नियम तोड़कर टीचर बने अफसर-नेता और बाबू के बेटा-बेटी:यूपी में शिक्षा विभाग का बड़ा फर्जीवाड़ा; जानिए किसे-कैसे मिली नौकरी यूपी में नेता से लेकर शिक्षा विभाग के अफसर तक, कॉलेज प्रबंधक से लेकर प्रिंसिपल के बच्चे तक टीचर बना दिए गए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की मिलीभगत से यह सब खेल हुआ। अनुदान लेने वाले स्कूलों और इंटर कॉलेजों में अल्पकालिक नियुक्तियों पर साल 2000 से रोक है। इसके बावजूद यूपी के दो जिले बलिया और मऊ में अनुदान प्राप्त (एडेड) स्कूल, संस्कृत विद्यालय और इंटर कॉलेजों में 200 से अधिक फर्जी भर्तियां की गईं। इस फर्जीवाड़े की जांच SIT करने वाली है। उसके पहले दैनिक भास्कर की टीम ने बलिया और मऊ जिले में इन्वेस्टिगेशन किया। नियुक्तियों के दस्तावेज जुटाए, अफसर-बाबू से हिडन कैमरे पर बात की। इसमें खुलासा हुआ कि कैसे बड़े ओहदे वालों के बच्चे टीचर-बाबू बना दिए गए? पढ़िए माध्यमिक शिक्षा विभाग में ‘रिश्तेदार भर्ती बोर्ड’ की पूरी कहानी… सबसे पहले जानिए किन प्रभावशाली लोगों की नियुक्तियां हुईं 1- उत्कर्ष सिंह: बलिया में रहनेवाले उत्कर्ष सिंह के पिता भाजपा एमएलसी रविशंकर सिंह पप्पू हैं। रविशंकर सिंह के जिले में 3 इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज हैं। उत्कर्ष सिंह विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। रेंज रोवर से चलते हैं, राजनीतिक कार्यक्रमों के मंचों पर अक्सर दिखते हैं। उत्कर्ष सिंह की नियुक्ति रेवती इंटर कॉलेज में 26 मार्च, 2018 में की गई थी। 2- रुद्र प्रकाश पांडेय: ये बलिया भाजपा के सीनियर लीडर नागेंद्र पांडेय के बेटे हैं। नागेंद्र पांडेय बलिया सदर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। इनकी नियुक्ति आदर्श संस्कृत माध्यमिक विद्यालय किशोर चेतन में सहायक अध्यापक के पद पर है। 3- राघवेंद्र सिंह यादव: इनके पिता विधि चंद्र आजमगढ़ में शिक्षा विभाग के जॉइंट डायरेक्टर ऑफिस में बाबू हैं। राघवेंद्र की नियुक्ति आदर्श संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किशोर चेतन में की गई। 4- अभिलाष कुंवर: इनके पिता संजय कुंवर सिंह बलिया DIOS दफ्तर में तैनात रहे हैं। अभिलाष कुंवर की नियुक्ति श्री अमर सहायक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेजुरी में 2019 में होना दिखाई गई है। पिता का दावा है कि 2 लाख रुपए महीने की सैलरी छोड़कर टीचर बना है। 5- राहुल रंजन सिंह, सुष्मिता सिंह: दोनों रेवती इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल अनिरुद्ध सिंह के बेटा-बेटी हैं। राहुल की जय प्रकाश इंटर कॉलेज, सेवाश्रम में 30 मार्च, 2018 को हुई थी। सुष्मिता की नियुक्ति कुंवर इंटर कॉलेज में है। इसी कॉलेज में अनिरुद्ध सिंह के भतीजे विशाल नारायण सिंह और समधी की बेटी सपना सिंह की नियुक्ति है। 6- हिमांशु चौबे: बसपा नेता भारतेंदु चौबे के बेटे हैं। इनकी नियुक्ति जिस श्री अमर सहायक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेजुरी में है। उसके मैनेजर भारतेंदु चौबे ही हैं। किस भर्ती के लिए क्या नियम तोड़े 1- सहायक अध्यापक: यूपी में अनुदान प्राप्त विद्यालय और इंटर कॉलेजों में अल्पकालिक नियुक्तियों पर साल 2000 से रोक है। लेकिन, कॉलेज प्रबंधन ने 26 अल्पकालिक टीचरों की नियुक्तियां कीं। सैलरी का भुगतान DIOS ऑफिस की मिलीभगत से 2022 से किया गया, जबकि नियुक्तियां 2015 से लेकर 2019 के बीच दिखाई गई हैं। नियुक्तियों में फर्जी दस्तावेज लगाए गए हैं। जैसे- भाजपा एमएलसी रविशंकर सिंह पप्पू के बेटे उत्कर्ष सिंह की नियुक्ति जिस रेवती इंटर कॉलेज में की गई, यहां कुल 11 नियुक्तियां हुई हैं। इसमें तत्कालीन DIOS अमरनाथ राय की अनुमति का पत्र लगा है। लेकिन अमरनाथ राय ने वर्तमान DIOS देवेंद्र गुप्ता को पत्र लिखकर कहा कि उनसे अनुमति नहीं ली गई है। न ही किसी दस्तावेज पर उनके सिग्नेचर है। 2- संस्कृत विद्यालय में टीचर: संस्कृत विद्यालयों में DIOS को टीचर रखने की अनुमति देने का अधिकार नहीं है। लेकिन, 58 शिक्षकों को संस्कृत विद्यालय में टीचर की नियुक्ति कर दी गई। 3- बाबू: पहले नियम था कि लिपिक की भर्ती मैनेजर करेगा। लिपिक की नियुक्ति से पहले DIOS की इजाजत लेनी होती है। यह इजाजत विनियम 101 इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत लेनी होती है। इसके लिए विज्ञापन निकालना होगा, चयन समिति इंटरव्यू करेगी। कैंडिडेट को ट्रिपल-सी का कोर्स किया होना जरूरी है। इसमें भी मनमानी न हो, इसके लिए रिजर्वेशन लागू कर दिया गया है। लेकिन, किसी नियम का पालन नहीं किया गया। पुरानी तारीख में भर्तियां DIOS की अनुमति दिखाकर की गई हैं। 4- चपरासी: 2011 से पहले फोर्थ क्लास की नियुक्ति भी लिपिकों की ही तरह होती थी। 2011 के बाद से फोर्थ क्लास की नियुक्ति आउटसोर्स के जरिए कर दी गई थी। इस फैसले के खिलाफ कुछ लोग कोर्ट गए। इस पर 4 नवंबर, 2013 को आदेश दिया गया कि फोर्थ क्लास की नियुक्ति आउटसोर्स के जरिए ही की जाएगी। इसलिए 2011 के बाद की हुईं नियुक्तियां पूरी तरह से अवैध मानी जाएंगी। लेकिन इसकी काट ढूंढ ली गई। बैक डेट में नियुक्तियां की गई हैं। जैसे- लंगटू बाबा इंटर कॉलेज में 1 जुलाई, 2000 में कुसुम मिश्रा को चपरासी पद पर नियुक्ति दी गई थी। जबकि उनकी जन्मतिथि 10 जुलाई, 1984 है। यानी वह नियुक्ति के समय 16 साल की थीं। नियमानुसार नियुक्ति के समय उम्र 18 साल होनी चाहिए। भास्कर के हिडन कैमरे पर बाबू ने कबूल किया नोट लेकर सैलरी दी अब पहला सवाल यह था कि कोर्ट के आदेश के बाद सैलरी दी गई, तो क्या इसमें DIOS ने भी रुपए लिए। क्योंकि, सैलरी भुगतान हो जाने के बाद इन नियुक्तियों पर मुहर लग जाती है। दूसरा- जब से नियुक्ति दिखाई गई है, तब से एरियर मिल जाता। सामने न आने की शर्त पर नियुक्ति पाए लाेगाें ने बताया कि चपरासी से 5 लाख, बाबू से 8 लाख और टीचरों से 15 लाख रुपए तक लिए गए हैं। बलिया में उस समय DIOS दफ्तर में बाबू रहे संजय कुंवर से हमने हिडन कैमरे पर बात की। उनके बेटे की सैलरी भी रुकी है। संजय पर नियुक्ति की फाइलें गायब करने की FIR भी दर्ज है। उन्होंने कहा- देखिए रमेश सिंह (तत्कालीन DIOS बलिया) बिना पैसे के किसी का काम नहीं करते। उसकी एक सीमा थी। वह परिचारक (चपरासी) का 3 लाख ले रहे थे। पहली बार भुगतान कर रहे थे। टीचर का 4 लाख ले रहे थे, लेकिन बाकी की बातें बनाई जा रही हैं। बिना पैसे वह क्यों करेंगे? यह खेल पूरे यूपी में, बलिया-मऊ का मामला अफसरों की लड़ाई में खुला
सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल, इंटर कॉलेज और संस्कृत विद्यालयों में यह फर्जीवाड़ा सिर्फ बलिया और मऊ में ही नहीं, पूरे यूपी में हुआ है। अब तक आगरा, आजमगढ़, जौनपुर में इस तरह के मामले सामने आए हैं। आगरा में इसी तरह 41 फर्जी नियुक्तियां की एसआईटी जांच कर रही है। रमेश सिंह 4 जुलाई, 2022 को DIOS के पद पर ट्रांसफर होकर बलिया आए। वह 2 साल तक रहे। इस दौरान उन्होंने एडेड स्कूल और संस्कृत स्कूल में सहायक शिक्षक, बाबू और फोर्थ ग्रेड में ऐसी 200 से नियुक्तियों की सैलरी मंजूर की। 10 करोड़ से ज्यादा का सैलरी भुगतान किया। वहीं मऊ में DIOS देवेंद्र गुप्ता ने इस दौरान 50 नियुक्तियों का भुगतान कराया। बलिया-मऊ में यह फर्जीवाड़ा इसलिए खुला क्योंकि दोनों जिलों के DIOS का ट्रांसफर एक-दूसरे के जिले में हो गया। बलिया के DIOS रमेश सिंह मऊ पहुंच गए, जबकि मऊ के DIOS देवेंद्र गुप्ता बलिया आ गए। 2 महीने तक ऐसी नियुक्तियों का भुगतान होता रहा। लेकिन अचानक देवेंद्र गुप्ता ने बलिया के 179 लोगों (संस्कृत टीचर-58, टीचर-26, बाबू-18, चपरासी-77) की सैलरी फर्जी नियुक्ति बताकर रोक दी। इधर, मऊ के DIOS रमेश सिंह ने 44 ऐसी नियुक्तियों की सैलरी रोक दी। दोनों ने एसीएस शिक्षा विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा। अब हम यह जानना चाहते थे कि ऐसा क्या हो गया कि 18 महीने से जो सैलरी भुगतान किया जा रहा था, उसे अचानक क्यों रोक दिया गया। इसका खुलासा बाबू कुंवर संजय सिंह ने किया। पढ़िए बाबू के खुलासे…कैसे मैनपावर कंपनी आड़े आई, तो लड़ाई शुरू हुई रिपोर्टर: दोनों अफसरों के बीच लड़ाई क्यों शुरू हो गई?
संजय कुंवर: ये संजय सिंह को जानते होंगे, जो नीरज शेखर के साथ रहते हैं। गरवार वाले…संजय सिंह (जंगल बाबा इंटर कॉलेज में टीचर) ओवरऑल नीरज शेखर के सभी कारोबार देखते हैं। उनकी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी (मैनपावर कंपनी) है। संजय सिंह ने बलिया में माध्यमिक शिक्षा में परिचारक का टेंडर लिया। संजय सिंह और रमेश सिंह (पूर्व DIOS बलिया) एक ही थाली में खाना खाते थे। इधर, जेडी वाईके सिंह और रमेश सिंह में झगड़ा शुरू हुआ, लेन-देन के लिए। कंपनी को नुकसान पहुंचा, तो फंस गए कर्मचारी
संजय कुंवर बताते हैं- रमेश सिंह, संजय सिंह के सर्विस प्रोवाइडर वाले काम में बाधा डाल रहे थे। दोनों में टशन बढ़ने लगी। फिर कोर्ट के आदेश पर 179 लोगों के भुगतान के आदेश जारी कर दिए। अब जितना भुगतान किया, उतने ही संजय सिंह के सर्विस प्रोवाइडर में मात्रा कम हो गई। चपरासी की नौकरी के नाम पर संजय सिंह ने जिन 100 लोगों से सवा लाख से डेढ़-डेढ़ लाख रुपए तक ले रखा है, वे उनसे आज भी रुपए मांगने जाते हैं। संजय सिंह ने भी इसे मुद्दा बना लिया। संजय कुंवर के मुताबिक, रमेश सिंह ने बलिया DIOS बने रहने या जौनपुर ट्रांसफर कराने के लिए संजय सिंह को 15 लाख रुपए दिए। संजय सिंह ने रमेश सिंह को मऊ ट्रांसफर करा दिया। मऊ से देवेंद्र गुप्ता (वर्तमान DIOS) को बलिया ट्रांसफर करा दिया। उसी दिन से दोनों में युद्ध चालू हो गया। यही नहीं, देवेंद्र गुप्ता के खिलाफ रमेश सिंह ने भी तमाम चिट्ठी शासन को लिखी हैं। सेटल के लिए मांगे गए थे 5 लाख रुपए
बाबू संजय कुंवर बताते हैं- देवेंद्र गुप्ता पर पूरा हाथ संजय सिंह का है। इन नियुक्तियों की वजह से मैनपावर कंपनी इंटर कॉलेजों में भर्ती नहीं कर पा रही थी। इससे उन्हें नुकसान होने लगा। एक महीने पहले जिला पंचायत में मीटिंग हुई थी। इसमें सब लोग थे। 5-5 लाख रुपए की डिमांड हुई थी। लड़के (जिनकी सैलरी रुकी है), बता रहे थे कि डिमांड हुई है। एक लाख संजय सिंह को देना है। एक लाख डायरेक्टर को देना है। एक लाख विभाग में देना है। तमाम बातें हुईं, लेकिन मामला बना नहीं। पूर्व डीआईओएस ने माना- संजय सिंह करीबी थे
संजय कुंवर के खुलासे को लेकर हमने पूर्व DIOS रमेश सिंह से भी बातचीत की। मैसेज करने के बाद उन्होंने हमें वॉट्सऐप कॉल की। हमने जब उनकी संजय सिंह से करीबियों के बारे में बात की, तो उन्होंने माना कि वह संजय सिंह के करीबी थे। हालांकि, उनका आरोप है कि बलिया के वर्तमान DIOS देवेंद्र गुप्ता पर अब संजय सिंह का हाथ है। मैनेजर-प्रिंसिपल ने एक-दूसरे के स्कूलों में अपने रिश्तेदारों को नौकरी दिलाई एडेड स्कूलों में मैनेजर और प्रिंसिपल अपने रिश्तेदारों को अल्पकालिक नियुक्ति भी नहीं दे सकते हैं। इस नियम का दो तरीके से तोड़ बलिया में निकाल लिया गया। पहला- मैनेजर-प्रिंसिपल ने अपने रिश्तेदार को दूसरे के स्कूल-कॉलेज में नौकरी दिलवाई। बदले में उनके बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों को अपने यहां नियुक्ति दे दी। सबसे बड़ा उदाहरण रेवती इंटर कॉलेज और जय प्रकाश इंटर कॉलेज, सेवाश्रम का है। रेवती इंटर कॉलेज में 26 मार्च, 2018 को भाजपा एमएलसी रवि शंकर सिंह पप्पू के बेटे उत्कर्ष सिंह की नियुक्ति हुई। इस कॉलेज के प्रिंसिपल अनिरुद्ध सिंह हैं। इस नियुक्ति के 4 दिन बाद भाजपा एमएलसी रवि शंकर सिंह पप्पू के जय प्रकाश इंटर कॉलेज, सेवाश्रम में राहुल रंजन सिंह की नियुक्ति हो गई। एमएलसी रविशंकर सिंह पप्पू के दूसरे इंटर कॉलेज कुंवर सिंह में अनिरुद्ध सिंह की बेटी सुष्मिता सिंह, उनके समधी की बेटी सपना सिंह, भतीजे विशाल नारायण सिंह की नियुक्ति हो जाती है। दूसरा- पहले मैनेजर का पद छोड़ा, दूसरे को मैनेजर बनाया और बेटे-रिश्तेदार को नौकरी दिलाई, फिर मैनेजर बन गए। इसका उदाहरण श्री अमर सहायक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेजुरी, बलिया है। इस कॉलेज के मैनेजर बसपा नेता भारतेंदु चौबे हैं। इनके बेटे हिमांशु की नियुक्ति भी इसी कॉलेज में है। यही नहीं, भारतेंदु चौबे के कॉलेज आदर्श संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किशोर चेतन में रागिनी चौबे सहायक अध्यापक हैं। रागिनी चौबे कॉलेज के मैनेजर भारतेंदु चौबे की बहन हैं। भारतेंदु चौबे से हमारी फोन पर बात हुई। उन्होंने हिमांशु और रागिनी चौबे की नियुक्ति की बात स्वीकार करते हुए कहा कि यह सभी नियुक्तियां नियमानुसार हैं। अपने बेटे हिमांशु की नियुक्ति को लेकर कहते हैं- हिमांशु की नियुक्ति भी 2019 में हुई है। उस समय कॉलेज के मैनेजर त्रिवेणी तिवारी थे। उन्होंने नियुक्ति की है। बहन रागिनी चौबे की नियुक्ति को लेकर वह कहते हैं कि उस समय सदानंद पांडेय मैनेजर थे। हम तो 11-12 महीने से वहां मैनेजर हैं। दोनों अफसरों ने एक-दूसरे पर गड़बड़ी के आरोप लगाए
बलिया के वर्तमान DIOS देवेंद्र गुप्ता से हमने बात की। सवाल किया कि क्या गड़बड़ियां मिली थीं? वह कहते हैं- पूर्व DIOS रमेश सिंह ने 179 कर्मचारी, जिनमें टीचर, बाबू और चपरासियों की सैलरी गलत तरह से निकाल दी है। ये नियुक्तियां फर्जी तरीके से की गई हैं। जब हमने बलिया में जॉइन किया, तो इस बारे में पता चला। हमने ऑफिस में तैनात बाबुओं से संबंधित फाइलें मांगीं। लेकिन, बाबू कुछ ही फाइल उपलब्ध करा सके। हमने 179 लोगों की सैलरी रोक दी और जांच के लिए शासन को बता दिया। शासन एसआईटी के जरिए जांच कराएगा। इधर, पूर्व DIOS रमेश सिंह कहते हैं कि जिन नियुक्तियों को फर्जी बताकर देवेंद्र गुप्ता ने सैलरी रोकी है, उसी तरह की 50 से अधिक नियुक्तियों का सैलरी भुगतान मऊ में उन्होंने DIOS रहते किया है। ———————– ये खबर भी पढ़ें… वाराणसी की निधि तिवारी PM की प्राइवेट सेक्रेटरी बनीं, 2014 बैच की IFS अधिकारी PMO में डिप्टी सेक्रेटरी थीं वाराणसी की रहने वाली IFS अधिकारी निधि तिवारी को पीएम नरेंद्र मोदी का प्राइवेट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने इस नियुक्ति की सूचना जारी की। निजी सचिव के तौर पर निधि तिवारी पीएम मोदी के कार्यक्रमों का समन्वयन, बैठकों का आयोजन और सरकारी विभागों के साथ संपर्क से संबंधित कामकाज देखेंगी।