यूपी में पहली बार डिजिटल हाईवे बनाने की तैयारी है। यह हाईवे बाराबंकी से बहराइच तक बनेगा। 101 किमी दूरी वाली ये रोड अभी टू-लेन की है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ऑफ इंडिया (NHAI) तीन हजार करोड़ की लागत से इसे फोर-लेन बनाने जा रहा है। 2028 में इस डिजिटल हाईवे पर गाड़ियां दौड़ने लगेंगी। दूसरे चरण में इस फोरलेन को नेपाल बॉर्डर के रुपईडीहा तक बनाने की योजना है। इससे नेपाल और लखनऊ की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। बाराबंकी-बहराइच हाईवे को क्यों डिजिटल हाईवे कहा जा रहा है? इसमें और दूसरे हाईवे में क्या अंतर होगा? कब से इसका निर्माण शुरू होगा? इसके पूरा होने पर आम लोगों को क्या फायदा होगा? पढ़िए रिपोर्ट… बाराबंकी-बहराइच मार्ग पर प्रतिदिन 25 हजार से अधिक ट्रैफिक
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया के मुताबिक, अब देश भर में नए डिजाइन में फोर-लेन हाईवे का निर्माण हो रहा है। लखनऊ से बाराबंकी पहले ही एनएच-27 से जुड़ा है। बाराबंकी से बहराइच तक करीब 101 किमी की रोड अभी टू-लेन की है। वर्तमान में इस रोड पर ट्रैफिक बढ़ चुका है। NHAI के सर्वे के मुताबिक, रोज इस पर 25 से 30 हजार वाहनों की आवाजाही हो रही है। इसमें कार से ऊपर की श्रेणी वाले वाहन शामिल हैं। बाइक-ऑटो की अलग संख्या है। टू-लेन होने के चलते इस मार्ग पर अक्सर जाम, एक्सीडेंट होते रहते हैं। अभी 100 किमी की ये दूरी तय करने में 3 घंटे से अधिक लग जाते हैं। यह हाईवे आगे बहराइच से रुपईडीहा तक जाता है, जो नेपाल का बॉर्डर है। बहराइच से रुपईडीहा की दूरी करीब 50 किमी है। यह हाईवे अभी टू-लेन है। लेकिन, अभी इस पर ट्रैफिक का दबाव 10 से 12 हजार वाहन रोज का है। जबकि, फोरलेन के लिए 15 हजार से अधिक वाहन रोज होने चाहिए। NHAI की ओर से इसका डीपीआर फाइनल हो चुका है। अप्रैल, 2025 में इस पर निर्माण कार्य के लिए टेंडर आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसी वित्तीय वर्ष में हाईवे के लिए जरूरी जमीनों के अधिग्रहण सहित निर्माण कार्य शुरू कराने की कवायद चल रही है। लखनऊ-अयोध्या से लिंक होगा ये हाईवे
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया ने बताया कि बाराबंकी-बहराइच फोरलेन हाईवे को लखनऊ-अयोध्या नेशनल हाईवे-27 से लिंक किया जाएगा। इसके लिए बाराबंकी के चैपुला के पास फ्लाईओवर बनाकर लखनऊ-अयोध्या हाईवे को जोड़ा जाएगा। इसका सर्वे भी NHAI ने पूरा कर लिया है। इसके अलाइनमेंट एरिया से बिजली पोल और पेड़ों को हटाने की मंजूरी भी ली जा चुकी है। पहले चरण में बाराबंकी से बहराइच तक ही फोर-लेन बनेगा। दूसरे चरण में इसे रुपईडीहा तक बनाने का प्रस्ताव है। इस वित्तीय वर्ष में इस हाईवे का निर्माण तीन हिस्सों में बांट कर किया जाएगा। पहला फेज 31 किमी का बाराबंकी से रामनगर तक का होगा। दूसरा फेज रामनगर के घाघरा ब्रिज व चौकाघाट होते हुए जरवल तक होगा। 20 किमी के इस हिस्से में पुल आदि का निर्माण होना है। तीसरा फेज जरवल से आगे मुस्तफाबाद और बहराइच तक का होगा। ये 50 किमी का हिस्सा होगा। तीनों के लिए अलग-अलग टेंडर मांगे जाएंगे। हाईवे को ढाई साल में पूरा करने का टारगेट रखा गया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर हाईटेक होगा यह हाईवे
परिवहन मंत्रालय ने पिछले साल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर देश भर में 10 हजार किमी डिजिटल हाईवे बनाने की बात कही थी। इसमें यूपी की बाराबंकी से बहराइच रोड भी शामिल थी। NHAI के मुताबिक, इस हाईवे में एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू होगा। कोई भी ड्राइवर रॉन्ग साइड गाड़ी ड्राइविंग नहीं कर पाएगा। पूरा हाईवे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से लैस सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगा। किसी तरह का एक्सीडेंट या अन्य गड़बड़ी, सब कुछ स्क्रीन में पॉप-अप हो जाएगी। इसके लिए कंट्रोल रूम भी टोल प्लाजा पर बनाया जाएगा। सभी स्ट्रक्चर वाले निर्माण के एरिया में सेंसर आधारित लाइट की व्यवस्था होगी। वाहन के गुजरते ही ये जल उठेंगी और फिर बंद हो जाएंगी। इस हाईवे की ये होगी खासियत डिजिटल कनेक्टिविटी: हाईवे के किनारे ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी। इससे टेलिकॉम और इंटरनेट सेवाओं के लिए मजबूत आधार तैयार होगा। भविष्य में सड़क को बार-बार खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुरक्षा और तकनीक: 24 घंटे नेटवर्क कवरेज और एनपीआर (नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे लगाए जाएंगे। इलेक्ट्रॉनिक अलर्ट सिस्टम और आधुनिक सड़क सुरक्षा उपाय जैसे रात में पूरी रोशनी, चालकों को मोड़ों और खतरों के बारे में अलर्ट करने की व्यवस्था होगी। लखनऊ से बाराबंकी तक का हिस्सा: लखनऊ से बाराबंकी तक का मार्ग पहले से ही राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-27) का हिस्सा है। यह 4 से 6 लेन का है। इसे डिजिटल हाईवे के मानकों के अनुरूप ऑप्टिकल फाइबर और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम जोड़कर अपग्रेड किया जा सकता है। बहराइच से नेपाल बॉर्डर (रुपईडीहा) तक : बहराइच से रुपईडीहा (नेपाल बॉर्डर) तक 50 किमी का हिस्सा भी अभी टू-लेन का है। अभी इस पर वाहनों का दबाव कम है। भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने पर इसे भी फोरलेन बनाया जाएगा। डिजिटल हाईवे 8 तरह की तकनीक से जुड़ेगा
लखनऊ से नेपाल बॉर्डर तक के सफर में अभी 3-4 घंटे में तय होता है। डिजिटल हाईवे बनने पर 2 से 2.30 घंटे में पूरा हो जाएगा। साथ ही नेपाल के साथ व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। डिजिटल हाईवे की तकनीक सड़क को केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि एक स्मार्ट इकोसिस्टम बनाती है। यह कनेक्टिविटी, सुरक्षा, और दक्षता को बढ़ाकर क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान देती है। लखनऊ से बहराइच और आगे नेपाल बॉर्डर तक यह तकनीक चरणबद्ध तरीके से लागू हो सकती है। इसमें शुरुआत ऑप्टिकल फाइबर और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से होगी। भविष्य में AI और EV सपोर्ट जैसे हाईटेक फीचर्स जोड़े जाएंगे। ——————— ये खबर भी पढ़ें… क्रिकेटर मो. शमी की दीदी-जीजा मनरेगा मजदूर, अमरोहा में फर्जीवाड़ा; MBBS छात्र-वकील-इंजीनियर को भी मिल रही मजदूरी उत्तर प्रदेश के अमरोहा के एक गांव में मनरेगा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। करोड़पति ग्राम प्रधान ने अपने परिवार के सभी सदस्यों, जानने वालों और चहेतों को मजदूर बना दिया। बाकायदा इनके खाते में पैसा आया और निकाला भी गया। इनमें सबसे बड़ा नाम भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की बहन शबीना और जीजा गजनबी का है। वकील, MBBS छात्र, ठेकेदार, इंजीनियर जैसे लोगों के नाम पर भी मजदूरी के जॉब कार्ड बने हैं। उन्हें भुगतान भी किया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर यूपी में पहली बार डिजिटल हाईवे बनाने की तैयारी है। यह हाईवे बाराबंकी से बहराइच तक बनेगा। 101 किमी दूरी वाली ये रोड अभी टू-लेन की है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ऑफ इंडिया (NHAI) तीन हजार करोड़ की लागत से इसे फोर-लेन बनाने जा रहा है। 2028 में इस डिजिटल हाईवे पर गाड़ियां दौड़ने लगेंगी। दूसरे चरण में इस फोरलेन को नेपाल बॉर्डर के रुपईडीहा तक बनाने की योजना है। इससे नेपाल और लखनऊ की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। बाराबंकी-बहराइच हाईवे को क्यों डिजिटल हाईवे कहा जा रहा है? इसमें और दूसरे हाईवे में क्या अंतर होगा? कब से इसका निर्माण शुरू होगा? इसके पूरा होने पर आम लोगों को क्या फायदा होगा? पढ़िए रिपोर्ट… बाराबंकी-बहराइच मार्ग पर प्रतिदिन 25 हजार से अधिक ट्रैफिक
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया के मुताबिक, अब देश भर में नए डिजाइन में फोर-लेन हाईवे का निर्माण हो रहा है। लखनऊ से बाराबंकी पहले ही एनएच-27 से जुड़ा है। बाराबंकी से बहराइच तक करीब 101 किमी की रोड अभी टू-लेन की है। वर्तमान में इस रोड पर ट्रैफिक बढ़ चुका है। NHAI के सर्वे के मुताबिक, रोज इस पर 25 से 30 हजार वाहनों की आवाजाही हो रही है। इसमें कार से ऊपर की श्रेणी वाले वाहन शामिल हैं। बाइक-ऑटो की अलग संख्या है। टू-लेन होने के चलते इस मार्ग पर अक्सर जाम, एक्सीडेंट होते रहते हैं। अभी 100 किमी की ये दूरी तय करने में 3 घंटे से अधिक लग जाते हैं। यह हाईवे आगे बहराइच से रुपईडीहा तक जाता है, जो नेपाल का बॉर्डर है। बहराइच से रुपईडीहा की दूरी करीब 50 किमी है। यह हाईवे अभी टू-लेन है। लेकिन, अभी इस पर ट्रैफिक का दबाव 10 से 12 हजार वाहन रोज का है। जबकि, फोरलेन के लिए 15 हजार से अधिक वाहन रोज होने चाहिए। NHAI की ओर से इसका डीपीआर फाइनल हो चुका है। अप्रैल, 2025 में इस पर निर्माण कार्य के लिए टेंडर आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसी वित्तीय वर्ष में हाईवे के लिए जरूरी जमीनों के अधिग्रहण सहित निर्माण कार्य शुरू कराने की कवायद चल रही है। लखनऊ-अयोध्या से लिंक होगा ये हाईवे
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया ने बताया कि बाराबंकी-बहराइच फोरलेन हाईवे को लखनऊ-अयोध्या नेशनल हाईवे-27 से लिंक किया जाएगा। इसके लिए बाराबंकी के चैपुला के पास फ्लाईओवर बनाकर लखनऊ-अयोध्या हाईवे को जोड़ा जाएगा। इसका सर्वे भी NHAI ने पूरा कर लिया है। इसके अलाइनमेंट एरिया से बिजली पोल और पेड़ों को हटाने की मंजूरी भी ली जा चुकी है। पहले चरण में बाराबंकी से बहराइच तक ही फोर-लेन बनेगा। दूसरे चरण में इसे रुपईडीहा तक बनाने का प्रस्ताव है। इस वित्तीय वर्ष में इस हाईवे का निर्माण तीन हिस्सों में बांट कर किया जाएगा। पहला फेज 31 किमी का बाराबंकी से रामनगर तक का होगा। दूसरा फेज रामनगर के घाघरा ब्रिज व चौकाघाट होते हुए जरवल तक होगा। 20 किमी के इस हिस्से में पुल आदि का निर्माण होना है। तीसरा फेज जरवल से आगे मुस्तफाबाद और बहराइच तक का होगा। ये 50 किमी का हिस्सा होगा। तीनों के लिए अलग-अलग टेंडर मांगे जाएंगे। हाईवे को ढाई साल में पूरा करने का टारगेट रखा गया है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर हाईटेक होगा यह हाईवे
परिवहन मंत्रालय ने पिछले साल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर देश भर में 10 हजार किमी डिजिटल हाईवे बनाने की बात कही थी। इसमें यूपी की बाराबंकी से बहराइच रोड भी शामिल थी। NHAI के मुताबिक, इस हाईवे में एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू होगा। कोई भी ड्राइवर रॉन्ग साइड गाड़ी ड्राइविंग नहीं कर पाएगा। पूरा हाईवे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से लैस सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगा। किसी तरह का एक्सीडेंट या अन्य गड़बड़ी, सब कुछ स्क्रीन में पॉप-अप हो जाएगी। इसके लिए कंट्रोल रूम भी टोल प्लाजा पर बनाया जाएगा। सभी स्ट्रक्चर वाले निर्माण के एरिया में सेंसर आधारित लाइट की व्यवस्था होगी। वाहन के गुजरते ही ये जल उठेंगी और फिर बंद हो जाएंगी। इस हाईवे की ये होगी खासियत डिजिटल कनेक्टिविटी: हाईवे के किनारे ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाएगी। इससे टेलिकॉम और इंटरनेट सेवाओं के लिए मजबूत आधार तैयार होगा। भविष्य में सड़क को बार-बार खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुरक्षा और तकनीक: 24 घंटे नेटवर्क कवरेज और एनपीआर (नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे लगाए जाएंगे। इलेक्ट्रॉनिक अलर्ट सिस्टम और आधुनिक सड़क सुरक्षा उपाय जैसे रात में पूरी रोशनी, चालकों को मोड़ों और खतरों के बारे में अलर्ट करने की व्यवस्था होगी। लखनऊ से बाराबंकी तक का हिस्सा: लखनऊ से बाराबंकी तक का मार्ग पहले से ही राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-27) का हिस्सा है। यह 4 से 6 लेन का है। इसे डिजिटल हाईवे के मानकों के अनुरूप ऑप्टिकल फाइबर और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम जोड़कर अपग्रेड किया जा सकता है। बहराइच से नेपाल बॉर्डर (रुपईडीहा) तक : बहराइच से रुपईडीहा (नेपाल बॉर्डर) तक 50 किमी का हिस्सा भी अभी टू-लेन का है। अभी इस पर वाहनों का दबाव कम है। भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने पर इसे भी फोरलेन बनाया जाएगा। डिजिटल हाईवे 8 तरह की तकनीक से जुड़ेगा
लखनऊ से नेपाल बॉर्डर तक के सफर में अभी 3-4 घंटे में तय होता है। डिजिटल हाईवे बनने पर 2 से 2.30 घंटे में पूरा हो जाएगा। साथ ही नेपाल के साथ व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। डिजिटल हाईवे की तकनीक सड़क को केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि एक स्मार्ट इकोसिस्टम बनाती है। यह कनेक्टिविटी, सुरक्षा, और दक्षता को बढ़ाकर क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान देती है। लखनऊ से बहराइच और आगे नेपाल बॉर्डर तक यह तकनीक चरणबद्ध तरीके से लागू हो सकती है। इसमें शुरुआत ऑप्टिकल फाइबर और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से होगी। भविष्य में AI और EV सपोर्ट जैसे हाईटेक फीचर्स जोड़े जाएंगे। ——————— ये खबर भी पढ़ें… क्रिकेटर मो. शमी की दीदी-जीजा मनरेगा मजदूर, अमरोहा में फर्जीवाड़ा; MBBS छात्र-वकील-इंजीनियर को भी मिल रही मजदूरी उत्तर प्रदेश के अमरोहा के एक गांव में मनरेगा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। करोड़पति ग्राम प्रधान ने अपने परिवार के सभी सदस्यों, जानने वालों और चहेतों को मजदूर बना दिया। बाकायदा इनके खाते में पैसा आया और निकाला भी गया। इनमें सबसे बड़ा नाम भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की बहन शबीना और जीजा गजनबी का है। वकील, MBBS छात्र, ठेकेदार, इंजीनियर जैसे लोगों के नाम पर भी मजदूरी के जॉब कार्ड बने हैं। उन्हें भुगतान भी किया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर
यूपी का पहला डिजिटल हाईवे कैसा होगा:3 हजार करोड़ में बाराबंकी-बहराइच के बीच बनेगा; नेपाल तक जोड़ेगा
