मेडिकल कॉलेजों में मान्यता के लिए फिर से होगी अपील:नए सत्र से पढ़ाई शुरू करने पर जोर,सीएम ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से की बात

मेडिकल कॉलेजों में मान्यता के लिए फिर से होगी अपील:नए सत्र से पढ़ाई शुरू करने पर जोर,सीएम ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से की बात

यूपी के 13 नए मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई को लेकर NMC से मान्यता न मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में खुद सीएम योगी ने हस्तक्षेप किया है। सीएम ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से 13 मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत और NMC की मान्यता को लेकर बात कही है। चिकित्सा शिक्षा विभाग इस मामले की फिर से अपील करने की तैयारी कर रहा हैं। वहीं, विभागीय सूत्रों की माने तो प्रदेश के 13 जिलों में नए मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत को NMC द्वारा अनुमति मिलने में आए अवरोध के पीछे मानकों में अचानक हुए बदलाव बड़ी वजह हैं। सरकार का दावा हैं कि प्रदेश में 13 नए स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों की परिकल्पना NMC के 2020 में निर्धारित मानकों के आधार पर की थी। इन्हीं के आधार पर साल 2023 में NMC से LOP मांगी गई थी। मकसद 2024-25 में शैक्षिक सत्र प्रारंभ करना था। पर झटका तब लगा जब NMC ने कॉलेजों में मान्यता देने से इनकार कर दिया। कहा जा रहा हैं कि NMC वर्ष MBBS कोर्स के लिए 2023 में जारी नए मानकों के आधार पर निर्णय ले रही है। यही कारण हैं कि इन मेडिकल कॉलेजों को NMC से मान्यता नही मिल पाई हैं। यही कारण हैं कि मान्यता को लेकर अन्य विकल्प तलाशे जा रहे हैं। सभी राज्य स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों द्वारा NMC एक्ट 2019 के अनुच्छेद 28 (5) के अधीन अपील भी की गई हैं। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं आगे बढ़कर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से वार्ता करते हुए इन मेडिकल कॉलेजों में 2024-25 के शैक्षिक सत्र को चलाने के लिए वर्ष 2020 में निर्धारित मानकों के आधार पर कार्रवाई की बात कही हैं। राज्य सरकार ने 13 नए मेडिकल कॉलेजों की NMC के 2020 में निर्धारित मानकों के आधार पर की थी। इन्हीं के आधार पर साल 2023 में NMC से एलओपी मांगी गई थी। जिससे कि साल 2024-25 में शैक्षिक सत्र प्रारम्भ हो सके। इस बीच NMC द्वारा वर्ष 2023 में MBBS कोर्स के लिए नए मानक निर्धारित कर दिए गये। इस पर योगी सरकार ने उसी समय NMC को पत्र लिखकर इन 13 नए मेडिकल कालेजों में पुराने मानकों के आधार पर निरीक्षण कराने का आग्रह किया था। न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि, कई अन्य राज्यों और निजी मेडिकल कालेजों द्वारा भी NMC से वर्ष 2023 में निर्धारित मानकों को स्थगित करने के लिए अनुरोध किया गया था। नए मानकों में चिकित्सा शिक्षकों और अवस्थापना के मानक वर्ष 2020 के निर्धारित मानकों से कहीं अधिक हैं। विभिन्न स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों द्वारा चिकित्सा शिक्षकों के पदों को भरने के लिए पूरी कोशिश की गई। राज्य सरकार द्वारा संविदा पर चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति का अधिकार स्थानीय स्तर पर प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में गठित कमेटी को दिया गया और नियमित चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 4 कमेटी गठित की गई। शिक्षकों के चयन की चल रही कार्रवाई
NMC के 2 मई 2024 के नोटिस के समय प्रदेश में लोकसभा चुनाव के कहते आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू थी। आदर्श चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के तुरंत बाद फिर चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी करके आवेदन मांगे गये और वर्तमान में चयन की कार्रवाई चल रही है। हालांकि इतने कम समय में इतने कड़े मानकों को पूर्ण किये जाने में समस्या है। मानकों में हुए ये बदलाव
साल 2020 के NMC के पुराने मानकों में 50 चिकित्सा शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि वर्ष 2023 के NMC के मानकों में 86 चिकित्सा शिक्षकों की जरूरत है। इसी प्रकार से जहाँ वर्ष 2020 के NMC के पुराने मानकों में 24 सीनियर रेजिडेंट की आवश्यकता है, वहीं वर्ष 2023 के के मानकों में 40 सीनियर रेजिडेंट चाहिए होंगे। इसी तरह, पुराने मानकों में प्रोफेसर के 6 पदों की आवश्यकता थी वहीं साल 2023 के नए मानकों में 17 प्रोफेसरों की अपरिहार्यता है। यूपी के 13 नए मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई को लेकर NMC से मान्यता न मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में खुद सीएम योगी ने हस्तक्षेप किया है। सीएम ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से 13 मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत और NMC की मान्यता को लेकर बात कही है। चिकित्सा शिक्षा विभाग इस मामले की फिर से अपील करने की तैयारी कर रहा हैं। वहीं, विभागीय सूत्रों की माने तो प्रदेश के 13 जिलों में नए मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत को NMC द्वारा अनुमति मिलने में आए अवरोध के पीछे मानकों में अचानक हुए बदलाव बड़ी वजह हैं। सरकार का दावा हैं कि प्रदेश में 13 नए स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों की परिकल्पना NMC के 2020 में निर्धारित मानकों के आधार पर की थी। इन्हीं के आधार पर साल 2023 में NMC से LOP मांगी गई थी। मकसद 2024-25 में शैक्षिक सत्र प्रारंभ करना था। पर झटका तब लगा जब NMC ने कॉलेजों में मान्यता देने से इनकार कर दिया। कहा जा रहा हैं कि NMC वर्ष MBBS कोर्स के लिए 2023 में जारी नए मानकों के आधार पर निर्णय ले रही है। यही कारण हैं कि इन मेडिकल कॉलेजों को NMC से मान्यता नही मिल पाई हैं। यही कारण हैं कि मान्यता को लेकर अन्य विकल्प तलाशे जा रहे हैं। सभी राज्य स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों द्वारा NMC एक्ट 2019 के अनुच्छेद 28 (5) के अधीन अपील भी की गई हैं। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं आगे बढ़कर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से वार्ता करते हुए इन मेडिकल कॉलेजों में 2024-25 के शैक्षिक सत्र को चलाने के लिए वर्ष 2020 में निर्धारित मानकों के आधार पर कार्रवाई की बात कही हैं। राज्य सरकार ने 13 नए मेडिकल कॉलेजों की NMC के 2020 में निर्धारित मानकों के आधार पर की थी। इन्हीं के आधार पर साल 2023 में NMC से एलओपी मांगी गई थी। जिससे कि साल 2024-25 में शैक्षिक सत्र प्रारम्भ हो सके। इस बीच NMC द्वारा वर्ष 2023 में MBBS कोर्स के लिए नए मानक निर्धारित कर दिए गये। इस पर योगी सरकार ने उसी समय NMC को पत्र लिखकर इन 13 नए मेडिकल कालेजों में पुराने मानकों के आधार पर निरीक्षण कराने का आग्रह किया था। न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि, कई अन्य राज्यों और निजी मेडिकल कालेजों द्वारा भी NMC से वर्ष 2023 में निर्धारित मानकों को स्थगित करने के लिए अनुरोध किया गया था। नए मानकों में चिकित्सा शिक्षकों और अवस्थापना के मानक वर्ष 2020 के निर्धारित मानकों से कहीं अधिक हैं। विभिन्न स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों द्वारा चिकित्सा शिक्षकों के पदों को भरने के लिए पूरी कोशिश की गई। राज्य सरकार द्वारा संविदा पर चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति का अधिकार स्थानीय स्तर पर प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में गठित कमेटी को दिया गया और नियमित चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 4 कमेटी गठित की गई। शिक्षकों के चयन की चल रही कार्रवाई
NMC के 2 मई 2024 के नोटिस के समय प्रदेश में लोकसभा चुनाव के कहते आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू थी। आदर्श चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के तुरंत बाद फिर चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी करके आवेदन मांगे गये और वर्तमान में चयन की कार्रवाई चल रही है। हालांकि इतने कम समय में इतने कड़े मानकों को पूर्ण किये जाने में समस्या है। मानकों में हुए ये बदलाव
साल 2020 के NMC के पुराने मानकों में 50 चिकित्सा शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि वर्ष 2023 के NMC के मानकों में 86 चिकित्सा शिक्षकों की जरूरत है। इसी प्रकार से जहाँ वर्ष 2020 के NMC के पुराने मानकों में 24 सीनियर रेजिडेंट की आवश्यकता है, वहीं वर्ष 2023 के के मानकों में 40 सीनियर रेजिडेंट चाहिए होंगे। इसी तरह, पुराने मानकों में प्रोफेसर के 6 पदों की आवश्यकता थी वहीं साल 2023 के नए मानकों में 17 प्रोफेसरों की अपरिहार्यता है।   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर