WhatsApp Username Feature पर सरकार सख्त, Meta को जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का अतिरिक्त समय

WhatsApp Username Feature पर सरकार सख्त, Meta को जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का अतिरिक्त समय

भारत सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित Username Feature को लेकर अपनी चिंताएं एक बार फिर स्पष्ट कर दी हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस मामले में Meta को जवाब देने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ाकर अब 9 जुलाई कर दी है। पहले कंपनी को 6 जुलाई तक अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देनी थी, लेकिन अब उसे तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जब तक इस फीचर को लेकर सभी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक Meta को भारत में इसे लॉन्च नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस फीचर का सीधा असर देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर पड़ सकता है, इसलिए किसी भी फैसले से पहले सभी संभावित जोखिमों का मूल्यांकन जरूरी है।

क्यों बढ़ाई गई जवाब देने की समयसीमा

सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने Meta से इस फीचर की पूरी कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और दुरुपयोग रोकने के उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी है। सरकार चाहती है कि कंपनी स्पष्ट करे कि यदि कोई व्यक्ति इस सुविधा का गलत इस्तेमाल करता है तो उसे कैसे रोका जाएगा और अपराधियों की पहचान किस प्रकार संभव होगी।

इसी कारण Meta को अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। सरकार का मानना है कि इतनी महत्वपूर्ण सुविधा को लागू करने से पहले व्यापक परामर्श आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की सुरक्षा चुनौती उत्पन्न न हो।

क्या है WhatsApp का नया Username Feature

WhatsApp ने हाल ही में एक ऐसे फीचर की घोषणा की है जिसके जरिए यूजर बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए भी दूसरे लोगों से संपर्क कर सकेंगे। इस सुविधा में हर अकाउंट के लिए एक अलग और यूनिक यूजरनेम बनाया जाएगा, जिसकी शुरुआत हमेशा ‘@’ से होगी, जैसे @Rahul123

इस यूजरनेम की मदद से लोग चैट, कॉल और अन्य माध्यमों से जुड़ सकेंगे, जबकि उनका वास्तविक मोबाइल नंबर सामने वाले व्यक्ति को दिखाई नहीं देगा। कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित होगी।

डिस्प्ले नेम और यूजरनेम में होगा बड़ा अंतर

WhatsApp ने स्पष्ट किया है कि नया यूजरनेम मौजूदा डिस्प्ले नेम से पूरी तरह अलग होगा। डिस्प्ले नेम ऐसा नाम है जिसे कोई भी यूजर अपनी इच्छा के अनुसार बदल सकता है और एक ही नाम कई लोग इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसके विपरीत, यूजरनेम प्रत्येक अकाउंट के लिए अलग और स्थायी पहचान की तरह काम करेगा। यदि किसी नाम को पहले ही किसी अन्य यूजर ने चुन लिया है तो वही यूजरनेम दोबारा उपलब्ध नहीं होगा। यानी हर यूजर को एक अलग पहचान मिलेगी।

ऐप में ऐसे सेट किया जा सकेगा यूजरनेम

WhatsApp के नए वर्जन में यह सुविधा उपलब्ध होने पर यूजर Settings में जाकर Account सेक्शन खोलेंगे। वहां Username विकल्प दिखाई देगा, जहां अपनी पसंद का उपलब्ध यूजरनेम चुनकर उसे सुरक्षित किया जा सकेगा।

इसके बाद जिन लोगों के पास आपका मोबाइल नंबर सेव नहीं होगा, उन्हें ग्रुप चैट, निजी बातचीत या कॉल के दौरान आपका मोबाइल नंबर नहीं बल्कि वही यूजरनेम दिखाई देगा। इससे नंबर सार्वजनिक किए बिना भी लोगों से संपर्क संभव होगा।

सरकार को किस बात की है सबसे ज्यादा चिंता

सरकार का मानना है कि यह सुविधा साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। यदि पहली बार किसी व्यक्ति से संपर्क करते समय मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा, तो धोखेबाज अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर लोगों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

मंत्रालय का कहना है कि वर्तमान में मोबाइल नंबर जांच का एक महत्वपूर्ण आधार होता है। लेकिन केवल यूजरनेम दिखाई देने की स्थिति में किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करना अधिक कठिन हो सकता है। इससे ऑनलाइन ठगी के मामलों की जांच भी प्रभावित हो सकती है।

डिजिटल अरेस्ट और फिशिंग जैसे अपराध बढ़ने की आशंका

1 जुलाई को Meta को भेजे गए नोटिस में सरकार ने कहा था कि इस फीचर के लागू होने के बाद फिशिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इम्पर्सनेशन अटैक जैसी घटनाओं में वृद्धि हो सकती है।

सरकार का तर्क है कि अपराधी फर्जी पहचान बनाकर लोगों से आसानी से संपर्क कर सकेंगे। कई मामलों में लोग केवल नाम देखकर भरोसा कर लेते हैं, जिससे ठगी की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए सरकार इस फीचर के सुरक्षा पहलुओं को लेकर पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही आगे बढ़ना चाहती है।

पहचान छिपाकर लोगों तक पहुंचना हो सकता है आसान

मंत्रालय के अनुसार, यदि मोबाइल नंबर सामने नहीं आएगा तो अपराधियों के लिए नकली पहचान के साथ लोगों तक पहुंचना पहले से आसान हो जाएगा। इससे वे खुद को किसी परिचित, अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताकर लोगों को धोखा देने की कोशिश कर सकते हैं।

सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों में आम लोगों के लिए असली और नकली अकाउंट के बीच अंतर समझना मुश्किल हो सकता है।

सरकारी संस्थानों के नाम से हो सकती है ठगी

सरकार ने यह आशंका भी जताई है कि अपराधी सरकारी विभागों, बैंकों, वित्तीय संस्थानों या अन्य प्रतिष्ठित संगठनों से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।

हालांकि Meta का कहना है कि कुछ विशेष यूजरनेम सरकारी एजेंसियों, सार्वजनिक हस्तियों और व्यवसायों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि कोई अन्य व्यक्ति उनका इस्तेमाल न कर सके। फिर भी सरकार का मानना है कि इससे जुड़े सुरक्षा मानकों की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है।

Meta ने बताए सुरक्षा उपाय

कंपनी के अनुसार, प्रत्येक यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और दो लोगों के पास एक जैसा यूजरनेम नहीं हो सकेगा। यदि किसी नाम पर पहले से दावा किया जा चुका है तो दूसरा यूजर वही नाम नहीं चुन पाएगा।

इसके अलावा, कुछ संवेदनशील और आधिकारिक नामों को रिजर्व रखा जाएगा ताकि उनका गलत इस्तेमाल न हो। कंपनी का कहना है कि इस व्यवस्था से फर्जी अकाउंट बनने की संभावना कम होगी।

रोलआउट पर फिलहाल लगी रोक

सरकार ने Meta से साफ कहा है कि जब तक दोनों पक्षों के बीच इस विषय पर बातचीत पूरी नहीं हो जाती और सभी सुरक्षा उपायों पर सहमति नहीं बन जाती, तब तक भारत में इस फीचर को लॉन्च नहीं किया जाए।

मंत्रालय का मानना है कि करोड़ों भारतीय WhatsApp का उपयोग करते हैं, इसलिए किसी भी नए फीचर को लागू करने से पहले उसकी सुरक्षा, गोपनीयता और साइबर अपराधों पर पड़ने वाले प्रभाव का गंभीरता से परीक्षण किया जाना जरूरी है।

अब सभी की नजर 9 जुलाई पर टिकी है, जब Meta सरकार के सवालों का विस्तृत जवाब सौंपेगी। इसके बाद ही यह तय होगा कि WhatsApp का नया Username Feature भारत में किस स्वरूप और किन सुरक्षा शर्तों के साथ लागू किया जाएगा।

(Photo : AI Generated)