नई शुरुआत की ओर बढ़ते कदम, पुनर्विवाह को लेकर बदल रही समाज की सोच

भारत में विवाह और पारिवारिक रिश्तों को लेकर समाज की सोच तेजी से बदल रही है। एक समय था जब तलाक, वैधव्य या असफल वैवाहिक जीवन को सामाजिक दृष्टि से नकारात्मक नजरिए से देखा जाता था। ऐसे लोगों के लिए दोबारा जीवनसाथी चुनना आसान नहीं होता था और परिवारों के साथ-साथ समाज का दबाव भी उनके फैसलों को प्रभावित करता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह तस्वीर काफी बदल चुकी है। अब बड़ी संख्या में लोग पुराने रिश्तों की कड़वी यादों को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करने का फैसला कर रहे हैं और समाज भी इस बदलाव को पहले…