ईरान के गहरे भूमिगत परमाणु अड्डे पर अमेरिका की नजर: ट्रम्प बोले- गतिविधि दिखी तो पिकैक्स माउंटेन पर हो सकता है बड़ा हमला

ईरान के गहरे भूमिगत परमाणु अड्डे पर अमेरिका की नजर: ट्रम्प बोले- गतिविधि दिखी तो पिकैक्स माउंटेन पर हो सकता है बड़ा हमला

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के एक बेहद सुरक्षित भूमिगत परमाणु परिसर को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि अगर ईरान के पिकैक्स माउंटेन स्थित भूमिगत ठिकाने पर किसी तरह की परमाणु गतिविधि सामने आती है तो अमेरिका उस स्थान को सैन्य कार्रवाई का निशाना बना सकता है। अमेरिकी एजेंसियां इस परिसर पर लगातार नजर रख रही हैं और वहां होने वाली गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।

ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके सैन्य ढांचे को लेकर अमेरिका और इजराइल की चिंता लगातार बढ़ी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि उनका प्रशासन ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने पिछले कई महीनों से चल रही अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया।

पिकैक्स माउंटेन क्यों बना अमेरिका की चिंता का केंद्र?

ईरान का पिकैक्स माउंटेन परिसर उसकी परमाणु गतिविधियों से जुड़े सबसे संवेदनशील स्थानों में माना जाता है। यह नतांज के प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र के आसपास के क्षेत्र में स्थित बताया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद गहराई में बनाया जाना है। भूमिगत सुरंगों और मजबूत संरचनाओं की वजह से यहां मौजूद किसी भी सैन्य या परमाणु ढांचे को पारंपरिक हवाई हमलों से नष्ट करना आसान नहीं माना जाता।

बताया जाता है कि इस परिसर में जमीन के भीतर दो बड़े सुरंग नेटवर्क मौजूद हैं। इनकी गहराई और संरचनात्मक मजबूती इसे ईरान के दूसरे परमाणु ठिकानों से अलग बनाती है। यही कारण है कि अमेरिका और इजराइल की निगाहें इस जगह पर बनी हुई हैं।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि इजराइली खुफिया अधिकारियों को आशंका है कि ईरान ने बड़ी संख्या में सेंट्रीफ्यूज इस भूमिगत परिसर में पहुंचाए हैं। सेंट्रीफ्यूज ऐसे उपकरण होते हैं जिनका इस्तेमाल यूरेनियम को संवर्धित करने के लिए किया जाता है। अगर बड़ी संख्या में सेंट्रीफ्यूज वहां सक्रिय हैं या उन्हें सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है, तो यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

इसी वजह से पिकैक्स माउंटेन अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हो गया है। यदि वहां परमाणु गतिविधि बढ़ती दिखाई देती है, तो अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का खतरा भी बढ़ सकता है।

ट्रम्प ने कहा- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे

शुक्रवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपनी स्थिति दोहराई। उन्होंने कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।

ट्रम्प ने अमेरिकी सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि पिछले करीब पांच महीनों में की गई कार्रवाई का उद्देश्य केवल सैन्य दबाव बनाना नहीं था, बल्कि एक बड़े खतरे को रोकना भी था। उनके मुताबिक अगर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने का मौका मिलता तो इससे इजराइल, पश्चिम एशिया और आगे चलकर दूसरे देशों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।

ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हस्तक्षेप ने पश्चिम एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को टालने में भूमिका निभाई। उनका कहना था कि यदि अमेरिका ने कार्रवाई नहीं की होती तो स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती थी।

उन्होंने अपने बयान में यह दावा भी किया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए अमेरिका ने पिछले पांच महीनों में निर्णायक कदम उठाए हैं। ट्रम्प ने इसे इजराइल और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ने देना अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं होगा।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियां लगातार कर रहीं निगरानी

पिकैक्स माउंटेन को लेकर ट्रम्प की चेतावनी का एक अहम हिस्सा अमेरिकी खुफिया निगरानी है। अमेरिकी एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ईरान इस भूमिगत परिसर में क्या गतिविधियां कर रहा है।

ऐसे ठिकाने पर सीधे हमला करना मुश्किल माना जाता है, इसलिए वहां मौजूद गतिविधियों की जानकारी हासिल करना अमेरिकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। यदि खुफिया एजेंसियों को लगता है कि परिसर में सेंट्रीफ्यूज लगाए जा रहे हैं, परमाणु सामग्री को स्थानांतरित किया जा रहा है या संवर्धन से जुड़ी गतिविधियां शुरू हो रही हैं, तो अमेरिका आगे की सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है।

ट्रम्प ने फिलहाल किसी निश्चित हमले की तारीख या अभियान की विस्तृत योजना नहीं बताई है, लेकिन उनका बयान यह स्पष्ट करता है कि पिकैक्स माउंटेन अमेरिकी निगरानी के दायरे में है और वहां किसी भी महत्वपूर्ण गतिविधि को गंभीरता से लिया जाएगा।

ईरान के रडार सिस्टम पर भी ट्रम्प का बड़ा दावा

ईरान के परमाणु ठिकाने के अलावा ट्रम्प ने उसके एयर डिफेंस और रडार नेटवर्क पर हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ईरान के अत्याधुनिक रडार सिस्टम को दो बार निशाना बनाकर नष्ट कर चुकी है।

ट्रम्प के मुताबिक पहली कार्रवाई के बाद ईरान ने दोबारा रडार सिस्टम स्थापित करने की कोशिश की। अमेरिका ने इसके बाद उन नए रडार ठिकानों को भी निशाना बनाया। उनका कहना था कि लगातार नुकसान के बाद ईरान शायद अब दोबारा नए रडार लगाने से बच रहा है।

अमेरिकी रणनीति में रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को कमजोर करना महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे किसी इलाके में हवाई अभियान चलाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। ईरान के सैन्य ढांचे पर लगातार दबाव बनाने की अमेरिकी कोशिशों में ये सिस्टम भी प्रमुख लक्ष्य रहे हैं।

अमेरिकी सेना ने IRGC से जुड़े ठिकानों पर भी की कार्रवाई

ट्रम्प का ताजा बयान अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM की ओर से ईरान में की गई सैन्य कार्रवाई की जानकारी दिए जाने के कुछ दिनों बाद आया है।

CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी सेना ने पिछले सप्ताह ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इन हमलों में केवल एक तरह के सैन्य ढांचे को लक्ष्य नहीं बनाया गया, बल्कि कई अलग-अलग क्षमताओं वाले सिस्टम शामिल थे।

अमेरिकी सेना के मुताबिक, कार्रवाई में एयर डिफेंस नेटवर्क, रडार सिस्टम, समुद्री सैन्य उपकरण, संचार से जुड़े ठिकाने और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता से संबंधित संसाधनों को निशाना बनाया गया।

अमेरिका का कहना है कि ये कार्रवाई ईरान की ओर से हाल में की गई कथित सैन्य गतिविधियों के जवाब में हुई। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, ईरान से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई की कोशिशें की गई थीं।

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।

ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को बताया संप्रभुता का उल्लंघन

अमेरिकी दावों के बीच ईरान ने वॉशिंगटन की सैन्य कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। ईरान ने अमेरिका पर अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में उसके कई प्रांतों में मौजूद सैन्य के साथ-साथ गैर-सैन्य बुनियादी ढांचे और नागरिक ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय नियमों और अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ बताया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसकी सेना ने अमेरिकी हमलों का जवाब रक्षात्मक कार्रवाई के रूप में दिया है। तेहरान का तर्क है कि पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे ही उन स्थानों के रूप में काम कर रहे हैं जहां से ईरान के खिलाफ हमलों की योजना, तैयारी और समर्थन किया जा रहा है।

ईरान के मुताबिक, इसी कारण उसने जवाबी कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

परमाणु कार्यक्रम बना टकराव का सबसे बड़ा मुद्दा

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव में परमाणु कार्यक्रम सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका लगातार यह कह रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। दूसरी तरफ ईरान अमेरिकी सैन्य दबाव और हमलों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताता रहा है।

पिकैक्स माउंटेन को लेकर ट्रम्प की ताजा चेतावनी इस पूरे विवाद को और गंभीर बना सकती है। जमीन के भीतर बेहद मजबूत संरचना वाला यह परिसर अमेरिकी सैन्य रणनीति के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। यदि यहां परमाणु गतिविधियों के बढ़ने के संकेत मिलते हैं, तो आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का स्तर और बढ़ सकता है।

फिलहाल ट्रम्प ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नजर बनाए हुए है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि पिकैक्स माउंटेन में कोई ऐसी गतिविधि सामने आती है जिसे अमेरिका परमाणु हथियार कार्यक्रम से जोड़ता है, तो उस स्थिति में सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा। इससे पश्चिम एशिया में पहले से तनावपूर्ण माहौल के और गहराने की आशंका बढ़ गई है।