पंजाब के मोगा जिले के गांव मानूके में 37 वर्षीय महिला ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर ली। घटना का पता चलते ही मौके पर थाना निहाल सिंह वाला के एएसआई रघुवीर सिंह पंहुचे और मामले की जांच शुरू कर दी। रघुवीर सिंह ने कहा कि मृतका जसवीर कौर पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थी। उसका पति बेअंत सिंह नशे का आदी था और कोई काम-धंधा नहीं करता था। घर में लगातार आर्थिक तंगी बनी रहती थी, जिससे वह काफी परेशान रहती थी और वह 4 बच्चों की मां थी। नहीं मिला सुसाइड नोट घटनास्थल पर जांच के दौरान पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और न ही ऐसा कोई सबूत मिला है जिससे ये कहा जा सके कि उसने आत्महत्या नहीं बल्कि उसकी हत्या की गई है। पुलिस ने मृतका के पति बेअंत सिंह के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पंजाब के मोगा जिले के गांव मानूके में 37 वर्षीय महिला ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर ली। घटना का पता चलते ही मौके पर थाना निहाल सिंह वाला के एएसआई रघुवीर सिंह पंहुचे और मामले की जांच शुरू कर दी। रघुवीर सिंह ने कहा कि मृतका जसवीर कौर पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थी। उसका पति बेअंत सिंह नशे का आदी था और कोई काम-धंधा नहीं करता था। घर में लगातार आर्थिक तंगी बनी रहती थी, जिससे वह काफी परेशान रहती थी और वह 4 बच्चों की मां थी। नहीं मिला सुसाइड नोट घटनास्थल पर जांच के दौरान पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और न ही ऐसा कोई सबूत मिला है जिससे ये कहा जा सके कि उसने आत्महत्या नहीं बल्कि उसकी हत्या की गई है। पुलिस ने मृतका के पति बेअंत सिंह के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पंजाब | दैनिक भास्कर
Related Posts

पंजाब में डॉक्टरों-स्टाफ को आदेश:मरीजों और परिजनों के साथ बरतनी होगी विनम्रता, सेहत मंत्री ने फर्स्ट एड ट्रेनिंग की योजना बनाई
पंजाब में डॉक्टरों-स्टाफ को आदेश:मरीजों और परिजनों के साथ बरतनी होगी विनम्रता, सेहत मंत्री ने फर्स्ट एड ट्रेनिंग की योजना बनाई पंजाब के सरकारी अस्पतालों और संस्थानों में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों से अब डॉक्टरों व स्टाफ को विनम्रता से व्यवहार रखना होगा। ताकि संस्थानों में लोगों के विश्वास को मजबूत किया जा सकें। इसके साथ ही नर्सिंग की छात्रों को ब्लड प्रेशर, एचबी स्तर और आंखों की जांच संबंधी ट्रेनिंग दी जाएगी। उनका प्रयोग अस्पतालों में मरीजों और उनके अटेंडेंट्स की सहायता के लिए किया जाना चाहिए। यह बात पंजाब के सेहत मंत्री बलबीर सिंह ने कही है। उन्होंने यह हिदायत सभी जिलों के सिविल सर्जनों को एक प्रोग्राम में दी है। हादसों में घायलों के मददगार बनेंगे स्टूडेंट्स सेहत मंत्री ने बताया कि स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को किसी दुर्घटना या आपातकाल स्थिति में दूसरों की सहायता करने के योग्य बनाने के लिए प्राथमिक सहायता संबंधी ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं, अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिलों की सराहना करते हुए उन्होंने अन्य जिलों के अधिकारियों को अपने जिलों में स्वास्थ्य और प्रशासनिक ढांचे का स्तर ऊंचा करने के लिए प्रेरित किया।पीएचएससी के चेयरमैन रमन बहल ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की देखभाल और सफाई पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। दवाइयों की कमी नहीं होनी चाहिए इसके साथ ही सेहत मंत्री ने कहा कि सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिए हैं कि वे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जरूरी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करें ताकि इलाज के लिए आने वाले लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

कर्नल मामले में देरी से FIR पर हाईकोर्ट खफा:पूछा- जांच सीबीआई को क्यों ना दें; पंजाब सरकार से दो दिन में जवाब मांगा
कर्नल मामले में देरी से FIR पर हाईकोर्ट खफा:पूछा- जांच सीबीआई को क्यों ना दें; पंजाब सरकार से दो दिन में जवाब मांगा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सेना अधिकारी कर्नल पुष्पिंदर बाठ पर कथित रूप से हमला करने वाले पंजाब पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने में हुई देरी पर पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। अगली सुनवाई 28 मार्च को होगी। जस्टिस संदीप मौदगिल ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि “वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं” और राज्य सरकार व CBI को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए पूछा कि “किन अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया? FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई, जबकि पीड़ित (सेना अधिकारी) और उनके बेटे की मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड में मौजूद थी?” हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से कई अहम सवाल पूछे हैं: CBI जांच की मांग कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ ने इस मामले की जांच पंजाब पुलिस से हटाकर किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मांग की है। उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस की जांच में निष्पक्षता नहीं है, देरी हुई है और इसमें हितों का टकराव भी है। कर्नल बाठ के परिवार को न्याय के लिए पंजाब के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राज्यपाल तक पहुंचना पड़ा, जिसके बाद घटना के 8 दिन बाद एक उचित FIR दर्ज की गई। राज्य सरकार को 2 दिन का समय कोर्ट ने पंजाब सरकार को दो दिन का समय देते हुए यह स्पष्ट करने को कहा है कि जांच को CBI को सौंपने की याचिका को क्यों खारिज नहीं किया जाना चाहिए। यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और सरकारी अधिकारियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जाने क्या है मामला दिल्ली में सेना मुख्यालय में तैनात कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ ने आरोप लगाया है कि 13 मार्च की रात पंजाब पुलिस के चार इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों और उनके सशस्त्र सहयोगियों ने बिना किसी उकसावे के उन पर और उनके बेटे पर हमला किया। पीड़ित अधिकारी का कहना है कि घटना के बावजूद स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। वरिष्ठ अधिकारियों को की गई फोन कॉल्स को नजरअंदाज कर दिया गया, और FIR दर्ज करने के बजाय “अज्ञात व्यक्तियों के बीच झगड़े” की एक फर्जी FIR किसी तीसरे व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज कर दी गई।

अंबाला की गुरसिख युवती नहीं दे पाई परीक्षा:कृपाण पहनने के चलते नहीं मिला प्रवेश, SGPC ने जताया विरोध; राजस्थान के विधायक ने उठाया मुद्दा
अंबाला की गुरसिख युवती नहीं दे पाई परीक्षा:कृपाण पहनने के चलते नहीं मिला प्रवेश, SGPC ने जताया विरोध; राजस्थान के विधायक ने उठाया मुद्दा राजस्थान में एक गुरसिख लड़की लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित न्यायिक परीक्षा में इसलिए शामिल नहीं हो पाई, क्योंकि उसने कक्कड़ कृपाण पहन रखी थी। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा गुरसिख लड़की से कृपाण उतारने को कहने और उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से रोकने का विरोध किया है। वहीं, अब राजस्थान के सिख विधायक भी हरकत में आए हैं। सुखबीर बादल ने जिस गुरसिख लड़की का मामला उठाया है, वह अंबाला कैंट की रहने वाली है। लड़की का नाम लखविंदर कौर है और वह रूप नगर स्थित रियात कॉलेज ऑफ लॉ में असिस्टेंट प्रोफेसर है। लखविंदर कौर ने बताया कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से पीएचडी कर रही है और यह उसका अंतिम वर्ष है। वह साथ ही न्यायपालिका परीक्षा की तैयारी भी कर रही थी। बीते सप्ताह 23 जून को उसकी राजस्थान ज्यूडीशियरी परीक्षा थी। जिसका केंद्र जोधुपर में बना था। वे तय समय पर संबंधित सेंटर में पहुंच गई थी। जब वे परीक्षा केंद्र में जाने के लिए लाइन में लगी तो उन्हें कड़ा व कृपाण उतारने के लिए कहा गया। प्रधान धामी का आरोप- जानबूझ कर सरकार अनजान बनी हुई है शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इसे बेहद दर्दनाक और अन्याय बताया है। सरकार ने सिविल जज न्यायिक परीक्षा में कई अमृतधारी सिख उम्मीदवारों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। जालंधर की रहने वाली सिख उम्मीदवार अरमानजोत कौर के मामले के बाद, अब अंबाला छावनी की सिख उम्मीदवार लखविंदर कौर के मामले में परीक्षा केंद्र में ककार (सिखों की आस्था के प्रतीक), किरपान और कड़ा को हटाने के लिए मजबूर किया गया है। जोधपुर में परीक्षा ने एक बार फिर राजस्थान में दीक्षित सिखों के साथ भेदभाव को उजागर किया है। एडवोकेट धामी ने कहा कि इन कृत्यों से सिख भावनाओं को ठेस पहुंची है, जिसके लिए राजस्थान सरकार की जिम्मेदारी है कि वह दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, लेकिन दुख की बात है कि सिख समुदाय की लगातार आपत्ति के बाद भी सरकार अनजान बनी हुई है और इसे पूरा नहीं कर रही है। 5 ककारों के बारे में भी दी जानकारी लखविंदर कौर ने बताया कि उन्होंने सीनियर अधिकारियों को 5 ककारों के बारे में बताया, लेकिन उन्हें केंद्र में बैठने से रोक दिया गया। जब उनसे नियमों के बारे में पूछा गया तो वे इंस्ट्रक्शन लिस्ट लाए। जिसमें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, ज्वेलरी etc. के बारे में लिखा था। etc. शब्द में उन्होंने कृपाण व कड़ा को भी जोड़ दिया। जब उन्हें समझाया कि आर्टिकल 25 में संवैधानिक अधिकार दिया गया है। इसके बावजूद उन्होंने उसे परीक्षा केंद्र में बैठने से मना कर दिया। भविष्य के लिए इस मुद्दे को उठाना जरूरी लखविंदर कौर ने बताया कि भविष्य के लिए इस मुद्दे को उठाना बहुत जरूरी है। जो उनके साथ हुआ है, आने वाले समय में अन्य के साथ ना हो, इसलिए इसका हल निकालना जरूरी है। इस परीक्षा से पहले वे अन्य राज्यों में और राजस्थान में भी पहले परीक्षा दे चुकी है। लेकिन, इस बार ही उन्हें परीक्षा देने से रोक दिया गया। सुखबीर ने इस घटना पर जताया विरोध इस घटना के बाद अकाली दल अध्यक्ष ने विरोध जताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा- यह वास्तव में चौंकाने वाला है कि एक अन्य अमृतधारी महिला वकील- बीबी लखविंदर कौर को 23 जून को राजस्थान न्यायपालिका परीक्षा के एक केंद्र में प्रवेश करने से मना कर दिया गया क्योंकि उन्होंने सिख धर्म की धार्मिक वस्तुएं पहन रखी थीं। इससे पहले बीबी अरमानजोत कौर को परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया था। यह बहुत दुखद है कि लखविंदर कौर को परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले अपना ‘कड़ा’ और ‘कृपाण’ उतारने के लिए मजबूर किया गया। राजस्थान सरकार द्वारा जिस तरह से अपनी आस्था का पालन करने के मौलिक अधिकार का हनन किया जा रहा है, वह निंदनीय है। सिख समुदाय के खिलाफ इस अपमान पर प्रतिक्रिया देने और दोषी परीक्षा कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल की देरी ने पूरे समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। सिखों को अपने ही देश में दोयम दर्जे के नागरिक जैसा महसूस नहीं कराया जाना चाहिए, जिसके लिए उन्होंने सबसे अधिक बलिदान दिया है। इससे पहले भी आया था एक मामला इससे पहले भी गुरसिख लड़की वकील अरमानजोत कौर को कृपाण सहित न्यायिक परीक्षा देने से रोक दिया गया था। जिस पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के विरोध जताया था। एडवोकेट धामी ने कहा था कि भारत के संविधान के अनुसार सिखों को कृपाण धारण करने का पूरा अधिकार है और सिख रहत मर्यादा के अनुसार कोई भी अमृतधारी सिख पांच सिख ककारों को अपने शरीर से अलग नहीं कर सकता है।