अमेरिका द्वारा अप्रैल मध्य से शुरू की गई समुद्री नाकेबंदी का असर अब ईरान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। तेल बिक्री पर काफी हद तक निर्भर ईरान को पिछले दो महीनों में अरबों डॉलर के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो तेहरान के लिए आर्थिक दबाव संभालना और कठिन हो जाएगा।
ईरान फिलहाल तेल उत्पादन तो जारी रखे हुए है, लेकिन निर्यात में आई भारी कमी के कारण उसे बड़ी मात्रा में कच्चा तेल भंडारित करना पड़ रहा है। ऊर्जा मामलों के जानकारों के अनुसार, जब तक उसके पास स्टोरेज की क्षमता है तब तक वह उत्पादन जारी रख सकता है, लेकिन भंडारण क्षमता भरने के बाद उसे उत्पादन घटाने या रोकने की नौबत आ सकती है।
दरअसल, 13 अप्रैल को अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास निगरानी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई शुरू की थी। वॉशिंगटन का दावा है कि यह कदम ईरान पर विभिन्न समझौतों को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाने का हिस्सा है। वहीं, तेहरान ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताते हुए इसे समुद्री डकैती जैसा कदम करार दिया है।
तेल बाजार के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में ईरान का कच्चा तेल और कंडेनसेट निर्यात गिरकर 3 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे पहुंच गया। इसके विपरीत, साल की शुरुआत में यह आंकड़ा करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन के आसपास था। चीन, जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है, वहां भी आपूर्ति प्रभावित हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है क्योंकि उसके कुल तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। नाकेबंदी के कारण न केवल ईरान बल्कि खाड़ी क्षेत्र के अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर भी असर पड़ा, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों में उछाल देखा गया।
राजस्व के मोर्चे पर भी ईरान को बड़ा झटका लगा है। मार्च में जहां तेल निर्यात से उसे अरबों डॉलर की आय हो रही थी, वहीं मई में कम निर्यात के कारण उसकी कमाई में लगभग 84 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। अनुमान है कि अप्रैल और मई के दौरान ईरान को संभावित आय के मुकाबले करीब 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
हालांकि कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान वैकल्पिक तरीकों से तेल पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। कुछ तेल खेपों को समुद्र में दूसरे जहाजों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिससे वास्तविक निर्यात का आंकड़ा आधिकारिक आंकड़ों से कुछ अधिक हो सकता है।
फिर भी मौजूदा हालात संकेत देते हैं कि लंबे समय तक जारी रहने वाली नाकेबंदी ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है और आने वाले महीनों में तेहरान पर दबाव और बढ़ सकता है।



