देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET को लेकर उठे विवाद और पेपर लीक जैसी घटनाओं के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए अब एनटीए अपने मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालयों और परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील सामग्री की निगरानी के लिए नई सुरक्षा एजेंसी नियुक्त करने जा रहा है।
एनटीए ने इसके लिए करीब 7.5 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। इस टेंडर के जरिए ऐसी सिक्योरिटी कंपनी का चयन किया जाएगा, जो एजेंसी के कार्यालयों, गोपनीय दस्तावेजों, परीक्षा सामग्री, सर्वर रूम और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की चौबीसों घंटे सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। एनटीए का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाना और किसी भी तरह की अनधिकृत पहुंच को रोकना है।
जानकारी के मुताबिक, यह टेंडर 25 जुलाई को जारी किया गया है। इसके तहत सुरक्षा सेवाओं के अलावा हाउसकीपिंग और परीक्षा से संबंधित प्रिंटिंग सेवाओं के लिए भी खरीद प्रक्रिया शुरू की गई है। एनटीए का मानना है कि परीक्षा आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया में सिर्फ प्रश्नपत्र तैयार करना ही नहीं, बल्कि उसकी छपाई, भंडारण, परिवहन और डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
दो साल का होगा सुरक्षा एजेंसी का अनुबंध
एनटीए की ओर से जारी किए गए टेंडर के अनुसार, चुनी जाने वाली सुरक्षा एजेंसी के साथ शुरुआती समझौता दो साल के लिए किया जाएगा। जरूरत और प्रदर्शन के आधार पर इस अनुबंध को आगे दो बार एक-एक साल के लिए बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है। सुरक्षा सेवा के लिए इच्छुक कंपनियां 17 अगस्त दोपहर 3 बजे तक अपनी बोलियां जमा कर सकती हैं। वहीं परीक्षा से जुड़ी प्रिंटिंग सेवाओं के लिए जारी टेंडर की अंतिम तारीख 20 अगस्त तय की गई है।
एनटीए ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को केवल सामान्य गार्ड तैनाती तक सीमित नहीं रखा है। एजेंसी ऐसी कंपनी चाहती है जो आधुनिक तकनीक के साथ सुरक्षा प्रबंधन संभाल सके। इसमें भौतिक सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन को भी शामिल किया गया है।
मुख्यालय से लेकर स्टोरेज सेंटर तक होगी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत चुनी गई सुरक्षा एजेंसी की जिम्मेदारी काफी व्यापक होगी। सुरक्षा कंपनी को एनटीए के दिल्ली स्थित मिंटो रोड मुख्यालय, ओखला क्षेत्रीय कार्यालय और अन्य चिन्हित स्थानों की निगरानी करनी होगी। परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री रखने वाले स्थानों की सुरक्षा भी एजेंसी के जिम्मे होगी। इसमें प्रश्नपत्रों से संबंधित दस्तावेज, रिकॉर्ड रूम, वेयरहाउस, स्ट्रॉन्ग रूम और सर्वर रूम जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति कोई व्यक्ति प्रवेश न कर सके। इसके लिए कर्मचारियों और आने वाले लोगों की पहचान जांच, विजिटर रिकॉर्ड तैयार करना और प्रवेश-निकास की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। एनटीए ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा से जुड़ी जानकारी और सामग्री की सुरक्षा सबसे अहम प्राथमिकता है। इसलिए केवल उन्हीं कर्मचारियों और अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में जाने की अनुमति होगी, जिनके पास इसके लिए अधिकृत मंजूरी होगी।
सुरक्षा में इस्तेमाल होंगी आधुनिक तकनीकें
एनटीए ने सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी सुधारों को भी शामिल किया है। नई सुरक्षा प्रणाली में डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर, बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम और डिजिटल घटना रिपोर्टिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा सुरक्षा गार्डों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जीपीएस आधारित पेट्रोलिंग ट्रैकिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि सुरक्षा कर्मी निर्धारित क्षेत्रों में नियमित गश्त कर रहे हैं या नहीं।
डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि, सुरक्षा उल्लंघन या आपात स्थिति की जानकारी तुरंत दर्ज की जा सकेगी। इससे सुरक्षा घटनाओं पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
एनटीए की योजना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हर चरण को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके।
पहले सिर्फ कम कीमत पर नहीं होगा चयन
एनटीए ने सुरक्षा एजेंसी चुनने के तरीके में भी बदलाव किया है। पहले जहां कई सरकारी टेंडर में कम कीमत वाली बोली को प्राथमिकता दी जाती है, वहीं इस बार एजेंसी ने गुणवत्ता और लागत आधारित चयन प्रक्रिया अपनाई है। एनटीए ने परीक्षा प्रणाली की संवेदनशीलता को देखते हुए क्वालिटी एंड कॉस्ट बेस्ड सिलेक्शन (QCBS) मॉडल लागू किया है। इसके तहत किसी कंपनी का चयन सिर्फ कम कीमत के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि उसकी तकनीकी क्षमता और अनुभव को भी महत्व दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया में तकनीकी योग्यता को 70 प्रतिशत और वित्तीय बोली को 30 प्रतिशत अंक दिए जाएंगे। जो कंपनियां तकनीकी मूल्यांकन में कम से कम 70 अंक हासिल करेंगी, वही आगे वित्तीय बोली के चरण में पहुंच पाएंगी।
इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी ऐसी एजेंसी को मिले, जिसके पास बड़े और संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा संभालने का अनुभव हो।
कंपनियों के लिए रखी गईं सख्त शर्तें
एनटीए ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए कई पात्रता शर्तें भी तय की हैं। टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनी के पास पेशेवर सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में कम से कम पांच साल का अनुभव होना जरूरी है। इसके अलावा कंपनी का पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसतन 10 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल आर्थिक रूप से मजबूत और अनुभवी कंपनियां ही इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए आवेदन करें।
कंपनी को पहले भी हाई सिक्योरिटी वाले संस्थानों में काम करने का अनुभव होना चाहिए। इनमें केंद्र सरकार के विभाग, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं, विश्वविद्यालय, एयरपोर्ट, अस्पताल और मेट्रो सिस्टम जैसे संस्थान शामिल हैं।
एनटीए का मानना है कि परीक्षा से जुड़ी सुरक्षा सामान्य सुरक्षा से अलग होती है। इसमें छोटी सी लापरवाही भी लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इसलिए अनुभवी और भरोसेमंद एजेंसी का चयन जरूरी है।
NEET विवाद के बाद उठाए जा रहे हैं कई कदम
NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद केंद्र सरकार और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। छात्रों और अभिभावकों की ओर से परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग लगातार की जा रही थी।
इसके बाद एनटीए ने परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा शुरू की और कई स्तरों पर बदलाव की तैयारी की। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना इसी सुधार अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। एनटीए अब परीक्षा सामग्री की छपाई से लेकर उसके सुरक्षित भंडारण और वितरण तक हर चरण में निगरानी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा और एक्सेस कंट्रोल को भी मजबूत किया जा रहा है।
नई सुरक्षा व्यवस्था लागू होने के बाद उम्मीद है कि परीक्षा से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों और सूचनाओं तक पहुंच को नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
एनटीए का यह कदम परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। एजेंसी की कोशिश है कि देशभर में होने वाली बड़ी परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता, सुरक्षा और भरोसे के साथ आयोजित की जाएं।



