सोनीपत की अनाज मंडी हो रही गड़बड़ी:एजेंसी-एजेंट की किसानों से अवैध वसूली; ऑनलाइन गेटपास की व्यवस्था, हाथ से दे रहे टोकन

सोनीपत की अनाज मंडी हो रही गड़बड़ी:एजेंसी-एजेंट की किसानों से अवैध वसूली; ऑनलाइन गेटपास की व्यवस्था, हाथ से दे रहे टोकन

सोनीपत की अनाज मंडी में किसानों को भारी अव्यवस्थाओं और धांधली का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि मंडी प्रशासन और एजेंसियों की मिलीभगत से उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है, ताकि वे सरकारी खरीद की लंबी प्रक्रिया से तंग आकर अपनी फसल प्राइवेट आढ़तियों को बेचने को मजबूर हो जाएं। गेट पास जारी करने में धांधली, सफाई और लोडिंग में देरी, अवैध वसूली और बुनियादी सुविधाओं की कमी से किसान बेहाल हैं। सोनीपत की अनाज मंडी में गेट पास ऑनलाइन कट रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके पहले आने वाले किसानों के ऑनलाइन गेट पास पर मैन्युअल लिखकर उन्हें बाद का नंबर दिया जा रहा है। मार्केट कमेटी के गेट पास काटने वाले कर्मचारी और HWC (हरियाणा वेयर वेयरहाउस एजेंसी) के हैंडलिंग एजेंट मिलीभगत के चलते किसानों के साथ लूट हो रही है। मुख्य गेट पर सेटिंग से नंबर लगाने और HWC एजेंट द्वारा लेबर वर्क के रुपए ज्यादा लेने तक का खेल मंडी में चल रहा है। किसान कप्तान सिंह ने दी शिकायत फाजिलपुर गांव के किसान कप्तान सिंह ने शिकायत की कि उन्होंने ऑनलाइन गेट पास कटवाया था, लेकिन मैन्युअल पर्ची पर पांचवां नंबर दे दिया गया। जबकि वह सबसे पहले सुबह 5.35 बजे पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब सेटिंग के तहत किया जा रहा है, जिससे तयशुदा किसानों को पहले नंबर दिया जा सके। उससे पहले चार नंबर मैन्युअल लगाए गए थे। उसके बाद HWC एजेंसी द्वारा लगाए गए हैंडलिंग एजेंट द्वारा एक्स्ट्रा पैसे लेने के आरोप लगे हैं। प्रक्रिया बहुत धीमी : अंकित भटगांव से आए किसान अंकित ने बताया कि वह सुबह 8 बजे मंडी पहुंचे थे, लेकिन उनका नंबर 36 था। 3 बजे तक सिर्फ 8 नंबर तक ही प्रक्रिया पूरी हो पाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई और लोडिंग का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी के पास केवल दो मशीनें और दो लेबर पार्टियां हैं, जिससे प्रक्रिया बहुत धीमी हो गई है। दिनभर इंतजार के बाद नहीं आया नंबर भटगांव के किसान अजय ने कहा कि वह सुबह 7:30 बजे मंडी पहुंचे थे, लेकिन दिनभर इंतजार के बावजूद उनका नंबर नहीं आया। उन्होंने कहा, मंडी में पूरा खेल इस तरह चल रहा है कि किसान को तंग करके प्राइवेट आढ़तियों के पास भेजा जा रहा है। यहां न कोई व्यवस्था है, न पानी, न पर्याप्त लेबर। अवैध वसूली और प्राइवेट आढ़तियों को फायदा पहुंचाने के आरोप किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लेबर कार्य के लिए 7 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन HWC द्वारा नियुक्त एजेंट रामधन एंड संस 10 रुपए प्रति क्विंटल वसूल रहे हैं। किसानों से बारदाना (बोरे) के नाम पर भी अवैध वसूली की जा रही है, जबकि सरकार इसे मुफ्त में उपलब्ध कराती है। अजय ने कहा, यहां सब मिलीभगत चल रही है। किसानों को इतनी परेशानी दी जा रही है कि वे मजबूरी में फसल प्राइवेट व्यापारियों को बेच दें, जहां उन्हें 600 से 800 रुपए प्रति क्विंटल तक का नुकसान हो रहा है। मूलभूत सुविधा भी दुरुस्त नहीं कर पाई मार्केट कमेटी किसानों द्वारा पीने के पानी की समस्या को लेकर हमने रियलिटी चेक किया तो समस्या बिल्कुल ज्यों की त्यों मिली। जहां गेट पास काटने वाले कार्यालय के नजदीक वाटर कूलर लगाया गया है। यहां पर कई वाटर कूलर एक ही जगह पर लगाए गए हैं, लेकिन किसी में भी पानी नहीं था। सभी नल को खोलकर चेक किया गया तो किसी भी नल से पानी नहीं आ रहा था। वाटर कूलर को ऊपर से खोलकर देखा गया तो अंदर जमी हुई गंदगी बयां कर रही है कि मार्केट कमेटी सचिव के दावे केवल कागजों में नजर आ रहे हैं। फसल आने से पहले तमाम व्यवस्था करने की जिम्मेदारी मार्केट कमेटी सचिव की होती है। लेकिन यहां पर केवल हवा हवाई बातें हो रही है। वहीं किसानों ने यह भी कहा है की मंडी में शेड के नीचे पानी के कैम्पर रखवाकर व्यवस्था होनी चाहिए। वहीं मंडी के दूसरे कोने पर एक किसान ने बताया कि पानी पीने के लिए गए तो उसमें खारा पानी मिला। पीने के पानी वाले कूलर में तलहटी में थोड़ा सा पानी था और उसमें गंदगी पड़ी हुई दिखाई दी क्या कहते हैं मार्केट कमेटी सचिव… मार्केट कमेटी सचिव ज्योति ने बताया कि 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो गई है और 5 से 6 अप्रैल के बीच अधिक मात्रा में गेहूं मंडी में आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल को 61 गेट पास काटे गए थे और अब तक 1120 क्विंटल सरसों की खरीद हो चुकी है। मंडी में मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त हैं। लेकिन शायद मैडम धरातल पर जाकर चेक नहीं कर पाई कि पीने के पानी के लिए किसान परेशान भटक रहे हैं। गेट पास को लेकर उन्होंने कहा कि, गेट पास जारी करने वाले कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो। HWC एजेंसी को भी सूचित कर दिया गया है कि किसानों से अधिक पैसे न लिए जाएं। अगर फिर भी किसी किसान से अवैध वसूली होती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों की मांग ,व्यवस्थाओं में सुधार और कार्रवाई किसानों ने मांग की है कि मंडी में बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाए, गेट पास घोटाले पर सख्त कार्रवाई हो और अवैध वसूली को रोका जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। सोनीपत की अनाज मंडी में किसानों को भारी अव्यवस्थाओं और धांधली का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि मंडी प्रशासन और एजेंसियों की मिलीभगत से उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है, ताकि वे सरकारी खरीद की लंबी प्रक्रिया से तंग आकर अपनी फसल प्राइवेट आढ़तियों को बेचने को मजबूर हो जाएं। गेट पास जारी करने में धांधली, सफाई और लोडिंग में देरी, अवैध वसूली और बुनियादी सुविधाओं की कमी से किसान बेहाल हैं। सोनीपत की अनाज मंडी में गेट पास ऑनलाइन कट रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके पहले आने वाले किसानों के ऑनलाइन गेट पास पर मैन्युअल लिखकर उन्हें बाद का नंबर दिया जा रहा है। मार्केट कमेटी के गेट पास काटने वाले कर्मचारी और HWC (हरियाणा वेयर वेयरहाउस एजेंसी) के हैंडलिंग एजेंट मिलीभगत के चलते किसानों के साथ लूट हो रही है। मुख्य गेट पर सेटिंग से नंबर लगाने और HWC एजेंट द्वारा लेबर वर्क के रुपए ज्यादा लेने तक का खेल मंडी में चल रहा है। किसान कप्तान सिंह ने दी शिकायत फाजिलपुर गांव के किसान कप्तान सिंह ने शिकायत की कि उन्होंने ऑनलाइन गेट पास कटवाया था, लेकिन मैन्युअल पर्ची पर पांचवां नंबर दे दिया गया। जबकि वह सबसे पहले सुबह 5.35 बजे पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब सेटिंग के तहत किया जा रहा है, जिससे तयशुदा किसानों को पहले नंबर दिया जा सके। उससे पहले चार नंबर मैन्युअल लगाए गए थे। उसके बाद HWC एजेंसी द्वारा लगाए गए हैंडलिंग एजेंट द्वारा एक्स्ट्रा पैसे लेने के आरोप लगे हैं। प्रक्रिया बहुत धीमी : अंकित भटगांव से आए किसान अंकित ने बताया कि वह सुबह 8 बजे मंडी पहुंचे थे, लेकिन उनका नंबर 36 था। 3 बजे तक सिर्फ 8 नंबर तक ही प्रक्रिया पूरी हो पाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई और लोडिंग का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी के पास केवल दो मशीनें और दो लेबर पार्टियां हैं, जिससे प्रक्रिया बहुत धीमी हो गई है। दिनभर इंतजार के बाद नहीं आया नंबर भटगांव के किसान अजय ने कहा कि वह सुबह 7:30 बजे मंडी पहुंचे थे, लेकिन दिनभर इंतजार के बावजूद उनका नंबर नहीं आया। उन्होंने कहा, मंडी में पूरा खेल इस तरह चल रहा है कि किसान को तंग करके प्राइवेट आढ़तियों के पास भेजा जा रहा है। यहां न कोई व्यवस्था है, न पानी, न पर्याप्त लेबर। अवैध वसूली और प्राइवेट आढ़तियों को फायदा पहुंचाने के आरोप किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लेबर कार्य के लिए 7 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन HWC द्वारा नियुक्त एजेंट रामधन एंड संस 10 रुपए प्रति क्विंटल वसूल रहे हैं। किसानों से बारदाना (बोरे) के नाम पर भी अवैध वसूली की जा रही है, जबकि सरकार इसे मुफ्त में उपलब्ध कराती है। अजय ने कहा, यहां सब मिलीभगत चल रही है। किसानों को इतनी परेशानी दी जा रही है कि वे मजबूरी में फसल प्राइवेट व्यापारियों को बेच दें, जहां उन्हें 600 से 800 रुपए प्रति क्विंटल तक का नुकसान हो रहा है। मूलभूत सुविधा भी दुरुस्त नहीं कर पाई मार्केट कमेटी किसानों द्वारा पीने के पानी की समस्या को लेकर हमने रियलिटी चेक किया तो समस्या बिल्कुल ज्यों की त्यों मिली। जहां गेट पास काटने वाले कार्यालय के नजदीक वाटर कूलर लगाया गया है। यहां पर कई वाटर कूलर एक ही जगह पर लगाए गए हैं, लेकिन किसी में भी पानी नहीं था। सभी नल को खोलकर चेक किया गया तो किसी भी नल से पानी नहीं आ रहा था। वाटर कूलर को ऊपर से खोलकर देखा गया तो अंदर जमी हुई गंदगी बयां कर रही है कि मार्केट कमेटी सचिव के दावे केवल कागजों में नजर आ रहे हैं। फसल आने से पहले तमाम व्यवस्था करने की जिम्मेदारी मार्केट कमेटी सचिव की होती है। लेकिन यहां पर केवल हवा हवाई बातें हो रही है। वहीं किसानों ने यह भी कहा है की मंडी में शेड के नीचे पानी के कैम्पर रखवाकर व्यवस्था होनी चाहिए। वहीं मंडी के दूसरे कोने पर एक किसान ने बताया कि पानी पीने के लिए गए तो उसमें खारा पानी मिला। पीने के पानी वाले कूलर में तलहटी में थोड़ा सा पानी था और उसमें गंदगी पड़ी हुई दिखाई दी क्या कहते हैं मार्केट कमेटी सचिव… मार्केट कमेटी सचिव ज्योति ने बताया कि 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो गई है और 5 से 6 अप्रैल के बीच अधिक मात्रा में गेहूं मंडी में आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल को 61 गेट पास काटे गए थे और अब तक 1120 क्विंटल सरसों की खरीद हो चुकी है। मंडी में मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त हैं। लेकिन शायद मैडम धरातल पर जाकर चेक नहीं कर पाई कि पीने के पानी के लिए किसान परेशान भटक रहे हैं। गेट पास को लेकर उन्होंने कहा कि, गेट पास जारी करने वाले कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो। HWC एजेंसी को भी सूचित कर दिया गया है कि किसानों से अधिक पैसे न लिए जाएं। अगर फिर भी किसी किसान से अवैध वसूली होती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों की मांग ,व्यवस्थाओं में सुधार और कार्रवाई किसानों ने मांग की है कि मंडी में बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाए, गेट पास घोटाले पर सख्त कार्रवाई हो और अवैध वसूली को रोका जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।   हरियाणा | दैनिक भास्कर