केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक और सीमा सुरक्षा को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारत में अवैध रूप से दाखिल होने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि देश किसी के लिए धर्मशाला नहीं है और भारत में रहने का अधिकार उसके नागरिकों को है। उनके मुताबिक घुसपैठ केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और देश की जनसांख्यिकी पर भी पड़ता है।
अमित शाह ने मंगलवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज (NSS) कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार की रणनीति सामने रखी। उन्होंने कहा कि देश को घुसपैठ की समस्या से मुक्त करना केंद्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। शाह ने यह भी बताया कि पिछले आठ महीनों के दौरान उन्होंने सभी सीमा से जुड़े राज्यों का दौरा किया और वहां की सुरक्षा व्यवस्था को करीब से समझा है।
गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ रणनीतिक दस्तावेज साझा किए हैं। उनका जोर आधुनिक तकनीक, बेहतर खुफिया नेटवर्क और केंद्र-राज्य के बीच मजबूत तालमेल पर रहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का अनुमान पहले से लगाया जाए, ताकि खतरे बड़े संकट का रूप लेने से पहले ही उन्हें नियंत्रित किया जा सके।
आतंकवाद के खिलाफ रोजाना कार्रवाई की जरूरत
अमित शाह ने आतंकवाद से निपटने के लिए PRAHAR रणनीति को लगातार जमीन पर लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए केवल उसके हमलों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे काम करने वाले पूरे नेटवर्क, फंडिंग, हथियारों की सप्लाई, स्लीपर नेटवर्क और अन्य सहयोगी तंत्र को भी निशाना बनाना जरूरी है।
उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को तोड़ने की दिशा में काम करने को कहा। शाह के मुताबिक देश की सुरक्षा व्यवस्था को ऐसी स्थिति तैयार करनी होगी जिसमें आतंकवादी गतिविधियों को शुरू होने से पहले ही पहचान लिया जाए।
तीन बड़े आंतरिक सुरक्षा मोर्चों पर सरकार का दावा
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि देश में आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से तीन प्रमुख चुनौतियां लंबे समय तक बनी रही थीं। इनमें नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद शामिल हैं। शाह ने दावा किया कि इन तीनों क्षेत्रों में सरकार ने बड़ी प्रगति हासिल की है और इनसे जुड़ी चुनौतियों को काफी हद तक समाप्त किया गया है।
उन्होंने इसके लिए राज्यों की पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। शाह ने कहा कि यदि पहले की सरकारों ने नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की समस्याओं को शुरुआती दौर में गंभीरता से लिया होता तो शायद देश को लंबे समय तक इनके दुष्परिणाम नहीं झेलने पड़ते।
गृह मंत्री ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI पर की गई कार्रवाई को भी केंद्र और राज्यों के तालमेल का उदाहरण बताया। उनके मुताबिक संगठन के खिलाफ व्यापक कार्रवाई और प्रतिबंध के पीछे विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित प्रयास रहा।
विदेशों में छिपे भगोड़ों पर भी कार्रवाई का लक्ष्य
अमित शाह ने कहा कि देश से बाहर जाकर कानून से बचने वाले अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को और तेज किया जाना चाहिए। उन्होंने आंकड़ा देते हुए कहा कि 2019 से 2026 के बीच लगभग 274 भगोड़ों को विदेश से भारत वापस लाया गया है।
उन्होंने सभी राज्यों से कहा कि विदेशों में मौजूद भगोड़ों की पहचान कर उन्हें भारतीय कानून के दायरे में लाने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। शाह के मुताबिक सरकार ने मल्टी एजेंसी सेंटर को भी अपग्रेड किया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग सुरक्षा और जांच एजेंसियों के बीच सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।
उनका कहना था कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई केवल देश की सीमा के भीतर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति विदेश भागकर भारतीय कानून से बचने की कोशिश करता है तो एजेंसियों को उसे वापस लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उपलब्ध कानूनी माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए।
नए आपराधिक कानूनों को लेकर बड़ा लक्ष्य
गृह मंत्री ने नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन को लेकर भी अधिकारियों के सामने समयसीमा रखी। उन्होंने कहा कि आने वाले एक साल में तीनों नए आपराधिक कानूनों को पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य है।
शाह ने उम्मीद जताई कि इन कानूनों और आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से आपराधिक मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है जिसमें गंभीर आपराधिक मामलों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल के भीतर हो सके।
उन्होंने अपराध से जुड़े आंकड़ों और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया। शाह ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले डेटा को जोड़ें, उसका विश्लेषण करें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अपराध के नए तरीकों की पहचान करें। इससे खुफिया जानकारी को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है।
नशे के खिलाफ तीन स्तर पर रणनीति
अमित शाह ने ड्रग्स के खिलाफ अभियान को भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा। उन्होंने राज्यों की पुलिस से नॉरकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 को प्रभावी तरीके से लागू करने की अपील की।
उन्होंने नशे के खिलाफ तीन चरणों वाली रणनीति पर जोर दिया। इसमें पहला चरण नशीले पदार्थों की पहचान करना, दूसरा उनके नेटवर्क और सप्लाई को बाधित करना तथा तीसरा पूरे तंत्र को खत्म करना है। शाह ने कहा कि नशीले पदार्थों के कारोबार पर कार्रवाई केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके पीछे मौजूद नेटवर्क, वित्तीय व्यवस्था और सप्लाई चेन को भी तोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नशे का सबसे बड़ा असर युवाओं पर पड़ता है। इसलिए नशामुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्यों और केंद्र की एजेंसियों को एक साथ काम करना होगा।
सीमा सुरक्षा में आधुनिक तकनीक पर जोर
घुसपैठ के मुद्दे पर अमित शाह पिछले कुछ समय से लगातार सख्त रुख अपनाते रहे हैं। 22 मई को उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमा की निगरानी को तकनीकी रूप से मजबूत करने की बात कही थी।
सरकार की योजना के तहत करीब 6 हजार किलोमीटर लंबी सीमा पर स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसमें ड्रोन, रडार, स्मार्ट कैमरे और दूसरी आधुनिक तकनीकों की मदद से निगरानी बढ़ाने की बात कही गई थी।
इसका उद्देश्य केवल घुसपैठ को रोकना नहीं बल्कि सीमा पार से होने वाली तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर भी नजर रखना है। तकनीक आधारित निगरानी से ऐसे इलाकों में सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने की कोशिश है जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पारंपरिक निगरानी मुश्किल होती है।
जनसंख्या में असामान्य बदलाव पर कमेटी
26 मई को केंद्र सरकार ने देश में जनसंख्या में हो रहे असामान्य बदलाव की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाए जाने की जानकारी दी थी। इस समिति की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर को दी गई।
समिति को देश के अलग-अलग हिस्सों में जनसंख्या के स्वरूप में हो रहे बदलाव का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई। सरकार की ओर से अवैध घुसपैठ समेत अन्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तन को भी अध्ययन के दायरे में रखा गया।
इस मुद्दे पर सरकार का तर्क है कि सीमा से लगे इलाकों में होने वाले असामान्य जनसंख्या परिवर्तन का अध्ययन सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी है। हालांकि ऐसे मामलों में आंकड़ों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई किए जाने पर भी जोर दिया जाता है।
घुसपैठियों को वापस जाने की शाह की अपील
28 मई को भी अमित शाह ने घुसपैठ के मुद्दे पर कड़ा बयान दिया था। उन्होंने पश्चिम बंगाल में घुसपैठ को लेकर तत्कालीन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि अब स्थिति बदल रही है और घुसपैठिए खुद वापस जाने लगे हैं।
उन्होंने अवैध रूप से भारत में दाखिल लोगों से अपने देश लौट जाने की अपील करते हुए कहा था कि समय रहते उन्हें वापस चले जाना चाहिए। उनके लगातार बयानों से साफ है कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को आने वाले समय में भी प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों में बनाए रखना चाहती है।
सुरक्षा नीति सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं
NSS कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने सुरक्षा नीति का दायरा व्यापक रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में देश के सामने केवल पारंपरिक सुरक्षा खतरे नहीं होंगे। वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा संकट, सप्लाई चेन में रुकावट, बढ़ता कट्टरपंथ और साइबर युद्ध जैसी चुनौतियां भी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों से 15 से 20 साल आगे की संभावित चुनौतियों पर विचार करने को कहा। उनका कहना था कि किसी खतरे के सामने आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से उसकी पहचान करना ज्यादा प्रभावी रणनीति है।
शाह के मुताबिक भारत की सुरक्षा व्यवस्था को बदलती तकनीक और वैश्विक परिस्थितियों के साथ लगातार अपडेट करना होगा। इसके लिए खुफिया एजेंसियों, पुलिस, केंद्रीय बलों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय जरूरी है।
गृह मंत्री का संदेश साफ रहा कि आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद, नशे के कारोबार और साइबर खतरों से निपटने के लिए सरकार अब तकनीक और खुफिया जानकारी आधारित व्यवस्था को ज्यादा मजबूत करना चाहती है। घुसपैठ के मामले में भी केंद्र का रुख सख्त है और आने वाले समय में सीमा निगरानी के साथ-साथ अवैध रूप से देश में रह रहे लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर जोर बढ़ सकता है।



