नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक रिश्तों को लेकर तेहरान की ओर से सकारात्मक संदेश सामने आया है। ईरान ने भारत के साथ अपने संबंधों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए दोनों देशों के बीच मौजूद पुराने ऐतिहासिक और सभ्यतागत जुड़ाव का उल्लेख किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने कहा है कि भारत के साथ उनके देश के संबंध केवल मौजूदा दौर की जरूरतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें काफी गहरी और पुरानी हैं।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं। ऐसे समय में तेहरान की ओर से भारत के साथ संबंधों को लेकर दिया गया बयान काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पेजेश्कियान की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ चाबहार बंदरगाह से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हो सकती है।
BRICS सम्मेलन भारत और ईरान को एक ही मंच पर अपने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर भी देगा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह इस बहुपक्षीय बैठक के दौरान भारत के साथ आपसी हित के मुद्दों पर संवाद को और मजबूत करना चाहता है।
BRICS के मंच पर भारत से बातचीत बढ़ाने की तैयारी
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने भारत को उन महत्वपूर्ण देशों में शामिल बताया, जिनके साथ तेहरान के कई क्षेत्रों में अच्छे संबंध हैं। उनके मुताबिक भारत के साथ आर्थिक और कारोबारी सहयोग दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बाकेई ने कहा कि भारत BRICS के साथ-साथ शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO का भी सदस्य है। ऐसे में दोनों देशों के पास बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे के साथ संवाद करने के कई अवसर मौजूद हैं। ईरान इन मंचों का इस्तेमाल अपने आर्थिक और कूटनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहता है।
ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, भारत उन देशों में शामिल है जिनके साथ ईरान विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक संबंध रखता है। खासतौर पर व्यापार और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आगे बढ़ने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पेजेश्कियान जल्द ही भारत की यात्रा करने वाले हैं। इसलिए तेहरान की ओर से भारत के साथ संबंधों पर जोर दिए जाने को इस यात्रा की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है।
मोदी-पेजेश्कियान की मुलाकात का भी किया जिक्र
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच हुई हालिया मुलाकात को भी महत्वपूर्ण बताया। दोनों नेताओं की मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में आयोजित SCO सम्मेलन के दौरान हुई थी।
इस बैठक में दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने और सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा हुई थी। अब पेजेश्कियान की प्रस्तावित दिल्ली यात्रा के साथ दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क का सिलसिला आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
बाकेई ने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति ने अपनी हालिया यात्राओं और बैठकों के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी बातचीत की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ईरान के संबंध केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं।
तेहरान का कहना है कि वह भारत के साथ इन रिश्तों को काफी महत्व देता है। ईरान की तरफ से इस तरह की टिप्पणी यह संकेत देती है कि वह आने वाले समय में भारत के साथ अपने संबंधों को और व्यापक बनाना चाहता है।
चाबहार बंदरगाह पर भी हो सकती है अहम चर्चा
भारत और ईरान के बीच सहयोग की बात होती है तो चाबहार बंदरगाह का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ईरानी प्रवक्ता ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत में चाबहार बंदरगाह का विषय अक्सर शामिल रहता है।
चाबहार भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके जरिए भारत को क्षेत्र में व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने का एक अहम मार्ग मिलता है। मध्य एशिया और अफगानिस्तान समेत आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच बनाने के लिहाज से भी चाबहार को महत्वपूर्ण माना जाता है।
ईरान के लिए भी यह बंदरगाह उसकी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक संभावनाओं से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि भारत और ईरान के बीच बातचीत के दौरान चाबहार से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं।
BRICS सम्मेलन के दौरान यदि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस विषय पर चर्चा आगे बढ़ती है तो यह द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि किन विशेष मुद्दों पर बातचीत होगी, इसका अंतिम विवरण बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।
भारत को आर्थिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानता है ईरान
ईरान लंबे समय से भारत के साथ आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने में रुचि दिखाता रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिन पर नियमित बातचीत होती रही है।
बाकेई ने भी इसी दिशा की ओर संकेत करते हुए कहा कि ईरान भारत के साथ अपने राजनयिक संबंधों का इस्तेमाल आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहता है। इसका अर्थ यह है कि तेहरान आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उपलब्ध आर्थिक अवसरों को और अधिक इस्तेमाल करना चाहता है।
भारत के लिए भी ईरान का महत्व कई स्तरों पर है। दोनों देशों के बीच पुराने सांस्कृतिक संपर्क हैं और इसके अलावा क्षेत्रीय व्यापार तथा कनेक्टिविटी से जुड़े हित भी एक-दूसरे से जुड़े हैं। ऐसे में उच्चस्तरीय यात्राएं और बहुपक्षीय बैठकों के दौरान होने वाली बातचीत द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दे सकती है।
SCO के बाद अब BRICS में आमने-सामने होंगे दोनों देशों के नेता
31 अगस्त को बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात के बाद अब दोनों देशों के बीच एक और महत्वपूर्ण संपर्क का अवसर सामने है। BRICS सम्मेलन के लिए ईरानी राष्ट्रपति का भारत आना दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
ईरान BRICS समूह का सदस्य है और भारत भी इस समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में दोनों देशों के पास बहुपक्षीय सहयोग के साथ-साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत का भी अवसर होगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह BRICS बैठक को भारत के साथ संवाद आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देखता है। तेहरान आपसी हित वाले विषयों पर चर्चा जारी रखना चाहता है। इससे यह संकेत मिलता है कि सम्मेलन केवल बहुपक्षीय एजेंडे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और ईरान के बीच अलग से बातचीत के लिए भी महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।
ऐतिहासिक रिश्तों को आधुनिक सहयोग से जोड़ने की कोशिश
भारत और ईरान के संबंधों का इतिहास काफी पुराना है। दोनों देशों के बीच भाषा, संस्कृति, व्यापार और सभ्यता के स्तर पर लंबे समय से संपर्क रहा है। आधुनिक दौर में इन ऐतिहासिक रिश्तों को आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के साथ जोड़ने की कोशिश होती रही है।
ईरानी प्रवक्ता ने अपने बयान में इसी पुराने जुड़ाव को विशेष महत्व दिया। उन्होंने भारत के साथ संबंधों को ऐतिहासिक और सभ्यतागत बताते हुए कहा कि तेहरान इन रिश्तों को महत्वपूर्ण मानता है।
तेहरान की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया की परिस्थितियों और वैश्विक राजनीति के बीच भारत और ईरान दोनों अपने-अपने रणनीतिक हितों को लेकर सक्रिय हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच स्थिर संवाद और आर्थिक सहयोग को बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
पेजेश्कियान की दिल्ली यात्रा पर टिकी नजरें
अब सबकी नजरें मसूद पेजेश्कियान की नई दिल्ली यात्रा पर हैं। BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाला है। इसी दौरान ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों के लिए अहम अवसर प्रदान करेगी।
सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों के अलावा भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय विषय भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। चाबहार बंदरगाह, व्यापार, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों की बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।
ईरान की ओर से पहले ही भारत के साथ रिश्तों को लेकर सकारात्मक रुख जाहिर किया जा चुका है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि दोनों देशों के संबंध लगातार बेहतर हो रहे हैं और तेहरान भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने में रुचि रखता है।
BRICS सम्मेलन से पहले ईरान की ओर से भारत की खुलकर तारीफ को दोनों देशों के बीच मजबूत होते संपर्क के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ बिश्केक में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात हो चुकी है, वहीं अब दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक दोनों नेताओं को फिर से बातचीत का अवसर देगी। ऐसे में पेजेश्कियान की यात्रा से भारत-ईरान संबंधों में आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी और रणनीतिक साझेदारी के नए रास्ते खुलने की उम्मीद की जा रही है।




