मेलबर्न में भारतीय समुदाय के बीच बोले पीएम मोदी, ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम समेत कई अहम समझौतों पर बनी सहमति

मेलबर्न में भारतीय समुदाय के बीच बोले पीएम मोदी, ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम समेत कई अहम समझौतों पर बनी सहमति

ऑस्ट्रेलिया के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में आयोजित “मेलबर्न मीट्स मोदी” कार्यक्रम के दौरान करीब 30 हजार भारतीय मूल के लोगों को संबोधित किया। विशाल जनसभा में उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति, तकनीकी उपलब्धियों, वैश्विक भूमिका और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर विस्तार से बात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर जैसे कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा भी की गई।

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में वह तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया आए हैं और इसे उन्होंने अपनी “हैट्रिक” बताया। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रिश्तों की मजबूती का सबसे बड़ा श्रेय यहां रहने वाले भारतीय समुदाय को जाता है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का उत्साह देखकर कहा कि पूरा आयोजन पूरी तरह हाउसफुल है और यह दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई महत्वपूर्ण समझौतों की जानकारी दी। सबसे अहम समझौता भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति को लेकर रहा। इसके अलावा रक्षा सहयोग, व्यापार विस्तार, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान, साइबर टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में साझेदारी को नई दिशा देने पर सहमति बनी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम भारत के स्वच्छ ऊर्जा अभियान को नई गति देगा। उन्होंने बताया कि दोनों देश मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर विकसित करेंगे, जिससे भविष्य की तकनीकों और उद्योगों के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा, जिससे भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन को तकनीकी सहायता मिलेगी।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों की तुलना क्रिकेट से करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती भी क्रिकेट की तरह मजबूत और रोमांचक है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की बैठकों में वनडे जैसा स्पष्ट फोकस होता है, फैसले टी-20 की तरह तेज गति से लिए जाते हैं और साझेदारी टेस्ट क्रिकेट की तरह लंबे समय तक टिकाऊ रहती है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास लगातार मजबूत हुआ है और यह आने वाले वर्षों में और गहरा होगा।

आतंकवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों मानते हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं और सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत किया जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा और खुफिया सहयोग भी भविष्य में और बढ़ाया जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब तक दोनों देशों की सप्लाई चेन तो जुड़ी हुई थी, लेकिन नीतियों में कई अंतर थे। नए समझौते इस दूरी को कम करेंगे। उन्होंने बताया कि 2015 के भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए नई साझेदारी (PACTS) शुरू करने पर भी सहमति जताई। इसके तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और डिजिटल रेजिलिएंस जैसे भविष्य की तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन क्षेत्रों में सहयोग केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज देश में दो लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप सक्रिय हैं और इनमें से कई रक्षा तथा अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थान भी भारत में अपने परिसर स्थापित कर रहे हैं, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और मजबूत हो रहा है।

डिजिटल इंडिया की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में डिजी लॉकर के 70 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और इसमें 850 करोड़ से ज्यादा डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड व्यवस्था से स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी आई है। पासपोर्ट सेवाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब पासपोर्ट बनने में महीनों लग जाते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया काफी तेज और आसान हो चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की मानवीय सहायता नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने दूरी की परवाह किए बिना विशेषज्ञ चिकित्सा दल भेजे। कोरोना महामारी के दौरान भारत ने न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया बल्कि 100 से अधिक देशों को वैक्सीन भी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों से लोगों को निकालने के दौरान भारत ने कभी पासपोर्ट का रंग नहीं देखा, बल्कि मानवता को प्राथमिकता दी।

खेलों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से खेलों में विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि भारत भी खेलों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और 2036 ओलंपिक की मेजबानी का दावेदार है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में दोनों देशों के बीच खेल सहयोग और अधिक व्यापक होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई ने यह साबित किया कि देश अपनी सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार आगे बढ़ने में विश्वास रखता है और “ग्रो मोर” की सोच के साथ नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

तकनीकी क्षेत्र में भारत की प्रगति पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले 5जी तकनीक को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं, लेकिन आज भारत की लगभग 99 प्रतिशत आबादी तक 5जी नेटवर्क पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5जी बाजार बन चुका है और अब स्वदेशी 6जी तकनीक विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में देश के दो दर्जन से अधिक शहरों तक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हुआ है और प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। नमो भारत रैपिड रेल परियोजना का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही “मेक इन इंडिया” अभियान के तहत भारत में बने मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण दुनिया के कई देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन लक्ष्य केवल इतना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने चंद्रयान मिशन की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान की सफल लैंडिंग ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को पूरी दुनिया के सामने स्थापित किया। अब देश गगनयान मिशन और भविष्य में अपना स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति और प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत दुनिया भर में अपनी पहचान बना रही है। उन्होंने बताया कि आज युवाओं के बीच भजन नाइट जैसे नए सांस्कृतिक आयोजन लोकप्रिय हो रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में भी भारतीय समुदाय भांगड़ा, भरतनाट्यम, क्रिकेट प्रतियोगिताओं और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से भारतीय परंपराओं को जीवंत बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय ऑस्ट्रेलिया की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और साथ ही भारत के विकास पर भी लगातार नजर रखता है।

भाषण के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य अब केवल एक सपना नहीं बल्कि राष्ट्रीय संकल्प बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है और विज्ञान, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल व्यवस्था तथा वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी आने वाले वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र ही नहीं बल्कि वैश्विक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।