दाता सिंह वाला-खनौरी किसान मोर्चे पर आमरण अनशन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का स्वास्थ्य 92वें दिन अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गया। उनका ब्लड प्रेशर बेहद खतरनाक स्तर (176/107) तक बढ़ गया, जिससे डॉक्टरों में चिंता बढ़ गई है। किसान मोर्चे पर मौजूद चिकित्सकों की टीम लगातार डल्लेवाल के स्वास्थ्य पर निगरानी रख रही है। डॉक्टरों के अनुसार, इतने लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है, और ब्लड प्रेशर का इतना अधिक बढ़ना उनकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी इस खबर के बाद चिंता बढ़ गई है। मोर्चे पर मौजूद साथी किसान लगातार उनके स्वास्थ्य को लेकर प्रार्थना और समर्थन जता रहे हैं। वहीं डॉक्टर्स की टीम ने डल्लेवाल को अब्जर्वेशन में रख लिया है। बीते दिन ही दिल्ली कूच को टाला गया हरियाणा और पंजाब के किसानों ने दिल्ली कूच पर अपना फैसला टाल दिया गया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बीते दिन सोमवार ही इसकी जानकारी दी। रविवार को दोनों फोरम के नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों के साथ बातचीत की और आगे की रणनीति पर चर्चा की है। शनिवार को आंदोलनकारी किसानों और केंद्र के बीच चंडीगढ़ में हुई छठीं मीटिंग में भी कोई हल नहीं निकल सका। ढाई घंटे चली मीटिंग में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी की मांग पर अड़े रहे। उन्होंने केंद्र के सामने आंकड़े रखे। अब अगली मीटिंग 19 मार्च को चंडीगढ़ में ही होगी। किसान आंदोलन से जुड़ीं 3 अहम बातें… 1. हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर खोलने को कहा, हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट गई फरवरी 2024 में किसानों को शंभू बॉर्डर पर रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया था। इसके खिलाफ अंबाला के व्यापारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में बॉर्डर खोलने के आदेश दिए। मगर, इसके खिलाफ हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 10 सुनवाई कर चुका है। इस दौरान रिटायर्ड जस्टिस की अगुआई में कमेटी भी बनाई, जो किसानों और सरकार के बीच मध्यस्थता कर मामला निपटा सके, लेकिन किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। 2. दिल्ली कूच की कोशिश की केंद्र के बातचीत भी बंद करने के बाद किसानों ने 6 दिसंबर को पहली बार दिल्ली कूच का फैसला किया। मगर, हरियाणा सरकार ने ट्रैक्टर समेत दिल्ली जाने की परमिशन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद 101 किसानों का जत्था दिल्ली रवाना किया गया। हालांकि हरियाणा पुलिस ने उन्हें भी शंभू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर रोक लिया। इसके बाद किसानों ने 8 और 14 दिसंबर को दिल्ली कूच की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने किसानों को रोक लिया। किसानों पर आंसू गैस के गोले भी दागे गए। इसके पहले 13 फरवरी 2014 को किसानों ने खनौरी बॉर्डर से दिल्ली जाने की कोशिश की थी तब किसानों को रोकने के दौरान हिंसा हुई थी। इसी दौरान गोली लगने से 21 फरवरी को शुभकरण की मौत हुई थी। 3. डल्लेवाल ने अनशन शुरू किया, SC तक मामला पहुंचा इसी बीच किसान नेता जगजीत डल्लेवाल ने बेटे-बहू और पोते के नाम संपत्ति कर आमरण अनशन का ऐलान कर दिया। हालांकि 26 नवंबर 2024 को अनशन से पहले पंजाब पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मगर, उन्होंने वहीं अनशन शुरू कर दिया। किसानों के दबाव में 1 दिसंबर को पंजाब पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। तब से ही डल्लेवाल का अनशन जारी है। मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। लेकिन डल्लेवाल ने मेडिकल मदद लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट में करीब 10 बार उनकी सेहत को लेकर सुनवाई हुई। इसके बाद केंद्र ने 14 फरवरी को बातचीत का न्योता दे दिया। तब डल्लेवाल मेडिकल सुविधा लेने के लिए राजी हो गए। दाता सिंह वाला-खनौरी किसान मोर्चे पर आमरण अनशन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का स्वास्थ्य 92वें दिन अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गया। उनका ब्लड प्रेशर बेहद खतरनाक स्तर (176/107) तक बढ़ गया, जिससे डॉक्टरों में चिंता बढ़ गई है। किसान मोर्चे पर मौजूद चिकित्सकों की टीम लगातार डल्लेवाल के स्वास्थ्य पर निगरानी रख रही है। डॉक्टरों के अनुसार, इतने लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है, और ब्लड प्रेशर का इतना अधिक बढ़ना उनकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। संयुक्त किसान मोर्चा के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी इस खबर के बाद चिंता बढ़ गई है। मोर्चे पर मौजूद साथी किसान लगातार उनके स्वास्थ्य को लेकर प्रार्थना और समर्थन जता रहे हैं। वहीं डॉक्टर्स की टीम ने डल्लेवाल को अब्जर्वेशन में रख लिया है। बीते दिन ही दिल्ली कूच को टाला गया हरियाणा और पंजाब के किसानों ने दिल्ली कूच पर अपना फैसला टाल दिया गया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बीते दिन सोमवार ही इसकी जानकारी दी। रविवार को दोनों फोरम के नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों के साथ बातचीत की और आगे की रणनीति पर चर्चा की है। शनिवार को आंदोलनकारी किसानों और केंद्र के बीच चंडीगढ़ में हुई छठीं मीटिंग में भी कोई हल नहीं निकल सका। ढाई घंटे चली मीटिंग में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी की मांग पर अड़े रहे। उन्होंने केंद्र के सामने आंकड़े रखे। अब अगली मीटिंग 19 मार्च को चंडीगढ़ में ही होगी। किसान आंदोलन से जुड़ीं 3 अहम बातें… 1. हाईकोर्ट ने शंभू बॉर्डर खोलने को कहा, हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट गई फरवरी 2024 में किसानों को शंभू बॉर्डर पर रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया था। इसके खिलाफ अंबाला के व्यापारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में बॉर्डर खोलने के आदेश दिए। मगर, इसके खिलाफ हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 10 सुनवाई कर चुका है। इस दौरान रिटायर्ड जस्टिस की अगुआई में कमेटी भी बनाई, जो किसानों और सरकार के बीच मध्यस्थता कर मामला निपटा सके, लेकिन किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। 2. दिल्ली कूच की कोशिश की केंद्र के बातचीत भी बंद करने के बाद किसानों ने 6 दिसंबर को पहली बार दिल्ली कूच का फैसला किया। मगर, हरियाणा सरकार ने ट्रैक्टर समेत दिल्ली जाने की परमिशन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद 101 किसानों का जत्था दिल्ली रवाना किया गया। हालांकि हरियाणा पुलिस ने उन्हें भी शंभू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर रोक लिया। इसके बाद किसानों ने 8 और 14 दिसंबर को दिल्ली कूच की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने किसानों को रोक लिया। किसानों पर आंसू गैस के गोले भी दागे गए। इसके पहले 13 फरवरी 2014 को किसानों ने खनौरी बॉर्डर से दिल्ली जाने की कोशिश की थी तब किसानों को रोकने के दौरान हिंसा हुई थी। इसी दौरान गोली लगने से 21 फरवरी को शुभकरण की मौत हुई थी। 3. डल्लेवाल ने अनशन शुरू किया, SC तक मामला पहुंचा इसी बीच किसान नेता जगजीत डल्लेवाल ने बेटे-बहू और पोते के नाम संपत्ति कर आमरण अनशन का ऐलान कर दिया। हालांकि 26 नवंबर 2024 को अनशन से पहले पंजाब पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मगर, उन्होंने वहीं अनशन शुरू कर दिया। किसानों के दबाव में 1 दिसंबर को पंजाब पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। तब से ही डल्लेवाल का अनशन जारी है। मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। लेकिन डल्लेवाल ने मेडिकल मदद लेने से इनकार कर दिया। कोर्ट में करीब 10 बार उनकी सेहत को लेकर सुनवाई हुई। इसके बाद केंद्र ने 14 फरवरी को बातचीत का न्योता दे दिया। तब डल्लेवाल मेडिकल सुविधा लेने के लिए राजी हो गए। पंजाब | दैनिक भास्कर
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