होर्मुज खुलते ही तेल बाजार में बड़ी राहत, वैश्विक बाजारों में लौटी तेजी

होर्मुज खुलते ही तेल बाजार में बड़ी राहत, वैश्विक बाजारों में लौटी तेजी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब हालात सामान्य होने के संकेत मिलने लगे हैं। ईरान की ओर से होर्मुज जलमार्ग को दोबारा सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खोलने के संकेत मिलने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक गिरावट आई है, जिससे दुनिया भर के निवेशकों और आयात पर निर्भर देशों को राहत की उम्मीद जगी है।

शुक्रवार, 17 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले ब्रेंट क्रूड करीब 99.39 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के दौरान तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था और मार्च महीने में यह लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।

संघर्ष शुरू होने से पहले फरवरी के अंत में कच्चे तेल की कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। लेकिन क्षेत्रीय तनाव और सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंताओं के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी। अब होर्मुज जलमार्ग के दोबारा खुलने की खबरों के बाद ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से अमेरिकी बाजारों में तेज खरीदारी देखने को मिली।

तेल की कीमतों में गिरावट से ग्लोबल शेयर बाजारों में तेजी

मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद के बीच अमेरिकी शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला। डाउ जोन्स इंडेक्स में करीब 1,000 अंकों की तेजी दर्ज की गई और यह लगभग 49,500 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं S&P 500 और नैस्डैक इंडेक्स में भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखने को मिली।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में कमी से कंपनियों की लागत घटने की संभावना बढ़ जाती है। खासतौर पर एयरलाइन, मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट और केमिकल सेक्टर को इसका फायदा मिल सकता है। तेल की कीमतें कम होने से महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा आपूर्ति को लेकर थी। होर्मुज जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। इस मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है।

ईरान ने सभी कमर्शियल जहाजों के लिए होर्मुज खोलने की जानकारी दी

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि क्षेत्र में युद्धविराम की स्थिति को देखते हुए होर्मुज स्ट्रेट को सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए खोल दिया गया है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है।

होर्मुज जलमार्ग दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और यहां से रोजाना बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। किसी भी तरह की रुकावट से दुनिया भर में ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

युद्ध के दौरान इस समुद्री मार्ग पर अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी। कई देशों और कंपनियों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ गए थे।

ट्रम्प ने होर्मुज को लेकर दिया बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी होर्मुज जलमार्ग से जुड़े घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने भविष्य में इस मार्ग को बंद नहीं करने का भरोसा दिया है। उनके अनुसार, अब इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल दबाव बनाने या रणनीतिक हथियार के रूप में नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति स्थापित करने के प्रयास आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में संबंधित देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट क्यों है महत्वपूर्ण

कच्चे तेल की कीमतों में कमी भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

तेल सस्ता होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे परिवहन लागत नियंत्रित रहने की संभावना बढ़ती है, जिसका असर आम लोगों के खर्च और बाजार में उपलब्ध वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमत कम होने से भारत को मिल सकते हैं कई फायदे

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को कई आर्थिक लाभ मिल सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख लाभ आयात बिल में कमी होना है। तेल आयात पर खर्च कम होने से देश के करंट अकाउंट डेफिसिट में सुधार आ सकता है।

  • पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
  • परिवहन लागत नियंत्रित रहने से महंगाई को काबू करने में मदद मिल सकती है।
  • तेल आयात बिल कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।
  • रुपये को मजबूती मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
  • सरकार पर ईंधन सब्सिडी का दबाव कम हो सकता है।
  • कंपनियों की उत्पादन लागत घटने से मुनाफे में सुधार हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल की कमी आती है तो भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट में कई अरब डॉलर तक सुधार देखने को मिल सकता है। इसके अलावा महंगाई दर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

होर्मुज जलमार्ग का महत्व और वैश्विक सप्लाई पर असर

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में शामिल है। दुनिया में तेल और गैस की बड़ी मात्रा की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

संघर्ष के दौरान सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के कारण कच्चे तेल के साथ-साथ LPG, उर्वरक, प्लास्टिक और अन्य औद्योगिक उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ गया था। कई देशों में परिवहन लागत बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी।

तेल कीमतों में उछाल ने बढ़ाई थी वैश्विक महंगाई की चिंता

मिडिल ईस्ट तनाव के दौरान ऊर्जा कीमतों में तेजी ने कई देशों के सामने महंगाई की चुनौती बढ़ा दी थी। यूरोप और अन्य क्षेत्रों में शिपिंग लागत बढ़ने से जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित होने की चिंता थी।

मार्च महीने में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। यह 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद सबसे तेज मासिक उछालों में से एक माना गया। उस समय भी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल बाजार में भारी अस्थिरता आई थी।

भारत के लिए पश्चिम एशिया की स्थिति अभी भी अहम

भारत के कुल तेल आयात में पश्चिम एशिया की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात खर्च बढ़ता है और इसका असर महंगाई से लेकर मुद्रा बाजार तक दिखाई दे सकता है।

होर्मुज जलमार्ग के खुलने से फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत के संकेत मिले हैं। आने वाले समय में तेल की कीमतों की दिशा मिडिल ईस्ट की स्थिरता, वैश्विक मांग और सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेगी।