉट दिया जाए.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>उत्तर भारतीयों और हिंदी भाषा पर राज ठाकरे का रुख</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>राज ठाकरे का रुख उत्तर भारतीयों को लेकर सख्त रहा है, खासकर जब हिंदी भाषा महाराष्ट्र में हावी होने लगी. वे मानते हैं कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा सीखनी चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए. उन्होंने राज्य में मराठी युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता की भी मांग की.</p>
<p style=”text-align: justify;”>महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना इसके पहले भी चुनाव में अपना किस्मत आजमा चुकी है. पहले ही चुनाव में जीत के बाद उन्हें हमेशा हार ही मिली है. पार्टी के पहले ही चुनाव में 12 विधायक जीते थे. यह जीत 2009 में मिली थी. अब सवाल है कि मराठी का मुद्दा एक बार फिर उठाकर राज ठाकरे को क्या बीएमसी चुनाव में जीत मिलेगी?</p> महाराष्ट्र यूपी के इन 7 जिलों में 2.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलेगा योगी सरकार की इस योजना का लाभ, प्लान तैयार
मराठी भाषा के मुद्दे पर राज ठाकरे की पार्टी आक्रामक, BMC चुनाव में MNS को मिलेगी सफलता?
