मेक्सिको में 7.4 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में सुनामी अलर्ट: लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह

मेक्सिको में 7.4 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में सुनामी अलर्ट: लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह

मेक्सिको के दक्षिणी हिस्से में शुक्रवार को आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। भूकंप का केंद्र चियापास राज्य के प्रशांत तट के पास बताया गया, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल सुनामी की आशंका को देखते हुए बड़े पैमाने पर अलर्ट जारी कर दिया। शुरुआती आकलन के अनुसार करीब 10 लाख लोगों को संभावित खतरे के दायरे में मानते हुए सतर्क रहने और समुद्र से दूर रहने की चेतावनी दी गई है।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार भूकंप का केंद्र मेक्सिको के प्यूर्टो मडेरो के नजदीक जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे था। कम गहराई में आए इस भूकंप के कारण झटके काफी तेज महसूस किए गए और आसपास के इलाकों में कंपन की तीव्रता अधिक रही। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई सेकेंड तक धरती हिलती रही, जिससे लोग घबराकर घरों, दफ्तरों और दुकानों से बाहर निकल आए।

भूकंप के कुछ ही मिनटों बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने मेक्सिको के दक्षिणी प्रशांत तट के लिए सुनामी अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि इस तीव्रता का भूकंप समुद्र के भीतर बड़े स्तर पर हलचल पैदा कर सकता है, जिससे ऊंची और खतरनाक लहरें उठने की आशंका रहती है। इसी वजह से प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी।

सुनामी की आशंका को देखते हुए सबसे अधिक सतर्कता चियापास के समुद्री तट, ओआक्साका के तटीय इलाकों और ग्वाटेमाला से लगे प्रशांत क्षेत्र में बरती जा रही है। अधिकारियों ने समुद्र किनारे रहने वाले लोगों से कहा है कि वे अगली सूचना मिलने तक समुद्र तटों, बंदरगाहों और निचले इलाकों से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। राहत और बचाव एजेंसियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

भूकंप के झटके केवल मेक्सिको तक सीमित नहीं रहे। पड़ोसी देशों ग्वाटेमाला और अल साल्वाडोर में भी लोगों ने तेज कंपन महसूस किया। कई स्थानों पर लोग सुरक्षा के लिए खुले मैदानों में पहुंच गए। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान या मौत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी जुटाई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप के केंद्र से लगभग 300 किलोमीटर तक के समुद्री क्षेत्र में सुनामी की लहरें उठने की संभावना बनी हुई है। यही कारण है कि समुद्र के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मेक्सिको और ग्वाटेमाला की सीमा के पास स्थित सुचियाते क्षेत्र में समुद्र के व्यवहार पर विशेष नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी असामान्य गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सके।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। बचाव दल, पुलिस, सेना और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दी गई हैं। कई स्थानों पर अस्थायी राहत केंद्र भी तैयार रखे गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित ठहराया जा सके।

वैज्ञानिकों के अनुसार 7.4 तीव्रता का भूकंप ‘मेजर’ श्रेणी में आता है। इस स्तर के भूकंप बड़े क्षेत्र में संरचनात्मक नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। हालांकि नुकसान की वास्तविक स्थिति का पता विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता संभावित सुनामी को लेकर बनी हुई है।

यह पूरा इलाका दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ का हिस्सा है। प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला यह क्षेत्र लगभग 40 हजार किलोमीटर लंबा है और घोड़े की नाल जैसी आकृति बनाता है। दुनिया के अधिकांश बड़े भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां इसी क्षेत्र में दर्ज की जाती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर आने वाले करीब 90 प्रतिशत भूकंप इसी भूकंपीय पट्टी में होते हैं।

भूवैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक महीने के दौरान इस क्षेत्र में 22 भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें शुक्रवार को आया 7.4 तीव्रता का झटका सबसे अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है। लगातार हो रही भूकंपीय गतिविधियों के कारण वैज्ञानिक इस क्षेत्र की निगरानी पहले से ही कर रहे थे। ताजा भूकंप के बाद निगरानी और भी बढ़ा दी गई है ताकि आफ्टरशॉक या किसी अन्य भूगर्भीय गतिविधि का समय रहते पता लगाया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े भूकंप के बाद आफ्टरशॉक आना सामान्य प्रक्रिया होती है। ऐसे झटके कभी-कभी कई दिनों तक महसूस किए जा सकते हैं। इसलिए प्रभावित इलाकों में लोगों को क्षतिग्रस्त इमारतों में प्रवेश न करने और प्रशासन की अनुमति मिलने तक सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

अमेरिका के नेशनल सुनामी वार्निंग सेंटर ने स्पष्ट किया है कि इस भूकंप के कारण अमेरिका के पश्चिमी तट, अलास्का या कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया क्षेत्र के लिए किसी प्रकार का सुनामी खतरा नहीं है। इसके बावजूद प्रशांत महासागर से जुड़े कई देशों की एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय रहते चेतावनी जारी की जा सके।

भूकंप के दौरान सबसे बड़ा खतरा केवल इमारतों के गिरने से नहीं बल्कि समुद्र में बनने वाली ऊंची लहरों से भी होता है। यदि समुद्र के भीतर बड़ी मात्रा में ऊर्जा अचानक मुक्त होती है तो पानी का विशाल हिस्सा विस्थापित हो जाता है, जिससे सुनामी पैदा होती है। ऐसी लहरें तटीय क्षेत्रों में पहुंचकर भारी तबाही मचा सकती हैं और अचानक बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकती हैं। इसी कारण प्रशासन ने लोगों से समुद्र के पास जाने से पूरी तरह बचने को कहा है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि पृथ्वी की बाहरी सतह कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी हुई है। ये प्लेटें लगातार बेहद धीमी गति से एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे धंसती हैं या किनारों पर फंस जाती हैं तो उनमें भारी दबाव जमा होने लगता है। लंबे समय तक दबाव बढ़ने के बाद जब चट्टानें उसे सहन नहीं कर पातीं तो अचानक ऊर्जा बाहर निकलती है, जिससे धरती कांप उठती है और भूकंप आता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में स्थित देशों को भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के प्रति हमेशा तैयार रहना पड़ता है। इसी वजह से यहां नियमित निगरानी, आधुनिक चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जाता है। मेक्सिको भी उन देशों में शामिल है जहां भूकंप के खतरे को देखते हुए समय-समय पर आपदा अभ्यास आयोजित किए जाते हैं।

फिलहाल राहत की बात यह है कि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य घोषित होने तक सतर्कता जारी रहेगी। विशेषज्ञ समुद्र के जलस्तर, आफ्टरशॉक और अन्य भूगर्भीय गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।

Photo : Reuters