बराला-बबली, दुग्गल के बीच 5 गुटों में बंटी भाजपा:लोकसभा में पिछड़े, विधानसभा में तीनों सीट हारे, नगर पालिका चेयरमैन भी नहीं जिता पाए

बराला-बबली, दुग्गल के बीच 5 गुटों में बंटी भाजपा:लोकसभा में पिछड़े, विधानसभा में तीनों सीट हारे, नगर पालिका चेयरमैन भी नहीं जिता पाए

हरियाणा के फतेहाबाद में भाजपा 5 गुटों में बंट गई है। यह गुट भी राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल, पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली, पूर्व विधायक दुड़ाराम बिश्नोई और पूर्व जिला अध्यक्ष बलदेव ग्रोहा के बने हुए हैं। हालात ये हैं कि एक गुट किसी वर्कर को पद देता है तो दूसरा उसको हटा देता है। इसी खींचतान की वजह से भाजपा लोकसभा में पिछड़ने के बाद विधानसभा में भी सारी सीटें हारी। वहीं निकाय चुनाव में भी नगर पालिका का चेयरमैन तक नहीं जिता पाए। हालांकि दिग्गजों के नाम जुड़े होने की वजह से संगठन के बड़े अधिकारी इनसे किनारा करके बैठे हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद
फतेहाबाद में पहले बलदेव ग्रोहा जिला अध्यक्ष थे। वह लगातार 2 टर्म से यहां पार्टी के अध्यक्ष रहे। 2024 के चुनाव में वह रतिया से टिकट के दावेदार थे लेकिन भाजपा ने सुनीता दुग्गल को टिकट दे दी। इसके बाद इसी साल 17 मार्च को भाजपा ने ग्रोहा को हटाकर यहां से प्रवीण जोड़ा को अध्यक्ष बना दिया। जोड़ा राज्यसभा सांसद सुभाष बराला के करीबी हैं। वहीं भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले जजपा नेता देवेंद्र बबली को पार्टी में शामिल कर टिकट दे दी। ग्रोहा ने हटने से पहले 3 मंडल अध्यक्ष लगाए: पिछले जिला अध्यक्ष बलदेव ग्रोहा ने अध्यक्ष पद से हटाने से एक दिन पहले 16 मार्च को 3 मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी। इनमें रतिया से अपने समर्थक जोगेंद्र नंदा, टोहाना में पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली समर्थक संकेत गर्ग व जाखल में किरण शर्मा की नियुक्ति कर दी। इसके अगले ही दिन ग्रोहा को बदल दिया गया। बराला के करीबी नए अध्यक्ष ने एक नगर मंडल अध्यक्ष हटाया: 17 मार्च को जिला अध्यक्ष बनते ही प्रवीण जोड़ा ने रतिया नगर मंडल के अध्यक्ष जोगेंद्र नंदा को हटा दिया। उनकी जगह अंकित सिंगला को नगर मंडल अध्यक्ष बना दिया। नंदा उसी लिस्ट में शामिल थे, जिसे पिछले अध्यक्ष ने कुर्सी जाने से एक दिन पहले नियुक्त किया था। बराला के करीबी ने बबली के नजदीकी को भी हटाया: टोहाना में भी पूर्व अध्यक्ष बलदेव ग्रोहा ने पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली के समर्थक संकेत गर्ग को प्रधान बदलने से पहले मंडल अध्यक्ष बनाया था। बबली ने इस पर खुशी जताते हुए उनका स्वागत भी किया। मगर, 10 दिन बाद बराला के करीबी नए जिलाध्यक्ष प्रवीन जोड़ा ने बबली समर्थक संकेत को हटा दिया। उनकी जगह पर सांसद बराला समर्थक रमन मडिया को मंडल अध्यक्ष बना दिया। ग्रोहा की ऑडियो वायरल हुई, दुग्गल के लिए अपशब्द कहे: इसके बाद पूर्व जिलाध्यक्ष बलदेव ग्रोहा की ऑडियो वायरल हुई। जिसमें वह पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल के लिए अपशब्द शब्द बोल रहे थे। इस ऑडियो को वायरल करने पर बलदेव ग्रोहा ने तीन पार्षदों के खिलाफ थाने में शिकायत भी दी। इसी ऑडियो को आधार बनाकर सुनीता दुग्गल के समर्थकों ने पूर्व जिलाध्यक्ष के खिलाफ रोष जताते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की मांग तक कर डाली। बबली के प्रचार में भी नहीं गए थे बराला: 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले देवेंद्र बबली JJP छोड़ BJP में आ गए थे। भाजपा ने उन्हें टोहाना से उम्मीदवार बनाया था। सुभाष बराला और देवेंद्र बबली आपस में कट्‌टर सियासी विरोधी रहे हैं। इस वजह से सुभाष बराला एक दिन भी देवेंद्र बबली के साथ चुनाव प्रचार में नहीं आए। हालांकि, टिकट मिलने के दो दिन बाद ही देवेंद्र बबली ने सुभाष बराला के निवास पर जाकर मुलाकात की थी। मगर बराला ने चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखी। इसका खामियाजा देवेंद्र बबली की हार के रूप में बीजेपी ने भुगता। बड़े मौके छोड़ पूर्व विधायक BJP कार्यालय तक नहीं आते: फतेहाबाद से विधायक रहे दुड़ाराम का अलग खेमा है। वह बाकी संगठन के पदाधिकारियों से अलग चलते नजर आते हैं। पिछले 5 साल में विधायक रहते हुए भी दुड़ाराम बीजेपी कार्यालय में सिर्फ बड़े मौकों पर ही नजर आए थे। 3 चुनाव से गुटबाजी का नुकसान उठा रही भाजपा 1. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 1 लाख से ज्यादा लीड
लोकसभा चुनाव में सिरसा लोकसभा सीट से बीजेपी ने अशोक तंवर को टिकट दी थी। फतेहाबाद जिला भी इसी सीट के अधीन आता है। चुनाव में तंवर को कांग्रेस की कुमारी सैलजा ने 2,68,497 वोट से हराया था। इनमें अकेले फतेहाबाद जिले से कांग्रेस की सैलजा को 1,07,384 वोटों की लीड मिली थी। 2. विधानसभा चुनाव में तीनों सीट हारे
2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने फतेहाबाद से दुड़ाराम बिश्नोई, टोहाना से देवेंद्र बबली और रतिया से सुनीता दुग्गल को टिकट दी थी। मगर, ये तीनों ही सीटें भाजपा हार गई। 3. नगर पालिका चुनाव में चेयरमैन चुनाव हारे
इसी साल फतेहाबाद की जाखल नगर पालिका में चुनाव हुए। इसमें भाजपा के चेयरमैन उम्मीदवार सुरेंद्र मित्तल 1319 वोटों से हार गए। उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार विकास कामरा ने हराया। यह हार तब हुई, जब भाजपा उम्मीदवार ने पार्टी के चुनाव चिन्ह कमल पर चुनाव लड़ा था। यह क्षेत्र राज्यसभा सांसद सुभाष बराला और पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली के विधानसभा क्षेत्र टोहाना में आता है। हरियाणा के फतेहाबाद में भाजपा 5 गुटों में बंट गई है। यह गुट भी राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल, पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली, पूर्व विधायक दुड़ाराम बिश्नोई और पूर्व जिला अध्यक्ष बलदेव ग्रोहा के बने हुए हैं। हालात ये हैं कि एक गुट किसी वर्कर को पद देता है तो दूसरा उसको हटा देता है। इसी खींचतान की वजह से भाजपा लोकसभा में पिछड़ने के बाद विधानसभा में भी सारी सीटें हारी। वहीं निकाय चुनाव में भी नगर पालिका का चेयरमैन तक नहीं जिता पाए। हालांकि दिग्गजों के नाम जुड़े होने की वजह से संगठन के बड़े अधिकारी इनसे किनारा करके बैठे हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद
फतेहाबाद में पहले बलदेव ग्रोहा जिला अध्यक्ष थे। वह लगातार 2 टर्म से यहां पार्टी के अध्यक्ष रहे। 2024 के चुनाव में वह रतिया से टिकट के दावेदार थे लेकिन भाजपा ने सुनीता दुग्गल को टिकट दे दी। इसके बाद इसी साल 17 मार्च को भाजपा ने ग्रोहा को हटाकर यहां से प्रवीण जोड़ा को अध्यक्ष बना दिया। जोड़ा राज्यसभा सांसद सुभाष बराला के करीबी हैं। वहीं भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले जजपा नेता देवेंद्र बबली को पार्टी में शामिल कर टिकट दे दी। ग्रोहा ने हटने से पहले 3 मंडल अध्यक्ष लगाए: पिछले जिला अध्यक्ष बलदेव ग्रोहा ने अध्यक्ष पद से हटाने से एक दिन पहले 16 मार्च को 3 मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी। इनमें रतिया से अपने समर्थक जोगेंद्र नंदा, टोहाना में पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली समर्थक संकेत गर्ग व जाखल में किरण शर्मा की नियुक्ति कर दी। इसके अगले ही दिन ग्रोहा को बदल दिया गया। बराला के करीबी नए अध्यक्ष ने एक नगर मंडल अध्यक्ष हटाया: 17 मार्च को जिला अध्यक्ष बनते ही प्रवीण जोड़ा ने रतिया नगर मंडल के अध्यक्ष जोगेंद्र नंदा को हटा दिया। उनकी जगह अंकित सिंगला को नगर मंडल अध्यक्ष बना दिया। नंदा उसी लिस्ट में शामिल थे, जिसे पिछले अध्यक्ष ने कुर्सी जाने से एक दिन पहले नियुक्त किया था। बराला के करीबी ने बबली के नजदीकी को भी हटाया: टोहाना में भी पूर्व अध्यक्ष बलदेव ग्रोहा ने पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली के समर्थक संकेत गर्ग को प्रधान बदलने से पहले मंडल अध्यक्ष बनाया था। बबली ने इस पर खुशी जताते हुए उनका स्वागत भी किया। मगर, 10 दिन बाद बराला के करीबी नए जिलाध्यक्ष प्रवीन जोड़ा ने बबली समर्थक संकेत को हटा दिया। उनकी जगह पर सांसद बराला समर्थक रमन मडिया को मंडल अध्यक्ष बना दिया। ग्रोहा की ऑडियो वायरल हुई, दुग्गल के लिए अपशब्द कहे: इसके बाद पूर्व जिलाध्यक्ष बलदेव ग्रोहा की ऑडियो वायरल हुई। जिसमें वह पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल के लिए अपशब्द शब्द बोल रहे थे। इस ऑडियो को वायरल करने पर बलदेव ग्रोहा ने तीन पार्षदों के खिलाफ थाने में शिकायत भी दी। इसी ऑडियो को आधार बनाकर सुनीता दुग्गल के समर्थकों ने पूर्व जिलाध्यक्ष के खिलाफ रोष जताते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित करने की मांग तक कर डाली। बबली के प्रचार में भी नहीं गए थे बराला: 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले देवेंद्र बबली JJP छोड़ BJP में आ गए थे। भाजपा ने उन्हें टोहाना से उम्मीदवार बनाया था। सुभाष बराला और देवेंद्र बबली आपस में कट्‌टर सियासी विरोधी रहे हैं। इस वजह से सुभाष बराला एक दिन भी देवेंद्र बबली के साथ चुनाव प्रचार में नहीं आए। हालांकि, टिकट मिलने के दो दिन बाद ही देवेंद्र बबली ने सुभाष बराला के निवास पर जाकर मुलाकात की थी। मगर बराला ने चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखी। इसका खामियाजा देवेंद्र बबली की हार के रूप में बीजेपी ने भुगता। बड़े मौके छोड़ पूर्व विधायक BJP कार्यालय तक नहीं आते: फतेहाबाद से विधायक रहे दुड़ाराम का अलग खेमा है। वह बाकी संगठन के पदाधिकारियों से अलग चलते नजर आते हैं। पिछले 5 साल में विधायक रहते हुए भी दुड़ाराम बीजेपी कार्यालय में सिर्फ बड़े मौकों पर ही नजर आए थे। 3 चुनाव से गुटबाजी का नुकसान उठा रही भाजपा 1. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 1 लाख से ज्यादा लीड
लोकसभा चुनाव में सिरसा लोकसभा सीट से बीजेपी ने अशोक तंवर को टिकट दी थी। फतेहाबाद जिला भी इसी सीट के अधीन आता है। चुनाव में तंवर को कांग्रेस की कुमारी सैलजा ने 2,68,497 वोट से हराया था। इनमें अकेले फतेहाबाद जिले से कांग्रेस की सैलजा को 1,07,384 वोटों की लीड मिली थी। 2. विधानसभा चुनाव में तीनों सीट हारे
2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने फतेहाबाद से दुड़ाराम बिश्नोई, टोहाना से देवेंद्र बबली और रतिया से सुनीता दुग्गल को टिकट दी थी। मगर, ये तीनों ही सीटें भाजपा हार गई। 3. नगर पालिका चुनाव में चेयरमैन चुनाव हारे
इसी साल फतेहाबाद की जाखल नगर पालिका में चुनाव हुए। इसमें भाजपा के चेयरमैन उम्मीदवार सुरेंद्र मित्तल 1319 वोटों से हार गए। उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार विकास कामरा ने हराया। यह हार तब हुई, जब भाजपा उम्मीदवार ने पार्टी के चुनाव चिन्ह कमल पर चुनाव लड़ा था। यह क्षेत्र राज्यसभा सांसद सुभाष बराला और पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली के विधानसभा क्षेत्र टोहाना में आता है।   हरियाणा | दैनिक भास्कर