नवरात्र 2026 में तिथियों का अनोखा संयोग: अष्टमी के तुरंत बाद नवमी, जानें कब रखें व्रत और करें कन्या पूजन

शारदीय नवरात्र को लेकर भक्तों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना वाला यह पर्व हर साल आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है। नवरात्र के दौरान घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, अखंड ज्योत जलाई जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन विजयादशमी के साथ होता है। इस बार शारदीय नवरात्र की तारीखों को लेकर एक खास बात सामने आ रही है। पंचांग की गणना के मुताबिक 2026 में अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग बनेगा।…

इस दिन से शुरू होगा पितृपक्ष, जानिए क्यों खास माने जाते हैं ये 16 दिन

हिंदू धार्मिक परंपरा में पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशेष समय माना जाता है। यह अवधि उन दिवंगत परिजनों को याद करने से जुड़ी है, जिनके प्रति परिवार अपनी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करता है। पितृपक्ष के दौरान लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान और भोजन कराने जैसे कर्म करते हैं। हर साल पितृपक्ष की तिथियां हिंदू पंचांग के आधार पर निर्धारित होती हैं। वर्ष 2026 में भी इस अवधि को लेकर लोगों के बीच तारीखों को जानने की उत्सुकता है। कई लोग यह समझना चाहते हैं…

7 दिन बाद आज विदा होंगे गणपति बप्पा, जानें विसर्जन की सही विधि, शुभ समय और जरूरी नियम

गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ गणपति उत्सव अब विसर्जन के चरण में पहुंच गया है। जिन श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की प्रतिमा अपने घर में सात दिनों के लिए स्थापित की थी, वे 20 सितंबर 2026, रविवार को बप्पा को विदाई देंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार गणेश जी की पूजा-अर्चना पूरी होने के बाद विधि-विधान से उनका विसर्जन किया जाता है। मान्यता है कि विसर्जन के साथ गणपति अपने धाम लौटते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि तथा मंगल का आशीर्वाद देते हैं। गणेश उत्सव भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी से आरंभ होता है। हालांकि आमतौर पर यह पर्व…

राधाष्टमी 2026 : 18 को तिथि शुरू, 19 सितंबर को मनाया जाएगा राधारानी का जन्मोत्सव; देखें पूजा और व्रत का समय

राधारानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली राधाष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल है। यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार अष्टमी तिथि 18 सितंबर की दोपहर से शुरू होकर 19 सितंबर की दोपहर तक रहेगी। इसी वजह से राधाष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है कि व्रत और राधारानी की पूजा 18 सितंबर को की जाए या 19 सितंबर को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधाष्टमी पर राधारानी के जन्मकाल यानी मध्याह्न के समय विशेष पूजा की जाती है। इसलिए…

विश्वकर्मा पूजा 2026: आज इस समय करें पूजा, पढ़ें आरती, मंत्र, पूजा विधि और भोग की पूरी जानकारी

विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आज देशभर में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की जा रही है। विशेष रूप से कारखानों, वर्कशॉप, निर्माण स्थलों, दुकानों और औद्योगिक संस्थानों में इस पर्व को उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों, उपकरणों और वाहनों की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का दिव्य शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला का अधिष्ठाता माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के लिए अनेक भव्य…

गणपति विसर्जन में कौन-सी बातें जरूरी हैं? बप्पा को विदा करने से पहले जान लें ये धार्मिक मान्यताएं

गणेश उत्सव के दौरान घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित किए गए गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना के बाद अब धीरे-धीरे विसर्जन का समय भी आने वाला है। गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला यह पर्व भक्तों के लिए आस्था और भक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई गई है, जबकि गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। हालांकि, कई भक्त अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या अन्य निर्धारित अवधि के बाद भी गणपति…

17 सितंबर को औजारों और वाहनों की पूजा क्यों? भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी इस परंपरा का जानें महत्व

हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल का प्रतीक माना जाता है। हर साल भगवान विश्वकर्मा की जयंती के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया जाता है। साल 2026 में यह पर्व 17 सितंबर को मनाया जाएगा। खासतौर पर कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों, निर्माण स्थलों और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े लोग इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। इस दिन सिर्फ भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा नहीं होती, बल्कि काम में इस्तेमाल होने वाले औजार, मशीनें, वाहन और अन्य उपकरण भी पूजे जाते हैं। कई जगहों पर कर्मचारी और कारोबारी इस…

बप्पा के आगमन से शुरू हुआ गणेशोत्सव, पूजा के बाद पढ़ें गणेश चालीसा और पाएं मंगल का आशीर्वाद

देशभर में आज यानी 14 सितंबर से गणपति उत्सव का शुभारंभ हो गया है। गणेश चतुर्थी के साथ शुरू होने वाला यह पर्व लगातार दस दिनों तक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और देश के दूसरे हिस्सों तक घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। भक्त सुबह से ही पूजा की तैयारियों में जुटे हैं और विधि-विधान के साथ गणपति बप्पा का स्वागत कर रहे हैं। धार्मिक परंपरा में गणेश जी को प्रथम पूज्य देव माना गया है। किसी भी शुभ काम की…

गणेश चतुर्थी पर इस बार क्यों खास है सोमवार का संयोग? जानिए शिव परिवार की पूजा से लेकर शुभ कामों तक पूरी जानकारी

हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। इस वजह से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाला यह पर्व घर-घर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। साल 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा और गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर को होगा। इस बार गणेश चतुर्थी कई मायनों में विशेष मानी जा रही है। एक तरफ चतुर्थी तिथि है, दूसरी ओर इसी दिन सोमवार पड़ रहा है। साथ…

फूलों की महक, दीपों की रोशनी और गुरबाणी की गूंज… पहले प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में दिखा अद्भुत नजारा

अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब में शनिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व बेहद श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक भावना के साथ मनाया गया। इस पवित्र अवसर पर पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमृतसर पहुंचे। सुबह से ही श्री दरबार साहिब परिसर में संगत की चहल-पहल बनी रही। श्रद्धालुओं ने गुरु घर में नतमस्तक होकर अरदास की और गुरबाणी कीर्तन सुनकर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। प्रकाश पर्व के मौके पर श्री हरिमंदिर साहिब सहित आसपास के प्रमुख गुरुद्वारों को विशेष रूप से सजाया गया था। फूलों…

गणेश चतुर्थी पर घर में बप्पा की स्थापना से पहले जान लें ये वास्तु नियम, सही सजावट से बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा

गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश के भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन घरों में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित कर पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। गणेश उत्सव के दौरान सिर्फ पूजा की तैयारियां ही नहीं होतीं, बल्कि लोग अपने घरों को भी आकर्षक तरीके से सजाते हैं। कहीं फूलों की लड़ियां लगाई जाती हैं तो कहीं रंगोली, तोरण और तरह-तरह की सजावटी वस्तुओं से घर को नया रूप दिया जाता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के साथ वास्तु के नजरिए से भी गणपति स्थापना और घर की सजावट को महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर…

जन्माष्टमी के बाद राधा रानी की आराधना क्यों है खास? जानिए राधा अष्टमी का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम को भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक प्रेम का सबसे सुंदर प्रतीक माना जाता है। श्रीकृष्ण की उपासना करने वाले भक्तों के लिए जिस तरह जन्माष्टमी का पर्व महत्वपूर्ण होता है, उसी तरह राधा अष्टमी का भी विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि राधा रानी के बिना श्रीकृष्ण की भक्ति पूर्ण नहीं मानी जाती। इसी कारण जन्माष्टमी के कुछ समय बाद आने वाला राधा अष्टमी का पर्व भक्तों के लिए विशेष अवसर बन जाता है। हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई…

भाद्रपद अमावस्या इस बार दो दिन, 10 सितंबर को कुशग्रहणी और 11 को स्नान-दान: पितरों के लिए दोपहर में करें धूप-ध्यान

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है। इस दिन पूर्वजों का स्मरण करने, उनके निमित्त तर्पण करने और जरूरतमंद लोगों को दान देने की परंपरा रही है। इस बार भाद्रपद मास की अमावस्या को लेकर तिथि दो दिनों में पड़ रही है। पंचांग के अनुसार अमावस्या 10 सितंबर की सुबह 10 बजकर 33 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 11 सितंबर की सुबह 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। तिथि के इसी समय के कारण दोनों दिनों के धार्मिक कार्य अलग-अलग माने जा रहे हैं। 10 सितंबर को कुशग्रहणी अमावस्या मनाई जाएगी, जबकि…

पितृपक्ष 2026: गया जी में ही क्यों किया जाता है पिंडदान? जानिए पितरों के मोक्ष से जुड़ी धार्मिक मान्यता

पितृपक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को समर्पित एक महत्वपूर्ण अवधि मानी जाती है। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष के दौरान आने वाले इन 15 दिनों में लोग अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों का स्मरण करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान पितरों को संतुष्टि प्रदान करता है। यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान देशभर में लोग अपने पूर्वजों के निमित्त अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। हालांकि, पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांडों में बिहार के गया धाम का विशेष स्थान माना जाता है। यहां पिंडदान करने के…

पेरिस में साकार हुआ 56 साल पुराना सपना, भव्य हिंदू मंदिर में हुई प्राण प्रतिष्ठा

फ्रांस की राजधानी पेरिस में भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। यहां देश के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर में रविवार को विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मंदिर में विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों की प्रतिष्ठा की गई। इसके साथ ही मंदिर अब श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर दुनिया के कई हिस्सों से संत, भक्त और गणमान्य अतिथि पेरिस पहुंचे। इस मंदिर के निर्माण के पीछे करीब पांच दशक से भी अधिक पुराना संकल्प जुड़ा है। BAPS अक्षरधाम…

भाद्रपद का पहला प्रदोष व्रत 8 सितंबर को या 9 को? जानें सही तारीख, पूजा का समय और भौम प्रदोष का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक महीने में दो बार प्रदोष व्रत आता है। यह व्रत कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। हालांकि, प्रदोष व्रत की तारीख तय करने में केवल त्रयोदशी तिथि देखना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि यह भी देखा जाता है कि प्रदोष काल के समय कौन सी तिथि चल रही है। इसी वजह से इस बार भाद्रपद महीने के पहले प्रदोष व्रत की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है। कई लोगों के मन…

पितृ पक्ष 2026: 27 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध के दिन, जानें प्रतिपदा श्राद्ध की तारीख, कुतुप मुहूर्त और धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दौरान परिवार के लोग अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पितरों को संतुष्टि मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है। हर साल पितृ पक्ष भाद्रपद या आश्विन मास के कृष्ण पक्ष से जुड़ी तिथियों के अनुसार आता है। इस अवधि में अलग-अलग तिथियों पर उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता…

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज: पूजा में इन बातों का रखें ध्यान, जानें व्रत से पारण तक की पूरी जानकारी

आज 4 सितंबर को देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर घरों तक भगवान कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्त दिनभर व्रत रखने के बाद रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय यानी निशिता काल में पूजा करेंगे। इस दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक, श्रृंगार, भोग, आरती और जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अन्न का त्याग करते हैं। कुछ भक्त पूरे दिन केवल फल, दूध और अन्य व्रत की चीजों का सेवन करते हैं, जबकि कुछ लोग…

जन्माष्टमी की आधी रात को ही क्यों हुआ श्रीकृष्ण का प्राकट्य, क्या है इस पावन रात की विशेष महिमा?

सनातन परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक माना जाता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी से जुड़ी मान्यताओं में सबसे खास बात भगवान श्रीकृष्ण का मध्यरात्रि में प्रकट होना है। यही वजह है कि जन्माष्टमी की रात को अत्यंत पवित्र और मंगलकारी माना जाता है। शास्त्रों में श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का पूर्णावतार और परम पुरुषोत्तम बताया गया है। उनके अवतरण का उद्देश्य केवल कंस जैसे अत्याचारी का अंत करना नहीं था,…

जन्माष्टमी 2026: 3 या 4 सितंबर, कब रखा जाएगा व्रत? जानें पूजा का शुभ समय, तिथि और पारण की सही विधि

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। देशभर में इस दिन मंदिरों से लेकर घरों तक विशेष सजावट की जाती है। भक्त बाल गोपाल का श्रृंगार करते हैं, उन्हें झूले में विराजमान करते हैं और आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास भी रखते हैं। हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी लोगों के बीच व्रत की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है कि आखिर जन्माष्टमी का व्रत 3 सितंबर को रखा जाएगा या 4…