Chaitra Navratri: चार माह बाद खुले मां शिकारी देवी मंदिर के कपाट, जानें स्थापना से जुड़ी पौराणिक कथा

Chaitra Navratri: चार माह बाद खुले मां शिकारी देवी मंदिर के कपाट, जानें स्थापना से जुड़ी पौराणिक कथा

<p style=”text-align: justify;”><strong>Chaitra Navratri 2025:</strong> मंडी में स्थित प्रसिद्ध शिकारी देवी मंदिर के कपाट चैत्र नवरात्र पर खोल दिए गए हैं. हर साल श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर का दर्शन करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि माता शिकारी देवी के दरबार से श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता. बर्फबारी के कारण हर साल दिसंबर से मार्च तक मंदिर का कपाट बंद रहता है. मौसम अनुकूल होने पर चार महीने बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का द्वार खोल दिया गया है. उपमंडल अधिकारी (नागरिक) थूनाग ने बताया कि मंदिर कमेटी को साफ-सफाई और जरूरी सुविधाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.</p>
<p style=”text-align: justify;”>बिजली, पानी और रास्तों को सुचारू करने के निर्देश जारी किए गए थे. पीडब्ल्यूडी को बर्फ हटाने का कार्य सौंपा गया था. जंजैहली और करसोग रायगढ़ से मंदिर तक का मार्ग जल्द बहाल होने की उम्मीद है. जब तक बर्फ पूरी तरह पिघल नहीं जाती तब तक रायगढ़ से शिकारी माता सड़क का सफर बहुत मनमोहन रहेगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>चार महीने बाद खुले शिकारी देवी मंदिर के कपाट</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>माता शिकारी देवी मंदिर को लेकर एक अद्भुत रहस्य भी है. कहा जाता है कि मंदिर की छत कभी टिक नहीं पाती. कई बार बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार छत गिर गई. कहा जाता है कि माता शिकारी देवी खुले आसमान के नीचे रहना पसंद करती हैं. देवी दुर्गा को समर्पित माता शिकारी देवी मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>श्रद्धालु बर्फीली वादियों में कर सकेंगे दिव्य दर्शन</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि मार्कंडेय ने यहां कठोर तपस्या की थी. इसके बाद पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान मंदिर का निर्माण किया था. तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा प्रकट हुईं और उन्हें युद्ध में विजय का आशीर्वाद दिया. अब श्रद्धालु बर्फीली वादियों में माता के दिव्य दर्शन कर सकेंगे. शिकारी देवी मंदिर सराज विधानसभा क्षेत्र की जंजैहली घाटी में 3359 मीटर की ऊंचाई पर बना है.&nbsp;</p>
<p><iframe title=”YouTube video player” src=”https://www.youtube.com/embed/_zfnkqEhdKA?si=AxiA01EO3H7rC9ln” width=”560″ height=”315″ frameborder=”0″ allowfullscreen=”allowfullscreen”></iframe></p>
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<p style=”text-align: justify;”>&nbsp;</p> <p style=”text-align: justify;”><strong>Chaitra Navratri 2025:</strong> मंडी में स्थित प्रसिद्ध शिकारी देवी मंदिर के कपाट चैत्र नवरात्र पर खोल दिए गए हैं. हर साल श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर का दर्शन करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि माता शिकारी देवी के दरबार से श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता. बर्फबारी के कारण हर साल दिसंबर से मार्च तक मंदिर का कपाट बंद रहता है. मौसम अनुकूल होने पर चार महीने बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का द्वार खोल दिया गया है. उपमंडल अधिकारी (नागरिक) थूनाग ने बताया कि मंदिर कमेटी को साफ-सफाई और जरूरी सुविधाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.</p>
<p style=”text-align: justify;”>बिजली, पानी और रास्तों को सुचारू करने के निर्देश जारी किए गए थे. पीडब्ल्यूडी को बर्फ हटाने का कार्य सौंपा गया था. जंजैहली और करसोग रायगढ़ से मंदिर तक का मार्ग जल्द बहाल होने की उम्मीद है. जब तक बर्फ पूरी तरह पिघल नहीं जाती तब तक रायगढ़ से शिकारी माता सड़क का सफर बहुत मनमोहन रहेगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>चार महीने बाद खुले शिकारी देवी मंदिर के कपाट</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>माता शिकारी देवी मंदिर को लेकर एक अद्भुत रहस्य भी है. कहा जाता है कि मंदिर की छत कभी टिक नहीं पाती. कई बार बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार छत गिर गई. कहा जाता है कि माता शिकारी देवी खुले आसमान के नीचे रहना पसंद करती हैं. देवी दुर्गा को समर्पित माता शिकारी देवी मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>श्रद्धालु बर्फीली वादियों में कर सकेंगे दिव्य दर्शन</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि मार्कंडेय ने यहां कठोर तपस्या की थी. इसके बाद पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान मंदिर का निर्माण किया था. तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा प्रकट हुईं और उन्हें युद्ध में विजय का आशीर्वाद दिया. अब श्रद्धालु बर्फीली वादियों में माता के दिव्य दर्शन कर सकेंगे. शिकारी देवी मंदिर सराज विधानसभा क्षेत्र की जंजैहली घाटी में 3359 मीटर की ऊंचाई पर बना है.&nbsp;</p>
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