अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर साफ संकेत दिए हैं कि उनकी प्राथमिकता युद्ध नहीं बल्कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि बात ईरान के परमाणु कार्यक्रम की आती है तो अमेरिका किसी भी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी और यही अमेरिका की सबसे बड़ी “रेड लाइन” है।
लास वेगास में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने हाल के महीनों में ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है। इसके बावजूद उनका उद्देश्य युद्ध को आगे बढ़ाना नहीं बल्कि ऐसा समाधान तलाशना है जिससे दोनों देशों के बीच तनाव कम हो और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष में सबसे अधिक नुकसान आम लोगों का होता है और यदि बातचीत से समाधान निकल सकता है तो वही बेहतर रास्ता है।
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ बेहद बड़े सैन्य अभियान की पूरी तैयारी थी। उनके अनुसार यह अभियान इतना व्यापक हो सकता था कि इसकी तुलना दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई से की जा सकती थी। लेकिन अंतिम समय में हालात बदले और ईरान की ओर से बातचीत की इच्छा जताए जाने के बाद उस योजना को रोक दिया गया। ट्रंप ने कहा कि जब बातचीत की संभावना सामने आई तो उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ताकत का उद्देश्य केवल युद्ध करना नहीं है बल्कि विरोधी पक्ष को इस स्थिति में लाना है कि वह बातचीत की मेज पर आए। ट्रंप के अनुसार यही रणनीति ईरान के मामले में अपनाई गई और अब दोनों पक्ष संवाद की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का परिणाम क्या होगा, यह आने वाला समय बताएगा।
अपने भाषण में ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर यह संकेत मिलता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है तो अमेरिका उसके खिलाफ कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने दावा किया कि पूर्व की कई अमेरिकी सरकारें इस मुद्दे पर निर्णायक कार्रवाई नहीं कर सकीं, लेकिन उनका प्रशासन इसे लेकर पूरी तरह स्पष्ट और सख्त है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कार्यकाल की नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने उन फैसलों को लागू किया जिनसे अमेरिका की सुरक्षा मजबूत हुई। उनका कहना था कि ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखना केवल अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान परमाणु क्षमता हासिल कर लेता है तो पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
अपने संबोधन में ट्रंप ने वेनेजुएला का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अमेरिका ने वहां अपने हितों को ध्यान में रखते हुए रणनीति अपनाई, उसी तरह ईरान के मामले में भी संतुलित नीति अपनाई जा रही है। उनके अनुसार अमेरिका ने दोनों मामलों में अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया है और आगे भी यही नीति जारी रहेगी।
ट्रंप ने कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का निर्णय बेहद गंभीर होता है। ऐसे फैसले केवल राजनीतिक संदेश देने के लिए नहीं लिए जाते बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि बिना युद्ध के किसी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है तो वही सबसे बेहतर विकल्प है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि अमेरिका की सुरक्षा को खतरा हुआ तो आवश्यक कदम उठाने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।
इस बीच पश्चिम एशिया में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। हालिया संघर्ष के बाद इस मार्ग पर गतिविधियां प्रभावित हुई थीं, जिससे वैश्विक बाजारों में भी चिंता बढ़ गई थी।
जानकारी के अनुसार दोनों देशों के अधिकारी इस समुद्री मार्ग के संचालन और प्रबंधन को लेकर एक साझा व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यदि यह बातचीत सफल रहती है तो क्षेत्र में समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति सामान्य होने की संभावना बढ़ जाएगी। इस घटनाक्रम पर दुनिया के कई देशों की नजर बनी हुई है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का व्यवधान सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों को प्रभावित करता है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने भी संकेत दिया है कि ओमान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि समझौते का मसौदा लगभग तैयार है और यदि किसी बाहरी हस्तक्षेप से प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती तो जल्द ही दोनों देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है। इस बयान में यह स्पष्ट किया जाएगा कि भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन और प्रबंधन को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य रूप से संचालित होने लगता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है। कई देशों की अर्थव्यवस्था इस मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति पर निर्भर करती है। ऐसे में किसी भी समझौते का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर भी दिखाई देगा।
अमेरिका भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। ट्रंप पहले भी कई बार कह चुके हैं कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए और समुद्री व्यापार सुरक्षित रहना चाहिए। माना जा रहा है कि होर्मुज मार्ग को फिर से पूरी तरह सक्रिय कराना अमेरिकी रणनीति का भी अहम हिस्सा है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल ट्रंप के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका एक ओर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसने अपनी सुरक्षा संबंधी शर्तों में कोई नरमी नहीं दिखाई है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उसका रुख पहले की तरह सख्त बना हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इससे लंबे समय से जारी तनाव को कम करने में कोई ठोस सफलता मिल पाती है।




