रेबीज से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन Abhayrab को लेकर ड्रग रेगुलेटर ने देशभर में अलर्ट जारी किया है। मामला Abhayrab के बैच नंबर KE25012 से जुड़ा है। दिल्ली में एक बिना लाइसेंस वाले परिसर से इस बैच के नाम वाली कुछ वायल बरामद हुई थीं। सरकारी प्रयोगशाला में जांच के दौरान सैंपल जरूरी potency test में फेल हो गया। इसके बाद संबंधित उत्पाद को Not of Standard Quality (NSQ) घोषित किया गया है। साथ ही, बरामद वायल के नकली होने की भी जांच की जा रही है।
यह मामला तब सामने आया जब ड्रग अधिकारियों ने दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में कार्रवाई की। तलाशी के दौरान मिले वायल पर Abhayrab का नाम और KE25012 बैच नंबर दर्ज था। अधिकारियों ने इन सैंपल को जांच के लिए Central Drugs Laboratory, Kasauli भेजा। परीक्षण में सैंपल निर्धारित potency मानक पूरा नहीं कर पाया।
कंपनी ने बरामद वैक्सीन को अपना मानने से किया इनकार
Abhayrab बनाने वाली कंपनी Indian Immunologicals Limited (IIL) ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली से बरामद की गई वायल उसकी ओर से निर्मित नहीं की गई थीं। कंपनी ने बरामद नमूनों की तुलना अपने रिकॉर्ड और असली बैच के सुरक्षित रखे गए सैंपल से की। कंपनी के मुताबिक, इस तुलना में कई अंतर सामने आए। इनमें वैक्सीन के लेबल, पैकेजिंग, QR कोड, कैप के रंग, लाइसेंस संबंधी जानकारी और पैकेट पर छपी दूसरी जानकारियां शामिल हैं। कंपनी ने जांच में कुल 17 अंतर मिलने की बात कही है।
इन अंतर के सामने आने के बाद आशंका जताई जा रही है कि किसी ने असली Abhayrab के नाम और बैच नंबर का इस्तेमाल करके नकली उत्पाद तैयार किया और उसे सप्लाई करने की कोशिश की।
दिल्ली के बिना लाइसेंस वाले परिसर से मिली थीं वायल
मामला दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में सामने आया। ड्रग अधिकारियों की कार्रवाई के दौरान एक ऐसे परिसर से वैक्सीन की वायल बरामद की गईं, जिसके पास संबंधित गतिविधि के लिए जरूरी लाइसेंस नहीं था। बरामद वायल पर Abhayrab का नाम और KE25012 बैच नंबर लिखा हुआ था। इसके बाद अधिकारियों ने सैंपल लिए और उन्हें सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा। केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कसौली की जांच में सैंपल potency की निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं कर पाया।
यही रिपोर्ट अब जांच का अहम हिस्सा बन गई है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि बरामद वायल कहां तैयार की गईं और इनकी सप्लाई किन लोगों के जरिए की जा रही थी।
DCGI ने राज्यों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए
मामले की जानकारी सामने आने के बाद Drugs Controller General of India (DCGI) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर्स को सतर्क किया है। अधिकारियों से Abhayrab के बैच नंबर KE25012 की बिक्री और वितरण पर नजर रखने को कहा गया है।
नियामक की ओर से राज्यों को जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका मकसद यह पता लगाना है कि कहीं इसी नाम और बैच नंबर वाली संदिग्ध वायल दूसरे इलाकों में तो नहीं पहुंची हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां बरामद वैक्सीन के स्रोत और उसके संभावित वितरण नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं।
चार लोगों को किया गया गिरफ्तार
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संदिग्ध वैक्सीन तैयार करने, पैक करने और सप्लाई करने में कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बरामद वायल केवल एक जगह तक सीमित थीं या इन्हें किसी बड़े नेटवर्क के जरिए अलग-अलग इलाकों में भेजा गया था।
अधिकारियों के सामने यह भी बड़ा सवाल है कि अगर ये वायल असली कंपनी ने नहीं बनाई थीं तो उन पर कंपनी का नाम, बैच नंबर और दूसरी जानकारी किस तरह इस्तेमाल की गई।
असली KE25012 बैच में थे 83,370 वायल
Indian Immunologicals Limited के मुताबिक, उसके असली KE25012 बैच में 83,370 वायल थीं। कंपनी ने बताया कि यह बैच उसके अधिकृत वितरण चैनल के जरिए बाजार में भेजा गया था। कंपनी का कहना है कि उसके अधिकृत चैनल से सप्लाई की गई वैक्सीन इस मामले में बरामद संदिग्ध वायल से अलग है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके असली उत्पादों को तय प्रक्रिया के तहत जांच और गुणवत्ता नियंत्रण से गुजरना पड़ता है।
यानी मौजूदा जांच का केंद्र उन वायल पर है जो दिल्ली में मिलीं और जिनकी पहचान को लेकर कंपनी ने खुद अंतर बताया है।
वैक्सीन की पैकेजिंग में मिले कई अंतर
कंपनी द्वारा की गई तुलना में सबसे ज्यादा ध्यान पैकेजिंग और पहचान से जुड़ी जानकारी पर गया। बरामद वायल और कंपनी के असली सैंपल को मिलाने पर लेबल और पैकेजिंग में अंतर पाया गया। इसके अलावा QR कोड, कैप का रंग और लाइसेंस से संबंधित जानकारी भी अलग बताई गई है। पैकेज पर छपी कुछ अन्य जानकारियों में भी अंतर पाया गया।
कंपनी के मुताबिक कुल 17 अंतर सामने आए हैं। इन्हीं वजहों से बरामद वायल के नकली होने की आशंका की जांच की जा रही है।
अधिकृत सप्लाई को लेकर कंपनी ने क्या कहा?
Indian Immunologicals ने कहा है कि उसके अधिकृत वितरण नेटवर्क से भेजी गई Abhayrab वैक्सीन इस मामले से प्रभावित नहीं है। कंपनी के अनुसार, उसके असली बैच के उत्पादन और सप्लाई का रिकॉर्ड मौजूद है।
कंपनी ने जांच एजेंसियों के साथ अपने उत्पादन और गुणवत्ता से जुड़े रिकॉर्ड साझा किए हैं। वहीं, सरकार की जांच में अभी यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि संदिग्ध वायल की कुल संख्या कितनी थी और इनमें से कितनी शीशियां बाजार या किसी स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंची थीं।
पहले भी सामने आ चुका है नकली Abhayrab का मामला
Abhayrab को लेकर नकली वैक्सीन का मामला पहले भी सामने आ चुका है। जनवरी 2025 में KA24014 बैच नंबर के नाम से नकली Abhayrab बाजार में होने की जानकारी सामने आई थी। उस समय भी संबंधित अधिकारियों को सतर्क किया गया था। इसके बाद कुछ विदेशी स्वास्थ्य अधिकारियों ने भारत से लौटने वाले यात्रियों के लिए भी सावधानी संबंधी अलर्ट जारी किए थे।
अब करीब दो साल के भीतर Abhayrab के नाम से जुड़ा एक और संदिग्ध मामला सामने आने के बाद ड्रग रेगुलेटर ने राज्यों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
रेबीज के इलाज में वैक्सीन क्यों जरूरी?
रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर के काटने या उसके संपर्क में आने के बाद हो सकती है। बीमारी से बचाव के लिए समय पर चिकित्सा सहायता और डॉक्टर की सलाह के अनुसार पोस्ट-एक्सपोजर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।
रेबीज के मामलों में वैक्सीन की गुणवत्ता और सही तरीके से उसका भंडारण महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से किसी वैक्सीन की गुणवत्ता को लेकर सामने आने वाली शिकायत या जांच को नियामक गंभीरता से लेते हैं।
भारत में रेबीज से हर साल बड़ी संख्या में मौतें होने का अनुमान है। ऐसे में प्रभावी और मानकों के अनुरूप वैक्सीन की उपलब्धता सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
अब आगे क्या होगी जांच?
फिलहाल जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि दिल्ली में मिली संदिग्ध Abhayrab वायल कहां से आईं। एजेंसियां इनके निर्माण, पैकेजिंग, स्टोरेज और सप्लाई से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
इसके साथ ही राज्यों को बैच नंबर KE25012 की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। अगर इस बैच के नाम से कोई संदिग्ध वायल दूसरे स्थानों पर मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे मामले में एक तरफ सरकारी लैब में सैंपल का potency test फेल हुआ है, जबकि दूसरी तरफ निर्माता कंपनी ने बरामद वायल को अपने उत्पादन से अलग बताया है। अब जांच से यह साफ होगा कि इन वायल को किसने तैयार किया, कितनी मात्रा में तैयार किया गया और इन्हें कहां-कहां सप्लाई किया गया।




