नई शुरुआत की ओर बढ़ते कदम, पुनर्विवाह को लेकर बदल रही समाज की सोच

भारत में विवाह और पारिवारिक रिश्तों को लेकर समाज की सोच तेजी से बदल रही है। एक समय था जब तलाक, वैधव्य या असफल वैवाहिक जीवन को सामाजिक दृष्टि से नकारात्मक नजरिए से देखा जाता था। ऐसे लोगों के लिए दोबारा जीवनसाथी चुनना आसान नहीं होता था और परिवारों के साथ-साथ समाज का दबाव भी उनके फैसलों को प्रभावित करता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह तस्वीर काफी बदल चुकी है। अब बड़ी संख्या में लोग पुराने रिश्तों की कड़वी यादों को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करने का फैसला कर रहे हैं और समाज भी इस बदलाव को पहले…

शादी के बाद बेटियों को क्यों लगता है कि मायका अब पहले जैसा नहीं रहा? जानिए सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण

भारतीय समाज में एक बात अक्सर सुनने को मिलती है कि बेटी शादी के बाद अपने घर की नहीं, बल्कि ससुराल की हो जाती है। हालांकि समय के साथ समाज में काफी बदलाव आया है, लेकिन आज भी कई महिलाओं को यह एहसास होता है कि विवाह के बाद उनका मायका पहले जैसा अपना नहीं रह जाता। जिस घर में उन्होंने बचपन बिताया, वही घर धीरे-धीरे एक ऐसी जगह में बदल जाता है, जहां आने से पहले उन्हें कई बार सोचना पड़ता है। यह केवल दूरी या व्यस्तता का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक परंपराएं, पारिवारिक अपेक्षाएं और…