कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: टनकपुर पहुंचा दूसरा जत्था, 11 राज्यों के 47 श्रद्धालुओं का पारंपरिक अंदाज में हुआ स्वागत

कैलाश मानसरोवर यात्रा-2026 का दूसरा दल बुधवार शाम उत्तराखंड के टनकपुर पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं का स्थानीय परंपराओं के अनुरूप बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया गया। देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत की झलक ढोल-दमाऊं की गूंज, पुष्पवर्षा और पारंपरिक लोक रीति-रिवाजों के बीच देखने को मिली। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने इस आत्मिक यात्रा की शुरुआत उत्तराखंड की धरती से की। जिला प्रशासन, कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और अन्य संबंधित विभागों ने यात्रियों के स्वागत से लेकर उनके ठहरने और आगे की यात्रा तक सभी जरूरी व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित कर रखी थीं। इस बार दूसरे जत्थे में…

बीजिंग में नेपाल ने उठाया सीमा विवाद का मुद्दा, चीन ने कहा- भारत से बातचीत कर सुलझाएं मतभेद

नेपाल ने एक बार फिर कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख से जुड़े सीमा विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए चीन के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की और उन समझौतों पर सवाल खड़े किए, जो भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के उपयोग को लेकर किए गए हैं। बैठक में खनाल ने स्पष्ट किया कि नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों को अपना हिस्सा मानता रहा है। उन्होंने चीन से जानना चाहा कि भारत और चीन के…

भारत-नेपाल सीमा विवाद: दो सदियों पुराना मुद्दा फिर चर्चा में, जानिए क्यों बढ़ा तनाव

भारत-नेपाल सीमा विवाद: कालापानी, लिपुलेख और सुस्ता पर क्यों बना हुआ है मतभेद? भारत और नेपाल के बीच संबंध केवल दो पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका आधार सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों पर टिका हुआ है। दोनों देशों के नागरिकों के बीच धार्मिक यात्राओं, व्यापार, शिक्षा और पारिवारिक संबंधों के माध्यम से लंबे समय से मजबूत जुड़ाव रहा है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा व्यवस्था भी दोनों देशों के विशेष संबंधों की एक महत्वपूर्ण पहचान है। दोनों देशों के बीच अधिकांश सीमा क्षेत्र शांतिपूर्ण और सहयोगपूर्ण रहे हैं, लेकिन…