सुबह की रोशनी से लेकर शाम की किरणों तक, शरीर पर पड़ता है गहरा असर, सिर्फ विटामिन D के लिए नहीं जरूरी है सूरज

सुबह आंख खुलने के बाद सबसे पहले मोबाइल देखना आज ज्यादातर लोगों की आदत बन चुकी है। कई लोग बिस्तर से उठते ही सोशल मीडिया, मैसेज या न्यूज स्क्रॉल करने लगते हैं और दिन की शुरुआत कमरे के अंदर ही हो जाती है। इसी तरह शाम को भी लोग घर, ऑफिस या स्क्रीन के सामने समय बिताते रहते हैं। देखने में यह सामान्य दिनचर्या लग सकती है, लेकिन हमारे शरीर की प्राकृतिक व्यवस्था के लिए रोशनी का इससे कहीं ज्यादा महत्व है। अक्सर जब धूप की बात होती है तो सीधे विटामिन D का नाम सामने आता है। यह सच…

रात को बिस्तर पर जाने से पहले मोबाइल से दूरी क्यों जरूरी? ये बदलाव बदल सकता है आपकी नींद का तरीका

आज के समय में मोबाइल फोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का इतना जरूरी हिस्सा बन चुका है कि दिन खत्म होने के बाद भी इससे दूरी बनाना मुश्किल लगता है। काम, सोशल मीडिया, वीडियो, चैटिंग और न्यूज देखने के लिए लोग देर रात तक फोन की स्क्रीन पर नजरें टिकाए रहते हैं। कई लोगों की आदत तो ऐसी हो चुकी है कि बिस्तर पर जाने के बाद भी फोन हाथ से नहीं छूटता। सोने से पहले कुछ मिनट के लिए शुरू हुआ स्क्रीन टाइम कब आधे या एक घंटे में बदल जाता है, इसका पता भी नहीं चलता। इस आदत…

नींद पूरी होने के बाद भी शरीर में दर्द और अकड़न क्यों? ये कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

सुबह के Body Pain को सामान्य थकान समझकर न करें नजरअंदाज सुबह की शुरुआत अगर ताजगी और ऊर्जा के बजाय शरीर में दर्द, भारीपन और अकड़न के साथ हो, तो इसे हमेशा सामान्य थकान मानकर टालना सही नहीं है। कई लोगों को रातभर सोने के बाद उम्मीद होती है कि शरीर पूरी तरह रिलैक्स महसूस करेगा, लेकिन बिस्तर से उठते ही कमर, गर्दन, कंधे, घुटनों या हाथ-पैरों में दर्द महसूस होने लगता है। कुछ मामलों में थोड़ी देर चलने-फिरने के बाद यह परेशानी कम हो जाती है, जबकि कुछ लोगों में दर्द और जकड़न लंबे समय तक बनी रहती है।…

नींद खुलते ही मोबाइल उठाना बन सकता है बड़ी परेशानी की वजह, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। दिन की शुरुआत से लेकर रात में सोने तक अधिकांश लोग किसी न किसी काम के लिए फोन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन एक आदत ऐसी है जो धीरे-धीरे हमारी सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है और ज्यादातर लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह आदत है सुबह नींद खुलते ही सबसे पहले मोबाइल फोन उठाकर सोशल मीडिया, मैसेज, ईमेल या खबरें देखना। विशेषज्ञों का मानना है कि देखने में सामान्य लगने वाली यह आदत लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य, नींद की गुणवत्ता और…

रोजाना 6.4 से 7.8 घंटे की नींद क्यों मानी जा रही है सेहत के लिए अहम, जानिए क्या कहती हैं रिसर्च

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग काम, तनाव और डिजिटल स्क्रीन की वजह से अपनी नींद से समझौता कर रहे हैं। कई बार देर रात तक मोबाइल चलाना, ऑफिस का दबाव या अनियमित दिनचर्या पर्याप्त आराम नहीं लेने देती। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत केवल अगले दिन की थकान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे शरीर की कार्यक्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पर भी असर डाल सकती है। हाल के वर्षों में प्रकाशित कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने संकेत दिए हैं कि रोजाना लगभग 6.4 से 7.8 घंटे की संतुलित नींद शरीर के लिए फायदेमंद…

देर रात तक जागना बन सकता है सेहत का दुश्मन, नींद की कमी से बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा; एक्सपर्ट्स ने दी बड़ी चेतावनी

आज के डिजिटल दौर में देर रात तक जागना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। काम का दबाव, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, वेब सीरीज और लगातार स्क्रीन टाइम ने लोगों की नींद का समय काफी बदल दिया है। कई लोग रात के घंटों को अपना निजी समय मानकर सोने में देरी करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत धीरे-धीरे शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है। लंबे समय तक नींद पूरी न होने से सिर्फ थकान और चिड़चिड़ापन नहीं बढ़ता, बल्कि दिमाग और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट्स…

कम नींद से बढ़ सकता है दिमाग पर दबाव, नई रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बातें

नींद हमारे शरीर और दिमाग के लिए किसी दवा से कम नहीं मानी जाती। पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ दिमाग को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है। लेकिन आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात तक जागना, तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों की नींद लगातार प्रभावित हो रही है। अब एक नई स्टडी में सामने आया है कि लंबे समय तक नींद पूरी न होने या बार-बार नींद टूटने का असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दिमाग की अंदरूनी कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर…