एडिशनल सेशन जज की अदालत ने पत्नी, सास, साले और सालेहार के हत्या आरोपी हवलदार कुलविंदर सिंह को दोषी करार देकर उम्रकैद और 40 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। गांव सैद जलालपुर के हरजिंदर सिंह ने 16 फरवरी, 2020 को थाना धर्मकोट में बयान दिया था कि जीजा कुलविंदर सिंह की पहली प|ी मनजीत कौर की मौत हो गई थी। उससे 2 बच्चे थे। उसका एक बेटा अनमोल जालंधर में पंजाब पुलिस में सिपाही के तौर पर तैनात है, जबकि बेटी समरीन की 8 साल पहले फिरोजपुर के गांव नाजूवाला में शादी हो चुकी थी। परिवार ने समरीन की शादी में पूरा फर्ज निभाया था। कुलविंदर सिंह अपनी विवाहित बेटी को आईईएलटीएस कराना चाहता था, जबकि बेटी के ससुराल वाले इस बात से नाराज थे। जीजा कुलविंदर सिंह को शक था कि उसकी बेटी के ससुराल में जो कुछ हो रहा है, उसमें उनके परिवार का हाथ है। इसी रंजिश के चलते कुलविंदर सिंह 15 फरवरी, 2020 को रात 12 बजे शराबी हालत में ससुराल पहुंचा। कुलविंदर ने मनप्रीत के साथ मारपीट की। जब परिवार ने बचाव करना चाहा तो उसने गालियां निकालीं। उन्होंने रात को इस बारे में पुलिस कंट्रोल रूम के अलावा थाना धर्मकोट की पुलिस को सूचित किया। सुबह पुलिस आई और कुलविंदर को अपने साथ ले गई। बाद में उसे छोड़ दिया गया। बाद में कुलविंदर सिंह ने पुलिस लाइन से असलहा लाकर घटना को अंजाम दिया। हरजिंदर सिंह ने बताया कि झगड़े में उसने अपनी प|ी को छोड़ने की बात कही तो मां ने उसकी पहली प|ी की बेटी के बारे में कुछ उल्टा कह दिया था। फिर कुलविंदर सिंह गुस्से में अंधाधुंध फायरिंग करने लगा। फायरिंग में उसने तो भागकर जान बचाई। मगर हवलदार ने अपनी पत्नी राजविंदर कौर, सास सुखविंदर कौर, साला जसकरण और सालेहार इंद्रजीत कौर की गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। फायरिंग में जसकरण सिंह की 10 साल की बेटी जश्नप्रीत घायल हो गई थी। वहीं, ससुर और साल के 2 बच्चों ने पड़ोसियों के घर छिपकर अपनी जान बचाई थी। एडिशनल सेशन जज की अदालत ने पत्नी, सास, साले और सालेहार के हत्या आरोपी हवलदार कुलविंदर सिंह को दोषी करार देकर उम्रकैद और 40 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। गांव सैद जलालपुर के हरजिंदर सिंह ने 16 फरवरी, 2020 को थाना धर्मकोट में बयान दिया था कि जीजा कुलविंदर सिंह की पहली प|ी मनजीत कौर की मौत हो गई थी। उससे 2 बच्चे थे। उसका एक बेटा अनमोल जालंधर में पंजाब पुलिस में सिपाही के तौर पर तैनात है, जबकि बेटी समरीन की 8 साल पहले फिरोजपुर के गांव नाजूवाला में शादी हो चुकी थी। परिवार ने समरीन की शादी में पूरा फर्ज निभाया था। कुलविंदर सिंह अपनी विवाहित बेटी को आईईएलटीएस कराना चाहता था, जबकि बेटी के ससुराल वाले इस बात से नाराज थे। जीजा कुलविंदर सिंह को शक था कि उसकी बेटी के ससुराल में जो कुछ हो रहा है, उसमें उनके परिवार का हाथ है। इसी रंजिश के चलते कुलविंदर सिंह 15 फरवरी, 2020 को रात 12 बजे शराबी हालत में ससुराल पहुंचा। कुलविंदर ने मनप्रीत के साथ मारपीट की। जब परिवार ने बचाव करना चाहा तो उसने गालियां निकालीं। उन्होंने रात को इस बारे में पुलिस कंट्रोल रूम के अलावा थाना धर्मकोट की पुलिस को सूचित किया। सुबह पुलिस आई और कुलविंदर को अपने साथ ले गई। बाद में उसे छोड़ दिया गया। बाद में कुलविंदर सिंह ने पुलिस लाइन से असलहा लाकर घटना को अंजाम दिया। हरजिंदर सिंह ने बताया कि झगड़े में उसने अपनी प|ी को छोड़ने की बात कही तो मां ने उसकी पहली प|ी की बेटी के बारे में कुछ उल्टा कह दिया था। फिर कुलविंदर सिंह गुस्से में अंधाधुंध फायरिंग करने लगा। फायरिंग में उसने तो भागकर जान बचाई। मगर हवलदार ने अपनी पत्नी राजविंदर कौर, सास सुखविंदर कौर, साला जसकरण और सालेहार इंद्रजीत कौर की गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। फायरिंग में जसकरण सिंह की 10 साल की बेटी जश्नप्रीत घायल हो गई थी। वहीं, ससुर और साल के 2 बच्चों ने पड़ोसियों के घर छिपकर अपनी जान बचाई थी। पंजाब | दैनिक भास्कर
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चंडीगढ़ में 17 मार्च को SGPC की बैठक:प्रधान धामी के इस्तीफे पर हो सकता है फैसला, नई नियुक्तियों पर भी चर्चा संभव शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की कार्यकारिणी की आगामी बैठक 17 मार्च को चंडीगढ़ में होगी। उम्मीद है कि इस बैठक में एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी के इस्तीफे पर फैसला लिया जा सकता है। एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क ने बैठक के एजेंडे के बारे में तो नहीं बताया, लेकिन संकेत दिए कि कमेटी से जुड़े मामलों पर चर्चा होगी। खास बात यह है कि इस बार बैठक अमृतसर की बजाय चंडीगढ़ में हुई है। चार बार एसजीपीसी के प्रधान रह चुके हरजिंदर सिंह धामी ने करीब एक महीने पहले नैतिक आधार पर इस्तीफे की पेशकश की थी। यह कदम तब उठाया गया जब पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने सोशल मीडिया पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह को तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार पद से हटाए जाने के तरीके की आलोचना की। इस्तीफे के बाद प्रधान धामी को मनाने की भी काफी कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस्तीफा वापस लेने से साफ इनकार कर दिया। प्रधान पद से इस्तीफे के अलावा उन्होंने 7 सदस्यीय समिति से भी इस्तीफा दे दिया है जिसका गठन श्री अकाल तख्त ने 2 दिसंबर को अकाली दल के पुनर्गठन के लिए किया था। पिछली बैठक और संभावित निर्णय 7 मार्च को हुई पिछली कार्यकारी बैठक में धामी के इस्तीफे पर निर्णय टाल दिया गया था, जबकि ज्ञानी रघबीर सिंह और ज्ञानी सुल्तान सिंह को तख्त श्री अकाल तख्त साहिब और श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार पद से हटा दिया गया था। ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज को तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार के रूप में नियुक्त करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। एसजीपीसी के निर्णय का विरोध करने वाले तीन सदस्यों ने साफ किया था कि एजेंडे में जत्थेदारों को बर्खास्त करने व नई नियुक्तियों के कोई जिक्र नहीं था। जानें एसजीपीसी के बारे में एसजीपीसी भारत में पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के गुरुद्वारों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार संगठन है। यह धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन, सुविधा रखरखाव और धार्मिक पहलुओं का प्रबंधन करता है, साथ ही ऐतिहासिक और पवित्र वस्तुओं का संरक्षण भी करता है। हरजिंदर सिंह धामी ने 29 नवंबर 2021 को एसजीपीसी के 31वें अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था। वे 1996 से होशियारपुर के शाम चुरासी निर्वाचन क्षेत्र से एसजीपीसी के सदस्य हैं।