हरियाणा में ड्रग तस्करों को लेकर हरियाणा पुलिस ने मेगा प्लान बनाया है। इसको लेकर पुलिस की ओर से 849 हाई रिस्क वाले ड्रग तस्करों की लिस्ट तैयार की है। जिनमें से प्रत्येक पर पिछले दशक में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत 3 या अधिक मामले दर्ज हैं। इसकी जानकारी राज्य भर में सभी लोकल यूनिटों को दी गई है, साथ ही टारगेट इन्फोर्समेंट के लिए सख्त आदेश भी दिए गए हैं। राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा लगातार अद्यतन की जा रही लाइव सूची में हर तस्कर की कानूनी स्थिति, गतिविधि और एक्शन हिस्ट्री की जिलावार ट्रैकिंग की जा रही है। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (HSNCB) के प्रमुख ओपी सिंह की ओर से फील्ड अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे इसे एक ऑपरेटिंग एक्यूपमेंट के रूप में मानें, न कि एक स्टेटिक डॉक्यूमेंट के रूप में। 468 तस्कर एक्टिव पुलिस की लिस्ट के अनुसार, 730 पहचाने गए तस्कर वर्तमान में जेल से बाहर हैं, 130 सलाखों के पीछे हैं और 381 सक्रिय रूप में काम कर रहे हैं। जो ड्रग तस्करी में एक्टिव मिले हैं। जबकि 468 को निष्क्रिय के रूप में चिह्नित किया गया है। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (HSNCB) ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 11 अपराधियों की मृत्यु हो गई है। HSNCB के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य राज्य में सक्रिय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क को डेटा-आधारित तरीके से ध्वस्त करना है। सिरसा-फतेहाबाद में सबसे ज्यादा तस्कर आईपीएस ओपी सिंह सिंह ने कहा, सामान्य रणनीतियों का समय खत्म हो चुका है। हमने समस्या के मूल को पहचान लिया है, बार-बार अपराध करने वाले क्रिमिनल जो जमानत, मुकदमे में देरी और असंगत अनुवर्ती कार्रवाई पर फलते-फूलते हैं। यह लाइव लिस्ट एक संकेत है, यदि आप इस पर हैं, तो राज्य देख रहा है। सिरसा, फतेहाबाद और यमुनानगर में तस्करों की संख्या सबसे ज़्यादा है और ये तस्करों की संख्या के मामले में कुख्यात हैं। लिस्ट के अनुसार, अकेले सिरसा में 117 नाम हैं, जिनमें से 106 अभी भी जेल से बाहर हैं। HSNCB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ये जिले लंबे समय से हाई रिस्क कॉरिडोर रहे हैं। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी हुआ प्रवर्तन को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, सभी जिलों को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी कर दिया गया है। जो वित्तीय जांच और दोषसिद्धि रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। सीनियर पुलिस ऑफिसरों ने राज्य की साइबर फोरेंसिक लैब को जांच अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है, विशेष रूप से मोबाइल डेटा, वित्तीय एप्स और एन्क्रिप्टेड डिजिटल ट्रेल्स को डिकोड करने में। लोग भी दे सकते हैं सूचना 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह का कहना है कि यह मिथक कि तस्कर मुकदमे में देरी, फर्जी खातों या डिजिटल छद्मवेश के पीछे छिप सकते हैं, अब खत्म हो गया है।अधिकारियों के अनुसार, जिला और रेंज स्तर पर वीकली रिव्यू पहले से ही चल रही है, तथा अधिकारियों को सलाह दी गई है कि कार्रवाई न करने को कर्तव्य में लापरवाही माना जाएगा। पुलिस के अनुसार, आम लोग भी गुप्त रूप से MANAS पोर्टल पर रिपोर्ट करके, 1933 ड्रग हेल्पलाइन (24×7) पर कॉल करके और वॉट्सऐप नंबर (9080591805) पर सुझाव साझा करके इस पहल का समर्थन कर सकते हैं। हरियाणा में ड्रग तस्करों को लेकर हरियाणा पुलिस ने मेगा प्लान बनाया है। इसको लेकर पुलिस की ओर से 849 हाई रिस्क वाले ड्रग तस्करों की लिस्ट तैयार की है। जिनमें से प्रत्येक पर पिछले दशक में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत 3 या अधिक मामले दर्ज हैं। इसकी जानकारी राज्य भर में सभी लोकल यूनिटों को दी गई है, साथ ही टारगेट इन्फोर्समेंट के लिए सख्त आदेश भी दिए गए हैं। राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा लगातार अद्यतन की जा रही लाइव सूची में हर तस्कर की कानूनी स्थिति, गतिविधि और एक्शन हिस्ट्री की जिलावार ट्रैकिंग की जा रही है। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (HSNCB) के प्रमुख ओपी सिंह की ओर से फील्ड अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे इसे एक ऑपरेटिंग एक्यूपमेंट के रूप में मानें, न कि एक स्टेटिक डॉक्यूमेंट के रूप में। 468 तस्कर एक्टिव पुलिस की लिस्ट के अनुसार, 730 पहचाने गए तस्कर वर्तमान में जेल से बाहर हैं, 130 सलाखों के पीछे हैं और 381 सक्रिय रूप में काम कर रहे हैं। जो ड्रग तस्करी में एक्टिव मिले हैं। जबकि 468 को निष्क्रिय के रूप में चिह्नित किया गया है। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (HSNCB) ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 11 अपराधियों की मृत्यु हो गई है। HSNCB के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य राज्य में सक्रिय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क को डेटा-आधारित तरीके से ध्वस्त करना है। सिरसा-फतेहाबाद में सबसे ज्यादा तस्कर आईपीएस ओपी सिंह सिंह ने कहा, सामान्य रणनीतियों का समय खत्म हो चुका है। हमने समस्या के मूल को पहचान लिया है, बार-बार अपराध करने वाले क्रिमिनल जो जमानत, मुकदमे में देरी और असंगत अनुवर्ती कार्रवाई पर फलते-फूलते हैं। यह लाइव लिस्ट एक संकेत है, यदि आप इस पर हैं, तो राज्य देख रहा है। सिरसा, फतेहाबाद और यमुनानगर में तस्करों की संख्या सबसे ज़्यादा है और ये तस्करों की संख्या के मामले में कुख्यात हैं। लिस्ट के अनुसार, अकेले सिरसा में 117 नाम हैं, जिनमें से 106 अभी भी जेल से बाहर हैं। HSNCB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ये जिले लंबे समय से हाई रिस्क कॉरिडोर रहे हैं। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी हुआ प्रवर्तन को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, सभी जिलों को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी कर दिया गया है। जो वित्तीय जांच और दोषसिद्धि रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। सीनियर पुलिस ऑफिसरों ने राज्य की साइबर फोरेंसिक लैब को जांच अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है, विशेष रूप से मोबाइल डेटा, वित्तीय एप्स और एन्क्रिप्टेड डिजिटल ट्रेल्स को डिकोड करने में। लोग भी दे सकते हैं सूचना 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह का कहना है कि यह मिथक कि तस्कर मुकदमे में देरी, फर्जी खातों या डिजिटल छद्मवेश के पीछे छिप सकते हैं, अब खत्म हो गया है।अधिकारियों के अनुसार, जिला और रेंज स्तर पर वीकली रिव्यू पहले से ही चल रही है, तथा अधिकारियों को सलाह दी गई है कि कार्रवाई न करने को कर्तव्य में लापरवाही माना जाएगा। पुलिस के अनुसार, आम लोग भी गुप्त रूप से MANAS पोर्टल पर रिपोर्ट करके, 1933 ड्रग हेल्पलाइन (24×7) पर कॉल करके और वॉट्सऐप नंबर (9080591805) पर सुझाव साझा करके इस पहल का समर्थन कर सकते हैं। हरियाणा | दैनिक भास्कर
