गोरखपुर मां-बेटी हत्याकांड- जिंदा बची खुशबू की कहानी कितनी सच्ची?:जिसे हत्यारा कहा, उसके खिलाफ सबूत नहीं, कमरे में बंद थी, तो आवाज कैसे पहचानी

गोरखपुर मां-बेटी हत्याकांड- जिंदा बची खुशबू की कहानी कितनी सच्ची?:जिसे हत्यारा कहा, उसके खिलाफ सबूत नहीं, कमरे में बंद थी, तो आवाज कैसे पहचानी

‘मेरे पापा की जब मौत हुई थी, तब मैं 10 साल की थी। मेरा भाई 5 साल का और छोटी बहन मां के पेट में ही थी। उस वक्त कोटेदार संजय ने मेरी मम्मी से कहा था- तुम्हारा पूरा ख्याल रखेंगे। उसने मां से संबंध बनाए। वह मेरे घर के बारे में सब कुछ जान गया। मम्मी उस पर विश्वास करती थीं। उसने मम्मी के पूरे गहने बिकवा दिए। उसी संजय ने भाई, पिता और दो भांजों के साथ मिलकर मेरी मां और बहन को काट के मार दिया। उन्हें फांसी हो।’ ये शब्द उस खुशबू (22) के हैं, जिसकी मां पूनम और बहन अनुष्का की गोरखपुर में 29 मार्च को धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। जिस समय वारदात को अंजाम दिया गया, वह एक कमरे में बंद थी। घर में उन 3 लोगों के अलावा और कोई नहीं था। घटना को 3 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कुछ आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। खुशबू जिसे अपनी मां-बहन का हत्यारा बता रही थी, पुलिस ने घटना के 1 घंटे बाद ही उसे गिरफ्तार कर लिया। 1 अप्रैल को उसे जेल भी भेज दिया गया। हालांकि, पुलिस की जांच में अभी तक कुछ ऐसा नहीं मिला, जिससे साबित हो कि आरोपी ही हमलावर है। दैनिक भास्कर की टीम इस पूरे मामले को कवर करने गोरखपुर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर शिवपुर शकदहा गांव पहुंची। घटना के बारे में समझा। खुशबू से बात की। खुशबू ने जिसे हत्यारा बताया, उसके घरवालों से बातचीत की। गांव वालों का क्या कहना है? पुलिस किस एंगल से जांच में जुटी है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जहां हत्या हुई, वहां आज भी मक्खियां भिनभिना रहीं
शिवपुर शकदहा गांव चौरी-चौरा थाना क्षेत्र में आता है। यहां अजीब-सा सन्नाटा था। घटनास्थल पर मौजूद 4 पुलिसकर्मी कुर्सियां लगाए अखबार पढ़ रहे थे। हम उस घर में पहुंचे, जहां 29 मार्च की रात करीब साढ़े 12 बजे 45 साल की पूनम निषाद और उनकी 12 साल की बेटी अनुष्का की हत्या की गई थी। कितनी बेरहमी से दोनों को मारा गया था, इसे पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के जरिए समझा जा सकता है। पूनम के सिर की 10 हड्डियां टूटी हुई थीं। दोनों हाथों की हथेलियां काट दी गई थीं। शरीर पर 12 गहरे घाव थे, जहां से हड्डियां नजर आ रही थीं। इसी तरह से बेटी के साथ भी निर्दयता की गई। उसे भी धारदार हथियार से सिर, चेहरे और गले पर गहरे जख्म दिए गए। दोनों का इतना खून बहा कि वह जगह 50 घंटे बाद भी गीली है और मक्खियां भिनभिना रही हैं। 12 साल पहले पति की मौत, कोटेदार की परिवार में एंट्री
हमारी मुलाकात पूनम की बड़ी बेटी खुशबू से हुई। हम घटना के वक्त की स्थिति को समझना चाहते थे, इसलिए सीधा उसी के बारे में पूछा। खुशबू कहती है- हम सब खाना खाकर सो रहे थे। मम्मी और छोटी बहन बरामदे में थी। मैं बगल वाले कमरे में सो रही थी। छत के जरिए लोग घर में घुसे और मम्मी पर हमला कर दिया। मम्मी ने ‘अरे माई’ कहा, तो मेरी नींद खुली। उन लोगों ने बाहर से मेरा कमरा बंद कर दिया था। खुशबू ने कहा- गांव के ही कोटेदार सरयू प्रसाद, उसके बेटे संजय, सुरेंद्र और उसके दो भांजे घर में घुसे। उन लोगों ने मम्मी-बहन को मार दिया। हमने पूछा- आपने कैसे पहचाना, हमलावरों ने आपको क्यों नहीं मारा? इसके जवाब में खुशबू कहती हैं- मैं तीन लोगों की आवाज पहचान रही थी। वे कह रहे थे कि मारो इसको, जान से मार दो। उन्होंने मुझे भी मारने की कोशिश की, इसलिए हमने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और दोनों हाथों से दरवाजे को पकड़े रही। वो लोग दरवाजे को जोर-जोर से पीट रहे थे। मेरे मुंह से निकला कि मैंने 112 नंबर पर फोन कर दिया है। पुलिस आ रही है। इसके बाद वे लोग चले गए। हमने पूछा- कोटेदार के बेटे संजय की क्या दुश्मनी है जो वह आपकी मां-बहन को मारेगा? खुशबू बताती हैं- जब मेरे पापा रविंद्र निषाद की मौत हुई थी, तब मेरी बहन मां के पेट में ही थी। 2 महीने बाद उसका जन्म हुआ था। उस वक्त संजय घर आता था। उसने मेरी मम्मी से संबंध बना लिए। वह मम्मी से कहता कि अब मैं तुम्हारा पूरा ख्याल रखूंगा। उसने मम्मी के गहने बिकवा दिए। मेरी मां उस पर विश्वास करती थी, इसलिए 30 हजार रुपए भी दिए। उसी रुपए से उसने पुरानी पिकअप खरीदी। जिस दरवाजे का खुशबू ने जिक्र किया, उस पर कोई निशान नहीं
हमने खुशबू से करीब 15 मिनट बात की। इसके बाद घर के अंदर तक गए। जिस तख्त पर मां-बेटी सोई थीं, उसके बगल एक खाट (चारपाई) और लगी थी। लेकिन घटना वाली रात इस पर कोई नहीं सो रहा था। जिस कमरे में खुशबू थी, उसमें बक्सा और गेहूं-चावल रखने के लिए ड्रम रखा है। एक तरफ बेड लगा है, दूसरी तरफ जो तख्त है, उस पर गृहस्थी का दूसरा सामान रखा है। दरवाजा लकड़ी का है। उस पर एक मामूली खरोंच नजर आ रही है। खुशबू ने बताया- बदमाश आए तो उन्होंने मेरे कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर लिया। 5 मिनट की बातचीत के बाद खुशबू ने कहा कि वे लोग मुझे भी मारना चाहते थे, इसलिए मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। हमलावर जोर-जोर से पीट रहे थे। एक अफसर कहते हैं, जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया, वे मजबूत हथियार लेकर आए होंगे। वे लोग दरवाजे को भी तोड़ सकते थे, लेकिन दरवाजे पर संघर्ष जैसा कुछ नजर नहीं आया। फिर अगर दरवाजे को जोर-जोर से पीटा गया, तो बगल वाले घर के लोगों को क्यों नहीं पता चला? जेठानी बोली- बिटिया ने चिल्लाया, चोर आए हैं बाहर मत निकलना
हम पड़ोस में पूनम की जेठानी लक्ष्मी से मिले। यह घर घटना वाले घर से 50 मीटर की दूरी पर है। उनसे पूछा कि क्या आप लोगों को एकदम पता नहीं चला? लक्ष्मी कहती हैं- हम सब सो रहे थे, किसी को कुछ भी पता नहीं चला। रात 1 बजे बेटे के मोबाइल पर फोन आया। खुशबू रो रही थी। बेटा मेरे पास आया और कहा कि दीदी रो रही हैं। हमने फोन लिया तो खुशबू ने कहा- बड़ी मम्मी घर से बाहर मत निकलना, चोर आ गए हैं। सबको काट दे रहे हैं। लक्ष्मी कहती हैं- हमें लगा कि खुशबू सपने में बात कर रही है। इसलिए हमने उसे अच्छे से बात करने को कहा। इस पर वह बोली अच्छे से ही बात कर रहे हैं। इसके बाद हम लोग घर के बाहर निकले और भागकर उधर गए। उस वक्त वहां कोई नहीं था। अंदर से ताला बंद था। जो लोग आए थे, वो छत के रास्ते ऊपर से अंदर गए थे। कुछ देर में पुलिस आई, जिसने दरवाजा खोला। अंदर गए तो देखा चारों तरफ सिर्फ खून ही खून था। गांव वाला बोला- कोटेदार से पूनम के संबंध थे
खुशबू हत्या के लिए बार-बार कोटेदार और उसके बेटे संजय को जिम्मेदार बता रही थी। हमने संजय के बारे में गांव के ही एक किसान रामदास से बात की। वह कहते हैं- संजय ही गांव का कोटा चलाता है। राशन बांटता है। उसका इस महिला से 7-8 साल से संबंध था। वह अक्सर इनके घर आता-जाता था। पूनम के लड़के से ही पैसा लेकर उसने शटरिंग का काम शुरू किया, लेकिन कुछ दिया नहीं। तीन महीने पहले हुआ था सुलहनामा
मारपीट के इस मामले को लेकर हमने और जानना चाहा। पता चला कि 3 महीने पहले पूनम ने संजय के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें पूनम ने कहा था- 12 साल से संजय मेरा शारीरिक शोषण कर रहा है। पुलिस ने संजय को थाने बुलाया। दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। संजय ने 50 हजार रुपए पूनम के खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद पूनम ने सुलहनामा लिखा कि दूसरों के बहकावे में आकर ऐसा आरोप लगाया था। इस मामले में थानेदार राहुल शुक्ल और दरोगा राहुल राव पर आरोप है कि इन्होंने संजय से 80 हजार रुपए लिए। 50 हजार रुपए पूनम के खाते में भेजे, 30 हजार अपने पास रख लिए। आरोपी की पत्नी ने कहा- पुलिस आई तो सो रहे थे पति
खुशबू की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में कोटेदार सरयू प्रसाद (80), उनके बेटे संजय (35) और सुरेंद्र के साथ दो अन्य लोगों के खिलाफ केस लिखा है। कोटेदार का घर पीड़ित के घर से करीब 1 किलोमीटर दूर है। हम कोटेदार के घर पहुंचे। मोहल्ले के बाकी लोग भी वहां जमा थे। हमने संजय की पत्नी रीना से बात की। वह कहती हैं- मेरे पति शटरिंग का काम करते हैं। शनिवार की शाम वह घर आ गए थे। 10 बजे रात में हम लोग सोने चले गए थे। रात को पुलिस पति को उठाकर ले गई। सुबह हम लोगों को पता चला कि गांव में हत्या हुई है। रीना कहती हैं- पूनम ने मेरे पति को फंसा लिया था। लेकिन, 3 महीने से सब कुछ अलग था। पहले तो मेरे पति जहां भी काम करते, वहीं पहुंच जाती थी, परेशान करती थी। यहां आकर झगड़ा भी करती थी, लेकिन हमारे पति का हत्या में कोई रोल नहीं। वे लोग मेरे पति को फंसा रहे हैं। मेरे ससुर तो इतने बुजुर्ग हैं कि सही से चल भी नहीं पाते। वह कह रही है, हत्या करने आए थे। जो बात रीना कहती है, वही बात कोटेदार सरयू की पत्नी बासमती और बेटी भी दोहराती हैं। मां-बेटी में अक्सर खटास रहती थी
पुलिस कई पॉइंट पर काम कर रही है। क्राइम ब्रांच की टीम भी लगातार लोगों से पूछताछ कर रही है। आसपास गांव के कुल 6 लोगों को उठाया गया है। इन 6 लोगों में वो भी हैं, जो खुशबू के संपर्क में थे। हमने गांव में कुछ और लोगों से बात की। कुछ पॉइंट समझ में आए। आखिर में एक नजर में पूरा हत्याकांड ———————– यह खबर भी पढ़ें : गोरखपुर में मां और 10 साल की बेटी की हत्या, घर में घुसकर काटा, बड़ी बेटी ने कमरे में बंद कर खुद को बचाया गोरखपुर में मां और 10 साल की बेटी की हत्या कर दी गई। हमलावरों ने शनिवार रात 2 बजे घर में घुसकर वारदात की। घटना के वक्त 18 साल की बड़ी बेटी भी साथ थी। खुद को कमरे में बंद कर उसने हमलावरों से बचाया। वारदात चौरी चौरा थाना क्षेत्र के शिवपुर चकदहा गांव की है। पढ़िए पूरी खबर… ‘मेरे पापा की जब मौत हुई थी, तब मैं 10 साल की थी। मेरा भाई 5 साल का और छोटी बहन मां के पेट में ही थी। उस वक्त कोटेदार संजय ने मेरी मम्मी से कहा था- तुम्हारा पूरा ख्याल रखेंगे। उसने मां से संबंध बनाए। वह मेरे घर के बारे में सब कुछ जान गया। मम्मी उस पर विश्वास करती थीं। उसने मम्मी के पूरे गहने बिकवा दिए। उसी संजय ने भाई, पिता और दो भांजों के साथ मिलकर मेरी मां और बहन को काट के मार दिया। उन्हें फांसी हो।’ ये शब्द उस खुशबू (22) के हैं, जिसकी मां पूनम और बहन अनुष्का की गोरखपुर में 29 मार्च को धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। जिस समय वारदात को अंजाम दिया गया, वह एक कमरे में बंद थी। घर में उन 3 लोगों के अलावा और कोई नहीं था। घटना को 3 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कुछ आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। खुशबू जिसे अपनी मां-बहन का हत्यारा बता रही थी, पुलिस ने घटना के 1 घंटे बाद ही उसे गिरफ्तार कर लिया। 1 अप्रैल को उसे जेल भी भेज दिया गया। हालांकि, पुलिस की जांच में अभी तक कुछ ऐसा नहीं मिला, जिससे साबित हो कि आरोपी ही हमलावर है। दैनिक भास्कर की टीम इस पूरे मामले को कवर करने गोरखपुर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर शिवपुर शकदहा गांव पहुंची। घटना के बारे में समझा। खुशबू से बात की। खुशबू ने जिसे हत्यारा बताया, उसके घरवालों से बातचीत की। गांव वालों का क्या कहना है? पुलिस किस एंगल से जांच में जुटी है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जहां हत्या हुई, वहां आज भी मक्खियां भिनभिना रहीं
शिवपुर शकदहा गांव चौरी-चौरा थाना क्षेत्र में आता है। यहां अजीब-सा सन्नाटा था। घटनास्थल पर मौजूद 4 पुलिसकर्मी कुर्सियां लगाए अखबार पढ़ रहे थे। हम उस घर में पहुंचे, जहां 29 मार्च की रात करीब साढ़े 12 बजे 45 साल की पूनम निषाद और उनकी 12 साल की बेटी अनुष्का की हत्या की गई थी। कितनी बेरहमी से दोनों को मारा गया था, इसे पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के जरिए समझा जा सकता है। पूनम के सिर की 10 हड्डियां टूटी हुई थीं। दोनों हाथों की हथेलियां काट दी गई थीं। शरीर पर 12 गहरे घाव थे, जहां से हड्डियां नजर आ रही थीं। इसी तरह से बेटी के साथ भी निर्दयता की गई। उसे भी धारदार हथियार से सिर, चेहरे और गले पर गहरे जख्म दिए गए। दोनों का इतना खून बहा कि वह जगह 50 घंटे बाद भी गीली है और मक्खियां भिनभिना रही हैं। 12 साल पहले पति की मौत, कोटेदार की परिवार में एंट्री
हमारी मुलाकात पूनम की बड़ी बेटी खुशबू से हुई। हम घटना के वक्त की स्थिति को समझना चाहते थे, इसलिए सीधा उसी के बारे में पूछा। खुशबू कहती है- हम सब खाना खाकर सो रहे थे। मम्मी और छोटी बहन बरामदे में थी। मैं बगल वाले कमरे में सो रही थी। छत के जरिए लोग घर में घुसे और मम्मी पर हमला कर दिया। मम्मी ने ‘अरे माई’ कहा, तो मेरी नींद खुली। उन लोगों ने बाहर से मेरा कमरा बंद कर दिया था। खुशबू ने कहा- गांव के ही कोटेदार सरयू प्रसाद, उसके बेटे संजय, सुरेंद्र और उसके दो भांजे घर में घुसे। उन लोगों ने मम्मी-बहन को मार दिया। हमने पूछा- आपने कैसे पहचाना, हमलावरों ने आपको क्यों नहीं मारा? इसके जवाब में खुशबू कहती हैं- मैं तीन लोगों की आवाज पहचान रही थी। वे कह रहे थे कि मारो इसको, जान से मार दो। उन्होंने मुझे भी मारने की कोशिश की, इसलिए हमने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और दोनों हाथों से दरवाजे को पकड़े रही। वो लोग दरवाजे को जोर-जोर से पीट रहे थे। मेरे मुंह से निकला कि मैंने 112 नंबर पर फोन कर दिया है। पुलिस आ रही है। इसके बाद वे लोग चले गए। हमने पूछा- कोटेदार के बेटे संजय की क्या दुश्मनी है जो वह आपकी मां-बहन को मारेगा? खुशबू बताती हैं- जब मेरे पापा रविंद्र निषाद की मौत हुई थी, तब मेरी बहन मां के पेट में ही थी। 2 महीने बाद उसका जन्म हुआ था। उस वक्त संजय घर आता था। उसने मेरी मम्मी से संबंध बना लिए। वह मम्मी से कहता कि अब मैं तुम्हारा पूरा ख्याल रखूंगा। उसने मम्मी के गहने बिकवा दिए। मेरी मां उस पर विश्वास करती थी, इसलिए 30 हजार रुपए भी दिए। उसी रुपए से उसने पुरानी पिकअप खरीदी। जिस दरवाजे का खुशबू ने जिक्र किया, उस पर कोई निशान नहीं
हमने खुशबू से करीब 15 मिनट बात की। इसके बाद घर के अंदर तक गए। जिस तख्त पर मां-बेटी सोई थीं, उसके बगल एक खाट (चारपाई) और लगी थी। लेकिन घटना वाली रात इस पर कोई नहीं सो रहा था। जिस कमरे में खुशबू थी, उसमें बक्सा और गेहूं-चावल रखने के लिए ड्रम रखा है। एक तरफ बेड लगा है, दूसरी तरफ जो तख्त है, उस पर गृहस्थी का दूसरा सामान रखा है। दरवाजा लकड़ी का है। उस पर एक मामूली खरोंच नजर आ रही है। खुशबू ने बताया- बदमाश आए तो उन्होंने मेरे कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर लिया। 5 मिनट की बातचीत के बाद खुशबू ने कहा कि वे लोग मुझे भी मारना चाहते थे, इसलिए मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। हमलावर जोर-जोर से पीट रहे थे। एक अफसर कहते हैं, जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया, वे मजबूत हथियार लेकर आए होंगे। वे लोग दरवाजे को भी तोड़ सकते थे, लेकिन दरवाजे पर संघर्ष जैसा कुछ नजर नहीं आया। फिर अगर दरवाजे को जोर-जोर से पीटा गया, तो बगल वाले घर के लोगों को क्यों नहीं पता चला? जेठानी बोली- बिटिया ने चिल्लाया, चोर आए हैं बाहर मत निकलना
हम पड़ोस में पूनम की जेठानी लक्ष्मी से मिले। यह घर घटना वाले घर से 50 मीटर की दूरी पर है। उनसे पूछा कि क्या आप लोगों को एकदम पता नहीं चला? लक्ष्मी कहती हैं- हम सब सो रहे थे, किसी को कुछ भी पता नहीं चला। रात 1 बजे बेटे के मोबाइल पर फोन आया। खुशबू रो रही थी। बेटा मेरे पास आया और कहा कि दीदी रो रही हैं। हमने फोन लिया तो खुशबू ने कहा- बड़ी मम्मी घर से बाहर मत निकलना, चोर आ गए हैं। सबको काट दे रहे हैं। लक्ष्मी कहती हैं- हमें लगा कि खुशबू सपने में बात कर रही है। इसलिए हमने उसे अच्छे से बात करने को कहा। इस पर वह बोली अच्छे से ही बात कर रहे हैं। इसके बाद हम लोग घर के बाहर निकले और भागकर उधर गए। उस वक्त वहां कोई नहीं था। अंदर से ताला बंद था। जो लोग आए थे, वो छत के रास्ते ऊपर से अंदर गए थे। कुछ देर में पुलिस आई, जिसने दरवाजा खोला। अंदर गए तो देखा चारों तरफ सिर्फ खून ही खून था। गांव वाला बोला- कोटेदार से पूनम के संबंध थे
खुशबू हत्या के लिए बार-बार कोटेदार और उसके बेटे संजय को जिम्मेदार बता रही थी। हमने संजय के बारे में गांव के ही एक किसान रामदास से बात की। वह कहते हैं- संजय ही गांव का कोटा चलाता है। राशन बांटता है। उसका इस महिला से 7-8 साल से संबंध था। वह अक्सर इनके घर आता-जाता था। पूनम के लड़के से ही पैसा लेकर उसने शटरिंग का काम शुरू किया, लेकिन कुछ दिया नहीं। तीन महीने पहले हुआ था सुलहनामा
मारपीट के इस मामले को लेकर हमने और जानना चाहा। पता चला कि 3 महीने पहले पूनम ने संजय के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें पूनम ने कहा था- 12 साल से संजय मेरा शारीरिक शोषण कर रहा है। पुलिस ने संजय को थाने बुलाया। दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। संजय ने 50 हजार रुपए पूनम के खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद पूनम ने सुलहनामा लिखा कि दूसरों के बहकावे में आकर ऐसा आरोप लगाया था। इस मामले में थानेदार राहुल शुक्ल और दरोगा राहुल राव पर आरोप है कि इन्होंने संजय से 80 हजार रुपए लिए। 50 हजार रुपए पूनम के खाते में भेजे, 30 हजार अपने पास रख लिए। आरोपी की पत्नी ने कहा- पुलिस आई तो सो रहे थे पति
खुशबू की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में कोटेदार सरयू प्रसाद (80), उनके बेटे संजय (35) और सुरेंद्र के साथ दो अन्य लोगों के खिलाफ केस लिखा है। कोटेदार का घर पीड़ित के घर से करीब 1 किलोमीटर दूर है। हम कोटेदार के घर पहुंचे। मोहल्ले के बाकी लोग भी वहां जमा थे। हमने संजय की पत्नी रीना से बात की। वह कहती हैं- मेरे पति शटरिंग का काम करते हैं। शनिवार की शाम वह घर आ गए थे। 10 बजे रात में हम लोग सोने चले गए थे। रात को पुलिस पति को उठाकर ले गई। सुबह हम लोगों को पता चला कि गांव में हत्या हुई है। रीना कहती हैं- पूनम ने मेरे पति को फंसा लिया था। लेकिन, 3 महीने से सब कुछ अलग था। पहले तो मेरे पति जहां भी काम करते, वहीं पहुंच जाती थी, परेशान करती थी। यहां आकर झगड़ा भी करती थी, लेकिन हमारे पति का हत्या में कोई रोल नहीं। वे लोग मेरे पति को फंसा रहे हैं। मेरे ससुर तो इतने बुजुर्ग हैं कि सही से चल भी नहीं पाते। वह कह रही है, हत्या करने आए थे। जो बात रीना कहती है, वही बात कोटेदार सरयू की पत्नी बासमती और बेटी भी दोहराती हैं। मां-बेटी में अक्सर खटास रहती थी
पुलिस कई पॉइंट पर काम कर रही है। क्राइम ब्रांच की टीम भी लगातार लोगों से पूछताछ कर रही है। आसपास गांव के कुल 6 लोगों को उठाया गया है। इन 6 लोगों में वो भी हैं, जो खुशबू के संपर्क में थे। हमने गांव में कुछ और लोगों से बात की। कुछ पॉइंट समझ में आए। आखिर में एक नजर में पूरा हत्याकांड ———————– यह खबर भी पढ़ें : गोरखपुर में मां और 10 साल की बेटी की हत्या, घर में घुसकर काटा, बड़ी बेटी ने कमरे में बंद कर खुद को बचाया गोरखपुर में मां और 10 साल की बेटी की हत्या कर दी गई। हमलावरों ने शनिवार रात 2 बजे घर में घुसकर वारदात की। घटना के वक्त 18 साल की बड़ी बेटी भी साथ थी। खुद को कमरे में बंद कर उसने हमलावरों से बचाया। वारदात चौरी चौरा थाना क्षेत्र के शिवपुर चकदहा गांव की है। पढ़िए पूरी खबर…   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर