डॉ. बीपी अशोक, जिन्होंने सपा के दिग्गज नेता आजम खान को 4 साल में 69 बार अरेस्ट किया। साढ़े तीन दशक की सर्विस में जहां भी तैनात रहे, कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया। इसी साल जनवरी में लखनऊ में फूड सेल के एसपी पद से रिटायर हुए। लखनऊ में जब भी बड़े आंदोलन-प्रदर्शन होते, इन्हें ही जिम्मेदारी दी जाती। वेस्ट यूपी के मेरठ में दो बार तैनात रहे, यहां जिला पंचायत सदस्य समेत कई बड़े मर्डर केस सॉल्व किए। पिता की वर्दी देख IPS बनने वाले डॉ. बीपी अशोक का बचपन कैसा था? कैसे उन्होंने खाकी वर्दी तक का सफर पूरा किया? उनके करियर की क्या कुछ बड़ी उपलब्धियां हैं? दैनिक भास्कर की स्पेशल सीरीज खाकी वर्दी में आज जानेंगे डॉ. बीपी अशोक की कहानी… यूपी के बुलंदशहर जिला मुख्यालय से 37 किमी दूर स्याना तहसील है। यहां सराय गांव में डॉ. देवी सिंह को हर कोई जानता था। वह यूपी पुलिस में आईजी थे। 31 जनवरी 1956 को डॉ. देवी सिंह पिता बने। उनकी पत्नी अरुणा अशोक ने बेटे का नाम रखा- भीम प्रिय। डॉ. बीपी सरोज अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते हैं, गांव की बात ही अलग थी। क्योंकि पिता जी पुलिस में थे, इसलिए सभी लोग हमारी फैमिली की रिस्पेक्ट करते थे। मां ने मेरा एडमिशन गांव के ही प्राथमिक स्कूल में कराया। यहां मेरा पूरा नाम भीम प्रिय अशोक लिखा गया। क्लास- 4 तक गांव के ही सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद पिताजी मुझे अलीगढ़ ले गए। यहां मैंने 1979 में नौरंगी लाल जीआईसी से हाईस्कूल पास किया। फिर मैं बरेली चला आया। यहां बरेली इंटर कॉलेज से 1981 में इंटर पास किया। मैंने मेरठ के कॉलेज से 1984 में बीए से ग्रेजुएशन किया और यहीं से 1986 में पोस्ट ग्रेजुएशन। पिताजी पुलिस अफसर थे। उन्हें देखकर हमेशा मुझे भी लगता था कि मैं भी अफसर बनूं। पापा मुझसे कहते- बाबू वर्दी पहनने के लिए बहुत पढ़ाई करनी होती है। मेहनत करनी होती है, तब सफलता मिलती है। यह बातें मुझे अच्छे से याद रहीं। एमए पूरा करने के बाद मैंने सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी थी। उस समय कोचिंग का कल्चर नहीं था। मैं यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। इसी बीच यूपी पीसीएस का फॉर्म आया और मैंने इसे भर दिया। एग्जाम दिया और इसमें क्वालिफाई हो गया। मेरा बैच 1992 था। पीपीएस बनने के बाद जब मैं घर पहुंचा, तब पूरे गांव में ढोल-नगाड़े बजाए गए। अपनी एजुकेशन के बारे में बताते हुए डॉ. बीपी अशोक कहते हैं- पीपीएस बनने के बाद मेरी सिविल सर्विसेज की तैयारी रुक गई। लेकिन, मन में था कि पढ़ाई जारी रखनी है। इसलिए मैंने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी से आगे की पढ़ाई की। यहां से 2001 में डी लिट की उपाधि ली। इसके बाद मैं 2008 में लंदन गया। यहां रायल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में से भी स्टडी की और डिप्लोमा लिया। डॉ. बीपी अशोक बताते हैं- वर्दी पहनकर कभी धर्म और जाति नहीं देखी जाती। कानून व्यवस्था संभालने के लिए कई लाठीचार्ज भी करना पड़ता है। मैं 5 जिलों- रामपुर, आगरा, सहारनपुर, मथुरा और लखनऊ में सीओ रहा। इसके बाद आगरा में एसपी सिटी रहा। लखनऊ में एसपी सिटी और एसपी वेस्ट और एसपी ईस्ट भी रहा। मेरठ में एसपी सिटी और एसपी क्राइम के पद पर तैनात रहा। मैं लंबे समय तक चुनार में तैनात रहा। मेरठ में शांति मार्च को लेकर जब भीड़ सड़कों पर उतरी, तब मैंने मोर्चा संभाला। इसके बाद मेरठ से ट्रांसफर हुआ। डॉ. बीपी अशोक कहते हैं- पुलिस करियर के 22 साल पूरे होने के बाद साल 2014 में मुझे प्रमोशन मिला। मैं पीपीएस अफसर से IPS अफसर बना। इस दौरान मैंने कई बड़े क्राइम केस सॉल्व किए। यह जानकर हैरानी हो सकती है कि किसी ने आजम खान जैसे नेता को 69 बार अरेस्ट किया हो। डॉ बीपी अशोक बताते हैं- 1999 से लेकर 2003 तक मैं रामपुर जिले में सीओ सिटी के पद पर रहा। रामपुर शहर सीओ सिटी में ही लगता था। रामपुर में उस समय धरना प्रदर्शन बहुत होते थे। सबसे ज्यादा कानून व्यवस्था आजम खान से ही बिगड़ने का डर रहता था। कभी बीच शहर में सैकड़ों लोगों को साथ लेकर जाम लगा दिया जाता, तो कभी धरनेबाजी होने लगती। कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आजम खान को समझाने का प्रयास करते थे, लेकिन उसके बाद भी वह लगातार भीड़ को बढ़ावा देते और भीड़ उग्र होने लगती थी। डॉ बीपी अशोक कहते हैं- मैं 4 साल से अधिक सीओ सिटी रामपुर रहा। अपने कार्यकाल में आजम खान को 69 बार अरेस्ट किया। इनमें सबसे ज्यादा बार 151 की कार्रवाई हुई। पुलिस का काम अरेस्ट करना होता था। कई बार आजम खान और उनके समर्थक पुलिस से भिड़ जाते थे। शांतिभंग में डीएम को पावर होती थी, जेल मतलब जेल… इसलिए कई बार आजम खान जेल भी गए। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। डॉ बीपी अशोक बताते हैं- आज का रामपुर बदल गया है। पहले तो कानून व्यवस्था में एक मिनट की ढील हो जाए, तो सड़कों पर गदर कट जाती थी। डॉ बीपी अशोक बताते हैं- 2001 में पूरे वेस्ट यूपी में भारतीय किसान यूनियन ने आंदोलन शुरू कर दिया। अलग-अलग जिलों में कार्यकर्ता धरना प्रदर्शन करने लगे। इस आंदोलन में किसानों ने कई जगहों पर सड़क जाम करना शुरू कर दिया। दिल्ली-लखनऊ रूट पर कई ट्रेनें भी रोकी गईं। उस समय भारतीय किसान यूनियन की कमान महेंद्र सिंह टिकैत के हाथों में थी। वह एक अच्छे किसान नेता रहे हैं, लेकिन अपनी मांगों को लेकर अडिग होने लगते। आंदोलन बढ़ता गया। इसके बाद महेंद्र सिंह टिकैत ने लखनऊ घेरने का ऐलान कर दिया। अलग-अलग जिलों में हाईवे पर पुलिस तैनात कर दी गई। इसमें भारी संख्या में किसान लखनऊ की तरफ कूच करने लगे। डॉ बीपी अशोक कहते हैं- मैं रामपुर में सीओ सिटी था। चारों तरफ से किसान लखनऊ की ओर बढ़ने लगे। रामपुर में पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरियर लगा दिए गए। लेकिन भाकियू अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत वेस्ट यूपी से पुलिस फोर्स को चकमा देकर रामपुर की सीमा में पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने सभी गाड़ियों की तलाशी ली। जैसे-तैसे महेंद्र सिंह टिकैट को रोक लिया गया। उन्हें समझाया गया कि आप किसान नेता हैं, बिना अनुमति लखनऊ नहीं जा सकते। अलग-अलग जगहों पर ट्रेनें भी रोकी गईं। लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का आदेश मिला था कि कोई भी जनहानि नहीं होनी चाहिए। किसानों को शांतिपूर्ण तरह से समझाया जाए। महेंद्र सिंह टिकैत ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस को महेंद्र सिंह टिकैत को अरेस्ट करना पड़ा। बाद में कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया। किसान आंदोलन में उग्र हुए किसानों को समझाया गया। रामपुर और आसपास के जिलों में बेहतर तरह से कानून व्यवस्था संभाली गई। डॉ बीपी अशोक बताते हैं- मुझे 2011 का केस याद है। मैं मेरठ में एसपी सिटी था। सितंबर की बात है। मेरठ के सदर बाजार इलाके में सेंट जोंस स्कूल के पास जिला पंचायत सदस्य संजय गुर्जर की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई। जैसे ही यह सूचना मेरे पास पहुंची। मैं तुरंत थाने पहुंचा। टीम को अलर्ट किया और 15 मिनट में क्राइम स्पॉट पर जा पहुंचा। यह हाईप्रोफाइल मर्डर का मामला था। मौके पर फोरेंसिक एक्सपर्ट भी बुलाए और क्राइम सीन को देखा। उस समय प्रेम प्रकाश SSP/DIG मेरठ थे। इस घटना के खुलासे के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। इस हत्याकांड की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई। शहर में व्यापारियों को कानून व्यवस्था का भरोसा दिया कि पुलिस घटना का जल्द खुलासा करेगी। केस को वर्कआउट किया। अपने मुखबिरों को एक्टिव किया। हमें पता चला कि संजय गुर्जर की हत्या शूटरों से कराई गई है। वारदात को उस समय अंजाम दिया गया, जब संजय गुर्जर अपने कार्यालय की तरफ जा रहे थे। केस की गहनता से जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि वेस्ट यूपी के बड़े अपराधियों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया है। मरने वाले संजय गुर्जर के परिजनों की तरफ से कुख्यात बदन सिंह बद्दो, चीकू बढ़ला और कपिल कटारिया व अन्य को नामजद किया। हमारी टीम ने साक्ष्य के आधार पर इस केस को सॉल्व करते हुए गिरफ्तारी की। इसमें जो भी शामिल थे, सभी के खिलाफ ने साक्ष्य के आधार पर चार्जशीट दाखिल की। डॉ बीपी अशोक कहते हैं कि अप्रैल 2018 में मेरठ में दलित हिंसा हो गई। इसमें एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर भीड़ ने पुलिस चौकी और अन्य जगहों पर आगजनी की। मेरठ की कचहरी में भी आगजनी की गई। इस हिंसा के बाद मुझे एसपी क्राइम मेरठ बनाया। हिंसा में जो भी शामिल रहे, उन्हें साक्ष्य के आधार पर जेल भेजा गया। लखनऊ में एसपी सिटी, एसपी वेस्ट और एसपी ईस्ट के पद पर भी रहा। जहां कई बार हजारों की भीड़ को संभालना पड़ा। कई आंदोलन को यहां शांतिपूर्ण तरह से संभाला। कई बार ऐसे भी मौके आए जब भीड़ उग्र होने लगी और उन्हें समझाकर शांत कराया। नौकरी से पहले की लव मैरिज डॉ बीपी अशोक बताते हैं- मैं मेरठ में पढ़ाई कर रहा था। 1989 में डॉ. मंजू अशोक से लव मैरिज की। डॉ. बीपी अशोक की बड़ी बेटी डॉ. अवलोकिता IRS अधिकारी हैं। जो इस समय इनकम टैक्स में डिप्टी कमिश्नर के पद पर हैं। वहीं बेटा सहर्स राज अशोक आईआईटी बीएचयू से पढ़ रहा है। छोटी बेटी प्रशस्ति लॉ करने के बाद एडवोकेट है। अभी सिविल सेवा की तैयारी कर रही है। अचीवमेंट्स ———————— खाकी वर्दी सीरीज की यह स्टोरी भी पढ़ें 37 लाख का पैकेज छोड़ IPS बने विक्रम दहिया: बुर्का पहन एसिड अटैक करने वाले को गोली मारी, पीलीभीत में युवाओं को ठगने वाली गैंग पकड़ी IPS विक्रम दहिया… यूपी पुलिस फोर्स के तेज तर्रार युवा अफसर हैं। महज 4 साल की सर्विस में कई क्राइम मिस्ट्री सॉल्व कर चुके हैं। बरेली में 4 साल के बच्चे के मर्डर केस में बड़ा खुलासा किया। बच्चे की मां को गिरफ्तार किया। इसके अलावा बुर्का पहन लेडी एडवोकेट पर एसिड अटैक करने वाले को दौड़ाकर गोली मारी। पढ़ें पूरी स्टोरी… डॉ. बीपी अशोक, जिन्होंने सपा के दिग्गज नेता आजम खान को 4 साल में 69 बार अरेस्ट किया। साढ़े तीन दशक की सर्विस में जहां भी तैनात रहे, कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया। इसी साल जनवरी में लखनऊ में फूड सेल के एसपी पद से रिटायर हुए। लखनऊ में जब भी बड़े आंदोलन-प्रदर्शन होते, इन्हें ही जिम्मेदारी दी जाती। वेस्ट यूपी के मेरठ में दो बार तैनात रहे, यहां जिला पंचायत सदस्य समेत कई बड़े मर्डर केस सॉल्व किए। पिता की वर्दी देख IPS बनने वाले डॉ. बीपी अशोक का बचपन कैसा था? कैसे उन्होंने खाकी वर्दी तक का सफर पूरा किया? उनके करियर की क्या कुछ बड़ी उपलब्धियां हैं? दैनिक भास्कर की स्पेशल सीरीज खाकी वर्दी में आज जानेंगे डॉ. बीपी अशोक की कहानी… यूपी के बुलंदशहर जिला मुख्यालय से 37 किमी दूर स्याना तहसील है। यहां सराय गांव में डॉ. देवी सिंह को हर कोई जानता था। वह यूपी पुलिस में आईजी थे। 31 जनवरी 1956 को डॉ. देवी सिंह पिता बने। उनकी पत्नी अरुणा अशोक ने बेटे का नाम रखा- भीम प्रिय। डॉ. बीपी सरोज अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते हैं, गांव की बात ही अलग थी। क्योंकि पिता जी पुलिस में थे, इसलिए सभी लोग हमारी फैमिली की रिस्पेक्ट करते थे। मां ने मेरा एडमिशन गांव के ही प्राथमिक स्कूल में कराया। यहां मेरा पूरा नाम भीम प्रिय अशोक लिखा गया। क्लास- 4 तक गांव के ही सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद पिताजी मुझे अलीगढ़ ले गए। यहां मैंने 1979 में नौरंगी लाल जीआईसी से हाईस्कूल पास किया। फिर मैं बरेली चला आया। यहां बरेली इंटर कॉलेज से 1981 में इंटर पास किया। मैंने मेरठ के कॉलेज से 1984 में बीए से ग्रेजुएशन किया और यहीं से 1986 में पोस्ट ग्रेजुएशन। पिताजी पुलिस अफसर थे। उन्हें देखकर हमेशा मुझे भी लगता था कि मैं भी अफसर बनूं। पापा मुझसे कहते- बाबू वर्दी पहनने के लिए बहुत पढ़ाई करनी होती है। मेहनत करनी होती है, तब सफलता मिलती है। यह बातें मुझे अच्छे से याद रहीं। एमए पूरा करने के बाद मैंने सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी थी। उस समय कोचिंग का कल्चर नहीं था। मैं यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। इसी बीच यूपी पीसीएस का फॉर्म आया और मैंने इसे भर दिया। एग्जाम दिया और इसमें क्वालिफाई हो गया। मेरा बैच 1992 था। पीपीएस बनने के बाद जब मैं घर पहुंचा, तब पूरे गांव में ढोल-नगाड़े बजाए गए। अपनी एजुकेशन के बारे में बताते हुए डॉ. बीपी अशोक कहते हैं- पीपीएस बनने के बाद मेरी सिविल सर्विसेज की तैयारी रुक गई। लेकिन, मन में था कि पढ़ाई जारी रखनी है। इसलिए मैंने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी से आगे की पढ़ाई की। यहां से 2001 में डी लिट की उपाधि ली। इसके बाद मैं 2008 में लंदन गया। यहां रायल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में से भी स्टडी की और डिप्लोमा लिया। डॉ. बीपी अशोक बताते हैं- वर्दी पहनकर कभी धर्म और जाति नहीं देखी जाती। कानून व्यवस्था संभालने के लिए कई लाठीचार्ज भी करना पड़ता है। मैं 5 जिलों- रामपुर, आगरा, सहारनपुर, मथुरा और लखनऊ में सीओ रहा। इसके बाद आगरा में एसपी सिटी रहा। लखनऊ में एसपी सिटी और एसपी वेस्ट और एसपी ईस्ट भी रहा। मेरठ में एसपी सिटी और एसपी क्राइम के पद पर तैनात रहा। मैं लंबे समय तक चुनार में तैनात रहा। मेरठ में शांति मार्च को लेकर जब भीड़ सड़कों पर उतरी, तब मैंने मोर्चा संभाला। इसके बाद मेरठ से ट्रांसफर हुआ। डॉ. बीपी अशोक कहते हैं- पुलिस करियर के 22 साल पूरे होने के बाद साल 2014 में मुझे प्रमोशन मिला। मैं पीपीएस अफसर से IPS अफसर बना। इस दौरान मैंने कई बड़े क्राइम केस सॉल्व किए। यह जानकर हैरानी हो सकती है कि किसी ने आजम खान जैसे नेता को 69 बार अरेस्ट किया हो। डॉ बीपी अशोक बताते हैं- 1999 से लेकर 2003 तक मैं रामपुर जिले में सीओ सिटी के पद पर रहा। रामपुर शहर सीओ सिटी में ही लगता था। रामपुर में उस समय धरना प्रदर्शन बहुत होते थे। सबसे ज्यादा कानून व्यवस्था आजम खान से ही बिगड़ने का डर रहता था। कभी बीच शहर में सैकड़ों लोगों को साथ लेकर जाम लगा दिया जाता, तो कभी धरनेबाजी होने लगती। कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी आजम खान को समझाने का प्रयास करते थे, लेकिन उसके बाद भी वह लगातार भीड़ को बढ़ावा देते और भीड़ उग्र होने लगती थी। डॉ बीपी अशोक कहते हैं- मैं 4 साल से अधिक सीओ सिटी रामपुर रहा। अपने कार्यकाल में आजम खान को 69 बार अरेस्ट किया। इनमें सबसे ज्यादा बार 151 की कार्रवाई हुई। पुलिस का काम अरेस्ट करना होता था। कई बार आजम खान और उनके समर्थक पुलिस से भिड़ जाते थे। शांतिभंग में डीएम को पावर होती थी, जेल मतलब जेल… इसलिए कई बार आजम खान जेल भी गए। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। डॉ बीपी अशोक बताते हैं- आज का रामपुर बदल गया है। पहले तो कानून व्यवस्था में एक मिनट की ढील हो जाए, तो सड़कों पर गदर कट जाती थी। डॉ बीपी अशोक बताते हैं- 2001 में पूरे वेस्ट यूपी में भारतीय किसान यूनियन ने आंदोलन शुरू कर दिया। अलग-अलग जिलों में कार्यकर्ता धरना प्रदर्शन करने लगे। इस आंदोलन में किसानों ने कई जगहों पर सड़क जाम करना शुरू कर दिया। दिल्ली-लखनऊ रूट पर कई ट्रेनें भी रोकी गईं। उस समय भारतीय किसान यूनियन की कमान महेंद्र सिंह टिकैत के हाथों में थी। वह एक अच्छे किसान नेता रहे हैं, लेकिन अपनी मांगों को लेकर अडिग होने लगते। आंदोलन बढ़ता गया। इसके बाद महेंद्र सिंह टिकैत ने लखनऊ घेरने का ऐलान कर दिया। अलग-अलग जिलों में हाईवे पर पुलिस तैनात कर दी गई। इसमें भारी संख्या में किसान लखनऊ की तरफ कूच करने लगे। डॉ बीपी अशोक कहते हैं- मैं रामपुर में सीओ सिटी था। चारों तरफ से किसान लखनऊ की ओर बढ़ने लगे। रामपुर में पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरियर लगा दिए गए। लेकिन भाकियू अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत वेस्ट यूपी से पुलिस फोर्स को चकमा देकर रामपुर की सीमा में पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने सभी गाड़ियों की तलाशी ली। जैसे-तैसे महेंद्र सिंह टिकैट को रोक लिया गया। उन्हें समझाया गया कि आप किसान नेता हैं, बिना अनुमति लखनऊ नहीं जा सकते। अलग-अलग जगहों पर ट्रेनें भी रोकी गईं। लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का आदेश मिला था कि कोई भी जनहानि नहीं होनी चाहिए। किसानों को शांतिपूर्ण तरह से समझाया जाए। महेंद्र सिंह टिकैत ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस को महेंद्र सिंह टिकैत को अरेस्ट करना पड़ा। बाद में कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया। किसान आंदोलन में उग्र हुए किसानों को समझाया गया। रामपुर और आसपास के जिलों में बेहतर तरह से कानून व्यवस्था संभाली गई। डॉ बीपी अशोक बताते हैं- मुझे 2011 का केस याद है। मैं मेरठ में एसपी सिटी था। सितंबर की बात है। मेरठ के सदर बाजार इलाके में सेंट जोंस स्कूल के पास जिला पंचायत सदस्य संजय गुर्जर की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई। जैसे ही यह सूचना मेरे पास पहुंची। मैं तुरंत थाने पहुंचा। टीम को अलर्ट किया और 15 मिनट में क्राइम स्पॉट पर जा पहुंचा। यह हाईप्रोफाइल मर्डर का मामला था। मौके पर फोरेंसिक एक्सपर्ट भी बुलाए और क्राइम सीन को देखा। उस समय प्रेम प्रकाश SSP/DIG मेरठ थे। इस घटना के खुलासे के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। इस हत्याकांड की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई। शहर में व्यापारियों को कानून व्यवस्था का भरोसा दिया कि पुलिस घटना का जल्द खुलासा करेगी। केस को वर्कआउट किया। अपने मुखबिरों को एक्टिव किया। हमें पता चला कि संजय गुर्जर की हत्या शूटरों से कराई गई है। वारदात को उस समय अंजाम दिया गया, जब संजय गुर्जर अपने कार्यालय की तरफ जा रहे थे। केस की गहनता से जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि वेस्ट यूपी के बड़े अपराधियों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया है। मरने वाले संजय गुर्जर के परिजनों की तरफ से कुख्यात बदन सिंह बद्दो, चीकू बढ़ला और कपिल कटारिया व अन्य को नामजद किया। हमारी टीम ने साक्ष्य के आधार पर इस केस को सॉल्व करते हुए गिरफ्तारी की। इसमें जो भी शामिल थे, सभी के खिलाफ ने साक्ष्य के आधार पर चार्जशीट दाखिल की। डॉ बीपी अशोक कहते हैं कि अप्रैल 2018 में मेरठ में दलित हिंसा हो गई। इसमें एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर भीड़ ने पुलिस चौकी और अन्य जगहों पर आगजनी की। मेरठ की कचहरी में भी आगजनी की गई। इस हिंसा के बाद मुझे एसपी क्राइम मेरठ बनाया। हिंसा में जो भी शामिल रहे, उन्हें साक्ष्य के आधार पर जेल भेजा गया। लखनऊ में एसपी सिटी, एसपी वेस्ट और एसपी ईस्ट के पद पर भी रहा। जहां कई बार हजारों की भीड़ को संभालना पड़ा। कई आंदोलन को यहां शांतिपूर्ण तरह से संभाला। कई बार ऐसे भी मौके आए जब भीड़ उग्र होने लगी और उन्हें समझाकर शांत कराया। नौकरी से पहले की लव मैरिज डॉ बीपी अशोक बताते हैं- मैं मेरठ में पढ़ाई कर रहा था। 1989 में डॉ. मंजू अशोक से लव मैरिज की। डॉ. बीपी अशोक की बड़ी बेटी डॉ. अवलोकिता IRS अधिकारी हैं। जो इस समय इनकम टैक्स में डिप्टी कमिश्नर के पद पर हैं। वहीं बेटा सहर्स राज अशोक आईआईटी बीएचयू से पढ़ रहा है। छोटी बेटी प्रशस्ति लॉ करने के बाद एडवोकेट है। अभी सिविल सेवा की तैयारी कर रही है। अचीवमेंट्स ———————— खाकी वर्दी सीरीज की यह स्टोरी भी पढ़ें 37 लाख का पैकेज छोड़ IPS बने विक्रम दहिया: बुर्का पहन एसिड अटैक करने वाले को गोली मारी, पीलीभीत में युवाओं को ठगने वाली गैंग पकड़ी IPS विक्रम दहिया… यूपी पुलिस फोर्स के तेज तर्रार युवा अफसर हैं। महज 4 साल की सर्विस में कई क्राइम मिस्ट्री सॉल्व कर चुके हैं। बरेली में 4 साल के बच्चे के मर्डर केस में बड़ा खुलासा किया। बच्चे की मां को गिरफ्तार किया। इसके अलावा बुर्का पहन लेडी एडवोकेट पर एसिड अटैक करने वाले को दौड़ाकर गोली मारी। पढ़ें पूरी स्टोरी… उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर
पिता को वर्दी में देख IPS बने डॉ. बीपी अशोक:आजम खान को 69 बार अरेस्ट किया, जिपं सदस्य का मर्डर केस निपटाया
