कानपुर में मिलती मूंगफली के तेल की फलहारी चाट:150 साल पुरानी दुकान में लगती है लोगों की लंबी लाइन; एक्टर चंकी पांडे भी दिवाने

कानपुर में मिलती मूंगफली के तेल की फलहारी चाट:150 साल पुरानी दुकान में लगती है लोगों की लंबी लाइन; एक्टर चंकी पांडे भी दिवाने

नवरात्र का व्रत चल रहा है। अगर आप फलहारी चाट चखना चाहते हैं तो चले आइए कानपुर। कानपुर के गंगाघाट के किनारे परमट मंदिर (आनंदेश्वर मंदिर) जाना होगा। यहां पहुंचने पर इस दुकान में तली जा रही चाट की खुशबू आपको अपनी ओर खींच लाएगी। परमट मंदिर में पिछले 150 साल पुरानी ये दुकान फलहारी चाट के नाम से खूब फेमस है। यहां पर खास बात ये है कि लोगों की भीड़ व्रत वाले दिन खूब देखने को मिलती है। चाट का स्वाद भी ऐसा कि एक बार जिसने भी खाया, वो इस स्वाद का मुरीद हो गया। एक्टर चंकी पांडे भी इस चाट का स्वाद चख चुके हैं। दैनिक भास्कर की स्पेशल सीरीज जायका में आज जानते हैं कानपुर के फलहारी चाट का फेमस जायका… परमट निवासी स्व. सूरज प्रसाद त्रिपाठी ने करीब 150 साल पहले फलहारी मिष्ठान भंडार के नाम से मिठाई की दुकान खोली थी। यहां पर साफ सुथरी व्रत वाली मिठाइयां मिलती थीं। इसलिए लोग यहां पर व्रत वाले दिन आते थे। इसके बाद इस दुकान को उनके बेटे स्व. श्याम नारायण त्रिपाठी देखने लगे थे। पिछले 20 सालों से उनके पौत्र राजीव त्रिपाठी बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने अपनी दुकान और स्वाद इस कदर मेंटेन रखा है, जो उनके दादा जी के हाथों में था। 1961 में फलहारी चाट शुरू की
राजीव त्रिपाठी बताते हैं, 1961 में पिता जी ने फलहारी चाट भी शुरू कर दी। लोगों को कुछ अलग स्वाद मिले, ये सोचकर इसकी शुरुआत की थी। एक बार जिस किसी ने भी ये चाट खाई, उसको यहां का स्वाद लग गया। इस दुकान की खास बात तो ये है कि टिक्कियां मूंगफली के तेल में पकाई जाती हैं। इस कारण यहां के जैसा स्वाद किसी और टिक्की में नहीं आता है। राजीव बताते है कि दुकान में व्रत वालों का खास ध्यान रखा जाता है। मार्केट का मसाला नहीं करते इस्तेमाल
राजीव ने बताया, जब से दुकान खुली है तब से लेकर आज दिन तक कभी हमारी दुकान में मार्केट का मसाला प्रयोग नहीं किया गया है। खुद खड़े मसाले खरीदते हैं और फिर उसे घर पर पिसवाते हैं। मार्केट के मसाले लोगों को नुकसान करते हैं और उसमें उतना स्वाद भी दे पाते। चंकी पांडेय ने भी लिया है यहां का स्वाद
इस दुकान का स्वाद केवल कानपुर वालों ने ही नहीं लिया है। इसका स्वाद चंकी पांडेय ने भी लिया है। राजीव ने बताया, एक बार चंकी पांडेय आनंदेश्वर मंदिर दर्शन के लिए आए थे। उसी दौरान वह दुकान भी आए और चाट का स्वाद चखा। कीमत 50 और 60 रुपए
आलू की टिक्की की कीमत 50 रुपए पत्ता है। सिंघाड़े की आलू की पकौड़ी 60 रुपए पत्ता है। सिंघाड़े के आटे की बनी पकौड़ी भी लोगों को खूब पसंद आती है। ये पकौड़ी 6 स्टेप में तैयार की जाती है। 7 स्टेप में तैयार होती है आलू की टिक्की कस्टमर रिव्यू… —————————- ये भी पढ़ें… लाजवाब है 54 साल पुराना कानपुर का मुन्ना समोसा:मलाई-पनीर, चीज-कॉर्न समेत 5 वैराइटी खाने पहुंचते हैं लोग समोसा खाना हो, तो कानपुर चले आइए…भाई, यहां तीखी हरी, गुड़ की मीठी चटनी के साथ जो समोसा मिलता है। उसका टेस्ट अल्टीमेट है। फिर बात अगर मुन्ना समोसा की हो, तो क्या ही कहने। जी हां… मुन्ना समोसा को देखते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। बनने की पूरी प्रोसेस पढ़ें… नवरात्र का व्रत चल रहा है। अगर आप फलहारी चाट चखना चाहते हैं तो चले आइए कानपुर। कानपुर के गंगाघाट के किनारे परमट मंदिर (आनंदेश्वर मंदिर) जाना होगा। यहां पहुंचने पर इस दुकान में तली जा रही चाट की खुशबू आपको अपनी ओर खींच लाएगी। परमट मंदिर में पिछले 150 साल पुरानी ये दुकान फलहारी चाट के नाम से खूब फेमस है। यहां पर खास बात ये है कि लोगों की भीड़ व्रत वाले दिन खूब देखने को मिलती है। चाट का स्वाद भी ऐसा कि एक बार जिसने भी खाया, वो इस स्वाद का मुरीद हो गया। एक्टर चंकी पांडे भी इस चाट का स्वाद चख चुके हैं। दैनिक भास्कर की स्पेशल सीरीज जायका में आज जानते हैं कानपुर के फलहारी चाट का फेमस जायका… परमट निवासी स्व. सूरज प्रसाद त्रिपाठी ने करीब 150 साल पहले फलहारी मिष्ठान भंडार के नाम से मिठाई की दुकान खोली थी। यहां पर साफ सुथरी व्रत वाली मिठाइयां मिलती थीं। इसलिए लोग यहां पर व्रत वाले दिन आते थे। इसके बाद इस दुकान को उनके बेटे स्व. श्याम नारायण त्रिपाठी देखने लगे थे। पिछले 20 सालों से उनके पौत्र राजीव त्रिपाठी बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने अपनी दुकान और स्वाद इस कदर मेंटेन रखा है, जो उनके दादा जी के हाथों में था। 1961 में फलहारी चाट शुरू की
राजीव त्रिपाठी बताते हैं, 1961 में पिता जी ने फलहारी चाट भी शुरू कर दी। लोगों को कुछ अलग स्वाद मिले, ये सोचकर इसकी शुरुआत की थी। एक बार जिस किसी ने भी ये चाट खाई, उसको यहां का स्वाद लग गया। इस दुकान की खास बात तो ये है कि टिक्कियां मूंगफली के तेल में पकाई जाती हैं। इस कारण यहां के जैसा स्वाद किसी और टिक्की में नहीं आता है। राजीव बताते है कि दुकान में व्रत वालों का खास ध्यान रखा जाता है। मार्केट का मसाला नहीं करते इस्तेमाल
राजीव ने बताया, जब से दुकान खुली है तब से लेकर आज दिन तक कभी हमारी दुकान में मार्केट का मसाला प्रयोग नहीं किया गया है। खुद खड़े मसाले खरीदते हैं और फिर उसे घर पर पिसवाते हैं। मार्केट के मसाले लोगों को नुकसान करते हैं और उसमें उतना स्वाद भी दे पाते। चंकी पांडेय ने भी लिया है यहां का स्वाद
इस दुकान का स्वाद केवल कानपुर वालों ने ही नहीं लिया है। इसका स्वाद चंकी पांडेय ने भी लिया है। राजीव ने बताया, एक बार चंकी पांडेय आनंदेश्वर मंदिर दर्शन के लिए आए थे। उसी दौरान वह दुकान भी आए और चाट का स्वाद चखा। कीमत 50 और 60 रुपए
आलू की टिक्की की कीमत 50 रुपए पत्ता है। सिंघाड़े की आलू की पकौड़ी 60 रुपए पत्ता है। सिंघाड़े के आटे की बनी पकौड़ी भी लोगों को खूब पसंद आती है। ये पकौड़ी 6 स्टेप में तैयार की जाती है। 7 स्टेप में तैयार होती है आलू की टिक्की कस्टमर रिव्यू… —————————- ये भी पढ़ें… लाजवाब है 54 साल पुराना कानपुर का मुन्ना समोसा:मलाई-पनीर, चीज-कॉर्न समेत 5 वैराइटी खाने पहुंचते हैं लोग समोसा खाना हो, तो कानपुर चले आइए…भाई, यहां तीखी हरी, गुड़ की मीठी चटनी के साथ जो समोसा मिलता है। उसका टेस्ट अल्टीमेट है। फिर बात अगर मुन्ना समोसा की हो, तो क्या ही कहने। जी हां… मुन्ना समोसा को देखते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। बनने की पूरी प्रोसेस पढ़ें…   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर