सरकार बेचेगी सेंट्रल बैंक में 8% हिस्सा, OFS से जुटाएगी ₹2455 करोड़

सरकार बेचेगी सेंट्रल बैंक में 8% हिस्सा, OFS से जुटाएगी ₹2455 करोड़

Central Bank of India OFS: सरकार बेचेगी 8% हिस्सेदारी, जुटाने की तैयारी ₹2,455 करोड़

केंद्र सरकार ने Central Bank of India में अपनी हिस्सेदारी कम करने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बैंक के शेयर बेचने की योजना बनाई है। इस प्रक्रिया के तहत सरकार बैंक में अपनी कुल 8 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बाजार के माध्यम से बेच सकती है। इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को लगभग ₹2,455 करोड़ जुटाने की उम्मीद है।

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, OFS के लिए प्रति शेयर ₹31 का फ्लोर प्राइस तय किया गया है। यह कीमत बैंक के पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव ₹33.94 से करीब 8.5 प्रतिशत कम है। फ्लोर प्राइस का मतलब वह न्यूनतम कीमत होती है जिस पर निवेशक OFS में शेयर खरीदने के लिए बोली लगा सकते हैं।

सरकार की इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में Central Bank of India के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान बैंक के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और भाव करीब ₹32 के आसपास पहुंच गया। पिछले एक महीने के प्रदर्शन पर नजर डालें तो बैंक का शेयर लगभग 13 प्रतिशत तक कमजोर हुआ है।

Central Bank of India OFS में कौन लगा सकता है बोली

सरकार द्वारा आयोजित यह ऑफर फॉर सेल दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में नॉन-रिटेल निवेशकों को हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। इसके बाद रिटेल निवेशक और बैंक कर्मचारी OFS में आवेदन कर सकेंगे।

जानकारी के मुताबिक, नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए OFS 22 मई 2026 को खुलेगा। वहीं रिटेल निवेशक और Central Bank of India के कर्मचारी 25 मई 2026 को बोली लगा पाएंगे। निवेशक बाजार समय के दौरान सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक आवेदन कर सकेंगे।

OFS में संस्थागत निवेशकों, रिटेल निवेशकों और बैंक कर्मचारियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। इससे छोटे निवेशकों और कर्मचारियों को भी सरकारी हिस्सेदारी खरीदने का अवसर मिलेगा।

सरकार पहले 4% शेयर बेचेगी, अतिरिक्त बिक्री का भी विकल्प

इस हिस्सेदारी बिक्री के तहत सरकार शुरुआत में Central Bank of India के करीब 4 प्रतिशत शेयर बेचने जा रही है। यह करीब 36 करोड़ से अधिक इक्विटी शेयरों के बराबर है। हालांकि, अगर निवेशकों की ओर से मजबूत मांग आती है तो सरकार अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी भी बेच सकती है।

अतिरिक्त शेयर बेचने के इस विकल्प को ग्रीन शू ऑप्शन कहा जाता है। इसके जरिए कंपनी या शेयर बेचने वाला पक्ष बाजार में मांग को देखते हुए तय सीमा से अधिक शेयर बेच सकता है। इससे सरकार को अपनी हिस्सेदारी घटाने और अधिक पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल Central Bank of India में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी करीब 89.27 प्रतिशत है। OFS के बाद सरकार की हिस्सेदारी में कमी आएगी और बैंक में सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ेगी।

OFS के जरिए सरकार की विनिवेश नीति को मिलेगा बढ़ावा

सरकार समय-समय पर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए विनिवेश प्रक्रिया अपनाती रही है। Central Bank of India में हिस्सेदारी बिक्री को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सरकारी कंपनियों में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के लिए बाजार नियामक सेबी की ओर से तय नियमों का पालन करना जरूरी होता है। OFS के जरिए सरकार एक तरफ पूंजी जुटाती है और दूसरी तरफ बाजार में सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने का प्रयास करती है।

बैंकिंग सेक्टर में सरकारी हिस्सेदारी को धीरे-धीरे कम करने की नीति के तहत यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे शेयर बाजार में बैंक के शेयरों की उपलब्धता बढ़ सकती है और निवेशकों की भागीदारी में भी बदलाव आ सकता है।

Central Bank of India OFS में निवेशकों के लिए क्या हैं नियम और शर्तें

सरकार ने OFS प्रक्रिया में अलग-अलग श्रेणी के निवेशकों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। नॉन-रिटेल कैटेगरी में योग्य संस्थागत निवेशकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि रिटेल निवेशकों के लिए भी शेयरों का एक निश्चित हिस्सा सुरक्षित रखा गया है।

नियमों के अनुसार, नॉन-रिटेल कैटेगरी में आरक्षित शेयरों में से कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों के लिए रखा जाएगा। यह सुविधा तभी लागू होगी जब इन संस्थागत निवेशकों की बोलियां तय फ्लोर प्राइस या उससे अधिक कीमत पर होंगी।

रिटेल निवेशकों और बैंक कर्मचारियों के लिए आरक्षण

Central Bank of India OFS में रिटेल निवेशकों के लिए कुल ऑफर का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित रखा गया है। इससे छोटे निवेशकों को भी सरकारी हिस्सेदारी खरीदने का अवसर मिलेगा।

इसके अलावा बैंक कर्मचारियों के लिए 75 लाख शेयर अलग रखे गए हैं। पात्र कर्मचारी अधिकतम ₹5 लाख तक के शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं। कर्मचारी चाहें तो निर्धारित नियमों के अनुसार रिटेल निवेशक श्रेणी में भी अलग से बोली लगा सकते हैं।

इस तरह सरकार ने OFS में छोटे निवेशकों और कर्मचारियों दोनों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग प्रावधान किए हैं।

OFS प्रक्रिया में Goldman Sachs की भूमिका

Central Bank of India की हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया के लिए Goldman Sachs की भारतीय इकाई को ब्रोकर नियुक्त किया गया है। यह पूरी प्रक्रिया भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा स्टॉक एक्सचेंज के नियमों के अनुसार आयोजित की जाएगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि OFS के दौरान बैंक के शेयर सामान्य तरीके से शेयर बाजार में ट्रेड होते रहेंगे। निवेशक बाजार में नियमित रूप से शेयर खरीद और बिक्री कर सकेंगे।

हालांकि, सरकार ने बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की मांग को देखते हुए OFS को वापस लेने का अधिकार भी सुरक्षित रखा है। अगर बाजार में पर्याप्त मांग नहीं बनती है या परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहती हैं तो प्रक्रिया में बदलाव किया जा सकता है।

क्या होता है ऑफर फॉर सेल और ग्रीन शू ऑप्शन

ऑफर फॉर सेल यानी OFS एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी कंपनी के प्रमोटर या सरकार अपनी हिस्सेदारी सीधे शेयर बाजार के माध्यम से निवेशकों को बेचते हैं। इस प्रक्रिया में नए शेयर जारी नहीं किए जाते, बल्कि मौजूदा शेयरों की बिक्री की जाती है।

OFS के जरिए सरकार या प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी कम कर सकते हैं और बाजार से पूंजी जुटा सकते हैं। इसमें निवेशक बोली लगाकर शेयर खरीदने का अवसर प्राप्त करते हैं।

वहीं ग्रीन शू ऑप्शन एक अतिरिक्त सुविधा होती है, जिसके तहत शेयर बेचने वाला पक्ष निवेशकों की अधिक मांग होने पर तय सीमा से अतिरिक्त शेयर बेच सकता है। इससे हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाया जाता है।

Central Bank of India की यह हिस्सेदारी बिक्री सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में सरकारी स्वामित्व कम करने और बाजार में सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। निवेशकों की नजर अब OFS में मिलने वाली प्रतिक्रिया और बैंक के शेयर प्रदर्शन पर रहेगी।