हिमाचल में संगठित अपराध पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास:सदन में आज पास हो सकता है संशोधन विधेयक, सरकारी कर्मचारी को डेढ़ गुना सजा

हिमाचल में संगठित अपराध पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास:सदन में आज पास हो सकता है संशोधन विधेयक, सरकारी कर्मचारी को डेढ़ गुना सजा

हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन की कार्यवाही प्रश्नकाल के साथ शुरू हुई। सदन में प्रदेश के 10 जिलों को जोड़ने वाला मटोर-शिमला फोरलेन का मामला गूंजेगा। इसके बाद सदन में चार महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा एवं पारण होगा। इनमें सबसे प्रमुख विधेयक संगठित अपराध से जुड़ा है। इस विधेयक में आरोपी को मृत्युदंड देने या फिर आजीवन कारावास का प्रावधान किया जा रहा है। बता दें कि हिमाचल में नशा तस्करी, अवैध खनन, वन कटान, वन्य जीवों की तस्करी, खतरनाक पदार्थों की डंपिंग, मानव अंगों की तस्करी, स्वास्थ्य विभाग में फर्जी बिल बनाने, झूठे क्लेम करने, साइबर आतंकवाद, फिरौती, फर्जी दस्तावेज रैकेट, खाने की वस्तुओं में मिलावट और मैच फिक्सिंग जैसे संगठित अपराध करने पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया जा रहा है। यह प्रावधान मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू द्वारा सदन में प्रस्तुत हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध विधेयक में किया गया है। आज इसे चर्चा के बाद पारित किया जा सकता है। संशोधित विधेयक में सजा के साथ दोषी को 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। नशा तस्कर की नशे से अर्जित संपत्ति भी जब्त की जा सकेगी। संगठित अपराध को उकसाने पर एक साल की सजा संशोधित विधेयक के अनुसार, जो व्यक्ति संगठित अपराध के लिए उकसाने, अपराध का प्रयास, षड्यंत्र, जानबूझकर उसे अंजाम देने में मदद या फिर अपराध की तैयारी के लिए किसी अन्य कार्य में शामिल पाया जाता है, तो उसे कम से कम एक वर्ष तक की जेल होगी। इसमें 5 लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान भी किया गया है। गिरोह के सदस्य को एक साल का कारावास यदि कोई व्यक्ति संगठित अपराध गिरोह का सदस्य है, उसे कम से कम एक साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। संगठित अपराधी को जानबूझकर शरण देने वाले या या छिपाने वाले व्यक्ति को कम से कम 6 महीने की सजा होगी और 20 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। अपराधी से कमीशन लेने पर एक साल से कम सजा संगठित अपराध से कमीशन लेने की सूरत में आरोपी को एक वर्ष तक की जेल और 2 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जाएगा। यदि किसी संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य की ओर से कोई व्यक्ति चल या अचल संपत्ति पर कब्जा करता है, जिसका वह संतोषजनक हिसाब नहीं दे पाएगा, तो उसे एक वर्ष से कम अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा। ड्रग्स मिली तो भी 14 साल तक की सजा जिस व्यक्ति के पास ड्रग्स मिलेगी या खरीदेगा या फिर इसका परिवहन करेगा, उसे कम से कम 2 वर्ष और अधिकतम 14 वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा। उसे 20 हजार से लेकर अधिकतम 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा। सरकारी कर्मचारी नशे के साथ पकड़ा तो डेढ़ गुणा ज्यादा सजा और जुर्माना किसी भी सरकारी कर्मचारी (लोक सेवक) के नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर उसे तय सजा से डेढ़ गुणा पनिशमेंट व इतना ही अधिक जुर्माना देना होगा। हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन की कार्यवाही प्रश्नकाल के साथ शुरू हुई। सदन में प्रदेश के 10 जिलों को जोड़ने वाला मटोर-शिमला फोरलेन का मामला गूंजेगा। इसके बाद सदन में चार महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा एवं पारण होगा। इनमें सबसे प्रमुख विधेयक संगठित अपराध से जुड़ा है। इस विधेयक में आरोपी को मृत्युदंड देने या फिर आजीवन कारावास का प्रावधान किया जा रहा है। बता दें कि हिमाचल में नशा तस्करी, अवैध खनन, वन कटान, वन्य जीवों की तस्करी, खतरनाक पदार्थों की डंपिंग, मानव अंगों की तस्करी, स्वास्थ्य विभाग में फर्जी बिल बनाने, झूठे क्लेम करने, साइबर आतंकवाद, फिरौती, फर्जी दस्तावेज रैकेट, खाने की वस्तुओं में मिलावट और मैच फिक्सिंग जैसे संगठित अपराध करने पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया जा रहा है। यह प्रावधान मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू द्वारा सदन में प्रस्तुत हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध विधेयक में किया गया है। आज इसे चर्चा के बाद पारित किया जा सकता है। संशोधित विधेयक में सजा के साथ दोषी को 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। नशा तस्कर की नशे से अर्जित संपत्ति भी जब्त की जा सकेगी। संगठित अपराध को उकसाने पर एक साल की सजा संशोधित विधेयक के अनुसार, जो व्यक्ति संगठित अपराध के लिए उकसाने, अपराध का प्रयास, षड्यंत्र, जानबूझकर उसे अंजाम देने में मदद या फिर अपराध की तैयारी के लिए किसी अन्य कार्य में शामिल पाया जाता है, तो उसे कम से कम एक वर्ष तक की जेल होगी। इसमें 5 लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान भी किया गया है। गिरोह के सदस्य को एक साल का कारावास यदि कोई व्यक्ति संगठित अपराध गिरोह का सदस्य है, उसे कम से कम एक साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। संगठित अपराधी को जानबूझकर शरण देने वाले या या छिपाने वाले व्यक्ति को कम से कम 6 महीने की सजा होगी और 20 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। अपराधी से कमीशन लेने पर एक साल से कम सजा संगठित अपराध से कमीशन लेने की सूरत में आरोपी को एक वर्ष तक की जेल और 2 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जाएगा। यदि किसी संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य की ओर से कोई व्यक्ति चल या अचल संपत्ति पर कब्जा करता है, जिसका वह संतोषजनक हिसाब नहीं दे पाएगा, तो उसे एक वर्ष से कम अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा। ड्रग्स मिली तो भी 14 साल तक की सजा जिस व्यक्ति के पास ड्रग्स मिलेगी या खरीदेगा या फिर इसका परिवहन करेगा, उसे कम से कम 2 वर्ष और अधिकतम 14 वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा। उसे 20 हजार से लेकर अधिकतम 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा। सरकारी कर्मचारी नशे के साथ पकड़ा तो डेढ़ गुणा ज्यादा सजा और जुर्माना किसी भी सरकारी कर्मचारी (लोक सेवक) के नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर उसे तय सजा से डेढ़ गुणा पनिशमेंट व इतना ही अधिक जुर्माना देना होगा।   हिमाचल | दैनिक भास्कर