बच्चा गुस्से में माता-पिता को मारने लगे तो क्या करें? इन तरीकों से समझाएं सही और गलत की सीमा

छोटे बच्चों में गुस्सा, जिद, चिड़चिड़ापन और अपनी बात मनवाने की कोशिश करना उनके विकास का सामान्य हिस्सा माना जाता है। कई बार बच्चा अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाता और ऐसे में वह रोने, चिल्लाने, चीजें फेंकने या हाथ-पैर चलाने लगता है। लेकिन जब यही व्यवहार माता-पिता को मारने तक पहुंच जाए, तो इसे केवल बच्चे की मासूम शरारत समझकर छोड़ देना सही नहीं है। बच्चे का किसी पेरेंट पर हाथ उठाना इस बात का संकेत हो सकता है कि उसे अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना और अपनी सीमाओं को समझना अभी सीखना है। ऐसे समय…

बच्चों में अनुशासन लाने के लिए डांट नहीं, समझदारी है सबसे बड़ा हथियार; इन गलतियों से बचें वरना पड़ सकता है उल्टा असर

हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा संस्कारी, जिम्मेदार और अच्छे व्यवहार वाला बने। इसी चाहत में कई बार पैरेंट्स बच्चों की गलतियों पर तुरंत सख्ती दिखाने लगते हैं। उन्हें लगता है कि ऊंची आवाज में डांटने, बार-बार रोकने या सजा देने से बच्चा जल्दी सुधर जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अनुशासन और डर, दोनों अलग-अलग बातें हैं। डर के सहारे बच्चा कुछ समय के लिए आपकी बात मान सकता है, लेकिन लंबे समय में उसका आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और माता-पिता के साथ रिश्ता प्रभावित हो सकता है। हाल के वर्षों में बच्चों के व्यवहार और…

घर की छोटी-छोटी आदतें कैसे बच्चों के मन में अनजाने में गहरा जेंडर भेदभाव पैदा कर देती हैं

बचपन इंसान के जीवन का वह चरण होता है, जहां उसकी सोच, समझ और व्यवहार की नींव तैयार होती है। इसी उम्र में बच्चा अपने आसपास जो देखता और सुनता है, वही धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है। ऐसे में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उनके शब्द, उनके व्यवहार और उनकी आदतें बच्चों के दिमाग पर गहरा असर डालती हैं। लेकिन कई बार पेरेंट्स बिना किसी गलत इरादे के ऐसी बातें या आदतें अपना लेते हैं, जो बच्चों के मन में लड़का-लड़की के बीच भेदभाव यानी जेंडर बायस को जन्म दे सकती हैं। यह…