मेरठ हत्याकांड, बच्ची की कस्टडी पर 2 परिवारों में विवाद:मुस्कान के पिता बोले- पीहू को नहीं दूंगा; सौरभ के भाई ने कहा- कोर्ट जाएंगे

मेरठ हत्याकांड, बच्ची की कस्टडी पर 2 परिवारों में विवाद:मुस्कान के पिता बोले- पीहू को नहीं दूंगा; सौरभ के भाई ने कहा- कोर्ट जाएंगे

हमें सौरभ के हिस्से की प्रॉपटी या उसके बैंक बैलेंस से कोई लेना-देना नहीं। मैं लिखकर देने को तैयार हूं, बस पीहू को अपने से अलग नहीं होने देंगे। – प्रमोद रस्तोगी, मुस्कान के पिता मेरी बेटी नहीं है। पीहू सौरभ की बच्ची है, मैं उसका चाचा हूं। मैं पीहू को सही तरह से पाल सकता हूं। वह हमारे पास होगी, तो सौरभ की कमी महसूस नहीं होगी। हम कोर्ट जाएंगे। – रोहित उर्फ बबलू, सौरभ के बड़े भाई यह दो बयान बता रहे हैं कि सौरभ मर्डर केस में अचानक पीहू की परवरिश का विवाद खड़ा हो गया है। अब तक सौरभ और मुस्कान के परिवार के बीच लव मैरिज, सौरभ के दूसरे मकान में रहने और फिर कत्ल में मुस्कान के आरोपी बनने को लेकर विवाद हुए। दावों और आरोपों का दौर भी चला। मगर इसमें पीहू का जिक्र नहीं था। ऐसा पहली बार हो रहा है कि दोनों परिवार पीहू की कस्टडी चाहते हैं। सौरभ की हत्या के बाद से 8 साल की पीहू की परवरिश उसके नाना प्रमोद रस्तोगी और नानी कविता कर रहे हैं। उन्होंने पीहू की मानसिक स्थिति को देखते हुए मीडिया से उसे दूर रखा है। मुस्कान और सौरभ के बिना पीहू कैसे दिन बिता रही है? वह ज्यादा परेशान तो नहीं है? वह नाना-नानी के घर ठीक से रह रही है या नहीं? यह देखने के लिए दैनिक भास्कर की टीम प्रमोद के घर ब्रह्मपुरी पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… पहले पीहू की बात… नाना-नानी बोले- पीहू के साथ हम भी बच्चे बन गए
ब्रह्मपुरी के घर पर प्रमोद और कविता दोनों से मुलाकात हुई। हमने पूछा- पीहू कैसी है? प्रमोद कहते हैं- पीहू समय-समय पर अपने मम्मी-पापा को याद करती है। पूछती है कि वह दोनों कब आएंगे? कविता कहती हैं- हम उसको बहलाते हैं। नए खिलौने लाए हैं, ताकि वह मां-पापा को कम याद करे। वह दिनभर एक कमरे से दूसरे कमरे के बीच दौड़ती रहती है। टीवी पर कार्टून देखती है। दूध पीना, खाना खाने में कभी जिद नहीं करती। मगर बच्चा तो बच्चा होता है, उसके लिए हम दोनों भी बच्चे बन जाते हैं। अब पीहू की कस्टडी पर नाना-नानी से बात… नाना ने कहा- उन्हें पीहू में सौरभ कम, मुस्कान ज्यादा दिखेगी
मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी कहते हैं- मैं आपको 100% गारंटी देता हूं। आज वह लोग (सौरभ के भाई) पीहू की कस्टडी मांग रहे हैं। उसको पालना चाहते हैं, ये अच्छी बात है। मगर कल उन्हें पीहू के अंदर सौरभ कम, मुस्कान ज्यादा दिखाई देगी। वह उसके साथ व्यवहार चाहकर भी ठीक नहीं रख पाएंगे। इसलिए यही ठीक होगा कि पीहू को हम अपने से दूर न करें। हम यह जिम्मेदारी ज्यादा ठीक तरीके से उठा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सौरभ का परिवार पीहू के हिस्से की जमीन के लिए उसकी कस्टडी मांग रहा है। हम पीहू की अच्छी परवरिश कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि मुझे न तो सौरभ के हिस्से की कोई संपत्ति चाहिए और न ही सौरभ के अकाउंट में जो पैसा है, वह ही चाहिए। पीहू की जिम्मेदारी हम उठा सकते हैं। नानी कविता ने कहा- पीहू मेरे बिना नहीं रह पाएगी
मुस्कान की मां कविता रस्तोगी का कहना है- पीहू अब मेरे बिना नहीं रह सकेगी। सौरभ लंदन चला जाता था। मुस्कान पीहू को मेरे पास ही छोड़ देती थी। शुरू से मैंने ही उसको पाला है। पीहू जब भी अपने पिता सौरभ और मां मुस्कान को याद करती है, तब हम उसे बताते हैं कि दोनों लंदन गए हुए हैं। वह कभी कभी कहती है कि वीडियो कॉल पर बात करवा दें। हम नेटवर्क नहीं होने का बहाना कर देते हैं। इन सबके बीच वह खुश ही रहती है। उसको कोई बहुत बड़ी दिक्कत नहीं है। अब पीहू हमारा ऐसा हिस्सा बन चुकी है, जिसको हम अलग नहीं होने दे सकते। अब सौरभ के भाई राहुल की बात… राहुल ने कहा- मैंने सौरभ से कहा था, चिंता न करे, मैं हूं…
अब दैनिक भास्कर टीम सौरभ के इंद्रानगर के घर पहुंची। हमारी मुलाकात राहुल राजपूत उर्फ बबलू से हुई। वह सौरभ के बड़े भाई हैं। उन्होंने दावा किया- सौरभ के जाने के बाद हमारी मां रेनू संभल नहीं पा रही हैं। उन्हें बड़ा सदमा पहुंचा है। सौरभ भले ही मुस्कान की वजह से 3km दूर दूसरे घर में रहता था, मगर वह हम लोगों से कभी दूर नहीं हुआ। सौरभ जब आखिरी बार लंदन जा रहा था, शायद तभी उसे अंदाजा हो गया था। उसने जाने से पहले पूछा था कि अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरी बेटी पीहू को कौन देखेगा? कौन उसका ध्यान रखेगा? भाई की ये बातें सुनकर मैं कुछ देर सोचता रहा कि आखिर ऐसा क्यों कह रहा है। फिर मैंने उसे जवाब दिया कि चिंता मत कर, मैं हूं ना। मैं पीहू का ध्यान रखूंगा। काश मैं उस वक्त कुछ समझ पाता, तो शायद आज भाई जिंदा होता। भाई के जाने के बाद से घर में सबकी हालत इतनी खराब है कि सभी नींद की गोली खाकर सोते हैं। आंखें बंद करो तो भाई का हंसता-मुस्कुराता चेहरा नजर आ जाता है। वो लड़की मेरे भाई को खा गई। उसने बेरहमी से भाई के टुकड़े कर दिए। सौरभ को जिस तरह से मार डाला गया, यह हम लोग भूल नहीं पा रहे हैं। पीहू अगर इस घर में आती है तो मां के लिए बड़ा सहारा होगा। फिर पीहू हमारा ही परिवार है। मेरे छोटे भाई की बेटी है। मेरी बेटी नहीं है। मैं उसकी परवरिश अच्छी तरह से कर सकता हूं। सौरभ मेरे बच्चे के लिए खिलौने लाता, फिर उसके साथ खेलता रहता
राहुल कुछ याद करते हुए कहते हैं- आप समझिए कि 24 मार्च को जब सौरभ लंदन से आया था। 2 दिन बाद 26 मार्च काे वह खाना लेने के लिए घर आया। तब वह मेरे बेटे के लिए खिलौने लाया था। काफी देर तक वह मेरे बेटे को उन खिलौनों से खेलना भी सिखा रहा था। 3 मार्च को खाना लेकर जाने के बाद वह फिर नहीं आया। मैं 4 मार्च को उसको कॉल करता रहा। फिर कुछ देर में हमारे पास मैसेज आया कि वह उत्तराखंड घूम रहा है। फिर हमें 18 मार्च को पता चला कि हमारा भाई तो कई दिन पहले मर चुका है। उसको कितनी बुरी तरह से मारा गया। हमारा मोह पीहू से, बाकी कुछ नहीं
राहुल ने कहा- आप समझिए, हम लोग सौरभ के जाने के बाद टूट चुके हैं। अब हमारा एक ही टारगेट है कि मुस्कान और साहिल को फांसी मिले। हम मरते दम तक मुकदमा लड़ते रहेंगे। हमें चैन नहीं आएगा। सौरभ की किसी भी चीज से हमें कोई मोह नहीं, हमारा मोह पीहू से है। वह मेरी भतीजी है, उसको बेटी की तरह मैं ही पाल सकता हूं। राहुल ने कहा- हमें समझ नहीं आता कि मुस्कान ने ऐसा क्यों किया
राहुल ने कहा- हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि सौरभ की बेटी पीहू हमारे साथ रहे। अब हम उसकी देखभाल करेंगे। हमें डर है कि अगर पीहू वहां रही तो अपनी मां मुस्कान जैसी हो जाएगी। इसलिए हम उसे अपने साथ ही रखना चाहते हैं। हमें समझ में नहीं आ रहा है कि मुस्कान ने ये सब क्यों किया, सौरभ तो एक साल पहले तलाक की अर्जी दे चुका था। कोर्ट में दूसरी सुनवाई पेंडिंग थी। सौरभ जब लंदन से लौटा, उसके दो दिन पहले ही उसने हम सबको वीडियो कॉल किया था। बहुत खुश था। मेरे बच्चों के लिए भी गिफ्ट लेकर आया। एक बेटे के लिए कपड़े लाया और दूसरे के लिए इलेक्ट्रॉनिक कार और जूते लाया। इंडिया आया तो सबसे पहले मुस्कान के पास ही गया था। हमसे मिलने दो दिन बाद आया। हमने उसे मुस्कान के पास जाने से मना किया था, लेकिन वह नहीं माना। 3 मार्च की रात साहिल-मुस्कान ने सौरभ को मार डाला
साहिल और मुस्कान पर आरोप हैं कि दोनों ने मिलकर 3 मार्च की रात को सौरभ को मार डाला। उसकी लाश के 4 टुकड़े करके प्लास्टिक के ड्रम में सीमेंट से जमा दिया था। इसके बाद दोनों उत्तराखंड और हिमाचल घूमने चले गए। वह 13 दिन तक घूमते रहे और 17 मार्च को मेरठ लौटे। इसके बाद परिवार तक पूरा मामला पहुंचने के बाद पुलिस जांच शुरू हुई और सौरभ की कटी हुई लाश उसके इंद्रानगर वाले घर से बरामद हुई। पुलिस ने साहिल और मुस्कान को अरेस्ट करके जेल भेज दिया। ————————- यह भी पढ़ें : मेरठ हत्याकांड-जेल में पेशी पर साहिल-मुस्कान करीब आना चाहते थे:वार्डन ने खींचा तो बोली- शादी की है, बात करने दीजिए मेरठ जेल में अलग-अलग बैरक में 14 दिन से बंद साहिल और मुस्कान का आखिरकार आमना-सामना हो गया। 2 अप्रैल को वर्चुअल पेशी के लिए उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में लाया गया था। दोनों की वकील रेखा जैन कोर्ट रूम में केस की डिटेल रखने के लिए तैयार थीं। जज ने साहिल और मुस्कान के नाम पूछे। केस की डिटेलिंग कोर्ट के पटल पर रखी जाती, इससे पहले ही जज ने 15 अप्रैल की डेट दे दी। पढ़िए पूरी खबर… हमें सौरभ के हिस्से की प्रॉपटी या उसके बैंक बैलेंस से कोई लेना-देना नहीं। मैं लिखकर देने को तैयार हूं, बस पीहू को अपने से अलग नहीं होने देंगे। – प्रमोद रस्तोगी, मुस्कान के पिता मेरी बेटी नहीं है। पीहू सौरभ की बच्ची है, मैं उसका चाचा हूं। मैं पीहू को सही तरह से पाल सकता हूं। वह हमारे पास होगी, तो सौरभ की कमी महसूस नहीं होगी। हम कोर्ट जाएंगे। – रोहित उर्फ बबलू, सौरभ के बड़े भाई यह दो बयान बता रहे हैं कि सौरभ मर्डर केस में अचानक पीहू की परवरिश का विवाद खड़ा हो गया है। अब तक सौरभ और मुस्कान के परिवार के बीच लव मैरिज, सौरभ के दूसरे मकान में रहने और फिर कत्ल में मुस्कान के आरोपी बनने को लेकर विवाद हुए। दावों और आरोपों का दौर भी चला। मगर इसमें पीहू का जिक्र नहीं था। ऐसा पहली बार हो रहा है कि दोनों परिवार पीहू की कस्टडी चाहते हैं। सौरभ की हत्या के बाद से 8 साल की पीहू की परवरिश उसके नाना प्रमोद रस्तोगी और नानी कविता कर रहे हैं। उन्होंने पीहू की मानसिक स्थिति को देखते हुए मीडिया से उसे दूर रखा है। मुस्कान और सौरभ के बिना पीहू कैसे दिन बिता रही है? वह ज्यादा परेशान तो नहीं है? वह नाना-नानी के घर ठीक से रह रही है या नहीं? यह देखने के लिए दैनिक भास्कर की टीम प्रमोद के घर ब्रह्मपुरी पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… पहले पीहू की बात… नाना-नानी बोले- पीहू के साथ हम भी बच्चे बन गए
ब्रह्मपुरी के घर पर प्रमोद और कविता दोनों से मुलाकात हुई। हमने पूछा- पीहू कैसी है? प्रमोद कहते हैं- पीहू समय-समय पर अपने मम्मी-पापा को याद करती है। पूछती है कि वह दोनों कब आएंगे? कविता कहती हैं- हम उसको बहलाते हैं। नए खिलौने लाए हैं, ताकि वह मां-पापा को कम याद करे। वह दिनभर एक कमरे से दूसरे कमरे के बीच दौड़ती रहती है। टीवी पर कार्टून देखती है। दूध पीना, खाना खाने में कभी जिद नहीं करती। मगर बच्चा तो बच्चा होता है, उसके लिए हम दोनों भी बच्चे बन जाते हैं। अब पीहू की कस्टडी पर नाना-नानी से बात… नाना ने कहा- उन्हें पीहू में सौरभ कम, मुस्कान ज्यादा दिखेगी
मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी कहते हैं- मैं आपको 100% गारंटी देता हूं। आज वह लोग (सौरभ के भाई) पीहू की कस्टडी मांग रहे हैं। उसको पालना चाहते हैं, ये अच्छी बात है। मगर कल उन्हें पीहू के अंदर सौरभ कम, मुस्कान ज्यादा दिखाई देगी। वह उसके साथ व्यवहार चाहकर भी ठीक नहीं रख पाएंगे। इसलिए यही ठीक होगा कि पीहू को हम अपने से दूर न करें। हम यह जिम्मेदारी ज्यादा ठीक तरीके से उठा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सौरभ का परिवार पीहू के हिस्से की जमीन के लिए उसकी कस्टडी मांग रहा है। हम पीहू की अच्छी परवरिश कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि मुझे न तो सौरभ के हिस्से की कोई संपत्ति चाहिए और न ही सौरभ के अकाउंट में जो पैसा है, वह ही चाहिए। पीहू की जिम्मेदारी हम उठा सकते हैं। नानी कविता ने कहा- पीहू मेरे बिना नहीं रह पाएगी
मुस्कान की मां कविता रस्तोगी का कहना है- पीहू अब मेरे बिना नहीं रह सकेगी। सौरभ लंदन चला जाता था। मुस्कान पीहू को मेरे पास ही छोड़ देती थी। शुरू से मैंने ही उसको पाला है। पीहू जब भी अपने पिता सौरभ और मां मुस्कान को याद करती है, तब हम उसे बताते हैं कि दोनों लंदन गए हुए हैं। वह कभी कभी कहती है कि वीडियो कॉल पर बात करवा दें। हम नेटवर्क नहीं होने का बहाना कर देते हैं। इन सबके बीच वह खुश ही रहती है। उसको कोई बहुत बड़ी दिक्कत नहीं है। अब पीहू हमारा ऐसा हिस्सा बन चुकी है, जिसको हम अलग नहीं होने दे सकते। अब सौरभ के भाई राहुल की बात… राहुल ने कहा- मैंने सौरभ से कहा था, चिंता न करे, मैं हूं…
अब दैनिक भास्कर टीम सौरभ के इंद्रानगर के घर पहुंची। हमारी मुलाकात राहुल राजपूत उर्फ बबलू से हुई। वह सौरभ के बड़े भाई हैं। उन्होंने दावा किया- सौरभ के जाने के बाद हमारी मां रेनू संभल नहीं पा रही हैं। उन्हें बड़ा सदमा पहुंचा है। सौरभ भले ही मुस्कान की वजह से 3km दूर दूसरे घर में रहता था, मगर वह हम लोगों से कभी दूर नहीं हुआ। सौरभ जब आखिरी बार लंदन जा रहा था, शायद तभी उसे अंदाजा हो गया था। उसने जाने से पहले पूछा था कि अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरी बेटी पीहू को कौन देखेगा? कौन उसका ध्यान रखेगा? भाई की ये बातें सुनकर मैं कुछ देर सोचता रहा कि आखिर ऐसा क्यों कह रहा है। फिर मैंने उसे जवाब दिया कि चिंता मत कर, मैं हूं ना। मैं पीहू का ध्यान रखूंगा। काश मैं उस वक्त कुछ समझ पाता, तो शायद आज भाई जिंदा होता। भाई के जाने के बाद से घर में सबकी हालत इतनी खराब है कि सभी नींद की गोली खाकर सोते हैं। आंखें बंद करो तो भाई का हंसता-मुस्कुराता चेहरा नजर आ जाता है। वो लड़की मेरे भाई को खा गई। उसने बेरहमी से भाई के टुकड़े कर दिए। सौरभ को जिस तरह से मार डाला गया, यह हम लोग भूल नहीं पा रहे हैं। पीहू अगर इस घर में आती है तो मां के लिए बड़ा सहारा होगा। फिर पीहू हमारा ही परिवार है। मेरे छोटे भाई की बेटी है। मेरी बेटी नहीं है। मैं उसकी परवरिश अच्छी तरह से कर सकता हूं। सौरभ मेरे बच्चे के लिए खिलौने लाता, फिर उसके साथ खेलता रहता
राहुल कुछ याद करते हुए कहते हैं- आप समझिए कि 24 मार्च को जब सौरभ लंदन से आया था। 2 दिन बाद 26 मार्च काे वह खाना लेने के लिए घर आया। तब वह मेरे बेटे के लिए खिलौने लाया था। काफी देर तक वह मेरे बेटे को उन खिलौनों से खेलना भी सिखा रहा था। 3 मार्च को खाना लेकर जाने के बाद वह फिर नहीं आया। मैं 4 मार्च को उसको कॉल करता रहा। फिर कुछ देर में हमारे पास मैसेज आया कि वह उत्तराखंड घूम रहा है। फिर हमें 18 मार्च को पता चला कि हमारा भाई तो कई दिन पहले मर चुका है। उसको कितनी बुरी तरह से मारा गया। हमारा मोह पीहू से, बाकी कुछ नहीं
राहुल ने कहा- आप समझिए, हम लोग सौरभ के जाने के बाद टूट चुके हैं। अब हमारा एक ही टारगेट है कि मुस्कान और साहिल को फांसी मिले। हम मरते दम तक मुकदमा लड़ते रहेंगे। हमें चैन नहीं आएगा। सौरभ की किसी भी चीज से हमें कोई मोह नहीं, हमारा मोह पीहू से है। वह मेरी भतीजी है, उसको बेटी की तरह मैं ही पाल सकता हूं। राहुल ने कहा- हमें समझ नहीं आता कि मुस्कान ने ऐसा क्यों किया
राहुल ने कहा- हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि सौरभ की बेटी पीहू हमारे साथ रहे। अब हम उसकी देखभाल करेंगे। हमें डर है कि अगर पीहू वहां रही तो अपनी मां मुस्कान जैसी हो जाएगी। इसलिए हम उसे अपने साथ ही रखना चाहते हैं। हमें समझ में नहीं आ रहा है कि मुस्कान ने ये सब क्यों किया, सौरभ तो एक साल पहले तलाक की अर्जी दे चुका था। कोर्ट में दूसरी सुनवाई पेंडिंग थी। सौरभ जब लंदन से लौटा, उसके दो दिन पहले ही उसने हम सबको वीडियो कॉल किया था। बहुत खुश था। मेरे बच्चों के लिए भी गिफ्ट लेकर आया। एक बेटे के लिए कपड़े लाया और दूसरे के लिए इलेक्ट्रॉनिक कार और जूते लाया। इंडिया आया तो सबसे पहले मुस्कान के पास ही गया था। हमसे मिलने दो दिन बाद आया। हमने उसे मुस्कान के पास जाने से मना किया था, लेकिन वह नहीं माना। 3 मार्च की रात साहिल-मुस्कान ने सौरभ को मार डाला
साहिल और मुस्कान पर आरोप हैं कि दोनों ने मिलकर 3 मार्च की रात को सौरभ को मार डाला। उसकी लाश के 4 टुकड़े करके प्लास्टिक के ड्रम में सीमेंट से जमा दिया था। इसके बाद दोनों उत्तराखंड और हिमाचल घूमने चले गए। वह 13 दिन तक घूमते रहे और 17 मार्च को मेरठ लौटे। इसके बाद परिवार तक पूरा मामला पहुंचने के बाद पुलिस जांच शुरू हुई और सौरभ की कटी हुई लाश उसके इंद्रानगर वाले घर से बरामद हुई। पुलिस ने साहिल और मुस्कान को अरेस्ट करके जेल भेज दिया। ————————- यह भी पढ़ें : मेरठ हत्याकांड-जेल में पेशी पर साहिल-मुस्कान करीब आना चाहते थे:वार्डन ने खींचा तो बोली- शादी की है, बात करने दीजिए मेरठ जेल में अलग-अलग बैरक में 14 दिन से बंद साहिल और मुस्कान का आखिरकार आमना-सामना हो गया। 2 अप्रैल को वर्चुअल पेशी के लिए उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में लाया गया था। दोनों की वकील रेखा जैन कोर्ट रूम में केस की डिटेल रखने के लिए तैयार थीं। जज ने साहिल और मुस्कान के नाम पूछे। केस की डिटेलिंग कोर्ट के पटल पर रखी जाती, इससे पहले ही जज ने 15 अप्रैल की डेट दे दी। पढ़िए पूरी खबर…   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर