^पहली निराशा में हार न मानना या एक असफलता के बाद हार न मानना एक महत्वपूर्ण जीवन कौशल है। आत्मविश्वास का मतलब हर समय हर चीज में सफल होना नहीं है, बल्कि कोशिश करते रहने के लिए पर्याप्त लचीला होना और अगर आप सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं तो परेशान न होना है। खुद की रुचियों की खोज करने से बच्चों को पहचान की भावना विकसित करने में मदद मिल सकती है, जो आत्मविश्वास बनाने के लिए आवश्यक है। बेशक, उनकी प्रतिभाओं को बढ़ते देखना उनके आत्मसम्मान को भी बहुत बढ़ावा देगा। बड़े और छोटे लक्ष्यों को स्पष्ट करना और उन्हें हासिल करना बच्चों को मजबूत महसूस कराता है। बच्चे को उन चीजों की सूची बनाने के लिए प्रोत्साहित करके इच्छाओं और सपनों को क्रियाशील लक्ष्यों में बदलने में मदद करें जिन्हें वे हासिल करना चाहते हैं। बच्चों की उपलब्धियों के लिए उनकी प्रशंसा करना बहुत अच्छा है, लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि आप उन्हें बताएं कि परिणाम की परवाह किए बिना उनके प्रयासों पर गर्व है। सोनम शर्मा, लाइफ कोच भास्कर न्यूज| लुधियाना जन्म से ही बच्चे बहुत तेजी से नए कौशल सीखते हैं और उन नई क्षमताओं के साथ, वे उनका उपयोग करने का आत्मविश्वास भी हासिल करते हैं। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनका आत्मविश्वास कौशल जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है। सफल होने के लिए बच्चों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने की जरूरत होती है। उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि अगर वे किसी चीज में सफल नहीं होते हैं, तो निराश होने की जरूरत नहीं होती है। महारत हासिल करने और असफलता से उबरने से ही उनमें स्वस्थ आत्मविश्वास विकसित होता है। बच्चों के लिए आत्मविश्वासी होना बहुत जरूरी होता है। ऐसे बच्चे ही आगे चलकर जीवन में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। एक आत्मविश्वासी बच्चा हर परिस्थिति में खुलकर अपनी बात रख पाता है। ऐसा बच्चा अपने आप पर भरोसा रखता है और असफल होने पर भी हिम्मत नहीं हारता, लेकिन कुछ माता पिता अपने बच्चों के शर्मीले व्यवहार को लेकर चिंता में रहते हैं। ऐसे माता पिता के लिए एक्सपर्ट बता रहे हैं कुछ खास बातें, जिसके माध्यम से बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने को मदद मिलेगी। बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है कि माता-पिता खुद को उनका आदर्श बनाएं। बच्चे अपने माता-पिता से ही सीखते हैं कि जीवन में कैसे आगे बढ़ना है, इसलिए, माता-पिता को हर स्थिति में आत्मविश्वास से भरपूर रहना चाहिए। बच्चों को गलतियां करने का अधिकार है और उनकी गलतियों से सीखने का भी अवसर देना जरूरी है। माता-पिता को बच्चों पर चिल्लाने या डांटने की बजाय आगे के लिए उनका हौंसला बढ़ाना चाहिए। बच्चों को यह समझने में मदद करें कि हर कोई गलतियां करता है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उनसे सीखें। बच्चों के लिए विविधता लाना अच्छा है। नए कौशल हासिल करने से बच्चे सक्षम और आश्वस्त महसूस करते हैं कि वे जो भी उनके रास्ते में आता है उससे निपट सकते हैं। बच्चे को आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं, तो उसको अपना काम खुद करने दीजिए। दूसरों पर निर्भर ना होने दें। बच्चों को ऐसी गतिविधियों में शामिल होने में मदद करें जो उन्हें सहज महसूस कराएं और बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त आत्मविश्वास दें।- पायल सचदेवा, लाइफ कोच ^पहली निराशा में हार न मानना या एक असफलता के बाद हार न मानना एक महत्वपूर्ण जीवन कौशल है। आत्मविश्वास का मतलब हर समय हर चीज में सफल होना नहीं है, बल्कि कोशिश करते रहने के लिए पर्याप्त लचीला होना और अगर आप सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं तो परेशान न होना है। खुद की रुचियों की खोज करने से बच्चों को पहचान की भावना विकसित करने में मदद मिल सकती है, जो आत्मविश्वास बनाने के लिए आवश्यक है। बेशक, उनकी प्रतिभाओं को बढ़ते देखना उनके आत्मसम्मान को भी बहुत बढ़ावा देगा। बड़े और छोटे लक्ष्यों को स्पष्ट करना और उन्हें हासिल करना बच्चों को मजबूत महसूस कराता है। बच्चे को उन चीजों की सूची बनाने के लिए प्रोत्साहित करके इच्छाओं और सपनों को क्रियाशील लक्ष्यों में बदलने में मदद करें जिन्हें वे हासिल करना चाहते हैं। बच्चों की उपलब्धियों के लिए उनकी प्रशंसा करना बहुत अच्छा है, लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि आप उन्हें बताएं कि परिणाम की परवाह किए बिना उनके प्रयासों पर गर्व है। सोनम शर्मा, लाइफ कोच भास्कर न्यूज| लुधियाना जन्म से ही बच्चे बहुत तेजी से नए कौशल सीखते हैं और उन नई क्षमताओं के साथ, वे उनका उपयोग करने का आत्मविश्वास भी हासिल करते हैं। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनका आत्मविश्वास कौशल जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है। सफल होने के लिए बच्चों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने की जरूरत होती है। उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि अगर वे किसी चीज में सफल नहीं होते हैं, तो निराश होने की जरूरत नहीं होती है। महारत हासिल करने और असफलता से उबरने से ही उनमें स्वस्थ आत्मविश्वास विकसित होता है। बच्चों के लिए आत्मविश्वासी होना बहुत जरूरी होता है। ऐसे बच्चे ही आगे चलकर जीवन में सफलता प्राप्त कर पाते हैं। एक आत्मविश्वासी बच्चा हर परिस्थिति में खुलकर अपनी बात रख पाता है। ऐसा बच्चा अपने आप पर भरोसा रखता है और असफल होने पर भी हिम्मत नहीं हारता, लेकिन कुछ माता पिता अपने बच्चों के शर्मीले व्यवहार को लेकर चिंता में रहते हैं। ऐसे माता पिता के लिए एक्सपर्ट बता रहे हैं कुछ खास बातें, जिसके माध्यम से बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने को मदद मिलेगी। बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है कि माता-पिता खुद को उनका आदर्श बनाएं। बच्चे अपने माता-पिता से ही सीखते हैं कि जीवन में कैसे आगे बढ़ना है, इसलिए, माता-पिता को हर स्थिति में आत्मविश्वास से भरपूर रहना चाहिए। बच्चों को गलतियां करने का अधिकार है और उनकी गलतियों से सीखने का भी अवसर देना जरूरी है। माता-पिता को बच्चों पर चिल्लाने या डांटने की बजाय आगे के लिए उनका हौंसला बढ़ाना चाहिए। बच्चों को यह समझने में मदद करें कि हर कोई गलतियां करता है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उनसे सीखें। बच्चों के लिए विविधता लाना अच्छा है। नए कौशल हासिल करने से बच्चे सक्षम और आश्वस्त महसूस करते हैं कि वे जो भी उनके रास्ते में आता है उससे निपट सकते हैं। बच्चे को आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं, तो उसको अपना काम खुद करने दीजिए। दूसरों पर निर्भर ना होने दें। बच्चों को ऐसी गतिविधियों में शामिल होने में मदद करें जो उन्हें सहज महसूस कराएं और बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त आत्मविश्वास दें।- पायल सचदेवा, लाइफ कोच पंजाब | दैनिक भास्कर
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पादरी बजिंदर केस में मोहाली कोर्ट सुनाएगा फैसला:जीरकपुर की महिला ने लगाए थे रेप के आरोप, 7 लोग नामजद हैं चमत्कार के जरिए बीमारियों को ठीक करने का दावा करने वाले जालंधर के पादरी बजिंदर सिंह की जीरकपुर की महिला से यौन उत्पीड़न करने के मामले में आज मोहाली कोर्ट में सुनवाई होगी। बता दें कि युवती से रेप करने के मामले में नामजद पास्टर बजिंदर सिंह सोमवार को अदालत में पेश हुए थे। उस दिन की पेशी के बाद कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। आज यानी शुक्रवार (28 मार्च) को केस में फैसला सुनाया जाएगा। बता दें कि जीरकपुर पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर पादरी बजिंदर सिंह समेत कुल 7 लोगों पर केस दर्ज किया था। केस में पादरी के साथ अकबर भट्टी, राजेश चौधरी, सुच्चा सिंह, जतिंदर कुमार, सितार अली और संदीप उर्फ पहलवान को नामजद किया गया था। साथ ही केस में आईपीसी की धारा 376, 420, 354, 294, 323, 506, 148 और 149 लगाई गई थी। इस मामले में पादरी की गिरफ्तारी पहले भी हो चुकी है। पादरी ने चंडीगढ़ ऑफिस में मोहाली की महिला से की थी मारपीट जानकारी के अनुसार पादरी बजिंदर सिंह का उक्त वीडियो 16 मार्च (रविवार) को तेजी से वायरल होने लगा था। जिसमें इस VIDEO में बजिंदर सिंह एक महिला को थप्पड़ मारता दिख रहा था। इससे पहले उसने बच्चे के साथ बैठी इस महिला के मुंह पर कॉपी भी फेंक कर मारी थी। वायरल हुआ VIDEO 14 फरवरी का था। घटना बजिंदर सिंह के चंडीगढ़ ऑफिस में हुई थी। वीडियो सामने आने के बाद पता चला कि जिस महिला के साथ मारपीट हुई, वह मोहाली की रहने वाली थी। जोकि पादरी के पास काम करती थी। उसी के साथ ये मारपीट की गई थी। महिला ने गलत हरकत के आरोप लगाए थे बजिंदर सिंह पर महिला से यौन उत्पीड़न का मामला चल रहा है। महिला ने पुलिस से कहा था कि ताजपुर गांव में ‘द चर्च ऑफ ग्लोरी एंड विस्डम’ के पादरी बजिंदर सिंह ने जालंधर में उसके साथ गलत हरकतें की। बजिंदर सिंह ने उसका फोन नंबर लेकर अश्लील मैसेज भेजने शुरू कर दिए। उसे चर्च में अकेले केबिन में बैठाना शुरू कर दिया। वहां वह उसके साथ गलत व्यवहार करता था। कपूरथला पुलिस ने मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर दी थी। इस केस की जांच SIT कर रही है। इसी मामले में युवती के बयान दर्ज में दर्ज करवाए गए हैं।

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