पंजाब के लुधियाना में आज जुम्मे की नमाज के बाद जामा मस्जिद फील्ड गंज चौक के बाहर केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित किए वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ पुतला फूंक रोष प्रदर्शन किया गया। रोष प्रदर्शन शाही इमाम पंजाब मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी की अगुआई में हुआ। इस दौरान मुस्लिम समुदाय ने केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। रोष प्रदर्शन के बाद पंजाब के शाही इमाम ने संबोधित किया। शाही इमाम ने कहा कि कानून में संशोधन कोई नई बात नहीं है, लेकिन अगर वह किसी विशेष समुदाय के लिए बनाया जा रहा है तो उस समुदाय की भावनाओं का ख्याल रखना सरकार की जिम्मेदारी बनती है। शाही इमाम ने कहा कि नए एक्ट में केंद्र सरकार का वक्फ बोर्ड में हर 5 साल बाद नियुक्त किए जाने वाले सदस्यों में गैर मुस्लिम सदस्यों को ले जाने का प्रावधान बिल्कुल गैर कानूनी है। लीडरशिप के कहने पर कोई कानून न बनाए केन्द्र सरकार शाही इमाम ने कहा कि वक्फ बोर्ड भारत के मुसलमान की धार्मिक संस्था है यह धर्म की संपत्तियों का संरक्षण करता है। इसको चलाने वाले इस धर्म के होने चाहिए, ताकि उन्हें धर्म की मर्यादाओं और शरीयत के पालन का ज्ञान हो। शाही इमाम ने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह देश के आम मुसलमान की भावनाओं के अनुसार संशोधन करें ना कि लीडरशिप के कहने पर कोई कानून बनाएं। मक्का और मदीना मुसलमान के सबसे बड़े वक्फ शाही इमाम ने कहा कि यह भ्रम फैलाना की दुनिया के इस्लामी देशों में वक्फ बोर्ड नहीं है बिल्कुल गलत बात है विश्व की सबसे बड़ी दो मस्जिद मक्का और मदीना मुसलमान के सबसे बड़े वक्फ है और वहां यह बात लिखकर लगाई गई कि यह वक्फ है। शाही इमाम ने कहा कि वक्फ संपति का मालिक अल्लाह है और वक्फ बोर्ड इस संपति का कस्टोडियन है, ताकि इस संपति से होने वाली आमदनी से गरीबों और धर्म का भला हो सके। दुख की बात देश के सभी वक्फ बोर्ड सही से नहीं कर रहे काम
शाही इमाम ने कहा कि दुख की बात यह है कि देश के सभी वक्फ बोर्ड अपने काम को सही से अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। शाही इमाम ने कहा कि पार्लियामेंट में वक्फ संशोधन बिल में यह तो कहा गया कि इस नए संशोधन से गरीब मुसलमान का भला होगा, लेकिन वह किस तरह होगा और वक्फ बोर्ड की तरफ से क्या स्कीमें चलाई जाएंगी। इस बारे में इस बिल में कोई भी जिक्र नहीं किया गया । उन्होंने कहा कि सत्ता और विपक्ष दोनों ही इस बिल को लेकर वोटों की राजनीति कर रहे हैं जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि वह वक्फ के इस एक्ट में किए गए संशोधन में जिन बातों पर आम मुसलमान को एतराज है उन्हें खारिज कर दिया जाए। वक्फ बिल लाने का सरकार का उद्देश्य क्या है?
8 अगस्त, 2024 को लोकसभा में दो बिल, वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) बिल, 2024 पेश किए गए। इनका मकसद वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित और वक्फ की प्रॉपर्टीज का बेहतर मैनेजमेंट करना है। वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 का मकसद वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है, ताकि वक्फ संपत्तियों के रेगुलेशन और मैनेजमेंट में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके। संशोधन विधेयक का उद्देश्य देश में वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट में सुधार करना है। इसका मकसद पिछले कानून की खामियों को दूर करना और अधिनियम का नाम बदलने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना भी है। पंजाब के लुधियाना में आज जुम्मे की नमाज के बाद जामा मस्जिद फील्ड गंज चौक के बाहर केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित किए वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ पुतला फूंक रोष प्रदर्शन किया गया। रोष प्रदर्शन शाही इमाम पंजाब मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी की अगुआई में हुआ। इस दौरान मुस्लिम समुदाय ने केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। रोष प्रदर्शन के बाद पंजाब के शाही इमाम ने संबोधित किया। शाही इमाम ने कहा कि कानून में संशोधन कोई नई बात नहीं है, लेकिन अगर वह किसी विशेष समुदाय के लिए बनाया जा रहा है तो उस समुदाय की भावनाओं का ख्याल रखना सरकार की जिम्मेदारी बनती है। शाही इमाम ने कहा कि नए एक्ट में केंद्र सरकार का वक्फ बोर्ड में हर 5 साल बाद नियुक्त किए जाने वाले सदस्यों में गैर मुस्लिम सदस्यों को ले जाने का प्रावधान बिल्कुल गैर कानूनी है। लीडरशिप के कहने पर कोई कानून न बनाए केन्द्र सरकार शाही इमाम ने कहा कि वक्फ बोर्ड भारत के मुसलमान की धार्मिक संस्था है यह धर्म की संपत्तियों का संरक्षण करता है। इसको चलाने वाले इस धर्म के होने चाहिए, ताकि उन्हें धर्म की मर्यादाओं और शरीयत के पालन का ज्ञान हो। शाही इमाम ने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह देश के आम मुसलमान की भावनाओं के अनुसार संशोधन करें ना कि लीडरशिप के कहने पर कोई कानून बनाएं। मक्का और मदीना मुसलमान के सबसे बड़े वक्फ शाही इमाम ने कहा कि यह भ्रम फैलाना की दुनिया के इस्लामी देशों में वक्फ बोर्ड नहीं है बिल्कुल गलत बात है विश्व की सबसे बड़ी दो मस्जिद मक्का और मदीना मुसलमान के सबसे बड़े वक्फ है और वहां यह बात लिखकर लगाई गई कि यह वक्फ है। शाही इमाम ने कहा कि वक्फ संपति का मालिक अल्लाह है और वक्फ बोर्ड इस संपति का कस्टोडियन है, ताकि इस संपति से होने वाली आमदनी से गरीबों और धर्म का भला हो सके। दुख की बात देश के सभी वक्फ बोर्ड सही से नहीं कर रहे काम
शाही इमाम ने कहा कि दुख की बात यह है कि देश के सभी वक्फ बोर्ड अपने काम को सही से अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। शाही इमाम ने कहा कि पार्लियामेंट में वक्फ संशोधन बिल में यह तो कहा गया कि इस नए संशोधन से गरीब मुसलमान का भला होगा, लेकिन वह किस तरह होगा और वक्फ बोर्ड की तरफ से क्या स्कीमें चलाई जाएंगी। इस बारे में इस बिल में कोई भी जिक्र नहीं किया गया । उन्होंने कहा कि सत्ता और विपक्ष दोनों ही इस बिल को लेकर वोटों की राजनीति कर रहे हैं जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि वह वक्फ के इस एक्ट में किए गए संशोधन में जिन बातों पर आम मुसलमान को एतराज है उन्हें खारिज कर दिया जाए। वक्फ बिल लाने का सरकार का उद्देश्य क्या है?
8 अगस्त, 2024 को लोकसभा में दो बिल, वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) बिल, 2024 पेश किए गए। इनका मकसद वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित और वक्फ की प्रॉपर्टीज का बेहतर मैनेजमेंट करना है। वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 का मकसद वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है, ताकि वक्फ संपत्तियों के रेगुलेशन और मैनेजमेंट में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके। संशोधन विधेयक का उद्देश्य देश में वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट में सुधार करना है। इसका मकसद पिछले कानून की खामियों को दूर करना और अधिनियम का नाम बदलने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना भी है। पंजाब | दैनिक भास्कर
