हिंदी सिनेमा के जाने-माने चरित्र अभिनेता मुश्ताक खान के निधन से फिल्म और टीवी जगत में शोक की लहर है। ‘वेलकम’, ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘आशिकी’ और ‘मुझसे शादी करोगी’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से पहचान बनाने वाले मुश्ताक खान ने 24 सितंबर की शाम मुंबई में अंतिम सांस ली। वह 75 वर्ष के थे। उनके परिवार की ओर से उनके बेटे मोहसिन ने निधन की जानकारी दी।
मुश्ताक खान पिछले करीब दो सप्ताह से मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती थे। रिपोर्टों के मुताबिक उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी और गुरुवार शाम करीब 7 बजे उनका निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। परिवार के मुताबिक करीब पांच साल पहले उन्हें इस बीमारी का पता चला था और इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था, लेकिन हाल के दिनों में बीमारी दोबारा सामने आई और उनकी सेहत तेजी से बिगड़ने लगी।
छोटे कस्बे से शुरू हुआ सफर, मुंबई में बनाई अलग पहचान
मुश्ताक खान का संबंध मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर कस्बे से था। एक छोटे शहर से निकलकर उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग जगह बनाई। उन्हें मुख्य भूमिकाओं की बजाय चरित्र और सपोर्टिंग रोल के लिए ज्यादा पहचान मिली, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ऐसी थी कि छोटे से छोटा किरदार भी दर्शकों के जेहन में रह जाता था।
उनकी अभिनय शैली में सहज कॉमेडी, खास हाव-भाव और संवाद बोलने का अलग अंदाज दिखाई देता था। यही वजह रही कि कई फिल्मों में कम समय के लिए नजर आने के बावजूद उन्होंने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने हिंदी फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन और मंच पर भी काम किया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने 500 से ज्यादा फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।
‘वेलकम’ ने किरदार को बना दिया यादगार
मुश्ताक खान के करियर की बात हो और ‘वेलकम’ का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। साल 2007 में रिलीज हुई इस कॉमेडी फिल्म में उन्होंने बल्लू का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके साथ अक्षय कुमार, नाना पाटेकर, अनिल कपूर और परेश रावल जैसे बड़े कलाकार थे।
‘वेलकम’ में उनका किरदार भले ही मुख्य भूमिकाओं में शामिल नहीं था, लेकिन उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी ने इसे यादगार बना दिया। फिल्म से जुड़े उनके कई दृश्य आज भी सोशल मीडिया पर मीम और वीडियो के रूप में दिखाई देते हैं। खास तौर पर उनका ‘मेरी एक टांग नकली है…’ वाला संवाद लंबे समय तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहा।
यही वह अंदाज था जिसने मुश्ताक खान को उन चरित्र कलाकारों की कतार में खड़ा किया, जो कहानी में मुख्य किरदार नहीं होते, लेकिन अपनी मौजूदगी से दृश्य को मजबूत बना देते हैं।
‘गदर’ में भी निभाया अहम किरदार
मुश्ताक खान ने सिर्फ कॉमेडी फिल्मों में ही काम नहीं किया। अनिल शर्मा की चर्चित फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में उन्होंने गुल खान की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनका किरदार गंभीर और अलग मिजाज का था। इस फिल्म ने उन्हें हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच और व्यापक पहचान दिलाई।
बाद में वह ‘गदर 2’ में भी नजर आए। इस तरह एक ही फिल्म फ्रेंचाइजी की अलग-अलग कड़ियों का हिस्सा बनकर उन्होंने लंबे समय तक अपने अभिनय का सिलसिला जारी रखा।
इसके अलावा उनकी चर्चित फिल्मों की सूची काफी लंबी है। ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘आशिकी’, ‘राजा’, ‘जोड़़ी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘हेरा फेरी’, ‘वेलकम’, ‘वांटेड’, ‘ओह माय गॉड!’, ‘स्त्री’, ‘गदर 2’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
पर्दे पर सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं थे
मुश्ताक खान को आमतौर पर उनकी कॉमिक भूमिकाओं के लिए याद किया जाता है, लेकिन उनका अभिनय सिर्फ हास्य किरदारों तक सीमित नहीं था। उन्होंने ड्रामा, एक्शन, पारिवारिक और कमर्शियल फिल्मों में भी कई तरह के रोल किए।
उनकी खासियत यह थी कि वह अपने किरदार के हिसाब से खुद को ढाल लेते थे। कभी वह दर्शकों को हंसाते नजर आए तो कभी गंभीर भूमिका में दिखाई दिए। यही विविधता उनके लंबे फिल्मी करियर की महत्वपूर्ण पहचान रही।
उनकी अभिनय यात्रा फिल्मों से आगे टेलीविजन तक भी पहुंची। ‘भारत एक खोज’, ‘नुक्कड़’, ‘वागले की दुनिया’ और ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ जैसे टीवी प्रोजेक्ट्स में भी उन्होंने काम किया। इससे साफ होता है कि उन्होंने सिर्फ बड़े पर्दे पर ही नहीं, बल्कि छोटे पर्दे पर भी लंबे समय तक अपनी मौजूदगी बनाए रखी।
आखिरी दिनों तक काम से जुड़े रहे
मुश्ताक खान के निधन से पहले भी उनके काम को लेकर गतिविधियां जारी थीं। रिपोर्टों के मुताबिक अस्पताल में भर्ती होने से पहले वह सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा के बेटे की पहली फिल्म की शूटिंग से जुड़े हुए थे। बीमारी के बावजूद उनका काम से जुड़े रहना उनके पेशे के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने उन्हें याद किया। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने भी उन्हें बेहतरीन कलाकार और मिलनसार इंसान बताया।
दो साल पहले अपहरण की खबर से भी चर्चा में आए थे
मुश्ताक खान की जिंदगी का एक मुश्किल दौर करीब दो साल पहले भी सामने आया था। नवंबर 2024 में उनके अपहरण का मामला चर्चा में रहा था। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने के बहाने बुलाया गया था और बाद में कथित तौर पर उनका अपहरण कर लिया गया।
मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि अपहरणकर्ताओं ने उनसे फिरौती की मांग की थी और उन्हें उत्तर प्रदेश के बिजनौर ले जाया गया था। वहां उनके साथ मारपीट और जबरन पैसे वसूलने के आरोप भी सामने आए थे। इस घटना ने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
इसके बाद मुश्ताक खान एक बार फिर अपने काम पर लौटे और फिल्मों तथा अन्य प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे। उनकी जिंदगी में आए इस कठिन दौर के बावजूद उनका फिल्मी सफर जारी रहा।
‘वेलकम’ से लेकर ‘स्त्री 2’ तक चलता रहा अभिनय
मुश्ताक खान का करियर इस बात का उदाहरण रहा कि हिंदी सिनेमा में चरित्र कलाकार किस तरह दशकों तक अपनी पहचान बनाए रख सकता है। उन्होंने अलग-अलग दौर की फिल्मों में काम किया और नई पीढ़ी के कलाकारों के साथ भी स्क्रीन साझा की।
‘वेलकम’ ने उन्हें कॉमेडी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया, जबकि ‘गदर’ जैसी फिल्मों ने उनके गंभीर और चरित्र आधारित अभिनय की झलक दिखाई। बाद के वर्षों में ‘गदर 2’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में भी उनकी मौजूदगी दर्ज हुई।
उनकी खास बात यह रही कि किसी फिल्म में भूमिका छोटी होने के बावजूद वह उसे अपने अंदाज से यादगार बना देते थे। उनकी संवाद अदायगी, शारीरिक हाव-भाव और कॉमिक टाइमिंग लंबे समय तक दर्शकों को याद रही।
परिवार और प्रशंसकों के बीच छोड़ गए यादें
मुश्ताक खान के निधन की खबर उनके परिवार, दोस्तों, सहकर्मियों और प्रशंसकों के लिए बड़ा सदमा है। परिवार के मुताबिक बीमारी के कारण उनकी तबीयत लगातार खराब हो रही थी और करीब दो सप्ताह तक अस्पताल में उनका इलाज चला। आखिरकार 24 सितंबर की शाम उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
मुश्ताक खान भले ही मुख्यधारा की फिल्मों में अक्सर सहायक भूमिका में नजर आए, लेकिन उनका योगदान सिर्फ स्क्रीन टाइम से नहीं आंका जा सकता। उन्होंने जिन किरदारों को निभाया, उनमें अपनी अलग पहचान छोड़ी। ‘वेलकम’ के बल्लू से लेकर ‘गदर’ के गुल खान तक, उनके कई किरदार दर्शकों की यादों का हिस्सा बन चुके हैं।
75 साल की उम्र में उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने बिना किसी स्टार इमेज के भी अपनी अदाकारी और खास अंदाज से दर्शकों के बीच मजबूत जगह बनाई। उनकी फिल्मों के किरदार और संवाद आने वाले समय में भी उन्हें दर्शकों के बीच याद दिलाते रहेंगे।




