जैन धर्म में अपरिग्रह का महत्व: क्यों सीमित रखना चाहिए धन-संपत्ति और भौतिक वस्तुओं का मोह?
आज के समय में ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं जुटाना और भविष्य के लिए जरूरत से अधिक चीजें इकट्ठा करना सामान्य जीवन का हिस्सा बन गया है। घर में कपड़े, सामान, पैसे और दूसरी वस्तुओं का संग्रह लगातार बढ़ता जाता है। लेकिन जैन धर्म जीवन को देखने का एक अलग नजरिया देता है। यहां सवाल केवल यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के पास कितना धन या सामान है, बल्कि यह भी देखा जाता है कि उसका मन उन चीजों के प्रति कितना आसक्त है। इसी विचार से जुड़ा है अपरिग्रह, जिसे जैन धर्म के पांच महाव्रतों में महत्वपूर्ण स्थान दिया…
