निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद ने कहा कि धनंजय सिंह और ब्रजेश सिंह किसी के लिए बाहुबली हो सकते हैं, लेकिन उनके लिए संरक्षक हैं। निषाद पार्टी को बड़ा और खड़ा करने में उनकी बड़ी भूमिका है, यदि कोई कानूनी अड़चन नहीं हुई तो वह उन्हें चुनाव लड़ने का मौका देंगे। निषाद का कहना है कि मछुआ समाज को अनुसूचित जाति में आरक्षण देने का भाजपा का पुराना वादा है, यदि वादा पूरा नहीं हुआ तो भाजपा को इसका जवाब देना होगा। संजय निषाद ने बिहार चुनाव सहित अन्य मुद्दों पर दैनिक भास्कर से विस्तार से बात की। संजय निषाद ने एक बार फिर दोहराया है कि सरकार में ऐसे अफसर बैठे हैं जो बाहर से खुद को कमल के साथ दिखाते हैं लेकिन अंदर से हाथी और साइकिल वाले हैं। ऐसे अफसरों को चिह्नित कर हटाना चाहिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल : बिहार चुनाव का आगाज हो गया है, आपकी पार्टी की क्या भूमिका रहेगी? संजय निषाद: हम लोग केंद्रीय नेतृत्व से गवर्न होते हैं। जेपी नड्डा, अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र के विकास के लिए काम करते हैं। हम 24 कैरेट के राष्ट्रवादी हैं, मुगलों को मौत के घाट उतारने वाले और भगवान राम को पार उतारने वाले लोग हैं। लोकतंत्र में जीत के माध्यम से ही समस्या का समाधान हो सकता है। निषाद समाज की समस्या तब ही दूर होगी जब लोकतंत्र में हमारी जीत होगी। बिहार में भी बहार आए, निषाद समाज को आरक्षण का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है। बिहार के 18 फीसदी निषाद एनडीए के साथ रहेंगे। सवाल: क्या अमित शाह, जेपी नड्डा आपका भी राष्ट्रीय नेतृत्व है? संजय निषाद: हमें जॉइन तो जेपी नड्डा साहब ने कराया था। हम लोग 2017, 2018 में भाजपा से अलग चुनाव लड़े थे, हम 2019 में भाजपा के साथ आए। हमें तो शीर्ष नेतृत्व जहां कहता है वहीं हम जाते हैं। जितनी भी संवैधानिक समस्याएं थीं चाहे वह राम मंदिर का मुद्दा हो या जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति हो, यह मुद्दे भाजपा ने ही सुलझाए हैं जबकि अन्य दल इन मुद्दों को उलझा रहे थे। सवाल: पिछले दिनों एक आदेश के तहत जातियों का नाम लिखने पर रोक लगाई गई थी, आपने इसका विरोध भी किया था, अब क्या कर रहे हैं? संजय निषाद: निषाद, ठाकुर, ब्राह्मण यदि जाति नहीं लिखेगा तो क्या करेगा, इन्हें जाति मानें या धर्म। अभी क्षत्रिय महासभा का सम्मेलन हुआ था तो कौनसा उन पर मुकदमा हो गया। जाति के नाम पर एक होना चाहिए। जैसे सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट कहती है कि ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण पर मिल्क मैन का कब्जा है, एससी के 22 फीसदी आरक्षण पर लैदर-मैन का कब्जा है। तो अदर मैन कहां जाएगा? यदि धोबी, पासी, वाल्मीकि एकत्रित नहीं हुआ तो क्या करेंगे? केवट, मल्लाह एकजुट नहीं होगा तो क्या करेगा। यदि हाथी और मिल्क-मैन को सभी का हिस्सा खिलाना हो तो इस तरह की रोक लगाएं। सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट कहती है कि यादव और जाटव अपनी संख्या से सौ गुना से अधिक सरकारी नौकरियों पर कब्जा किए हैं। कब्जा वापस लेने के लिए समूह में एकत्रित होना होगा, यदि कब्जा कराना हो तो जाति लिखने पर रोक लगाएं। सरकार को इसके खिलाफ अपील में जाना चाहिए, विचार करना चाहिए। सरकार को इन जातियों के साथ खड़े रहना चाहिए। सवाल: पंचायत चुनाव में निषाद समाज की क्या भूमिका रहेगी? संजय निषाद: पंचायत चुनाव बिना सिंबल का होता है, जब सदस्य जीतकर आते हैं तो ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए गठबंधन करेंगे। सदस्य का चुनाव अलग लड़ेंगे, यदि भाजपा कहेगी तो तालमेल मिलाया जाएगा। सवाल: आप कहते हैं कि सरकार में सपा के अधिकारी बैठे हैं, तो क्या आपने उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार से बात की? संजय निषाद: अभी देखिए अधिकारियों ने जाति नहीं लिखने का आदेश जारी कर दिया, अभी क्षत्रिय महासभा की बैठक हुई है यदि उन पर मुकदमा दर्ज होता तो प्रदेश का क्षत्रिय तो नाराज हो जाता। अभी जिन जातियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा क्या वह भाजपा के साथ रहेंगी, यह आदेश वही अधिकारी जारी कर रहे हैं जो सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं? जापान में एक लड़की को स्कूल ले जाने और लाने के लिए ट्रेन चलती है लेकिन यहां स्कूल बंद करा दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल चल रहा था तो उसे प्राइवेट को देते थे, अब बच्चे दस किलोमीटर स्कूल जाएंगे। यह छोटे-छोटे निर्णय काफी प्रभावित करते हैं, अधिकारी तो वोट मांगने जाते नहीं हैं, अधिकारी ऐसे निर्णय लेते हैं कि वोट खराब हो जाए। 2020 में चौरीचौरा में दो निषाद ब्लॉक का चुनाव जीते थे, दूसरे दिन प्रमाण पत्र लेने गए तो यादव अधिकारी ने उनका प्रमाण पत्र ही बदल दिया। जब जिले के निषादों ने आंदोलन किया तो वह एसडीएम जेल गया था, जब उससे पूछा गया तो उसने कहा कि सरकार आएगी तो वापस बहाल हो जाएंगे, हमारा काम ही यह है। सोचिए कि यदि इस सोच के लोग तहसील, कचहरी और थाना में रहेंगे तो क्या होगा? अंदर से हाथी-साइकिल है बाहर से कमल है, लेकिन जब वह नुकसान करते हैं तो पता चलता है। सीएम योगी समय-समय पर ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी करते हैं। ऐसे अफसरों को चिह्नित कर हटाना जाहिए। सवाल: आप बीजेपी के नेताओं की बयानबाजी से नाराज थे, क्या कुछ सुधार आया है अब? संजय निषाद: अभी बहुत कुछ सुधार हुआ है। कुछ आयातित नेता हैं, उनका काम ही है कि सत्ता में साथ आना और मलाई खाना। जो नेता सपा के साथ रहा हो तब निषादों का आरक्षण छीन लिया, बहनजी ने जमीन छीन ली थी। अब वही लोग भाजपा को गुमराह कर रहे हैं कि झउआ भर वोट हैं, पौव्वा पीएगा और वोट दिलाएगा। 2019 और 2022 में निषाद ने भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई है। निषाद नेता आरक्षण पर क्यों नहीं बोलते हैं। आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा 45 सीट हार गई, हम भाजपा के सहयोगी हैं इसलिए यह हमारी भी हार है। हमने निषाद का महत्व बढ़ाया है, निषाद पार्टी के कारण उनकी पूछ हो रही है। भाजपा को अपने कैडर लीडर को आगे बढ़ाना चाहिए जो संघ से आया हो। दूसरे दल से आए हैं उन्हें अवसर नहीं दें। सवाल: आपका 2019 से बीजेपी से गठबंधन है, आपकी मांगों को कितना पूरा किया गया जिनके लिए आपने निषाद समाज से बीजेपी को वोट देने की अपील की थी? संजय निषाद: यह भाजपा का खुद का मुद्दा है। मछुआ विजन 2014 में बनाया था। योगी जी खुद आवाज उठाते रहे हैं कि निषाद को एससी में आरक्षण मिलना चाहिए। आज जब भाजपा खुद सरकार में है, मैं तो वकील हूं अपनी मांग करूंगा। जवाब तो भाजपा को देना होगा। पहली बार है कि सीएम योगी ने आरजीआई को पत्र लिखा है। आरजीआई ने कह दिया है कि केवल, मल्लाह, माझी को एससी में आरक्षण दिया। सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय इसका नोडल विभाग है, भाजपा को इसे हल करना चाहिए। हमारा कहना है कि ओबीसी से हमारा नाम खारिज करो और अनुसूचित में जोड़ने का आदेश जारी करो। राज्यपाल और राष्ट्रपति ने भी आदेश दिया है, इसका पालन करना चाहिए। इससे 2027 की जीत आसान हो जाएगी। सवाल: बाहुबली धनंजय सिंह और ब्रजेश सिंह आपके संपर्क में हैं, क्या आपकी पार्टी उन्हें टिकट देगी? संजय निषाद: कांग्रेस, सपा का कितना आतंक था कि वह किसी दूसरे दल को खड़ा नहीं होने देते थे। हमारे लोगों पर मुकदमा दर्ज किया जाता था। यह लोग आपके लिए बाहुबली हो सकते हैं, लेकिन यह लोग उस समय हमारे संरक्षक रहे हैं, हमारी पार्टी को खड़ा-बड़ा करने में उनकी भूमिका है। हमारे समाज को संरक्षण दिया था। यदि उन लोगों ने साथ दिया है कि वह हमारे मित्र हैं। यदि न्यायालय रोकेगा तो रुक जाएंगे, लेकिन लोकतंत्र में मिलना-जुलना जारी रहना चाहिए। वह लोग सरकार के साथ हैं, हम भी सरकार के साथ हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… महिला बोली- कामदगिरि की परिक्रमा से दूर हुई गरीबी:जो मांगते हैं, मिलता है; दिवाली तक चित्रकूट 40 लाख श्रद्धालु आएंगे ‘हम पिछले 16 साल से रोज कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं। यह हमारी आस्था का प्रतीक है। यहां आने के बाद हम एक विशेष ऊर्जा से भर जाते हैं। हम सामाजिक और जनहित में जो भी काम करते हैं। ऐसा लगता है कि उसमें हमें यहां की ईश्वरीय शक्ति सहयोग करती है। आगे हमेशा ऐसे ही करते रहेंगे।’ ये कहना है श्रद्धालु अक्षांश पंडित का। अक्षांश की ही तरह ही हजारों लोग चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं। दीपावली तक इस परिक्रमा में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 40 लाख तक पहुंच जाती है। पढ़ें पूरी खबर निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद ने कहा कि धनंजय सिंह और ब्रजेश सिंह किसी के लिए बाहुबली हो सकते हैं, लेकिन उनके लिए संरक्षक हैं। निषाद पार्टी को बड़ा और खड़ा करने में उनकी बड़ी भूमिका है, यदि कोई कानूनी अड़चन नहीं हुई तो वह उन्हें चुनाव लड़ने का मौका देंगे। निषाद का कहना है कि मछुआ समाज को अनुसूचित जाति में आरक्षण देने का भाजपा का पुराना वादा है, यदि वादा पूरा नहीं हुआ तो भाजपा को इसका जवाब देना होगा। संजय निषाद ने बिहार चुनाव सहित अन्य मुद्दों पर दैनिक भास्कर से विस्तार से बात की। संजय निषाद ने एक बार फिर दोहराया है कि सरकार में ऐसे अफसर बैठे हैं जो बाहर से खुद को कमल के साथ दिखाते हैं लेकिन अंदर से हाथी और साइकिल वाले हैं। ऐसे अफसरों को चिह्नित कर हटाना चाहिए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल : बिहार चुनाव का आगाज हो गया है, आपकी पार्टी की क्या भूमिका रहेगी? संजय निषाद: हम लोग केंद्रीय नेतृत्व से गवर्न होते हैं। जेपी नड्डा, अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र के विकास के लिए काम करते हैं। हम 24 कैरेट के राष्ट्रवादी हैं, मुगलों को मौत के घाट उतारने वाले और भगवान राम को पार उतारने वाले लोग हैं। लोकतंत्र में जीत के माध्यम से ही समस्या का समाधान हो सकता है। निषाद समाज की समस्या तब ही दूर होगी जब लोकतंत्र में हमारी जीत होगी। बिहार में भी बहार आए, निषाद समाज को आरक्षण का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है। बिहार के 18 फीसदी निषाद एनडीए के साथ रहेंगे। सवाल: क्या अमित शाह, जेपी नड्डा आपका भी राष्ट्रीय नेतृत्व है? संजय निषाद: हमें जॉइन तो जेपी नड्डा साहब ने कराया था। हम लोग 2017, 2018 में भाजपा से अलग चुनाव लड़े थे, हम 2019 में भाजपा के साथ आए। हमें तो शीर्ष नेतृत्व जहां कहता है वहीं हम जाते हैं। जितनी भी संवैधानिक समस्याएं थीं चाहे वह राम मंदिर का मुद्दा हो या जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति हो, यह मुद्दे भाजपा ने ही सुलझाए हैं जबकि अन्य दल इन मुद्दों को उलझा रहे थे। सवाल: पिछले दिनों एक आदेश के तहत जातियों का नाम लिखने पर रोक लगाई गई थी, आपने इसका विरोध भी किया था, अब क्या कर रहे हैं? संजय निषाद: निषाद, ठाकुर, ब्राह्मण यदि जाति नहीं लिखेगा तो क्या करेगा, इन्हें जाति मानें या धर्म। अभी क्षत्रिय महासभा का सम्मेलन हुआ था तो कौनसा उन पर मुकदमा हो गया। जाति के नाम पर एक होना चाहिए। जैसे सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट कहती है कि ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण पर मिल्क मैन का कब्जा है, एससी के 22 फीसदी आरक्षण पर लैदर-मैन का कब्जा है। तो अदर मैन कहां जाएगा? यदि धोबी, पासी, वाल्मीकि एकत्रित नहीं हुआ तो क्या करेंगे? केवट, मल्लाह एकजुट नहीं होगा तो क्या करेगा। यदि हाथी और मिल्क-मैन को सभी का हिस्सा खिलाना हो तो इस तरह की रोक लगाएं। सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट कहती है कि यादव और जाटव अपनी संख्या से सौ गुना से अधिक सरकारी नौकरियों पर कब्जा किए हैं। कब्जा वापस लेने के लिए समूह में एकत्रित होना होगा, यदि कब्जा कराना हो तो जाति लिखने पर रोक लगाएं। सरकार को इसके खिलाफ अपील में जाना चाहिए, विचार करना चाहिए। सरकार को इन जातियों के साथ खड़े रहना चाहिए। सवाल: पंचायत चुनाव में निषाद समाज की क्या भूमिका रहेगी? संजय निषाद: पंचायत चुनाव बिना सिंबल का होता है, जब सदस्य जीतकर आते हैं तो ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए गठबंधन करेंगे। सदस्य का चुनाव अलग लड़ेंगे, यदि भाजपा कहेगी तो तालमेल मिलाया जाएगा। सवाल: आप कहते हैं कि सरकार में सपा के अधिकारी बैठे हैं, तो क्या आपने उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार से बात की? संजय निषाद: अभी देखिए अधिकारियों ने जाति नहीं लिखने का आदेश जारी कर दिया, अभी क्षत्रिय महासभा की बैठक हुई है यदि उन पर मुकदमा दर्ज होता तो प्रदेश का क्षत्रिय तो नाराज हो जाता। अभी जिन जातियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा क्या वह भाजपा के साथ रहेंगी, यह आदेश वही अधिकारी जारी कर रहे हैं जो सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं? जापान में एक लड़की को स्कूल ले जाने और लाने के लिए ट्रेन चलती है लेकिन यहां स्कूल बंद करा दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल चल रहा था तो उसे प्राइवेट को देते थे, अब बच्चे दस किलोमीटर स्कूल जाएंगे। यह छोटे-छोटे निर्णय काफी प्रभावित करते हैं, अधिकारी तो वोट मांगने जाते नहीं हैं, अधिकारी ऐसे निर्णय लेते हैं कि वोट खराब हो जाए। 2020 में चौरीचौरा में दो निषाद ब्लॉक का चुनाव जीते थे, दूसरे दिन प्रमाण पत्र लेने गए तो यादव अधिकारी ने उनका प्रमाण पत्र ही बदल दिया। जब जिले के निषादों ने आंदोलन किया तो वह एसडीएम जेल गया था, जब उससे पूछा गया तो उसने कहा कि सरकार आएगी तो वापस बहाल हो जाएंगे, हमारा काम ही यह है। सोचिए कि यदि इस सोच के लोग तहसील, कचहरी और थाना में रहेंगे तो क्या होगा? अंदर से हाथी-साइकिल है बाहर से कमल है, लेकिन जब वह नुकसान करते हैं तो पता चलता है। सीएम योगी समय-समय पर ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी करते हैं। ऐसे अफसरों को चिह्नित कर हटाना जाहिए। सवाल: आप बीजेपी के नेताओं की बयानबाजी से नाराज थे, क्या कुछ सुधार आया है अब? संजय निषाद: अभी बहुत कुछ सुधार हुआ है। कुछ आयातित नेता हैं, उनका काम ही है कि सत्ता में साथ आना और मलाई खाना। जो नेता सपा के साथ रहा हो तब निषादों का आरक्षण छीन लिया, बहनजी ने जमीन छीन ली थी। अब वही लोग भाजपा को गुमराह कर रहे हैं कि झउआ भर वोट हैं, पौव्वा पीएगा और वोट दिलाएगा। 2019 और 2022 में निषाद ने भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाई है। निषाद नेता आरक्षण पर क्यों नहीं बोलते हैं। आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा 45 सीट हार गई, हम भाजपा के सहयोगी हैं इसलिए यह हमारी भी हार है। हमने निषाद का महत्व बढ़ाया है, निषाद पार्टी के कारण उनकी पूछ हो रही है। भाजपा को अपने कैडर लीडर को आगे बढ़ाना चाहिए जो संघ से आया हो। दूसरे दल से आए हैं उन्हें अवसर नहीं दें। सवाल: आपका 2019 से बीजेपी से गठबंधन है, आपकी मांगों को कितना पूरा किया गया जिनके लिए आपने निषाद समाज से बीजेपी को वोट देने की अपील की थी? संजय निषाद: यह भाजपा का खुद का मुद्दा है। मछुआ विजन 2014 में बनाया था। योगी जी खुद आवाज उठाते रहे हैं कि निषाद को एससी में आरक्षण मिलना चाहिए। आज जब भाजपा खुद सरकार में है, मैं तो वकील हूं अपनी मांग करूंगा। जवाब तो भाजपा को देना होगा। पहली बार है कि सीएम योगी ने आरजीआई को पत्र लिखा है। आरजीआई ने कह दिया है कि केवल, मल्लाह, माझी को एससी में आरक्षण दिया। सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय इसका नोडल विभाग है, भाजपा को इसे हल करना चाहिए। हमारा कहना है कि ओबीसी से हमारा नाम खारिज करो और अनुसूचित में जोड़ने का आदेश जारी करो। राज्यपाल और राष्ट्रपति ने भी आदेश दिया है, इसका पालन करना चाहिए। इससे 2027 की जीत आसान हो जाएगी। सवाल: बाहुबली धनंजय सिंह और ब्रजेश सिंह आपके संपर्क में हैं, क्या आपकी पार्टी उन्हें टिकट देगी? संजय निषाद: कांग्रेस, सपा का कितना आतंक था कि वह किसी दूसरे दल को खड़ा नहीं होने देते थे। हमारे लोगों पर मुकदमा दर्ज किया जाता था। यह लोग आपके लिए बाहुबली हो सकते हैं, लेकिन यह लोग उस समय हमारे संरक्षक रहे हैं, हमारी पार्टी को खड़ा-बड़ा करने में उनकी भूमिका है। हमारे समाज को संरक्षण दिया था। यदि उन लोगों ने साथ दिया है कि वह हमारे मित्र हैं। यदि न्यायालय रोकेगा तो रुक जाएंगे, लेकिन लोकतंत्र में मिलना-जुलना जारी रहना चाहिए। वह लोग सरकार के साथ हैं, हम भी सरकार के साथ हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… महिला बोली- कामदगिरि की परिक्रमा से दूर हुई गरीबी:जो मांगते हैं, मिलता है; दिवाली तक चित्रकूट 40 लाख श्रद्धालु आएंगे ‘हम पिछले 16 साल से रोज कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं। यह हमारी आस्था का प्रतीक है। यहां आने के बाद हम एक विशेष ऊर्जा से भर जाते हैं। हम सामाजिक और जनहित में जो भी काम करते हैं। ऐसा लगता है कि उसमें हमें यहां की ईश्वरीय शक्ति सहयोग करती है। आगे हमेशा ऐसे ही करते रहेंगे।’ ये कहना है श्रद्धालु अक्षांश पंडित का। अक्षांश की ही तरह ही हजारों लोग चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं। दीपावली तक इस परिक्रमा में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 40 लाख तक पहुंच जाती है। पढ़ें पूरी खबर उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर
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‘दूसरे धर्म की पूजा-पाठ में शामिल होना भाईचारा नहीं बल्कि ईमान की कमजोरी’, मौलाना इस्हाक गोरा का बयान
‘दूसरे धर्म की पूजा-पाठ में शामिल होना भाईचारा नहीं बल्कि ईमान की कमजोरी’, मौलाना इस्हाक गोरा का बयान <p style=”text-align: justify;”>देवबंद के प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और जमीयत दावातुल मुसलिमीन के संरक्षक मौलाना क़ारी इस्हाक़ गोरा का एक नया वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. इस वीडियो में मौलाना ने साफ़ शब्दों में कहा है कि “दूसरे धर्म की पूजा या धार्मिक रस्मों में शामिल होना भाईचारे की निशानी नहीं, बल्कि यह ईमान की कमजोरी और नफ़ाक़ (मुनाफ़िक़त) की पहचान है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>मौलाना इस्हाक़ गोरा ने कहा कि आज के समय में कुछ लोग यह मान बैठे हैं कि अगर कोई व्यक्ति दूसरे धर्म के पूजा-पाठ या त्योहार में हिस्सा लेता है, तो वह “सच्चा भाईचारा” दिखा रहा है. लेकिन ऐसा करना न तो इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार सही है और न ही शरीअत की नज़र में जायज़. उन्होंने कहा कि असली भाईचारा यह नहीं कि किसी को खुश करने के लिए अपने धर्म की सीमाएं तोड़ दी जाएँ, बल्कि यह है कि इंसान दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करे, किसी को तकलीफ़ न दे और समाज में इंसाफ़ कायम रखे.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”><strong>दूसरों की इज्जत सिखाता है धर्म </strong></h3>
<p style=”text-align: justify;”>उन्होंने आगे कहा धर्म हमें सिखाता है कि हम दूसरों की इज़्ज़त करें लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम उनके धार्मिक तौर-तरीक़ों को अपनाएँ या उनकी पूजा में शरीक हों. जब दिल में कुछ और हो और ज़ाहिर में कुछ और किया जाए, तो यह सच्चा भाईचारा नहीं बल्कि मुनाफ़िक़त (दिखावा) है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>मौलाना ने कुरआन का हवाला देते हुए कहा कि “तुम्हारा धर्म तुम्हारे लिए और मेरा धर्म मेरे लिए. यानी दूसरों के धर्म का सम्मान करो, लेकिन अपने विश्वास पर मज़बूती से क़ायम रहो. उन्होंने कहा कि इस्लाम ने हमेशा इंसाफ़, आदर और नर्मी की शिक्षा दी है, लेकिन साथ ही यह भी सिखाया है कि इबादत सिर्फ़ अल्लाह के लिए होनी चाहिए.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”><strong>मुसलमान दिखावा करने से बचें</strong></h3>
<p style=”text-align: justify;”>उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि धर्म के नाम पर दिखावा करने से बचें और असली भाईचारे का मतलब समझें. उन्होंने कहा कि भाईचारा तब होता है जब हम किसी की मदद करें, उसके दुख-दर्द में साथ दें, और समाज में इंसाफ़ कायम करें. दूसरों की पूजा-प्रथा में शामिल होना न तो भाईचारा है, न सहिष्णुता, यह आत्मिक भ्रम है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>सोशल मीडिया पर मौलाना का यह बयान तेजी से फैल रहा है. बहुत से लोगों ने उनके विचारों को “धर्म की सच्ची व्याख्या” बताया है. कई लोगों का कहना है कि मौलाना ने इस्लामी दृष्टिकोण को साफ़ और सादगी भरे शब्दों में समझाया है, जो आज के समय में बेहद ज़रूरी है.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”><strong>इस्लामिक शिक्षा और सामाजिक सुधार पर काम करते हैं गोरा </strong></h3>
<p style=”text-align: justify;”>मौलाना क़ारी इस्हाक़ गोरा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले के देवबंद क्षेत्र से हैं और जमीयत दावातुल मुसलिमीन नामक संस्था से जुड़े हैं, जो इस्लामी शिक्षा और समाजिक सुधार के लिए काम करती है. वे अपने सादे लेकिन असरदार बयानों के लिए जाने जाते हैं. पहले भी उनके कई वीडियो वायरल हो चुके हैं, जिनमें उन्होंने मुसलमानों को ईमान, नैतिकता और समझदारी से जीवन जीने की नसीहत दी थी.</p>
<p style=”text-align: justify;”>पिछले वर्षों में उन्होंने कई सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी थी, जैसे युवाओं में ग़ैर-इस्लामी फैशन, शादी-विवाह में दिखावा, और धार्मिक परंपराओं से भटकाव. उनके संदेशों में हमेशा यह बात दोहराई जाती है कि इस्लाम हमें दूसरों के साथ इंसाफ़ करने, प्यार से पेश आने और समाज में अमन कायम रखने की शिक्षा देता है, लेकिन धर्म की सीमाओं को पार करने की नहीं.</p>

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