HSSC सचिव पर 50 हजार रुपए जुर्माना:TGT भर्ती केस में HC ने मूल रिपोर्ट मांगी; आयोग ने फोटोस्टेट दी; योग्यता पर उठाए सवाल

HSSC सचिव पर 50 हजार रुपए जुर्माना:TGT भर्ती केस में HC ने मूल रिपोर्ट मांगी; आयोग ने फोटोस्टेट दी; योग्यता पर उठाए सवाल

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के सचिव पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपए की व्यक्तिगत कॉस्ट लगाई है। टीजीटी भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने दो अंतरिम आदेश पारित कर चीफ एग्जामिनर्स, एग्जामिनर्स की मूल रिपोर्ट मांगी थी। मगर एचएसएससी ने फोटो स्टेट कॉपी दे दी। मूल प्रतियां नहीं देने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए जस्टिस त्रिभुवन दहिया की खंडपीठ ने पारित अंतरिम आदेश में जहां सचिव पर जुर्माना लगाया है, वहीं एग्जामिनर्स की योग्यता पर संदेह व्यक्त किया है। अंकुर सिधार ने कहा कि खंडपीठ ने अगली सुनवाई 7 अप्रैल तय की है। उधर, हाईकोर्ट में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने शपथ पत्र के जरिए दलील दी कि आयोग तो चीफ एग्जामिनर्स की आंसर-की को मानता है, क्योंकि आयोग एकेडमिक मामलों की एक्सपर्ट बॉडी नहीं है। HC ने अपने आदेश में ये लिखा 1. एक भी मूल रिपोर्ट आयोग ने नहीं भेजी जस्टिस त्रिभुवन दहिया की खंडपीठ ने सविता रानी बनाम हरियाणा एवं अन्य मामले में अंतरिम आदेश में लिखा है, ‘दिनांक 17 मार्च के अंतरिम आदेश के तहत, आयोग को दिनांक 28 नवंबर 2024 और 20 फरवरी 2025 के अंतरिम आदेशों का पालन करने के लिए अंतिम अवसर दिया गया था, ताकि मूल रूप में पूर्ण विशेषज्ञ रिपोर्ट दी जा सके। साथ ही विषय में चीफ एग्जामिनर्स और सब्जेक्ट स्पेशलिस्ट के नाम भी सीलबंद लिफाफे में दिए जा सकें, जिन्होंने प्रश्न पत्रों पर आपत्तियों की जांच की है। राज्य अधिवक्ता ने अंतरिम आदेशों के अनुपालन में तीन सीलबंद लिफाफे सौंपे हैं। इसमें निहित रिपोर्टों का अवलोकन, जिन्हें राज्य अधिवक्ता को भी दिखाया गया है। यह स्पष्ट करता है कि इनमें से कोई भी विषय विशेषज्ञों (सब्जेक्ट एग्जामिनर्स) की मूल रिपोर्ट नहीं है, न्यायालय में मूल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश के बावजूद केवल फोटोकॉपी प्रस्तुत की गई है। 2. एग्जामिनर्स और सब्जेक्ट स्पेशलिस्ट की योग्यता पर सवाल उठाए दूसरे, 27.03.2025 के पत्र में दिए गए और मुख्य परीक्षकों के विवरण में कुछ व्यक्तियों के नाम दिए गए हैं, लेकिन उनके स्टेटस, उनके धारण किए गए पदों और जिन संस्थानों में उन्होंने काम किया है, उनके नाम नहीं बताए गए हैं। प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि इन विषय विशेषज्ञों, मुख्य परीक्षकों की योग्यताएं संदिग्ध हो सकती हैं। क्योंकि गृह विज्ञान (होम साइंस) के चीफ एग्जामिनर की योग्यता ‘विज्ञान में स्नातक अंग्रेजी ऑनर्स, विज्ञान में परा स्नातक, बीएड, एमएड दर्शाई गई है। इसी तरह, अंग्रेजों के मुख्य परीक्षक की योग्यता ‘विज्ञान में स्नातक अंग्रेजी ऑनर्स, विज्ञान में परा स्नातक, बीएड, एमएड’ है। साथ ही, पहली नजर में, ‘टीजीटी पंजाबी, अंग्रेजी, शारीरिक शिक्षा, संस्कृत और गृह विज्ञान की आंसर की के संबंध में स्पष्टीकरण’ विषय शीर्षक के तहत तथाकथित रिपोर्ट पर एक मुख्य परीक्षक द्वारा हस्ताक्षर किए गए प्रतीत होते हैं, हालांकि वे अलग-अलग विषयों से संबंधित हैं। 3. फिर से सील कराई रिपोर्टें इन रिपोटों को फिर से सील कर दिया गया है और केस फाइल पर रखा गया है। इस स्थिति का सामना करते हुए, राज्य वकील निर्देश प्राप्त करने के लिए अंतिम अवसर चाहते हैं, सुनवाई 7 अप्रैल तक स्थगित की गई है। आयोग के सचिन पर व्यक्तिगत रूप से 50,000 रुपए की कॉस्ट लगाई गई है। ये राशि उन्हें अगली सुनवाई तक गरीब मरीज कल्याण कोष, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में जमा करना होगा, क्योंकि उन्होंने बार-बार समय मांगकर इन मामलों की सुनवाई को अनावश्यक रूप से स्थगित करवाया है। केवल अपर्याप्त जानकारी ही पेश की है। यहां पढ़िए HSSC ने क्या दी हैं दलीलें… 1. याचिकाकर्ताओं ने अपने सबंधित वर्ग में अंतिम चयनित अभ्यर्थियों से कम अंक प्राप्त किए हैं, इसलिए संबंधित पद के लिए विचार नहीं किया गया। 2. आयोग वर्तमान भर्ती में निर्धारित प्रक्रिया कर पालन करता है, अर्थात आपत्तियां मांगने के लिए आंसर की प्रकाशित करना, आपत्तियां प्राप्त करना, आपत्तियों को चीफ एग्जामिनर को फॉरवर्ड करना। तत्पश्चात मुख्य परीक्षक अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करता है और उसे आयोग को अग्रेषित करता है। तदनुसार, अंतिम उत्तर कुंजी के आधार पर आयोग ने अंतिम परिणाम घोषित किया। 3. आयोग उत्तर की शुद्धता का निर्णय करने के लिए एक्सपर्ट बॉडी नहीं है और उत्तर की वैधता का निर्णय मुख्य परीक्षक पर छोड़ दिया गया है। 4. डिजिटलीकरण और इंटरनेट की वर्तमान दुनिया में, विभिन्न प्रश्नों के उत्तर साइट दर साइट और पुस्तक दर पुस्तक भिन्न हो सकते हैं। इस प्रकार, आयोग के पास अपने स्तर पर किसी उत्तर की सत्यता सुनिश्चित करने की कोई प्रक्रिया नहीं है और इसलिए आयोग को मुख्य परीक्षक पर निर्भर रहना पड़ता है। 5. एक बार अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करने की प्रक्रिया का पालन करने के बाद याचिकाकर्ताओं के पास कोई अधिकार नहीं है। यह भी प्रस्तुत किया गया है कि एक स्थापित कानून है कि एक बार मुख्य परीक्षक ने उत्तर कुंजी को अंतिम रूप दे दिया है तो उसे उसी तरह फाइनल मान लिया जाएगा क्योंकि एकेडमिक मामले में एक्सपटांइज केवल एक्सपर्टस पर छोड़ दी जाती है, इसलिए इसे अंतिम (फाइनल) माना जाता है। इसके अलावा, संदेह की स्थिति में, लाभ उम्मीदवार के बजाय परीक्षा प्राधिकरण (एग्जामिनेशन अथॉरिटी) को जाना चाहिए। 6. इसके अलावा यहां यह उल्लेख करना उचित है कि अंतिम उत्तर कुंजी (परहनल आंसर की) को बार-बार आपत्तियां मांगने के लिए रखने की कोई प्रक्रिया नहीं है क्योंकि यदि इस प्रक्रिया का पालन किया जाता है तो कोई अंत नहीं होगा और भर्ती को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता क्योंकि उम्मीदवार उत्तर कुंजी को चुनौती देते रहेंगे और इसे कभी भी अतिम रूप नहीं दिया जा सकेगा। आयोग ने ओएमआर शीट का मूल्यांकन मुख्य परीक्षक की तरफ से फाइनल की गई आंसर की के आधार पर किया है। 7. वर्तमान रिट याचिका को आवश्यक पक्षों को पक्षकार न बनाने के आधार पर खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि याचिकाकर्ता ने चयनित अनुशंसित उम्मीदवारों को पक्षकार नहीं बनाया है। यदि रिट को अनुमति दी जाती है तो इससे सभी चयनित उम्मीदवारों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। 8. इन प्रस्तुतियों के मद्देनजर, सभी संबंधित रिट याचिकाएं किसी भी योग्यता से रहित (डिवॉयड ऑफ एनी मेरिट) हैं और खारिज किए जाने योग्य है। सम्मानपूर्वक आग्रह है कि कृपया वर्तमान याचिका को खारिज कर दिया जाए। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के सचिव पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपए की व्यक्तिगत कॉस्ट लगाई है। टीजीटी भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने दो अंतरिम आदेश पारित कर चीफ एग्जामिनर्स, एग्जामिनर्स की मूल रिपोर्ट मांगी थी। मगर एचएसएससी ने फोटो स्टेट कॉपी दे दी। मूल प्रतियां नहीं देने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए जस्टिस त्रिभुवन दहिया की खंडपीठ ने पारित अंतरिम आदेश में जहां सचिव पर जुर्माना लगाया है, वहीं एग्जामिनर्स की योग्यता पर संदेह व्यक्त किया है। अंकुर सिधार ने कहा कि खंडपीठ ने अगली सुनवाई 7 अप्रैल तय की है। उधर, हाईकोर्ट में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने शपथ पत्र के जरिए दलील दी कि आयोग तो चीफ एग्जामिनर्स की आंसर-की को मानता है, क्योंकि आयोग एकेडमिक मामलों की एक्सपर्ट बॉडी नहीं है। HC ने अपने आदेश में ये लिखा 1. एक भी मूल रिपोर्ट आयोग ने नहीं भेजी जस्टिस त्रिभुवन दहिया की खंडपीठ ने सविता रानी बनाम हरियाणा एवं अन्य मामले में अंतरिम आदेश में लिखा है, ‘दिनांक 17 मार्च के अंतरिम आदेश के तहत, आयोग को दिनांक 28 नवंबर 2024 और 20 फरवरी 2025 के अंतरिम आदेशों का पालन करने के लिए अंतिम अवसर दिया गया था, ताकि मूल रूप में पूर्ण विशेषज्ञ रिपोर्ट दी जा सके। साथ ही विषय में चीफ एग्जामिनर्स और सब्जेक्ट स्पेशलिस्ट के नाम भी सीलबंद लिफाफे में दिए जा सकें, जिन्होंने प्रश्न पत्रों पर आपत्तियों की जांच की है। राज्य अधिवक्ता ने अंतरिम आदेशों के अनुपालन में तीन सीलबंद लिफाफे सौंपे हैं। इसमें निहित रिपोर्टों का अवलोकन, जिन्हें राज्य अधिवक्ता को भी दिखाया गया है। यह स्पष्ट करता है कि इनमें से कोई भी विषय विशेषज्ञों (सब्जेक्ट एग्जामिनर्स) की मूल रिपोर्ट नहीं है, न्यायालय में मूल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश के बावजूद केवल फोटोकॉपी प्रस्तुत की गई है। 2. एग्जामिनर्स और सब्जेक्ट स्पेशलिस्ट की योग्यता पर सवाल उठाए दूसरे, 27.03.2025 के पत्र में दिए गए और मुख्य परीक्षकों के विवरण में कुछ व्यक्तियों के नाम दिए गए हैं, लेकिन उनके स्टेटस, उनके धारण किए गए पदों और जिन संस्थानों में उन्होंने काम किया है, उनके नाम नहीं बताए गए हैं। प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि इन विषय विशेषज्ञों, मुख्य परीक्षकों की योग्यताएं संदिग्ध हो सकती हैं। क्योंकि गृह विज्ञान (होम साइंस) के चीफ एग्जामिनर की योग्यता ‘विज्ञान में स्नातक अंग्रेजी ऑनर्स, विज्ञान में परा स्नातक, बीएड, एमएड दर्शाई गई है। इसी तरह, अंग्रेजों के मुख्य परीक्षक की योग्यता ‘विज्ञान में स्नातक अंग्रेजी ऑनर्स, विज्ञान में परा स्नातक, बीएड, एमएड’ है। साथ ही, पहली नजर में, ‘टीजीटी पंजाबी, अंग्रेजी, शारीरिक शिक्षा, संस्कृत और गृह विज्ञान की आंसर की के संबंध में स्पष्टीकरण’ विषय शीर्षक के तहत तथाकथित रिपोर्ट पर एक मुख्य परीक्षक द्वारा हस्ताक्षर किए गए प्रतीत होते हैं, हालांकि वे अलग-अलग विषयों से संबंधित हैं। 3. फिर से सील कराई रिपोर्टें इन रिपोटों को फिर से सील कर दिया गया है और केस फाइल पर रखा गया है। इस स्थिति का सामना करते हुए, राज्य वकील निर्देश प्राप्त करने के लिए अंतिम अवसर चाहते हैं, सुनवाई 7 अप्रैल तक स्थगित की गई है। आयोग के सचिन पर व्यक्तिगत रूप से 50,000 रुपए की कॉस्ट लगाई गई है। ये राशि उन्हें अगली सुनवाई तक गरीब मरीज कल्याण कोष, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में जमा करना होगा, क्योंकि उन्होंने बार-बार समय मांगकर इन मामलों की सुनवाई को अनावश्यक रूप से स्थगित करवाया है। केवल अपर्याप्त जानकारी ही पेश की है। यहां पढ़िए HSSC ने क्या दी हैं दलीलें… 1. याचिकाकर्ताओं ने अपने सबंधित वर्ग में अंतिम चयनित अभ्यर्थियों से कम अंक प्राप्त किए हैं, इसलिए संबंधित पद के लिए विचार नहीं किया गया। 2. आयोग वर्तमान भर्ती में निर्धारित प्रक्रिया कर पालन करता है, अर्थात आपत्तियां मांगने के लिए आंसर की प्रकाशित करना, आपत्तियां प्राप्त करना, आपत्तियों को चीफ एग्जामिनर को फॉरवर्ड करना। तत्पश्चात मुख्य परीक्षक अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करता है और उसे आयोग को अग्रेषित करता है। तदनुसार, अंतिम उत्तर कुंजी के आधार पर आयोग ने अंतिम परिणाम घोषित किया। 3. आयोग उत्तर की शुद्धता का निर्णय करने के लिए एक्सपर्ट बॉडी नहीं है और उत्तर की वैधता का निर्णय मुख्य परीक्षक पर छोड़ दिया गया है। 4. डिजिटलीकरण और इंटरनेट की वर्तमान दुनिया में, विभिन्न प्रश्नों के उत्तर साइट दर साइट और पुस्तक दर पुस्तक भिन्न हो सकते हैं। इस प्रकार, आयोग के पास अपने स्तर पर किसी उत्तर की सत्यता सुनिश्चित करने की कोई प्रक्रिया नहीं है और इसलिए आयोग को मुख्य परीक्षक पर निर्भर रहना पड़ता है। 5. एक बार अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करने की प्रक्रिया का पालन करने के बाद याचिकाकर्ताओं के पास कोई अधिकार नहीं है। यह भी प्रस्तुत किया गया है कि एक स्थापित कानून है कि एक बार मुख्य परीक्षक ने उत्तर कुंजी को अंतिम रूप दे दिया है तो उसे उसी तरह फाइनल मान लिया जाएगा क्योंकि एकेडमिक मामले में एक्सपटांइज केवल एक्सपर्टस पर छोड़ दी जाती है, इसलिए इसे अंतिम (फाइनल) माना जाता है। इसके अलावा, संदेह की स्थिति में, लाभ उम्मीदवार के बजाय परीक्षा प्राधिकरण (एग्जामिनेशन अथॉरिटी) को जाना चाहिए। 6. इसके अलावा यहां यह उल्लेख करना उचित है कि अंतिम उत्तर कुंजी (परहनल आंसर की) को बार-बार आपत्तियां मांगने के लिए रखने की कोई प्रक्रिया नहीं है क्योंकि यदि इस प्रक्रिया का पालन किया जाता है तो कोई अंत नहीं होगा और भर्ती को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता क्योंकि उम्मीदवार उत्तर कुंजी को चुनौती देते रहेंगे और इसे कभी भी अतिम रूप नहीं दिया जा सकेगा। आयोग ने ओएमआर शीट का मूल्यांकन मुख्य परीक्षक की तरफ से फाइनल की गई आंसर की के आधार पर किया है। 7. वर्तमान रिट याचिका को आवश्यक पक्षों को पक्षकार न बनाने के आधार पर खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि याचिकाकर्ता ने चयनित अनुशंसित उम्मीदवारों को पक्षकार नहीं बनाया है। यदि रिट को अनुमति दी जाती है तो इससे सभी चयनित उम्मीदवारों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। 8. इन प्रस्तुतियों के मद्देनजर, सभी संबंधित रिट याचिकाएं किसी भी योग्यता से रहित (डिवॉयड ऑफ एनी मेरिट) हैं और खारिज किए जाने योग्य है। सम्मानपूर्वक आग्रह है कि कृपया वर्तमान याचिका को खारिज कर दिया जाए।   हरियाणा | दैनिक भास्कर