भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। भारत की ओर से इस समझौते को अस्थायी रूप से रोकने के फैसले के बाद पाकिस्तान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को लेकर सख्त बयान देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान के पानी के अधिकार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो उसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जो भी पाकिस्तान के पानी पर हाथ डालेगा, उसका हाथ काट दिया जाएगा।
मुसादिक मलिक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव बढ़ गया है। भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को अस्थायी तौर पर निलंबित करने का फैसला लिया था। भारत का कहना था कि आतंकवाद और पानी का रिश्ता एक साथ नहीं चल सकता। पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में पर्यटक शामिल थे।
पाकिस्तान ने भारत पर लगाए पानी रोकने की कोशिश के आरोप
पाकिस्तान सरकार लगातार भारत के इस फैसले का विरोध कर रही है। सोमवार को पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुसादिक मलिक ने भारत पर आरोप लगाया कि वह पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने पानी के अधिकारों की रक्षा करेगा और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
मलिक ने कहा कि पाकिस्तान के लिए पानी सिर्फ एक संसाधन नहीं बल्कि जीवन और सुरक्षा का मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि अगर भारत ने पानी रोकने की कोशिश की तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले भी ऐसे हालात का सामना कर चुका है और वह अपनी सुरक्षा करने में सक्षम है।
उन्होंने भारत की ओर इशारा करते हुए कहा कि एक पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के हाथ में पानी के नल का नियंत्रण है और वह दावा कर रहे हैं कि पाकिस्तान में पानी की एक बूंद नहीं जाने देंगे। इसी बयान के दौरान उन्होंने भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
मंत्री ने सेना का भी किया जिक्र
मुसादिक मलिक ने अपने बयान में पाकिस्तान की सेना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पहले भी दिखाया है कि वह अपने हितों की रक्षा करना जानता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई पाकिस्तान के पानी या हवा तक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा तो उसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय में दो बार अपनी क्षमता दिखाई है। हालांकि, भारत की ओर से पाकिस्तान के इन आरोपों पर कोई नया बयान सामने नहीं आया है।
पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि पानी को लेकर दुनिया के सामने पाकिस्तान अपना पक्ष रखेगा। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय न्याय और अधिकारों का मुद्दा बताया। उनका कहना था कि किसी भी देश को यह अधिकार नहीं मिल सकता कि वह ऊपर की ओर होने के कारण नीचे की ओर जाने वाले पानी को रोक दे।
क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर हुआ एक ऐतिहासिक समझौता है। यह समझौता साल 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था। इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था। समझौते के अनुसार, तीन पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज के पानी पर भारत का अधिकार तय किया गया, जबकि तीन पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी का इस्तेमाल मुख्य रूप से पाकिस्तान के लिए निर्धारित किया गया।
हालांकि, संधि के तहत भारत को पश्चिमी नदियों पर भी कुछ अधिकार मिले हुए हैं। भारत इन नदियों पर सीमित सिंचाई परियोजनाएं और जलविद्युत परियोजनाएं बना सकता है, लेकिन इसके लिए संधि में तय नियमों का पालन करना होता है। यह समझौता दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले जल समझौतों में से एक माना जाता है। खास बात यह रही कि भारत और पाकिस्तान के बीच कई युद्धों और गंभीर तनाव के बावजूद यह संधि लंबे समय तक लागू रही।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कई कदम उठाए थे। इन्हीं कदमों में सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला भी शामिल था। भारत ने साफ कहा था कि आतंकवाद और पानी का साथ-साथ चलना संभव नहीं है। भारत के इस कदम के बाद पाकिस्तान ने चिंता जताई थी और कहा था कि सिंधु जल संधि अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिसे एकतरफा तरीके से नहीं बदला जा सकता। पाकिस्तान का कहना है कि इस समझौते से उसे मिलने वाले पानी के अधिकारों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
वहीं भारत का पक्ष है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाना जरूरी है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर वह अपने हितों की रक्षा करेगा।
पानी को लेकर बढ़ता रणनीतिक तनाव
सिंधु नदी प्रणाली दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था काफी हद तक इन नदियों पर निर्भर है। वहीं भारत के जम्मू-कश्मीर और हिमालयी क्षेत्रों में भी इन नदियों का महत्व काफी ज्यादा है। इसी वजह से सिंधु जल संधि हमेशा दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी आने वाले समय में दक्षिण एशिया में एक बड़ा रणनीतिक मुद्दा बन सकता है।
पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयान के बाद यह साफ है कि सिंधु जल संधि को लेकर राजनीतिक तनाव अभी कम नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मतभेदों के बीच पानी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं। आतंकवाद, सीमा विवाद और कूटनीतिक मतभेदों के बीच सिंधु जल संधि अब एक और बड़ा मुद्दा बनती दिख रही है। हालांकि, आने वाले समय में दोनों देशों का रुख और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली बातचीत इस विवाद की दिशा तय करेगी।




