यूपी बजट में कृषि, MSME और व्यापार पर हो फोकस:7 एक्सपर्ट ने टॉक शो में बताया रोडमैप, किसानों की बिजली फ्री करने का सुझाव

यूपी बजट में कृषि, MSME और व्यापार पर हो फोकस:7 एक्सपर्ट ने टॉक शो में बताया रोडमैप, किसानों की बिजली फ्री करने का सुझाव 20 फरवरी को प्रदेश का बजट पेश होगा। इस बार बजट का आकार करीब 8.50 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। बजट किसी भी सरकार की आर्थिक नीति का विश्लेषण है कि वह कितना जल्द डेवलपमेंट स्टेट बनना चाहता है। बजट इसका एक रोडमैप है। विशेषज्ञों की राय में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य को आगे बढ़ना है तो बजट में 3 सेक्टर कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) और कैपिटल स्ट्रक्चर पर फोकस करना चाहिए। तभी हम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अगले दो साल में 1 ट्रिलियन डालर तक ले जा पाएंगे। सवाल है, किसी राज्य का बजट कैसे तैयार होता है? कितने महीने पहले इसकी प्रक्रिया शुरू होती है? अलग-अलग विभागों को किस आधार पर राशि आवंटित होती है? बजट से प्रदेश के किसानों, व्यापारियों, महिलाएं, युवा, उद्योगपतियों और छोटे उद्योग-धंधों से जुड़े लोगों की अपेक्षाएं क्या हैं? उनके सुझाव, जिससे बजट समावेशी और विकासोन्मुखी बन पाए। दैनिक भास्कर ने अलग-अलग क्षेत्र के 7 एक्सपर्ट से चर्चा की। पढ़िए हमारी खास पहल बजट पर टॉक शो… 4 महीने पहले बजट बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है यूपी के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के मुताबिक, 1997-98 में वित्त सचिव रहते हुए दो बार बजट बनाने का अनुभव है। तब पहली बार विभाग के लोगों ने सीडी से बजट का एनालिसिस किया था। बजट की प्रक्रिया तीन-चार महीने पहले से शुरू हो जाती है। वित्त विभाग सबसे पहले अलग-अलग विभागों से प्रस्ताव मांगता है। प्रस्ताव देने वाले विभाग देखते हैं कि पिछले साल उनका क्या बजट था? उसमें कितना खर्च हुआ? प्रस्ताव में पिछले साल का बजट इस्टीमेट, रिवाइज इस्टीमेट और अगले साल का बजट इस्टीमेट शामिल रहता है। किसी भी बजट के लिए जरूरी होता है कि हमारे संसाधन क्या हैं? यूपी को आबादी के अनुसार केंद्र सरकार से लगभग 17 फीसदी राशि केंद्र के टैक्स पूल से मिलती है। दूसरा हमारे खुद के संसाधन क्या हैं? उसे बजट के अनुसार कैसे बढ़ाएं? पहले सेल्स टैक्स था, अब जीएसटी आ गया है। राज्य को उसका जीएसटी शेयर मिल जाता है। पिछले वित्त कमीशन की सिफारिश पर भारत सरकार ने राज्यों का टैक्स पूल 32 से बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया है। लेकिन, उन्होंने टैक्स पूल की राशि बढ़ाकर एक खेल कर दिया। पहले केंद्र की स्कीम को या तो खत्म कर दिया या फिर उसका अंशदान कम कर दिया। 2015-16 में इसकी वजह से यूपी को 8000 करोड़ रुपए कम मिले थे। बजट के लिए दूसरा संसाधन राज्य के टैक्सेस हैं। इससे कितना रेवन्यू मिल सकता है? दूसरे नॉन रेवन्यू वाले सेक्टर से कितना टैक्स और मिल सकता है? इसके लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। इसके बाद आता है कि बजट में अलग-अलग विभागों को राशि कितनी दिया जाए। तो एफएआरबीएम (फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट) का एक्ट कहता है कि बजट बनाते समय फिजिकल डेफिसिटी 3 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इससे पता चलता है कि हम किस सीमा तक खर्च कर सकते हैं। इसके आधार पर विभागों को बजट आवंटित किया जाता है। सरकार के प्राथमिकता वाले सेक्टर का बजट बढ़ा दिया जाता है। वहीं दूसरे का सामान्य रखते हैं। प्रदेश की 46 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है। ऐसे में कृषि पर फोकस बढ़ाना होगा। दूसरा एमएसएमई सेक्टर है, जो रोजगार उपलब्ध कराते हैं। इसमें कई छोटे उद्योग बंद होते जा रहे हैं। ये नॉन फार्मर सेक्टर हैं और रजिस्टर्ड भी नहीं हैं। इसकी वजह से इन्हें सरकारी योजनाओं का फायदा भी नहीं मिल रहा है। इसे बचाने के लिए सरकार को फोकस करना चाहिए। तीसरा कैपिटल स्ट्रक्चर पर फोकस करना चाहिए। बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर सेक्टर, पुल, सड़क, सिंचाई पर कितना खर्च कर रहे हैं? इस पर जितना खर्च करेंगे, उतना नया रोजगार मिलेगा। प्रदेश में आज भी सबसे ज्यादा रोजगार कृषि सेक्टर से मिल रहा है। इसके बावजूद कृषि यूपी सरकार बजट का लगभग 3 फीसदी ही खर्च करती है। किसान नेता हरनाम सिंह वर्मा के मुताबिक, किसान इस प्रदेश और देश की रीढ़ हैं। सबसे ज्यादा रोजगार कृषि में है, लेकिन दुर्भाग्य है कि इसके ही आंकड़े नहीं हैं। इस प्रदेश को खुशहाल करना है तो कृषि को बढ़ावा देना होगा। क्या कारण है कि एक दाने से 100 दाने गेहूं पैदा करने वाला किसान जान दे रहा है। लेकिन, उसके ही एक किलो गेहूं से 900 ग्राम का दलिया बनाकर बेचने वाला व्यापारी सुखी है। फर्क बस इतना है कि व्यापारी को उसकी कीमत तय करने का अधिकार है। किसान को अपनी उपज सरकार के समर्थन मूल्य पर बेचने की मजबूरी है। 1967 में 12 ग्राम सोने की कीमत 3 क्विंटल गेहूं के बराबर थी। तब 12 ग्राम का एक तोला होता था। 220 रुपए में एक तोला सोना मिल जाता था। आज क्या 3 क्विंटल गेहूं में कोई किसान एक तोला सोना खरीद सकता है? सरकार के अधीन काम करने वाले गन्ना शोध संस्थानों की रिपोर्ट है कि एक क्विंटल गन्ना पैदा करने की लागत 450 रुपए है। लेकिन, सरकार एक क्विंटल गन्ना की कीमत किसानों को 370 रुपए दे रही है। बिजली सेक्टर को बजट से क्या चाहिए
प्रदेश के 42 जिलों की बिजली को प्राइवेट सेक्टर के हाथों में देने की तैयारी है। देश में यूपी ऐसा इकलौता राज्य है, जहां अभी भी रोस्टर से बिजली दी जा रही है। कृषि को छोड़कर पूरे देश में 24 घंटे बिजली देने का कानून बन गया। लेकिन, अभी भी सबसे कम बिजली ग्रामीण क्षेत्रों को यूपी में मिल रही है। यूपी राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि पूरे देश में यूपी में सबसे कम प्रति व्यक्ति बिजली खपत 629 यूनिट है। जबकि देश में औसत प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 1300 यूनिट है। यूपी में कम बिजली खपत के दो ही कारण हैं। पहला या तो यहां के लोगों को जरूरत से कम बिजली मिल रही है या फिर बिजली महंगी मिल रही है। सरकार प्रदेश के बिजली सेक्टर को प्राइवेट हाथों में सौंपकर सुधारना चाहती है। जबकि इस तरह का प्रयास 2014-15 में हुआ था, जो फिजिबल रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दिया गया। बिजली का सुधार सार्वजनिक क्षेत्र में रखकर ही किया जा सकता है। तभी इस पर सरकार का नियंत्रण होगा। जब किसी व्यापारी के हाथों में बिजली होगी, तो उसका उद्देश्य सिर्फ फायदा कमाने पर रहेगा। प्रदेश में बिजली की खपत के अनुसार ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क ही नहीं है। ऐसे में इन दोनों सेक्टर में सुधार की जरूरत है। ये बिना सरकारी मदद के नहीं हो सकता। देश में 4.50 लाख मेगावाट बिजली की उपलब्धता है। जबकि मांग सिर्फ 2.50 लाख मेगावाट की है। इसके बावजूद हम लोगों को 24 घंटे बिजली नहीं दे पा रहे हैं। अवधेश कुमार वर्मा कहते हैं- प्रदेश के किसानों को हम फ्री बिजली देने का ढिंढोरा पीटते रहते हैं। जबकि सच्चाई ये है कि 1350 यूनिट से अधिक खपत पर सब्सिडी बंद करने का नियम बना रखा है। बजट से व्यापारियों को क्या है उम्मीद
केंद्र हो या राज्य सरकार, व्यापारियों का दर्द वो समझना ही नहीं चाहते। जबकि ई-कॉमर्स के चलते व्यापार सिमट रहा है। इंस्पेक्टर राज के चंगुल में व्यापारियों को इस कदर फंसा दिया गया है कि जीएसटी और इनकम टैक्स के अलावा उन्हें वर्तमान में 19 तरीके के टैक्स देने पड़ रहे हैं। लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्रा के मुताबिक, व्यापारियों को प्रोत्साहन नहीं देंगे तो वह माइग्रेट कर जाएगा। राज्य का राजस्व घट जाएगा। इस प्रदेश की सच्चाई ये है कि यहां व्यवसायिक प्रोडक्शन महज 5 फीसदी है। 95 फीसदी माल बाहर के राज्य से आता है। यूपी में सिर्फ ट्रेडिंग अधिक होती है। ऑनलाइन व्यापार के चलते खुदरा व्यापार डूब रहा है। कृषि के बाद व्यापार सेक्टर ही ऐसा है, जहां सबसे अधिक रोजगार मिल सकता है। आलम यह है कि एक दवा की दुकान में फूड सप्लीमेंट रखकर बेचना हो तो उसे अलग से फूड सेफ्टी लाइसेंस लेना पड़ता है। क्या व्यापारी एक ही पोर्टल से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नहीं कर सकता? आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता के मुताबिक, जीएसटी देने वाले व्यापारियों का 10 लाख का दुर्घटना बीमा मिलता है। सरकार को इसके साथ में 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा देने का प्रावधान करना चाहिए। प्रदेश सरकार अपने बजट में प्रमुख बाजारों में सीसीटीवी लगाने की योजना को शामिल करें। इससे व्यापार और व्यापारी सुरक्षित रहेगा। प्रदेश के सभी बाजारों में पिंक और पब्लिक टॉयलेट बनाना चाहिए। विदेशी ई-कॉमर्स और रिटेल ट्रेड की अलग-अलग पॉलिसी लाना चाहिए। सरकार के पास फंड दैवीय आपदा (आग, बाढ़ और भूकंप) की हालत में ऐसी राशि मिल सके कि दोबारा से व्यापारी अपने पैर पर खड़ा हो सके। दैवीय आपदा पालिसी व्यापारियों के लिए लाना चाहिए। महिलाओं और युवाओं को बजट से क्या हैं उम्मीदें
बेरोजगारी प्रदेश और देश की सबसे बड़ी समस्या है। जब तक स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम सही तरीके से लागू नहीं होंगे, ये समस्या बनी रहेगी। हम सस्ते कर्ज देकर कोई छोटे-मोटे उद्योग-धंधे तो खुलवा देते हैं, लेकिन स्किल न होने की वजह से वे घाटे में बंद कर देने पड़ते हैं। ऑनलाइन और एआई का दौर है। ऐसे में इस तरह की स्किल में उन्हें दक्ष बनाने का एक प्रोग्राम लागू करना होगा। सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल गुप्ता के मुताबिक, युवाओं में आधी आबादी भी शामिल है। ऐसे में सरकार को बजट में उन्हें सम्मिलित रूप से शामिल करते हुए ऐसी योजना बनानी चाहिए, जिससे वे खुद कोई बिजनेस कर दूसरे को भी रोजगार देने में सक्षम बन सकें। आईआईए की अध्यक्ष और आंत्रप्रन्योर अपर्णा मिश्रा कहती हैं कि अक्सर बजट में आधी आबादी को भुला दिया जाता है। जब तक महिलाओं की भागीदारी नहीं मिलेगी, प्रदेश की ग्रोथ नहीं हो सकती। हमारे प्रदेश में बड़ी आबादी ऐसी महिलाओं की है, जो घर के काम ही कर पाती हैं। क्या हम ऐसी महिलाओं काे स्किल ट्रेनिंग देकर कोई ऐसा बिजनेस नहीं शुरू करा सकते हैं, जो वो घर बैठे कर पाएं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में विभागों को 54% ही बजट मिला, जो मिला 98% खर्च किया; उखड़ी सड़कें नहीं बन पाईं; बिजली कटौती भी नहीं सुधरी यूपी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभिन्न विभागों को अब तक करीब आधा बजट (54.50%) ही जारी किया है। दिलचस्प तो यह है कि विभागों ने मिले बजट का 98.05% 5 फरवरी तक खर्च भी कर दिया। अब वित्तीय वर्ष खत्म होने में सिर्फ डेढ़ महीने बचे हैं। ऐसे में अब बजट जारी करने और उसे खर्च करने में जल्दबाजी दिखाई जाएगी। पढ़ें पूरी खबर

अद्भूत ताज, बेमिसाल सुनक की सादगी:ब्रिटेन के पूर्व PM की सादगी के कायल हुए टूरिस्ट, हाथ जोड़कर किया नमस्कार

अद्भूत ताज, बेमिसाल सुनक की सादगी:ब्रिटेन के पूर्व PM की सादगी के कायल हुए टूरिस्ट, हाथ जोड़कर किया नमस्कार दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक संगमरमरी ताजमहल की सुंदरता शनिवार को कुछ देर के लिए फीकी पड़ गई। मुख्य स्मारक की ओर बढ़ने वाले टूरिस्ट के कदम ठहर गए…धवल सफेद स्मारक की ओर टिकी रहने वाली निगाहें छरहरे बदन वाले एक शख्स की ओर ठहर गईं। चेहरे पर मुस्कान…दिल में हिंदुस्तान के संस्कार…सहज ही टूरिस्ट को आकर्षित कर रहे थे। जी हां, शनिवार को ताजमहल को भूल..टूरिस्ट सुनक की सादगी में खो गए। सुनक की सादगी की 4 तस्वीर… ब्रिटेन के पूर्व PM ऋषि सुनक को देखकर लोगों को एक पल के लिए भी नहीं लगा कि ये उसी देश के प्रधानमंत्री रहे हैं, जिसका कभी सूरज अस्त नहीं होता था। कभी भारत पर राज करने वाले ब्रिटेन के इस पूर्व PM की सादकी के लोग कायल हो गए। सुनक को देख कोई राधे-राधे से उनका अभिवादन कर रहा था तो कोई नमस्कार कर रहा था। सुनक भी सहजता के साथ हाथ जोड़कर उनका अभिवादन कर रहे थे।
वे लगभग एक घंटे तक ताजमहल में रुके। बिना किसी प्रोटोकॉल के उन्होंने परिवार के साथ सामान्य टूरिस्ट की तरह से ताजमहल का दीदार किया। उनके आसपास सुरक्षा का घेरा तो था लेकिन वे इसके बंधन में नहीं थे। सफेद शर्ट और पेंट पहने ऋषि सुनक टूरिस्ट को देखकर कुछ दूर चलने के बाद रुक जाते और हाथ हिलाकर उनकाे रेस्पांस करते। उनके प्रति लोगों के आकर्षण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जो टूरिस्ट मुख्य गुम्बद की ओर जा रहे थे, वे सुनक को देखकर वहीं रुक गए। एक झलक देखने को बेताब टूरिस्ट
सुरक्षाकर्मी बार-बार टूरिस्ट को आगे बढ़ने के लिए कह रहे थे लेकिन वे सुनक की एक झलक देखने को बेताब थे। ब्रिटेन के पूर्व PM और उनके परिजनों को ताजमहल का भ्रमण कराने वाले गाइड शमशुद्दीन का कहते हैं कि भ्रमण के दौरान भी वे काफी सहज और सरल रहे। उन्होंने ताजमहल के इतिहास और इसकी पच्चीकारी के जानने में काफी रुचि दिखाई। आज फतेहपुर सीकरी और किला जा सकते हैं
ब्रिटेन के पूर्व PM अपने परिवार के साथ दो दिवसीय आगरा दौरे पर हैं। वे शनिवार सुबह लगभग 10.45 बजे होटल अमर विलास पहुंचे। प्रशासनिक कार्यक्रम के अनुसार, उन्हें रविवार सुबह ताजमहल देखने जाना था लेकिन वे शनिवार शाम को ही अचानक इस स्मारक का दीदार करने पहुंच गए। अब रविवार को वे फतेहपुर सीकरी और आगरा किला जा सकते हैं। इससे पहले कलाकृति में भी जा सकते हैं। वे सोमवार को रवाना होंगे।

नाव से 550 KM की महाकुंभ जलयात्रा:सड़कें हुईं जाम, ट्रेनें फुल तो 7 लोगों ने बनाई जुगाड़ की नाव; 84 घंटे लगे

नाव से 550 KM की महाकुंभ जलयात्रा:सड़कें हुईं जाम, ट्रेनें फुल तो 7 लोगों ने बनाई जुगाड़ की नाव; 84 घंटे लगे बिहार और यूपी के 7 लोग मोटरबोट से पानी के रास्ते 275 किलोमीटर सफर करके महाकुंभ में पहुंचे। संगम में डुबकी लगाई और वापस उसी रास्ते बिहार में अपने गांव पहुंच गए। प्रयागराज में 8 और 9 फरवरी को प्रयागराज आने वाले हर रास्ते पर भीषण जाम के हालात थे। ट्रेनों में सीटें फुल थीं। लोग दो-दो दिन का सफर करके भी महाकुंभ नहीं पहुंच पा रहे थे। महाजाम में श्रद्धालु 5 से 6 घंटे तक गाड़ियों में ‘रोड अरेस्ट’ हो गए। इससे बचने के लिए पानी के रास्ते संगम पहुंचने का प्लान बनाया। मोटरबोट पर गैस सिलेंडर, चूल्हा समेत खाने-पीने के पूरे इंतजाम थे। दो लोग नाव चलाते और बाकी 5 लोग आराम करते थे। करीब 550 किलोमीटर का बक्सर-टू-प्रयागराज का ये 84 घंटे का सफर एकदम अनूठा और रोमांचकारी रहा। पढ़िए ये खास रिपोर्ट… रोड जाम होने की खबरें देखकर आया नाव से जाने का आइडिया
7 लोगों के इस ग्रुप में सुमन चौधरी, संदीप, मुन्नू चौधरी, सुखदेव चौधरी, आदू चौधरी, रविंद्र और रमेश चौधरी शामिल रहे। इसमें मुन्नू यूपी में बलिया जिले के गांव कुटबा नारायणपुर के रहने वाले हैं। बाकी 6 लोग बिहार में बक्सर जिले के कमहरिया गांव के निवासी हैं। ये सभी पेशेवर मल्लाह हैं और अपने-अपने जिलों में नाव चलाकर परिवार पालते हैं। मुन्नू बताते हैं- 9 फरवरी के आसपास मीडिया में लगातार जाम की खबरें आ रही थीं। कई ऐसे वीडियो भी वायरल हुए, जिसमें मध्यप्रदेश से प्रयागराज तक रोड जाम होना बताया गया। उस वक्त हम सभी लोग महाकुंभ जाने का प्लान बना रहे थे। अचानक मन में आइडिया आया कि क्यों न नाव से ही प्रयागराज पहुंचा जाए? नाव में लगाए दो इंजन, खाने-पीने और सोने का था पूरा इंतजाम
मुन्नू चौधरी ने बताया- हमने नाव में दो इंजन लगाए, ताकि एक में खराबी आए तो दूसरे इंजन से नाव चल सकें। नाव पर ही 5 किलो गैस वाला सिलेंडर, चूल्हा, 20 लीटर पेट्रोल, सब्जी, चावल, आटा और रजाई-गद्दे रख लिए। 11 फरवरी की सुबह 10 बजे बिहार के बक्सर जिले में कमहरिया गांव से ये मोटरबोट यात्रा शुरू हुई। कमहरिया से जमनिया, यूपी के गाजीपुर, वाराणसी होते हुए हम 12 फरवरी की रात करीब 1 बजे प्रयागराज पहुंच गए। हमारी नाव को प्रयागराज में संगम पहुंचने से 5 किलोमीटर पहले रोक लिया गया। बताया गया कि आगे पीपा (पांटून) पुल हैं, इसलिए मोटरबोट नहीं जा सकती। हमें करीब 275 किलोमीटर के इस सफर में यूपी के गाजीपुर जिले में गहमर गांव के पास सिर्फ एक पांटून पुल मिला, जिसे बेहद आसानी से पार कर लिया। प्रयागराज से पांच KM पहले रोक दी थी नाव
मुन्नू ने आगे बताया- नाव रुकने के बाद हमने उसको साइड में खड़ा किया। फिर वहां से करीब 5-6 किलोमीटर पैदल चलकर संगम पर पहुंच गए। 13 फरवरी की तड़के संगम में डुबकी लगाई, पूजा-अर्चना की। फिर उसी रात मोटरबोट से वापस रवाना हो गए। 14 फरवरी की रात एक बजे तक हम सभी लोग बिहार के बक्सर सकुशल पहुंच गए। दो लोग नाव चलाते, बाकी लोग करते थे आराम
सुमन चौधरी बताते हैं- इस पूरी यात्रा में हमारे करीब 20 हजार रुपए खर्च हुए। इसमें मोटरबोट का पेट्रोल खर्च भी शामिल है। रास्ते में कई बार पेट्रोल खरीदकर हम एक प्लास्टिक कैन में स्टोर कर लेते थे। इससे रास्ते में तेल की कोई दिक्कत नहीं होती थी। हर वक्त दो लोग नाव चलाते थे और बाकी 5 लोग आराम करते थे। इस तरह ये रोस्टर चलता रहता था। हमारी इस तरह की ये इतनी लंबी पहली यात्रा थी। ————————-
ये खबर भी पढ़ें… संगम स्नान से पहले पति की बाहों में तोड़ा दम, सांस लेने में तकलीफ थी, जाम की वजह अस्पताल ले जाने में दो-तीन घंटे लग गए ‘सारे तीर्थ हमने साथ किए, लेकिन संगम स्नान से पहले ही यह मेरा साथ छोड़कर चली गई। अब किसके लिए जियूंगा।’ यह सिर्फ शब्द नहीं हैं बल्कि जज्बात हैं महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के नारायण प्रसाद तिवारी के, जिन्होंने शनिवार को अपनी 35 साल से साथ रही जीवन संगिनी रेखा को खो दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

मेरठ में करंट से लाइनमैन की मौत:20 दिन में तीसरा हादसा, आर्थिक मदद के लिए लोगों ने किया हंगामा

मेरठ में करंट से लाइनमैन की मौत:20 दिन में तीसरा हादसा, आर्थिक मदद के लिए लोगों ने किया हंगामा मेरठ के हस्तिनापुर के गणेशपुर में लाइनमैन संदीप की करंट लगने से मौत हो गई। संदीप शनिवार को लाइन ठीक करने के लिए बिजली के खंभे पर चढ़ा था। अचानक लाइन में करंट आ गया। इसके कारण संदीप को करंट लगा वो चिपक गया, मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
बता दें कि पिछले लगभग 20 दिनों में यह तीसरे लाइनमैन की मौत है। करंट लगने के कारण लाइनमैन ने दम तोड़ा है। वहीं मृतक के घरवालों और ग्रामीणों ने मौके पर हंगामा कर दिया। कहा कि मृतक के परिजनों को आर्थिक मदद दी जाए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। लाइन में फॉल्ट आने पर आया था संदीप हस्तिनापुर के गणेशपुर में 11हजार की लाइन में फॉल्ट हो गया और अचानक बिजली चली गई। ग्रामीणों की शिकायत पर गणेशपुर निवासी विद्युत संविदाकर्मी 34 वर्षीय संदीप पुत्र निरंजन मौके पर आया। संदीप ने एसएसओ ओमप्रकाश से शटडाउन लेने को कहा। जैसे ही संदीप काम करने के लिए खंबे पर चढ़ा तो लाइन में करंट आने के कारण वह बुरी तरह झुलस गया। एसएसओ पर गलत शटडाउन लेने का आरोप ग्रामीणों ने बताया कि विद्युत उपखंड केंद्र पर तैनात एसएसओ ने गणेशपुर का शटडाउन नहीं लिया उसने रहमापुर का शटडाउन ले लिया। जिस कारण संदीप बुरी तरह झुलस गया उसके बाद उसे सीएचसी पर लाया गया जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उपखंड केंद्र के जेई बिजेंद्र कुमार और एक्शन भूपेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंच गए। जब इस बात की जानकारी परिजनों को लगी तो उनके होश उड़ गए। परिजनों ने किया हंगामा काफी संख्या में गांव के लोग और मृतक के परिजन बिजलीघर पहुंचे। हंगामा कर दिया। साथ ही एसएसओ ओमप्रकाश पर हत्या का आरोप लगाया। घरवालों के लिए आर्थिक मदद की मांग कर दी। थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की परंतु परिजनों ने अधिकारियों के ना आने तक पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया। वहीं लापरवाही बरतने वाले एसएसओ पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। मृतक की पत्नी को मुआवजा और नौकरी पर सहमति बाद में ग्रामीणों ने सपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह जयंत से बातचीत की जिसमें मृतक की पत्नी को सात लाख रुपए संबंधित कंपनी और पांच लाख रुपए विद्युत विभाग के अधिकारियों की ओर से देने और मृतक की पेंशन और पत्नी की संविधान पर नौकरी रखने के आश्वासन पर परिजनों से साथ सहमति बनी। जिसके बाद अधिकारियों के आश्वासन पर परिजन मृतक का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद थाना पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक की पत्नी निशा और उसके तीनों बच्चे तुलसी 12 वर्ष आरोही 11 वर्ष और छोटा बेटा आर्यन का रो रो कर बुरा हाल था। परिजनों को मिले न्याय भीम आर्मी के कार्यकर्ता चतर सिंह जाटव ने कहा कि लगातार इस तरह के हादसे हो रहे हैं। जब लाइनमैनों की मौत हो रही है। उन्हें सरकार से किसी प्रकार की सुविधा और मुआवजा नहीं मिल रहा। परिजन परेशान भटक रहे हैं। मृतकों के परिजनों को उचित सहायता दिलाने के लिए भीम आर्मी पूरा प्रयास करेगी। मेरठ मे ंपिछले 15 दिन में 2 लाइनमैन की मौत हुई… सरधना में लाइनमैन की मौत:बिजली ठीक करते समय गिर गया, अस्पताल में तोड़ा दम मेरठ में करंट लगने से युवक की मौत:16 दिन बाद सुभारती अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम, पहले कट गए थे दोनों हाथ

इमरान प्रतापगढ़ी बोले- बजट में अमीरों को प्राथमिकता दी:संसद में कहा- अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में हुई कटौती, महंगाई पर सरकार चुप

इमरान प्रतापगढ़ी बोले- बजट में अमीरों को प्राथमिकता दी:संसद में कहा- अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में हुई कटौती, महंगाई पर सरकार चुप संसद में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने केंद्रीय बजट पर तीखा हमला बोला। आरोप लगाया कि यह बजट गरीबों की अनदेखी और अमीरों को फायदा पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में महंगाई से जूझ रहे आम लोगों के लिए कोई राहत नहीं दी गई, जबकि अमीरों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। इमरान ने मनरेगा के बजट में कटौती, महंगाई पर चुप्पी, और अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में भारी कमी पर सवाल उठाते हुए सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। गरीबों और मध्यम वर्ग की उपेक्षा इमरान प्रतापगढ़ी ने संसद में अपने भाषण में कहा कि बजट में महंगाई पर कोई चर्चा नहीं की गई, जबकि जनता महंगे पेट्रोल, डीजल और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से परेशान है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में दूध की कीमत 73 रुपए प्रति लीटर है, फिर भी सरकार महंगाई पर चुप्पी साधे हुए है। इमरान ने व्यंग्य करते हुए पूछा कि आखिर इस बजट में किसकी संतुष्टि है – आम जनता की या फिर उद्योगपति दोस्तों की? मनरेगा के बजट में कमी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस योजना से करोड़ों मजदूरों के घरों में चूल्हा जलता है, उसके लिए भी सरकार ने सिर्फ 1 रुपए की बढ़ोतरी की। उन्होंने कहा, “क्या 40 लाख नए मतदाताओं में एक भी मनरेगा का मजदूर नहीं था?” अल्पसंख्यकों के लिए बजट में कटौती पर सवाल इमरान ने अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में भारी कटौती की कड़ी आलोचना की। उन्होंने बताया कि 2024-25 के बजट में अल्पसंख्यक मंत्रालय के लिए 3183 करोड़ रुपए की घोषणा हुई थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 1868 करोड़ रुपए कर दिया गया। उन्होंने पूछा, “क्या इस कटौती से देश के अल्पसंख्यक संतुष्ट हुए या फिर सरकार?” इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रधानमंत्री के उस बयान को याद दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे मुसलमानों के एक हाथ में कंप्यूटर और दूसरे हाथ में कुरान देखना चाहते हैं। इमरान ने आरोप लगाया कि स्कॉलरशिप्स खत्म करके और अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में कटौती करके सरकार इस वादे से मुकर रही है। महंगाई और टैक्स पर तंज इमरान ने महंगाई और टैक्स के बोझ को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब गृहणियां सब्जी बनाने के लिए तेल डालती हैं, तो उनके आंसू भी उस तेल में गिरते हैं। उन्होंने जीएसटी का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने दूध, मक्खन और अंतिम संस्कार के सामान तक पर टैक्स लगा रखा है, फिर भी इसे मध्यम वर्ग का बजट बताया जा रहा है। संसद में गूंजे शुदमा पांडेय ‘धूमिल’ के शब्द इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने भाषण की शुरुआत शुदमा पांडेय ‘धूमिल’ के शब्दों से की – “एक आदमी रोटी बेलता है, एक आदमी रोटी खाता है, एक तीसरा आदमी भी है, जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है, वह सिर्फ रोटी से खेलता है। वह तीसरा आदमी कौन है? मेरे देश की संसद मौन है।” उन्होंने इन शब्दों के जरिए संकेत दिया कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में गरीब और मध्यम वर्ग की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि कुछ विशेष वर्गों को ही लाभ पहुंचाया जा रहा है। संसद में सशक्त विपक्ष की भूमिका इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने भाषण के अंत में सरकार से मांग की कि वह गरीबों और मध्यम वर्ग के हितों की रक्षा करे और अमीरों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों को बदले। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार की नीतियों की कड़ी समीक्षा करता रहेगा और जनता की आवाज को संसद में बुलंद करता रहेगा।

दोस्तों संग पार्टी करने गया, अस्पताल में हुई मौत:परिजन बोले- ये मर्डर है, सड़क पर शव रखकर लगाया जाम, कई थानों की पुलिस मौके पर

दोस्तों संग पार्टी करने गया, अस्पताल में हुई मौत:परिजन बोले- ये मर्डर है, सड़क पर शव रखकर लगाया जाम, कई थानों की पुलिस मौके पर बरेली में दोस्तों के साथ पार्टी करने गए युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने रात में सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। सूचना मिलते ही कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। लोगों से बात कर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन परिजन हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। उन्होंने कहा- ये मर्डर है। आखिरकार, पुलिस ने तहरीर के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन दिया, तब जाकर परिजन शव को लेकर जाने को राजी हुए। उसके बाद जाम खोला गया। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। पार्टी के बाद युवक की हालत बिगड़ी, अस्पताल में हुई मौत किला थाना क्षेत्र के अलखनाथ मंदिर रोड के पास स्थित पेठा मंडी निवासी सचिन कुमार शुक्रवार को अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने गया था। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसे खोजना शुरू किया। उन्होंने उसके दोस्तों को फोन किया, लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया। इसी दौरान किसी ने परिजन को बताया कि उनकी बेटे की उम्र का एक लड़का महेंद्र गायत्री हॉस्पिटल में भर्ती है। उसे देख लीजिए। क्या पता वो आपका बेटा ही हो। इसके बाद परिजन उसे खोजते हुए अशरफ खां पुलिस चौकी के पास स्थित महेंद्र गायत्री हॉस्पिटल पहुंचे। उन्होंने बेटे को पहचान लिया। उस समय उसकी हालत अधिक खराब थी। तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद जब परिजन शव लेकर घर पहुंचे, तो उन्होंने सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। सूचना पर एसपी सिटी मानुष पारीक, सीओ सिटी प्रथम पंकज श्रीवास्तव और सीओ सिटी सेकंड संदीप सिंह कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। लोगों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने मांग किया कि जब तक हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होगा, शव वहीं रखा रहेगा। अधिकारियों ने जब परिजनों की मांग मान ली, तो जाम हटा दिया गया। पुलिस सड़क हादसे का मामला मान रही थी पुलिस इस मामले को सड़क हादसा मान रही थी, लेकिन परिजनों का कहना है कि उनके बेटे की हत्या की गई है। यही वजह है कि उसके दोस्त फरार हो गए हैं। पुलिस ने परिजनों से तहरीर ले ली है। एसपी सिटी मानुष पारीक ने कहा कि कुछ लोगों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगाया था और हत्या का आरोप लगाया है। हमने परिजनों की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं। प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है और मामले की जांच जारी है। ———————— यह खबर भी पढ़े अपर्णा यादव बोलीं- कॉमेडियन अनुभव का शो नहीं होने देंगे, बोलीं- महिलाओं को गाली देते हैं, सीएम से शिकायत करेंगे राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने अनुभव सिंह बस्सी के कॉमेडी शो को रद्द करने की मांग की है। अर्पणा ने कहा- 15 फरवरी को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में कार्यक्रम है। उनका यूट्यूब चैनल देखने के बाद पता चला कि वह महिलाओं को गाली देते हैं। मजाक उड़ाते हैं। यहां पढ़े पूरी खबर

BSc स्टूडेंट की आंखों में स्प्रे किया…कपड़े फाड़े:झांसी पैरामेडिकल कॉलेज कैंपस में 2 लड़कों ने बेहोश होने पर जबरदस्ती की

BSc स्टूडेंट की आंखों में स्प्रे किया…कपड़े फाड़े:झांसी पैरामेडिकल कॉलेज कैंपस में 2 लड़कों ने बेहोश होने पर जबरदस्ती की झांसी के पैरामेडिकल कॉलेज में शनिवार को दिनदहाड़े बीएससी छात्रा के साथ रेप का प्रयास हुआ। गर्ल्स हॉस्टल के पीछे 2 युवकों ने छात्रा की आंखों में मिर्ची का स्प्रे डाल दिया। फिर रेप का प्रयास किया। इससे छात्रा बेहोश हो गई। जब होश में आई, तो कपड़े अस्त-व्यस्त और फटे हुए थे। छात्रा ने अपने रूम मेट को इस बारे में बताया। पुलिस को जानकारी भेजी गई। एसपी सिटी, ट्रेनी आईपीएस, सीओ सिटी समेत दो थानों की पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई। केस दर्ज कर छानबीन की जा रही है। HOD से छुट्‌टी लेने जा रही थी छात्रा
21 साल की पीड़िता फरुखाबाद की रहने वाली है। वह झांसी के पैरामेडिकल कॉलेज में बीएससी रेडियोलॉजी में सेकेंड ईयर की छात्रा है। वह कल्पना चावला गर्ल्स हॉस्टल में रहती है। उसके क्लासमेट ने बताया- छात्रा की तबीयत कुछ दिन से खराब चल रही है, इसलिए उसे अपने घर जाना था। शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे वह एचओडी से छुट्‌टी लेने जा रही थी। जब वह हॉस्टल के पीछे वाले रास्ते पर करीब 150 दूर पहुंची तो वहां सुनसान था। उसने बताया कि पीछे से दो युवक आए और आंखों पर स्प्रे डाल दिया। वह उन्हें देख नहीं सकी। इसके बाद वो लोग जोर जबरदस्ती करने लगे। छात्रा ने कुछ देर तक विरोध किया, आंखों में तेज जलन और दर्द हो रहा था। इसके बाद वह बेहोश हो गई। होश आया तो कपड़े फटे हुए थे
क्लासमेट ने आगे बताया कि कुछ देर बाद छात्रा को होश आया तो पूरे कपड़े अस्त व्यस्त थे और फटे हुए थे। किसी तरह छात्रा एचओडी के पास पहुंची तो वे क्लास में थे। इस दौरान छात्रा ने वार्डन को जानकारी दी। मगर वार्डन ने कोई एक्शन नहीं लिया और कहा कि परिजनों को बुलाओ और घर चले जाओ। इस दौरान छात्रा दोबारा बेहोश हो गई। तब साथी उसे मेडिकल कॉलेज ले गया। तबीयत ठीक होने पर छात्रा को वापस हॉस्टल लाए। तब उसने अपने जूनियर और सीनियर छात्राओं को मामले की जानकारी दी। सुरक्षा इंचार्ज और डायरेक्टर ने नहीं सुनी छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में घटना की जानकारी देते हुए छात्रा रोने लगी। तब सुरक्षा इंचार्ज को जानकारी दी। मगर उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बाद डायरेक्टर को फोन कर बताया। मगर, वे छात्रा को ही मेडिकल कॉलेज आने की बात कहने लगे। विरोध करने पर स्टाफ को भेजने की बात कही, मगर कोई नहीं गया। इससे छात्रों में रोष है। शाम करीब 5 बजे छात्रों ने पुलिस को फोन कर सूचना दी। इसके बाद नवाबाद थाना पुलिस और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए। केस दर्ज करके मेडिकल जांच करा रहे हैं
एसपी सिटी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने कहा- पैरामेडिकल कॉलेज की छात्रा अपने हॉस्टल से प्रशासनिक भवन जा रही थी। युवकों ने पीछे से आकर आंखों में स्प्रे कर दिया। जब हटाने की कोशिश की तो आरोपियों ने धक्का दे दिया और कपड़े फाड़ दिए। केस दर्ज किया जा रहा है। छात्रा की मेडिकल जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। फोरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए हैं। छात्रा को कॉलेज के प्रबंधन से भी नाराजगी है। आरोप बेबुनियान है, तुरंत पुलिस बुलाई पैरामेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. अंशुल जैन बताया कि घटना के बाद लड़की अपने डिपार्टमेंट में रो रही थी, मगर घटना के बारे में नहीं बताया। तबीयत खराब होने पर उसे तुरंत एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज भेजा गया। वहां से हॉस्टल लौटने के बाद स्प्रे करने की बात बताई। मुझे फोन लगाया तो मैंने स्टाफ को भेजा। पुलिस बुलाने के लिए कहा, तब तक पुलिस को बुला लिया गया। पीड़िता की पूरी मदद की गई। पीड़िता और उसके क्लासमेट के आरोप बेबुनियान है।
——————- ये खबर भी पढ़ें… JEE स्टूडेंट ने मोटिवेशन के लिए लिखा- ‘धैर्य रखो अदिति’, गोरखपुर में सुसाइड के बाद बड़े पापा ने रूम खोला तो स्लोगन देख रो पड़े टालमटोल भाड़ में जाए, जिम्मेदारी, खुद की देखभाल बहुमूल्य है लड़कियों… जैसे स्लोगन लिखकर हर वक्त अपने सामने रखने वाली अदिति अब इस दुनिया में नहीं है। उसे अपनी जिम्मेदारी का एहसास था। यह भलीभांति मालूम था कि उसके माता-पिता ने घर से इतनी दूर क्यों भेजा है? यही कारण था कि वह अपने मन को भटकने नहीं देना चाहती थी। पढ़िए पूरी खबर

आगरा में 100 दिन बाद मिली गुम हुई डॉगी:मालिक को देखते ही उछलकर गोद में बैठी; पति-पत्नी लिपटकर खूब रोए

आगरा में 100 दिन बाद मिली गुम हुई डॉगी:मालिक को देखते ही उछलकर गोद में बैठी; पति-पत्नी लिपटकर खूब रोए आगरा के एक फाइव स्टार होटल से लापता हुई डॉगी 100 दिन बाद उसके मालिक को मिल गई। वह 3 नवंबर, 2024 को लापता हो गई थी। उसे मेहताब बाग के पास से शनिवार को रेस्क्यू किया गया। डॉगी को वापस पाकर उसके मालिक खुश हैं। वे उसे गले लगाकर खूब रोए। उन्होंने डॉगी की तलाश करने वाले को 50 हजार रुपए इनाम देने का ऐलान किया था। पहले 3 तस्वीरें… 1 नवंबर को दो पेट डॉग्स के साथ आगरा आए थे
गुरुग्राम के रहने वाले दीपायन और उनकी पत्नी कस्तूरी 1 नवंबर, 2024 को अपने दो पेट डॉग्स के साथ आगरा आए थे। यहां एक पेट फ्रेंडली फाइव स्टार होटल में स्टे के लिए बुकिंग की थी। 3 नवंबर की सुबह करीब 8.30 बजे दीपायन पत्नी कस्तूरी के साथ फतेहपुर सीकरी घूमने चले गए। इसी बीच उनका एक डॉगी ग्रे हाउंड गायब हो गया। इसके बाद दीपायन और कस्तूरी ने डॉगी को खूब ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिली। वीडियो में कहा था- प्लीज, हमारा डॉगी ढूंढ दीजिए
इसके बाद दीपायन ने अपने डॉगी की तलाश के लिए एक वीडियो भी जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि उनकी 9 साल की फीमेल डॉग का नाम ग्रे हाउंड है। वह जर्मन शेफर्ड की क्रॉस ब्रीड है। उसके गले में चिप है। कोई भी वेटनररी डॉक्टर स्कैन करके जानकारी कर सकता है। फीमेल डॉग फ्रेंडली है। दीपायन और उनकी पत्नी ने वीडियो में कहा था कि प्लीज हमारे डॉगी को ढूंढ दीजिए। हम आगरा में सिर्फ उसको ढूंढने के लिए रुके हैं। उन्होंने डॉगी को खोजकर लाने वाले को इनाम देने की भी घोषणा की थी। पहले इनाम की राशि 10 फिर 20 और फिर 50 हजार रुपए कर दी थी। डॉग की तलाश में उन्होंने कई जगह विज्ञापन भी दिए थे। 5 स्टार होटल को 2 हजार दिया था पेट सिटिंग चार्ज
दीपायन का कहना है कि वे फाइव स्टार होटल में रुके थे। उसे इसीलिए बुक किया था, जिससे उनके डॉग को कोई परेशानी न हो। हमने बाकायदा डॉगी के लिए यहां पेट सिटिंग चार्ज दिया था। होटल ने उनसे 3 घंटे के लिए 2 हजार रुपए लिए। फिर डॉग खोने की सूचना दी गई। दोनों ने होटल मैनेजमेंट पर भी सवाल खड़े किए थे। मेट्रो स्टेशन के पास मिली थी लास्ट लोकेशन
दीपायन ने बताया- पुलिस में भी उन्होंने शिकायत की थी। इसके बाद एक स्निफर डॉग को तलाश में लगाया गया था। सीसीटीवी फुटेज चेक करने पर ताज मेट्रो स्टेशन के पास 3 नवंबर को उसे देखा गया था। स्निफर डॉग ने शाहजहां गार्डन के पीछे हिस्से में जाकर खोज खत्म की थी। दीपायन और कस्तूरी, विनीता अरोरा की मदद से 30 वॉलंटियर के साथ अपने ग्रे हाउंड को ढूंढ रहे थे। एनजीओ वाले ने दी थी सूचना
कैस्पर्स होम और डॉग एनजीओ चलाने वाली विनीता अरोरा ने बताया कि शुक्रवार को उनके पास मेहताब बाग से किसी का फोन आया था। उन्होंने बताया कि वहां पर एक नया डॉग आ गया है। वो केवल खाना खाने बाहर आता है। उसकी तबीयत भी खराब है, उसे रेस्क्यू कर लीजिए। उन्होंने डॉग का वीडियो मंगाया। वीडियो गुरुग्राम में कस्तूरी और दीपायन को भेजा। उन्होंने डॉग को पहचान लिया। आवाज सुनकर गोद में आ गई
शनिवार सुबह गुरुग्राम से पति-पत्नी आगरा आ गए। वहां से सीधे मेहताब बाग गए। वहां पर डॉग कैचर भी बुलाए गए। डॉग कैचर ने डॉग को पकड़ने की काफी कोशिश की, लेकिन वो जंगल से बाहर नहीं आई। इसके बाद डॉग की ऑनर कस्तूरी ने उसे रेस्क्यू करने का निर्णय लिया। वो जंगल में गईं। उन्होंने जैसे ही आवाज लगाई, डॉग भागती हुई उनकी गोद में आग गई। इसके बाद कस्तूरी की आंखें भर आईं। —————————— यह खबर भी पढ़ें- “अब्बू मुझे कभी भी फांसी हो सकती है, रोना मत”, बांदा की शहजादी ने दुबई जेल से की बात, बोली-अब समय खत्म पापा…मेरा समय खत्म हो गया है। अब हम फोन कर पाएंगे भी या नहीं…कुछ नहीं पता। ये शायद आखिरी कॉल है। इंडिया में जो केस आप लोगों ने किया है, वो वापस ले लेना, ठीक है। आप लोग अच्छे से रहना। किसी से दुश्मनी मोल मत लेना। जो FIR है, वो कैंसिल करवा देना। वकील से कहना, केस वापस ले ले। हमें कुछ नहीं चाहिए, बस सुकून चाहिए। यहां पढे़ं पूरी खबर

फतेहपुर भाजपा जिलाध्यक्ष और बांदा के नेता का AUDIO:अजित बोले- पैसा दे दूंगा, गाड़ी भी मिलेगी; मुखलाल बोले- जो कह दिया, वो हो जाएगा

फतेहपुर भाजपा जिलाध्यक्ष और बांदा के नेता का AUDIO:अजित बोले- पैसा दे दूंगा, गाड़ी भी मिलेगी; मुखलाल बोले- जो कह दिया, वो हो जाएगा फतेहपुर में भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल पर गंभीर आरोप लगे हैं। बांदा के भाजपा नेता अजित कुमार गुप्ता ने कहा, मुखलाल ने जिलाध्यक्ष बनवाने के लिए 50 लाख रुपए पार्टी फंड के नाम पर लिए। लेकिन, पार्टी फंड में जमा नहीं किए। दोनों की बातचीत का एक ऑडियो भी सामने आया है। जिसमें रुपए और गिफ्ट में गाड़ी देने की बात की जा रही है। हालांकि दैनिक भास्कर इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है। अजित कुमार गुप्ता ने बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को पत्र लिखकर शिकायत की है। पार्टी ने फतेहपुर के जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला ने बताया कि मुखलाल पाल के आचरण को पार्टी विरोधी मानते हुए नोटिस जारी किया है। 7 दिन में जवाब देना होगा। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अब जानिए पूरा मामला… जिलाध्यक्ष ने पार्टी और उनके साथ विश्वासघात किया बांदा निवासी अजित कुमार गुप्ता कानपुर-बुंदेलखंड के क्षेत्रीय मंत्री और भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि कानपुर-बुंदेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल के माध्यम से यह रकम मांगी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष ने पार्टी और उनके साथ विश्वासघात किया है। जिलाध्यक्ष बोले- आईटी एक्ट और मानहानि का मुकदमा कराऊंगा उनका कहना है कि ऑडियो सामने आने के बाद जिलाध्यक्ष का फोन नहीं उठ रहा है। वहीं, बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया। उन्होंने अजित कुमार गुप्ता के खिलाफ आईटी एक्ट और मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है। अजित कुमार ने चेतावनी दी है कि अगर पार्टी फोरम से न्याय नहीं मिला तो वे कानूनी कार्रवाई का सहारा लेंगे। इस विवाद ने फतेहपुर की राजनीति में हलचल मचा दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से पद के लिए पैसों की खरीद-फरोख्त के आरोपों की जांच और कार्रवाई की मांग की जा रही है। अब पढ़िए भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल और अजीत कुमार गुप्ता के बीच हुई बातचीत… अजीत गुप्ता- खुलकर बात करिए। जिलाध्यक्ष – कह रहे हैं कि शंका वाली बात मत करिए। अजीत गुप्ता- कह रहे है कि शंका वाली बात कुछ नहीं है। जिलाध्यक्ष- तुम अपने हो अपनी बात करो। अजीत पाल- 80 आपने कहा था। 5 पहले दे दिया था, 35 और दे दिया, 40 बाद में दे दूंगा। जिलाध्यक्ष – मैंने सब कुछ खुलकर बता दिया है। गाड़ी गिफ्ट में देने की बात भी की जा रही है। (इस दौरान अजीत कुमार गुप्ता की रुपए गिनने की भी आवाज आ रही है) अजीत गुप्ता- जब आप कह दोगे, एक-दो दिन का समय लगेगा, जो बात हो गई है हो जाएगा। जिलाध्यक्ष- अपनी बात का ध्यान रखते हुए व्यवस्था कर देना। 10 दिन पहले व्यवस्था कर देना। अजीत कुमार गुप्ता- 10 दिन पहले की बात हो गई है तो समय पर काम हो जाएगा। यही भी बात हुई है कि अध्यक्ष की बात हुई है। उपाध्यक्ष वगैरह ना बनवा देना। एक गाड़ी गिफ्ट में देने की बात हुई है, दे दूंगा। जिलाध्यक्ष- परेशान ना हो, जो कह दिया वह हो जाएगा। तुमको एक गाड़ी भी देनी है गिफ्ट में। अपनी बात कोई नहीं कह पाता, दूसरे की बात कर लेता है। यह रुपया संगठन के लिए है। ——————————— ये खबर भी पढ़ेंः- वाराणसी में पूर्व CM अखिलेश का बेटियों को ऑटोग्राफ, भीड़ में भइया जी की आवाज सुनकर रुके और अपने पास बुलाया; बोले-रोशन करो काशी का नाम वाराणसी में शादी समारोह में शिरकत करने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मिजाज इस बार अलग दिखा। हजारों की भीड़ में काशी की बेटियों से मुलाकात, उन्हें ऑटोग्राफ, आशीर्वाद और पढ़ाई को प्रोत्साहित करने की चर्चा है। पूर्व सीएम गिफ्ट खरीदने के लिए छात्रा को उपहार के लिए रुपए भी दिए। पढ़ें पूरी खबर…

यूपी दिनभर, 3 मिनट में 20 बड़ी खबरें:धीरेंद्र शास्त्री ने माफी मांगी; अखिलेश बोले-BJP की टोपी लगाकर थाने में बैठो; लापता अजगर के लगे पोस्टर

यूपी दिनभर, 3 मिनट में 20 बड़ी खबरें:धीरेंद्र शास्त्री ने माफी मांगी; अखिलेश बोले-BJP की टोपी लगाकर थाने में बैठो; लापता अजगर के लगे पोस्टर यूपी दिनभर में देखिए आज की 20 बड़ी खबरें। ऊपर VIDEO पर क्लिक करें…