यूपी में पिछले साल से ज्यादा गर्मी पड़ेगी:49 डिग्री जा सकता है तापमान, 2024 में पोस्टमॉर्टम हाउस और श्मशान शवों से पट गए थे

यूपी में पिछले साल से ज्यादा गर्मी पड़ेगी:49 डिग्री जा सकता है तापमान, 2024 में पोस्टमॉर्टम हाउस और श्मशान शवों से पट गए थे

मार्च महीने में यूपी में औसत अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहना चाहिए। लेकिन, इस बार यह 35 डिग्री को पार कर गया है। मौसम विभाग की मानें तो अप्रैल, मई और जून में भी अधिकतम और न्यूनतम दोनों ही तापमान सामान्य से ज्यादा रहने वाले हैं। जून में अधिकतम तापमान 49 डिग्री तक जाने का अनुमान है। जबकि 2024 में यह 47 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था, जो रेड अलर्ट था। इस स्थिति में श्मशान घाट से लेकर पोस्टमॉर्टम तक हाउसफुल हो गए थे। आने वाले महीनों में अधिकतम तापमान कितना जाएगा? पिछले कुछ सालों में कैसे यहां गर्मियों का ट्रेंड बदला? हीट वेव के दिन कितने बढ़े हैं और इसका क्या असर रहा? इन सभी सवालों के जवाब इस रिपोर्ट में पढ़िए… मार्च के आखिर तक तापमान 40 से ऊपर जाएगा
मार्च की शुरुआत में ही मौसम विभाग ने चेतावनी जारी कर बता दिया कि इस बार सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने वाली है। पूरा मार्च महीना भी पिछले सालों की अपेक्षा गर्म रहने वाला है। जैसे-जैसे दिन गुजर रहे हैं, मौसम विभाग की यह चेतावनी सही साबित हो रही है। मौसम विभाग ने यह भी अनुमान लगाया था कि मार्च के आखिर तक कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाएगा। इसमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है। वहीं, मौसम विभाग के मुताबिक मार्च महीने में राज्य में औसत अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहना चाहिए। जून में 49 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाएगा तापमान
मौसम वैज्ञानिक वेद प्रकाश सिंह बताते हैं- मई-जून में उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में अधिकतम तापमान 49 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। वहीं, मार्च के आखिर तक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाएगा। अप्रैल में यह बढ़कर 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने का अनुमान है। इस बीच मार्च से ही हीट वेव चलने का भी अनुमान है। यह मार्च से लेकर मई तक एक महीने में 8 से 10 दिन हो सकता है। 1982 से अधिकतम तापमान तेजी से बढ़ रहा
उत्तर प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट की 2024 की एक रिपोर्ट बताती है कि 1982 से 2023 के बीच यहां गर्मियों के तापमान में तेजी से वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए 1981 में लखनऊ में जून महीने में औसत अधिकतम तापमान 44.94 डिग्री सेल्सियस था। 2023 में 1.42 डिग्री सेल्सियस बढ़कर 46.36 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यही ट्रेंड राज्य के सभी प्रमुख शहरों का है। मई की बात करें, तो इस बीच नोएडा का तापमान औसत सबसे ज्यादा 3.07 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। 1982 मई में यहां का अधिकतम औसत तापमान 41.98 डिग्री सेल्सियस था। 2023 में यह 45.05 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सहारनपुर, अमरोहा, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ और सीतापुर का औसत अधिकतम तापमान इस दौरान सबसे ज्यादा बढ़ा है। पिछले 1 से 17 जून के बीच 20 शहरों में 414 मौतें
हीट वेव का सबसे खतरनाक चेहरा लोगों की मौतों के रूप में सामने आता है। स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे-बूढ़े और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है। हालांकि, सरकार की तरफ से मौत की वजह हीट वेव को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया जाता। ऐसे में, 2024 की गर्मियों में दैनिक भास्कर ने राज्य के 20 शहरों में हीट वेव की वजह से होने वाली मौतों को लेकर पड़ताल की थी। गर्मी के चरम पर 1 से 17 जून के मौत के आंकड़ों और पोस्टमॉर्टम हाउस लाई जाने वाली लाशों की तुलना 1 से 17 मार्च तक के आंकड़ों से की थी। तब इन जगहों पर एक दिन में सामान्य से 4 गुना ज्यादा लावारिस लाशें मिली थीं। पोस्टमॉर्टम हाउस में भी डेढ़ गुना से ज्यादा शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ। जहां 1 से 17 मार्च के बीच इन शहरों में 92 लावारिस लाशें मिलीं, वहीं 1 से 17 जून के बीच यह संख्या 414 रही। उत्तर प्रदेश हीट वेव से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य
2022 की उत्तर प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, हीट वेव का सबसे बुरा असर उत्तर प्रदेश पर पड़ता है। इसके कई असर होते हैं… स्वास्थ्य : देश भर में कामकाजी लोगों में कुल 19.3% लोग उत्तर प्रदेश से हैं। यह किसी भी राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा है। राज्य के इन कामकाजी लोगों में भी सबसे ज्यादा 55% लोग खेती का काम करते हैं। मतलब, सीधे धूप और गर्मी में काम करना पड़ता है। ये लोग हीट वेव से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। यह सीधा उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। उन्हें हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में हीट वेव खतरनाक रूप ले लेता है। स्वास्थ्य के साथ ही यह राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाता है। अर्थव्यवस्था : इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2001 से 2020 के बीच हीट वेव की वजह से राज्य में औसत 50.271 बिलियन कामकाजी घंटों का नुकसान हुआ। इससे अर्थव्यवस्था को करीब 88 हजार 789 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, हीट वेव की वजह से कृषि से लेकर इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर सभी प्रभावित होते हैं। ये सीधा अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है। पानी की कमी भी इसका एक पहलू है। हीट वेव में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। इससे उद्योग-धंधे से लेकर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पटरी से उतर जाती है। कृषि : इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर की 2022 की एक स्टडी के मुताबिक, हीट वेव कृषि उत्पादों पर गहरा असर डालता है। 2022 में हीट वेव ने सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया था। गोरखपुर और गोंडा में उत्पादन 20% तक कम हुआ। झांसी में यह कमी 32 से 34% रही। वहीं मार्च महीने में अधिकतम सामान्य तापमान 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाने से आम की पैदावार भी खराब हुई। ———————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में अचानक बढ़ी गर्मी, आम का स्वाद बिगाड़ेगी, लखनऊ के मैंगो बेल्ट में 20 साल बाद आया इतना बौर, मुरझाने का खतरा यूपी में मार्च के महीने में जब तापमान 30 डिग्री होना चाहिए, वह 35 डिग्री से ऊपर चला गया है। मतलब, औसत से 5 डिग्री ज्यादा हो गया है। इसका सीधा असर आम की फसल पर भी पड़ सकता है। इस समय आम की फसल पर बौर आ चुका है। यह पिछले कई सालों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। लेकिन, बढ़ती गर्मी से किसान परेशान हैं। क्योंकि ऐसे मौसम में आम की फसल पर कीड़ों का अटैक सबसे ज्यादा होता है। पढ़ें पूरी खबर मार्च महीने में यूपी में औसत अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहना चाहिए। लेकिन, इस बार यह 35 डिग्री को पार कर गया है। मौसम विभाग की मानें तो अप्रैल, मई और जून में भी अधिकतम और न्यूनतम दोनों ही तापमान सामान्य से ज्यादा रहने वाले हैं। जून में अधिकतम तापमान 49 डिग्री तक जाने का अनुमान है। जबकि 2024 में यह 47 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था, जो रेड अलर्ट था। इस स्थिति में श्मशान घाट से लेकर पोस्टमॉर्टम तक हाउसफुल हो गए थे। आने वाले महीनों में अधिकतम तापमान कितना जाएगा? पिछले कुछ सालों में कैसे यहां गर्मियों का ट्रेंड बदला? हीट वेव के दिन कितने बढ़े हैं और इसका क्या असर रहा? इन सभी सवालों के जवाब इस रिपोर्ट में पढ़िए… मार्च के आखिर तक तापमान 40 से ऊपर जाएगा
मार्च की शुरुआत में ही मौसम विभाग ने चेतावनी जारी कर बता दिया कि इस बार सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने वाली है। पूरा मार्च महीना भी पिछले सालों की अपेक्षा गर्म रहने वाला है। जैसे-जैसे दिन गुजर रहे हैं, मौसम विभाग की यह चेतावनी सही साबित हो रही है। मौसम विभाग ने यह भी अनुमान लगाया था कि मार्च के आखिर तक कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाएगा। इसमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है। वहीं, मौसम विभाग के मुताबिक मार्च महीने में राज्य में औसत अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहना चाहिए। जून में 49 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाएगा तापमान
मौसम वैज्ञानिक वेद प्रकाश सिंह बताते हैं- मई-जून में उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में अधिकतम तापमान 49 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। वहीं, मार्च के आखिर तक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाएगा। अप्रैल में यह बढ़कर 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने का अनुमान है। इस बीच मार्च से ही हीट वेव चलने का भी अनुमान है। यह मार्च से लेकर मई तक एक महीने में 8 से 10 दिन हो सकता है। 1982 से अधिकतम तापमान तेजी से बढ़ रहा
उत्तर प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट की 2024 की एक रिपोर्ट बताती है कि 1982 से 2023 के बीच यहां गर्मियों के तापमान में तेजी से वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए 1981 में लखनऊ में जून महीने में औसत अधिकतम तापमान 44.94 डिग्री सेल्सियस था। 2023 में 1.42 डिग्री सेल्सियस बढ़कर 46.36 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यही ट्रेंड राज्य के सभी प्रमुख शहरों का है। मई की बात करें, तो इस बीच नोएडा का तापमान औसत सबसे ज्यादा 3.07 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। 1982 मई में यहां का अधिकतम औसत तापमान 41.98 डिग्री सेल्सियस था। 2023 में यह 45.05 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सहारनपुर, अमरोहा, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ और सीतापुर का औसत अधिकतम तापमान इस दौरान सबसे ज्यादा बढ़ा है। पिछले 1 से 17 जून के बीच 20 शहरों में 414 मौतें
हीट वेव का सबसे खतरनाक चेहरा लोगों की मौतों के रूप में सामने आता है। स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे-बूढ़े और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है। हालांकि, सरकार की तरफ से मौत की वजह हीट वेव को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया जाता। ऐसे में, 2024 की गर्मियों में दैनिक भास्कर ने राज्य के 20 शहरों में हीट वेव की वजह से होने वाली मौतों को लेकर पड़ताल की थी। गर्मी के चरम पर 1 से 17 जून के मौत के आंकड़ों और पोस्टमॉर्टम हाउस लाई जाने वाली लाशों की तुलना 1 से 17 मार्च तक के आंकड़ों से की थी। तब इन जगहों पर एक दिन में सामान्य से 4 गुना ज्यादा लावारिस लाशें मिली थीं। पोस्टमॉर्टम हाउस में भी डेढ़ गुना से ज्यादा शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ। जहां 1 से 17 मार्च के बीच इन शहरों में 92 लावारिस लाशें मिलीं, वहीं 1 से 17 जून के बीच यह संख्या 414 रही। उत्तर प्रदेश हीट वेव से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य
2022 की उत्तर प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, हीट वेव का सबसे बुरा असर उत्तर प्रदेश पर पड़ता है। इसके कई असर होते हैं… स्वास्थ्य : देश भर में कामकाजी लोगों में कुल 19.3% लोग उत्तर प्रदेश से हैं। यह किसी भी राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा है। राज्य के इन कामकाजी लोगों में भी सबसे ज्यादा 55% लोग खेती का काम करते हैं। मतलब, सीधे धूप और गर्मी में काम करना पड़ता है। ये लोग हीट वेव से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। यह सीधा उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। उन्हें हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में हीट वेव खतरनाक रूप ले लेता है। स्वास्थ्य के साथ ही यह राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाता है। अर्थव्यवस्था : इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2001 से 2020 के बीच हीट वेव की वजह से राज्य में औसत 50.271 बिलियन कामकाजी घंटों का नुकसान हुआ। इससे अर्थव्यवस्था को करीब 88 हजार 789 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, हीट वेव की वजह से कृषि से लेकर इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर सभी प्रभावित होते हैं। ये सीधा अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है। पानी की कमी भी इसका एक पहलू है। हीट वेव में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। इससे उद्योग-धंधे से लेकर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पटरी से उतर जाती है। कृषि : इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर की 2022 की एक स्टडी के मुताबिक, हीट वेव कृषि उत्पादों पर गहरा असर डालता है। 2022 में हीट वेव ने सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया था। गोरखपुर और गोंडा में उत्पादन 20% तक कम हुआ। झांसी में यह कमी 32 से 34% रही। वहीं मार्च महीने में अधिकतम सामान्य तापमान 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाने से आम की पैदावार भी खराब हुई। ———————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में अचानक बढ़ी गर्मी, आम का स्वाद बिगाड़ेगी, लखनऊ के मैंगो बेल्ट में 20 साल बाद आया इतना बौर, मुरझाने का खतरा यूपी में मार्च के महीने में जब तापमान 30 डिग्री होना चाहिए, वह 35 डिग्री से ऊपर चला गया है। मतलब, औसत से 5 डिग्री ज्यादा हो गया है। इसका सीधा असर आम की फसल पर भी पड़ सकता है। इस समय आम की फसल पर बौर आ चुका है। यह पिछले कई सालों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। लेकिन, बढ़ती गर्मी से किसान परेशान हैं। क्योंकि ऐसे मौसम में आम की फसल पर कीड़ों का अटैक सबसे ज्यादा होता है। पढ़ें पूरी खबर   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर