यूपी में अचानक बढ़ी गर्मी, आम का स्वाद बिगाड़ेगी:लखनऊ की मैंगो बेल्ट में 20 साल बाद आया इतना बौर, मुरझाने का खतरा

यूपी में अचानक बढ़ी गर्मी, आम का स्वाद बिगाड़ेगी:लखनऊ की मैंगो बेल्ट में 20 साल बाद आया इतना बौर, मुरझाने का खतरा

यूपी में मार्च के महीने में जब तापमान 30 डिग्री होना चाहिए, वह 35 डिग्री से ऊपर चला गया है। मतलब, औसत से 5 डिग्री ज्यादा हो गया है। इसका सीधा असर आम की फसल पर भी पड़ सकता है। इस समय आम की फसल पर बौर आ चुका है। यह पिछले कई सालों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। लेकिन, बढ़ती गर्मी से किसान परेशान हैं। क्योंकि ऐसे मौसम में आम की फसल पर कीड़ों का अटैक सबसे ज्यादा होता है। ये कीड़े आम के फल का साइज न सिर्फ छोटा कर देते हैं, बल्कि मिठास भी कम कर देते हैं। लखनऊ और उसके आसपास इलाके में हजारों किसान आम की खेती करते हैं। यहां का आम विदेशों तक में सप्लाई होता है। पेड़ों पर लदे बौर को देखकर किसान खुश हैं। लेकिन, इस बात को लेकर परेशान भी हैं कि कहीं गर्मी और बेमौसम बरसात से सब कुछ बर्बाद न हो जाए। दैनिक भास्कर की टीम दुनिया में आम की सबसे अच्छी पैदावार देने वाले मलिहाबाद और आसपास के इलाकों में पहुंची। किसानों से बात की। आम की क्वालिटी और उसके रखरखाव को समझा। एक्सपर्ट्स से जाना कि मौसम में बदलाव का फसल पर क्या असर पड़ सकता है? अब पढ़िए किसान क्या कहते हैं… रामरति बोली- पिछले 4 साल से कोई कमाई नहीं हुई
लखनऊ मुख्यालय से करीब 34 किलोमीटर दूर मलिहाबाद इलाका है। यहां चारों तरफ सिर्फ आम के बाग नजर आते हैं। आसपास काकोरी और माल इलाका है। यहां भी किसान आम की ही फसल पर जोर देते हैं। इसीलिए 27 हजार हेक्टेयर में फैले इस हिस्से को ‘मैंगो बेल्ट’ कहा जाता है। हम लखनऊ से सीतापुर वाले रास्ते से होते हुए यहां के लिए निकले। जैसे ही इस इलाके में पहुंचे, आम के हर पेड़ पर बौर ही बौर दिखने लगे। रास्ते में हम एक बाग में पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात रामरति से हुई। उनके आम के 100 से ज्यादा पेड़ हैं। कहती हैं- पिछले 4 साल में कोई कमाई नहीं हुई। यहां तक कि जो दवा का छिड़काव किया, उसका पैसा भी नहीं निकल पाया। इस बार हर पेड़ पर बौर आया है, तो उम्मीद है। एक महीने पहले बाग में पानी भरा था, गर्मी के चलते वह सूख गया। अब 10 दिन बाद फिर से पानी लगाना पड़ेगा। रामरति कहती हैं- अब इतना बौर है तो उम्मीद है कि कुछ न कुछ होगा। जब कमाई होगी तो जो दवा का पैसा बकाया है और जो कर्ज लेकर फसल में खाद डाली है, उसका पैसा अदा कर देंगे। रामरति के पति राम खेलावन कहते हैं- इस बार बौर खूब आया है। लेकिन, इस वक्त जैसी गर्मी पड़ रही और बीच-बीच में बरसात हो रही, उससे नुकसान हो सकता है। बाकी यहां पानी की दिक्कत है। पानी नहीं मिलता है, तो आम छोटा रह जाता है। यहां सब कुछ सरकारी ट्यूबवेल के भरोसे है, वह भी दूर है। वहां से सब पानी लेते हैं, इसलिए पानी मिलने में देर हो जाती है। राम औतार ने कहा- गर्मी बढ़ेगी, तो कीड़े बौर खा जाएंगे
इसके बाद हम माल इलाके की तरफ पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात राम औतार से हुई। हमने उनसे सबसे पहले यही पूछा कि यहां के आम दुनियाभर में मशहूर क्यों हैं? राम औतार कहते हैं- यहां के आम का स्वाद बहुत अच्छा है। दूसरी जगह भी आम मिलेंगे, लेकिन उसका स्वाद यहां के जैसा नहीं होगा। यहां की मिट्टी बालू कपसा वाली है, मटियार नहीं है। इसलिए आम बहुत अच्छा होता है। पिछले साल बौर नहीं आया था, इस साल बहुत आया है। चंद्रवीर बोले- बरसात ज्यादा हुई, तो फंगस लग जाएगा
मलिहाबाद, काकोरी और माल इलाके में बहुत सारे ऐसे किसान हैं, जो कई प्रकार के आमों की खेती करते हैं। ऐसे ही हमें एक किसान चंद्रवीर सिंह चौहान मिले। चंद्रवीर की 12 एकड़ बाग में करीब 20 तरह के आम के पेड़ हैं। उनके बाग के आम विदेश में भी जाते हैं। इस वक्त उनके बाग के छोटे से लेकर बड़े सभी पेड़ में खूब बौर आए हुए हैं। चंद्रवीर से हमने बात की। चंद्रवीर कहते हैं- मैंने पिछले 20 साल में इतना बौर नहीं देखा, जितना इस बार आया है। इसकी दो वजह हैं। पहली यह कि जनवरी-फरवरी में ही तापमान बढ़ गया। इस वक्त तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना चाहिए, लेकिन 35 डिग्री से ऊपर पहुंच रहा है। इससे पॉलिनेशन में दिक्कत आएगी और फ्रूट सेट होने में समस्या होगी। बीच में 1-2 बार बरसात भी हुई अगर यह ज्यादा हुई तो फंगस की समस्या हो जाएगी। चंद्रवीर दूसरी वजह में कहते हैं- बाग के बहुत सारे ठेकेदारों ने इस बार केमिकल का इस्तेमाल किया। इसमें कल्टार प्रमुख है। इसका इस्तेमाल हर पेड़ में 5 से 10 ग्राम होना चाहिए। लेकिन, लोगों ने ज्यादा पैदावार के लिए 100-150 ग्राम तक प्रयोग किया। इससे पेड़ की ग्रोथ रुक जाती है और जहां नए कल्ले निकलने चाहिए, वहां बौर निकल आता है। इससे आने वाले सालों में पेड़ को बहुत नुकसान होगा। हमारा आम आम्रपाली आबूधाबी तक जाता है
चंद्रवीर अपने बाग के फलों का नाम गिनाते हुए कहते हैं- दशहरी, आम्रपाली, अंबिका, हुश्नआरा, गुलाब खास, सुर्खा बर्मा, कस्तूरी गोल्ड, बनराज, मियां जाकी, बनाना, नाजुक बदन, केसर जैसे कुल 20 तरह के आम हैं। हमारे पास आम्रपाली के 1 हजार से ज्यादा पेड़ है। हम चंद्रवीर के साथ आम्रपाली के बाग में पहुंचे। इन पेड़ों की उम्र अभी 4 साल है, लेकिन पिछले साल से ही इसमें पैदावार शुरू हो चुकी है। चंद्रवीर कहते हैं- हमने पिछले साल 30 क्विंटल आम्रपाली आम की पैदावार की और सभी आबूधाबी भेजे। उस वक्त हमारे आम 90 रुपए प्रति किलो के हिसाब से गए थे। इस बार हमारा टारगेट इससे भी ज्यादा है। साथ ही हम कलर आम पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। इसलिए आम्रपाली के बगल ही कलर आमों के पौधे लगाए हैं। आने वाले समय में हरे आम की जगह कलर आम ज्यादा पॉपुलर होंगे। वह कहते हैं- हम आमों की पैकिंग पर भी ज्यादा ध्यान देते हैं। इसलिए भी हमारे आम बाकी लोगों के मुकाबले ज्यादा रेट पर जाते हैं। यूपी से आम खाड़ी देशों के अलावा मलेशिया, सिंगापुर, कुछ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में भी निर्यात किया जाता है। अब जानिए एक्सपर्ट क्या कहते हैं? इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में वनस्पति विज्ञान विभाग के एचओडी रहे प्रोफेसर एनबी सिंह कहते हैं- गर्मी बढ़ेगी, तो आम का बौर मुरझाएगा। जाहिर है, इससे आम का उत्पादन घटेगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या ज्यादा गर्मी की वजह से इतना ज्यादा बौर आ गया है? उन्होंने कहा- बौर तो आना ही था, लेकिन जो फ्रूटिंग होगी वह टेम्प्रेचर और मौसम पर डिपेंड करेगी। इस बार कम ठंड पड़ी। इसका मतलब है कि धरती का एवरेज तापमान बढ़ता जा रहा है। यूपी में उगता है देश का सबसे ज्यादा आम
उत्तर प्रदेश आम उत्पादन में पूरे देश में सबसे आगे है। यहां करीब पौने 3 लाख हेक्टेयर जमीन पर आम की खेती होती है। इससे करीब 45 लाख टन आम पैदा होता है। इसमें 30% हिस्सा लखनऊ के मलिहाबाद, काकोरी और माल इलाके में होता है। यहां के आम की क्वालिटी अच्छी होती है, इसलिए पूरे देश के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… संभल में गाजी मियां के नेजा मेले पर विवाद बढ़ा, झंडे वाला गड्ढा बंद कराया, चप्पे-चप्पे पर फोर्स, ड्रोन से निगरानी संभल में महमूद गजनवी के भांजे अब्दुल सालार गाजी (गाजी मियां) की याद में लगने वाले नेजा मेले पर विवाद बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को पुलिस ने मेले की शुरुआत से पहले जहां झंडा (ढाल) लगाया जाता था, उस गड्ढे को सीमेंट से बंद करवा दिया। जहां मेला लगता है, वहां भारी संख्या में फोर्स तैनात है। ड्रोन से निगरानी की जा रही है। ASP (उत्तरी) श्रीश्चंद्र और सीओ अनुज चौधरी ने PAC-RRF के जवानों के साथ फ्लैग मार्च भी किया। पढ़ें पूरी खबर यूपी में मार्च के महीने में जब तापमान 30 डिग्री होना चाहिए, वह 35 डिग्री से ऊपर चला गया है। मतलब, औसत से 5 डिग्री ज्यादा हो गया है। इसका सीधा असर आम की फसल पर भी पड़ सकता है। इस समय आम की फसल पर बौर आ चुका है। यह पिछले कई सालों की तुलना में कई गुना ज्यादा है। लेकिन, बढ़ती गर्मी से किसान परेशान हैं। क्योंकि ऐसे मौसम में आम की फसल पर कीड़ों का अटैक सबसे ज्यादा होता है। ये कीड़े आम के फल का साइज न सिर्फ छोटा कर देते हैं, बल्कि मिठास भी कम कर देते हैं। लखनऊ और उसके आसपास इलाके में हजारों किसान आम की खेती करते हैं। यहां का आम विदेशों तक में सप्लाई होता है। पेड़ों पर लदे बौर को देखकर किसान खुश हैं। लेकिन, इस बात को लेकर परेशान भी हैं कि कहीं गर्मी और बेमौसम बरसात से सब कुछ बर्बाद न हो जाए। दैनिक भास्कर की टीम दुनिया में आम की सबसे अच्छी पैदावार देने वाले मलिहाबाद और आसपास के इलाकों में पहुंची। किसानों से बात की। आम की क्वालिटी और उसके रखरखाव को समझा। एक्सपर्ट्स से जाना कि मौसम में बदलाव का फसल पर क्या असर पड़ सकता है? अब पढ़िए किसान क्या कहते हैं… रामरति बोली- पिछले 4 साल से कोई कमाई नहीं हुई
लखनऊ मुख्यालय से करीब 34 किलोमीटर दूर मलिहाबाद इलाका है। यहां चारों तरफ सिर्फ आम के बाग नजर आते हैं। आसपास काकोरी और माल इलाका है। यहां भी किसान आम की ही फसल पर जोर देते हैं। इसीलिए 27 हजार हेक्टेयर में फैले इस हिस्से को ‘मैंगो बेल्ट’ कहा जाता है। हम लखनऊ से सीतापुर वाले रास्ते से होते हुए यहां के लिए निकले। जैसे ही इस इलाके में पहुंचे, आम के हर पेड़ पर बौर ही बौर दिखने लगे। रास्ते में हम एक बाग में पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात रामरति से हुई। उनके आम के 100 से ज्यादा पेड़ हैं। कहती हैं- पिछले 4 साल में कोई कमाई नहीं हुई। यहां तक कि जो दवा का छिड़काव किया, उसका पैसा भी नहीं निकल पाया। इस बार हर पेड़ पर बौर आया है, तो उम्मीद है। एक महीने पहले बाग में पानी भरा था, गर्मी के चलते वह सूख गया। अब 10 दिन बाद फिर से पानी लगाना पड़ेगा। रामरति कहती हैं- अब इतना बौर है तो उम्मीद है कि कुछ न कुछ होगा। जब कमाई होगी तो जो दवा का पैसा बकाया है और जो कर्ज लेकर फसल में खाद डाली है, उसका पैसा अदा कर देंगे। रामरति के पति राम खेलावन कहते हैं- इस बार बौर खूब आया है। लेकिन, इस वक्त जैसी गर्मी पड़ रही और बीच-बीच में बरसात हो रही, उससे नुकसान हो सकता है। बाकी यहां पानी की दिक्कत है। पानी नहीं मिलता है, तो आम छोटा रह जाता है। यहां सब कुछ सरकारी ट्यूबवेल के भरोसे है, वह भी दूर है। वहां से सब पानी लेते हैं, इसलिए पानी मिलने में देर हो जाती है। राम औतार ने कहा- गर्मी बढ़ेगी, तो कीड़े बौर खा जाएंगे
इसके बाद हम माल इलाके की तरफ पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात राम औतार से हुई। हमने उनसे सबसे पहले यही पूछा कि यहां के आम दुनियाभर में मशहूर क्यों हैं? राम औतार कहते हैं- यहां के आम का स्वाद बहुत अच्छा है। दूसरी जगह भी आम मिलेंगे, लेकिन उसका स्वाद यहां के जैसा नहीं होगा। यहां की मिट्टी बालू कपसा वाली है, मटियार नहीं है। इसलिए आम बहुत अच्छा होता है। पिछले साल बौर नहीं आया था, इस साल बहुत आया है। चंद्रवीर बोले- बरसात ज्यादा हुई, तो फंगस लग जाएगा
मलिहाबाद, काकोरी और माल इलाके में बहुत सारे ऐसे किसान हैं, जो कई प्रकार के आमों की खेती करते हैं। ऐसे ही हमें एक किसान चंद्रवीर सिंह चौहान मिले। चंद्रवीर की 12 एकड़ बाग में करीब 20 तरह के आम के पेड़ हैं। उनके बाग के आम विदेश में भी जाते हैं। इस वक्त उनके बाग के छोटे से लेकर बड़े सभी पेड़ में खूब बौर आए हुए हैं। चंद्रवीर से हमने बात की। चंद्रवीर कहते हैं- मैंने पिछले 20 साल में इतना बौर नहीं देखा, जितना इस बार आया है। इसकी दो वजह हैं। पहली यह कि जनवरी-फरवरी में ही तापमान बढ़ गया। इस वक्त तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना चाहिए, लेकिन 35 डिग्री से ऊपर पहुंच रहा है। इससे पॉलिनेशन में दिक्कत आएगी और फ्रूट सेट होने में समस्या होगी। बीच में 1-2 बार बरसात भी हुई अगर यह ज्यादा हुई तो फंगस की समस्या हो जाएगी। चंद्रवीर दूसरी वजह में कहते हैं- बाग के बहुत सारे ठेकेदारों ने इस बार केमिकल का इस्तेमाल किया। इसमें कल्टार प्रमुख है। इसका इस्तेमाल हर पेड़ में 5 से 10 ग्राम होना चाहिए। लेकिन, लोगों ने ज्यादा पैदावार के लिए 100-150 ग्राम तक प्रयोग किया। इससे पेड़ की ग्रोथ रुक जाती है और जहां नए कल्ले निकलने चाहिए, वहां बौर निकल आता है। इससे आने वाले सालों में पेड़ को बहुत नुकसान होगा। हमारा आम आम्रपाली आबूधाबी तक जाता है
चंद्रवीर अपने बाग के फलों का नाम गिनाते हुए कहते हैं- दशहरी, आम्रपाली, अंबिका, हुश्नआरा, गुलाब खास, सुर्खा बर्मा, कस्तूरी गोल्ड, बनराज, मियां जाकी, बनाना, नाजुक बदन, केसर जैसे कुल 20 तरह के आम हैं। हमारे पास आम्रपाली के 1 हजार से ज्यादा पेड़ है। हम चंद्रवीर के साथ आम्रपाली के बाग में पहुंचे। इन पेड़ों की उम्र अभी 4 साल है, लेकिन पिछले साल से ही इसमें पैदावार शुरू हो चुकी है। चंद्रवीर कहते हैं- हमने पिछले साल 30 क्विंटल आम्रपाली आम की पैदावार की और सभी आबूधाबी भेजे। उस वक्त हमारे आम 90 रुपए प्रति किलो के हिसाब से गए थे। इस बार हमारा टारगेट इससे भी ज्यादा है। साथ ही हम कलर आम पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। इसलिए आम्रपाली के बगल ही कलर आमों के पौधे लगाए हैं। आने वाले समय में हरे आम की जगह कलर आम ज्यादा पॉपुलर होंगे। वह कहते हैं- हम आमों की पैकिंग पर भी ज्यादा ध्यान देते हैं। इसलिए भी हमारे आम बाकी लोगों के मुकाबले ज्यादा रेट पर जाते हैं। यूपी से आम खाड़ी देशों के अलावा मलेशिया, सिंगापुर, कुछ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में भी निर्यात किया जाता है। अब जानिए एक्सपर्ट क्या कहते हैं? इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में वनस्पति विज्ञान विभाग के एचओडी रहे प्रोफेसर एनबी सिंह कहते हैं- गर्मी बढ़ेगी, तो आम का बौर मुरझाएगा। जाहिर है, इससे आम का उत्पादन घटेगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या ज्यादा गर्मी की वजह से इतना ज्यादा बौर आ गया है? उन्होंने कहा- बौर तो आना ही था, लेकिन जो फ्रूटिंग होगी वह टेम्प्रेचर और मौसम पर डिपेंड करेगी। इस बार कम ठंड पड़ी। इसका मतलब है कि धरती का एवरेज तापमान बढ़ता जा रहा है। यूपी में उगता है देश का सबसे ज्यादा आम
उत्तर प्रदेश आम उत्पादन में पूरे देश में सबसे आगे है। यहां करीब पौने 3 लाख हेक्टेयर जमीन पर आम की खेती होती है। इससे करीब 45 लाख टन आम पैदा होता है। इसमें 30% हिस्सा लखनऊ के मलिहाबाद, काकोरी और माल इलाके में होता है। यहां के आम की क्वालिटी अच्छी होती है, इसलिए पूरे देश के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… संभल में गाजी मियां के नेजा मेले पर विवाद बढ़ा, झंडे वाला गड्ढा बंद कराया, चप्पे-चप्पे पर फोर्स, ड्रोन से निगरानी संभल में महमूद गजनवी के भांजे अब्दुल सालार गाजी (गाजी मियां) की याद में लगने वाले नेजा मेले पर विवाद बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को पुलिस ने मेले की शुरुआत से पहले जहां झंडा (ढाल) लगाया जाता था, उस गड्ढे को सीमेंट से बंद करवा दिया। जहां मेला लगता है, वहां भारी संख्या में फोर्स तैनात है। ड्रोन से निगरानी की जा रही है। ASP (उत्तरी) श्रीश्चंद्र और सीओ अनुज चौधरी ने PAC-RRF के जवानों के साथ फ्लैग मार्च भी किया। पढ़ें पूरी खबर   उत्तरप्रदेश | दैनिक भास्कर