50 साल पुराना सपना फिर होगा पूरा? जेपी दत्ता की ‘सरहद’ को लेकर नई चर्चा

50 साल पुराना सपना फिर होगा पूरा? जेपी दत्ता की ‘सरहद’ को लेकर नई चर्चा

भारतीय सिनेमा में युद्ध और देशभक्ति पर आधारित फिल्मों के लिए अलग पहचान बनाने वाले फिल्म निर्माता और निर्देशक जेपी दत्ता एक बार फिर अपने लंबे समय से अधूरे पड़े ड्रीम प्रोजेक्ट ‘सरहद’ को लेकर चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी चर्चाओं के अनुसार, यह महत्वाकांक्षी फिल्म कई वर्षों बाद दोबारा शुरू हो सकती है। हालांकि फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि निर्देशक की बेटी और फिल्म निर्माता निधि दत्ता इस प्रोजेक्ट को नए रूप में दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर सकती हैं।

‘सरहद’ उन फिल्मों में गिनी जाती है जिनकी घोषणा तो बड़े स्तर पर हुई, लेकिन विभिन्न कारणों से यह कभी पूरी नहीं हो सकी। पिछले कई दशकों से इस फिल्म का नाम समय-समय पर चर्चा में आता रहा है। अब एक बार फिर इस प्रोजेक्ट के पुनर्जीवित होने की संभावना ने फिल्म प्रेमियों और जेपी दत्ता के प्रशंसकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।

यदि यह फिल्म वास्तव में दोबारा शुरू होती है तो यह भारतीय फिल्म उद्योग के उन दुर्लभ प्रोजेक्ट्स में शामिल होगी, जिनकी परिकल्पना कई दशक पहले की गई थी और जिन्हें नई पीढ़ी के साथ फिर से प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है।

जेपी दत्ता की फिल्मों की अलग पहचान

जेपी दत्ता हिंदी सिनेमा के उन निर्देशकों में शामिल हैं जिन्होंने युद्ध, सैनिकों के जीवन, सीमावर्ती इलाकों और देशभक्ति जैसे विषयों को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उनकी फिल्मों में केवल युद्ध के दृश्य ही नहीं बल्कि सैनिकों की भावनाएं, परिवार, बलिदान और राष्ट्रीय कर्तव्य जैसे पहलुओं को भी प्रमुखता से दिखाया गया है।

इसी कारण उनकी फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से विशेष पहचान मिली। ‘बॉर्डर’, ‘एलओसी कारगिल’ और अन्य फिल्मों ने उन्हें इस शैली के प्रमुख निर्देशकों में स्थापित किया।

1970 के दशक में हुई थी ‘सरहद’ की योजना

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘सरहद’ की परिकल्पना 1970 के दशक में की गई थी। उस समय यह फिल्म जेपी दत्ता के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक मानी जा रही थी। कहानी का विषय युद्ध और युद्धबंदियों के जीवन से जुड़ा बताया जाता है, जो उस दौर के हिसाब से एक अलग और चुनौतीपूर्ण विषय था।

उस समय इस फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार करने की योजना बनाई गई थी और इसे भव्य निर्माण के साथ प्रस्तुत करने की चर्चा भी रही थी।

स्टार कास्ट को लेकर भी रही थी चर्चा

फिल्म से जुड़ी पुरानी रिपोर्ट्स के अनुसार, अभिनेता विनोद खन्ना का नाम इस प्रोजेक्ट के प्रमुख किरदार के लिए सामने आया था। इसके अलावा मिथुन चक्रवर्ती और अभिनेत्री बिंदिया गोस्वामी के शामिल होने की भी चर्चाएं होती रही थीं।

हालांकि उस समय फिल्म की पूरी स्टार कास्ट को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हो सकी थी, लेकिन उस दौर के कई लोकप्रिय कलाकारों के नाम इस परियोजना से जोड़े गए थे।

युद्ध और युद्धबंदियों की कहानी पर आधारित थी फिल्म

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ‘सरहद’ की कहानी सीमा क्षेत्रों, सैन्य संघर्ष और युद्धबंदियों के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती थी। यह विषय भारतीय सिनेमा में बहुत कम देखने को मिला था, इसलिए इस फिल्म को लेकर दर्शकों और फिल्म जगत में काफी उत्सुकता थी।

युद्ध आधारित फिल्मों में मानवीय भावनाओं और सैनिकों के संघर्ष को प्रस्तुत करना हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ‘सरहद’ भी इसी प्रकार की कहानी पर आधारित बताई जाती रही है।

प्रोडक्शन में आई बाधाएं, ‘गुलामी’ से हुई वापसी और अब निधि दत्ता संभाल सकती हैं जिम्मेदारी

शूटिंग शुरू होने के बाद आईं वित्तीय चुनौतियां

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म की शूटिंग प्रारंभ होने के बाद निर्माण कार्य में कई तरह की कठिनाइयां सामने आने लगी थीं। सबसे बड़ी समस्या आर्थिक सहयोग से जुड़ी बताई जाती है। कहा जाता है कि प्रोडक्शन के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी, जिसके कारण फिल्म का काम प्रभावित हुआ।

धीरे-धीरे परियोजना पूरी तरह रुक गई और बाद में इसे दोबारा शुरू नहीं किया जा सका।

अधूरी रह गई महत्वाकांक्षी फिल्म

‘सरहद’ उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल हो गई जो बड़े स्तर पर शुरू होने के बावजूद दर्शकों तक नहीं पहुंच सकीं। कई वर्षों तक यह प्रोजेक्ट फिल्म उद्योग में अधूरी फिल्मों की सूची में शामिल रहा।

समय के साथ कलाकार, तकनीक और फिल्म उद्योग में कई बदलाव आए, लेकिन यह फिल्म फिर भी पूरी नहीं हो सकी।

‘गुलामी’ से जेपी दत्ता ने की नई शुरुआत

‘सरहद’ के रुक जाने के बाद जेपी दत्ता को अपनी अगली फिल्म लेकर आने में कुछ समय लगा। बाद में उन्होंने वर्ष 1985 में फिल्म ‘गुलामी’ का निर्देशन किया, जिसने उन्हें एक निर्देशक के रूप में नई पहचान दिलाई।

इस फिल्म के बाद उन्होंने लगातार कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया और हिंदी सिनेमा में अपनी अलग शैली स्थापित की।

देशभक्ति फिल्मों से बनाई अलग पहचान

जेपी दत्ता के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में ‘बॉर्डर’ और ‘एलओसी कारगिल’ प्रमुख मानी जाती हैं। इन फिल्मों में उन्होंने वास्तविक घटनाओं और सैनिकों के जीवन को सिनेमाई रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया।

इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने के साथ-साथ दर्शकों के बीच देशभक्ति विषयक फिल्मों के प्रति नई रुचि भी पैदा की।

निधि दत्ता निभा सकती हैं अहम भूमिका

फिल्म इंडस्ट्री में चल रही चर्चाओं के अनुसार, जेपी दत्ता की बेटी निधि दत्ता इस अधूरे प्रोजेक्ट को नए सिरे से विकसित करने की दिशा में काम कर सकती हैं। निधि दत्ता पहले भी फिल्म निर्माण से जुड़ी रही हैं और कई प्रोजेक्ट्स में सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं।

यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो ‘सरहद’ को आधुनिक तकनीक, नए कलाकारों और वर्तमान दर्शकों की पसंद के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।

क्या पुराने कलाकारों की कहानी नए रूप में दिखाई जाएगी?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि फिल्म की मूल कहानी को उसी रूप में प्रस्तुत किया जाएगा या फिर समय के अनुसार उसमें बदलाव किए जाएंगे। यह भी सामने नहीं आया है कि फिल्म में नए कलाकार होंगे या किसी विशेष कलाकार को प्रमुख भूमिका के लिए चुना जाएगा।

इन सभी पहलुओं पर आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आधिकारिक घोषणा का इंतजार

अब तक फिल्म निर्माताओं की ओर से ‘सरहद’ को दोबारा शुरू किए जाने संबंधी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इस समय सामने आ रही अधिकांश जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और फिल्म इंडस्ट्री में चल रही चर्चाओं पर आधारित है।

फिल्म प्रेमियों की नजर अब इस बात पर बनी हुई है कि क्या वास्तव में यह बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट वर्षों बाद नए रूप में बड़े पर्दे तक पहुंच पाएगा। यदि ऐसा होता है तो भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे चर्चित अधूरी फिल्मों में से एक को आखिरकार पूरा होते देखने का अवसर मिल सकता है।